August 10, 2026
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    दुर्ग

    दुर्ग (5011)

    दुर्ग। राजनीति में अक्सर यह चर्चा होती है कि समर्पित कार्यकर्ताओं की जगह प्रभाव और चाटुकारिता को अधिक महत्व मिलने लगा है। ऐसे माहौल में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दुर्ग नगर निगम के लिए घोषित एल्डरमैनों की सूची में तुलसी यादव का नाम शामिल होना केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि उन हजारों कार्यकर्ताओं के लिए सम्मान का संदेश है, जो वर्षों तक बिना किसी पद और अपेक्षा के संगठन की सेवा करते हैं।

    मिलपारा वार्ड निवासी 60 वर्षीय तुलसी यादव पिछले 25 से 30 वर्षों से भी अधिक समय से भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं। साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले तुलसी यादव कृष्णा मेडिकल में नौकरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी संगठन और समाज सेवा से दूरी नहीं बनाई।

    कोसरिया यादव समाज के संगठन मंत्री के रूप में उन्होंने समाज को संगठित करने और सामाजिक गतिविधियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरल, सहज और मृदुभाषी व्यक्तित्व के कारण वे समाज में सम्मानित पहचान रखते हैं। राजनीतिक रूप से वे वरिष्ठ भाजपा नेता हेमचंद यादव के समर्थक माने जाते हैं तथा वर्ष 2004 में वार्ड क्रमांक 38 से पार्षद पद के प्रत्याशी भी रह चुके हैं।

    एल्डरमैन के रूप में उनके नाम की घोषणा होते ही मिलपारा वार्ड सहित उनके शुभचिंतकों और भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों का कहना है कि यह सम्मान केवल तुलसी यादव का नहीं, बल्कि उन सभी निष्ठावान कार्यकर्ताओं का सम्मान है जिन्होंने वर्षों तक बिना किसी स्वार्थ के पार्टी के लिए मेहनत की।

    तुलसी यादव की नियुक्ति ने यह संदेश भी दिया है कि भारतीय जनता पार्टी में संगठन के लिए वर्षों तक किया गया समर्पण और निष्ठा आज भी मूल्यवान है। यह निर्णय उन कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी नई ऊर्जा देता है, जो वर्षों से बिना किसी पद की अपेक्षा के पार्टी के लिए कार्य कर रहे हैं।

    तुलसी यादव की कहानी यह साबित करती है कि संगठन की नींव बड़े पदों से नहीं, बल्कि उन साधारण कार्यकर्ताओं से मजबूत होती है जो हर परिस्थिति में पार्टी के साथ खड़े रहते हैं। एल्डरमैन के रूप में मिला यह सम्मान उनके वर्षों के समर्पण, सेवा और संगठन के प्रति अटूट विश्वास का सच्चा प्रतिफल माना जा रहा है।

    दुर्ग निगम में किसकी चली सबसे ज़्यादा? सरोज पांडे का प्रभाव बरकरार, सांसद-विधायक खेमों को भी मिला प्रतिनिधित्व

    दुर्ग। लगभग ढाई वर्ष के लंबे इंतज़ार के बाद छत्तीसगढ़ शासन ने प्रदेशभर के नगरीय निकायों में एल्डरमैनों की नियुक्ति प्रक्रिया को गति देते हुए दुर्ग नगर पालिक निगम के लिए 9 एल्डरमैनों की सूची जारी कर दी है। सूची सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। संगठनात्मक समीकरणों और राजनीतिक संतुलन को साधते हुए जारी इस सूची में एक बार फिर भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सूची में शामिल अधिकांश नाम ऐसे हैं, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं अथवा सरोज पांडे के विश्वस्त माने जाते हैं। इसके साथ ही दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल तथा विधायक एवं मंत्री गजेंद्र यादव के करीबी नेताओं को भी स्थान देकर पार्टी नेतृत्व ने सभी प्रमुख शक्ति केंद्रों के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया है।

    दुर्ग निगम के घोषित 9 एल्डरमैन

    श्री मदन वाडई

    श्रीमती चमेली साहू

    श्री अनुप सोनी

    श्री तुलसी यादव

    श्री दशरथ निर्मलकर

    श्री गौरव शर्मा

    श्री तेखन सिन्हा

    श्री कांतिलाल जैन (गोलू)

    श्री नरेश तेजवानी

    संगठन को प्राथमिकता, सामाजिक संतुलन पर भी ध्यान

    सूची पर नजर डालें तो इसमें विभिन्न सामाजिक वर्गों और लंबे समय से संगठन में कार्यरत कार्यकर्ताओं को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास दिखाई देता है। पार्टी ने अनुभवी चेहरों के साथ सक्रिय कार्यकर्ताओं को भी अवसर देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि संगठन के प्रति समर्पण का सम्मान किया जाएगा।

    अब बढ़ेगी निगम की राजनीतिक सक्रियता

    एल्डरमैनों की नियुक्ति के बाद दुर्ग नगर निगम में कई महत्वपूर्ण समितियों के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा। विकास योजनाओं, निगम की नीतियों और विभिन्न प्रशासनिक निर्णयों में इन मनोनीत सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। ऐसे में यह नियुक्ति केवल औपचारिक नहीं, बल्कि आने वाले समय की स्थानीय राजनीतिक दिशा तय करने वाली भी मानी जा रही है।

    चर्चा का विषय बनी सूची

    सूची जारी होने के साथ ही भाजपा के भीतर खुशी का माहौल है, वहीं जिन नेताओं के नामों की चर्चा लंबे समय से चल रही थी लेकिन सूची में स्थान नहीं मिला, उनके समर्थकों में हल्की निराशा भी देखी जा रही है। कुल मिलाकर यह सूची संगठनात्मक संदेश देने के साथ-साथ आगामी राजनीतिक रणनीति की झलक भी पेश करती है।

    ढाई वर्षों के इंतज़ार के बाद जारी हुई यह सूची साफ संकेत देती है कि भाजपा ने दुर्ग में संगठन, अनुभव और राजनीतिक संतुलन—तीनों को साधने की कोशिश की है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि नव-नियुक्त एल्डरमैन नगर निगम की कार्यप्रणाली और शहर के विकास में कितनी प्रभावी भूमिका निभाते हैं।

    केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने किया सम्मानित, बोले— "यह सम्मान पूरे समाज का है"

    दुर्ग। मेघगंगा ग्रुप के चेयरमैन मनीष पारख को सामाजिक सेवा, जनकल्याण और सामाजिक दायित्वों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत सरकार के केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री Ramdas Athawale द्वारा प्रदान किया गया।

    दुर्ग जिले के सफल उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके मनीष पारख ने व्यापारिक उपलब्धियों के साथ-साथ सामाजिक उत्तरदायित्व को भी अपनी प्राथमिकता बनाया है। उन्होंने अपने पिता से मिली सेवा, संस्कार और समाज के प्रति समर्पण की प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, साइबर जागरूकता और सामाजिक विकास के अनेक क्षेत्रों में लगातार कार्य किया है।

    सम्मान प्राप्त करने के बाद मनीष पारख ने कहा, "डॉक्टरेट की इस उपाधि के लिए मैं आप सभी के सहयोग, विश्वास और स्नेह के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। यह सम्मान मुझे समाज की सेवा के लिए और अधिक प्रेरित करेगा।"

    सामाजिक सरोकारों में उल्लेखनीय योगदान

    मनीष पारख के नेतृत्व में विभिन्न जनहितकारी पहलें संचालित की गई हैं, जिनमें प्रमुख रूप से—

    लाइफकेयर डायग्नोस्टिक्स (NABL मान्यता प्राप्त) के माध्यम से नियमित निःशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन।

    पिछले 7 वर्षों से निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा का सतत संचालन।

    आम नागरिकों में नियमित स्वास्थ्य जांच की संस्कृति विकसित करने के लिए हेल्थ कार्ड योजना की शुरुआत।

    युवाओं के कौशल विकास हेतु विशेष स्किल डेवलपमेंट एवं डिग्री प्रोग्राम का संचालन।

    "मोर शहर, मोर जिम्मेदारी" अभियान के अंतर्गत दुर्ग के गांधी चौक, शहीद चौक, वाई-शेप ब्रिज चौक एवं कचहरी चौक सहित कई प्रमुख स्थलों के सौंदर्यीकरण एवं निर्माण कार्य में योगदान।

    शहर की यातायात व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए पुलिस विभाग को ट्रैफिक बैरिकेड्स उपलब्ध कराना।

    महावीर स्कूल के अध्यक्ष के रूप में विद्यालय के जीर्णोद्धार, आधुनिक शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना।

    दुर्ग पुलिस एवं तत्कालीन रेंज आईजी राम गोपाल गर्ग के साथ मिलकर "साइबर प्रहरी" अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए साइबर अपराध के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना।

    मनीष पारख को मिला यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि उद्योग जगत से जुड़े लोग यदि सामाजिक दायित्वों को प्राथमिकता दें, तो समाज में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन संभव है। यह उपलब्धि दुर्ग जिले के लिए भी गर्व का विषय मानी जा रही है।

    रायपुर। छत्तीसगढ़ को अंगदान एवं देहदान के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सर्वधर्म सेवा संस्था, भिलाई के प्रतिनिधिमंडल ने संस्था के संरक्षक श्री इंद्रजीत सिंह (छोटू भईया) के सहयोग एवं मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सौजन्य भेंट की।

    इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को 16 बिंदुओं का विस्तृत सुझाव-पत्र सौंपते हुए पूरे प्रदेश में अंगदान एवं देहदान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने का आग्रह किया। संस्था ने सुझाव दिया कि शासन स्तर पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं, जिससे अधिक से अधिक लोग अंगदान के लिए प्रेरित हों और जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सके।

    संस्था ने एक महत्वपूर्ण मांग रखते हुए कहा कि अंगदान करने वाले दाताओं को मरणोपरांत राजकीय सम्मान प्रदान किया जाए। संस्था का मानना है कि इससे समाज में अंगदान के प्रति सम्मान, जागरूकता और सकारात्मक सोच विकसित होगी तथा अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।

    सर्वधर्म सेवा संस्था का कहना है कि यदि शासन, चिकित्सा संस्थान, सामाजिक संगठन और आमजन मिलकर समन्वित प्रयास करें, तो छत्तीसगढ़ न केवल हजारों लोगों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, बल्कि अंगदान एवं देहदान के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल भी बन सकता है।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और इस विषय पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। संस्था ने मुख्यमंत्री के संवेदनशील दृष्टिकोण एवं सकारात्मक प्रतिक्रिया के लिए उनका आभार व्यक्त करते हुए आशा जताई कि भविष्य में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं

    सुरक्षित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने दो दिवसीय आयोजन, उत्कृष्ट टीमें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में करेंगी बीएसपी का प्रतिनिधित्व

    भिलाई ।
    भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग द्वारा कार्यस्थल पर सुरक्षित कार्य संस्कृति, नवाचार और सतत सुधार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दो दिवसीय एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिता ‘सुरक्षा-2026’ का आयोजन 27 एवं 29 जून को मानव संसाधन विकास विभाग के सभागार में किया गया। प्रतियोगिता में संयंत्र के विभिन्न विभागों की 47 सेफ्टी सर्किल टीमों ने सुरक्षा से जुड़े नवाचारों और केस स्टडी प्रस्तुत किए।

    प्रतियोगिता का शुभारंभ मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (मार्केटिंग एंड यूटिलिटीज) बी.के. बेहरा ने किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। दुर्घटनारहित कार्यस्थल के निर्माण के लिए नवाचार और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

    कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और अजय टल्लू द्वारा प्रतिभागियों को सुरक्षा शपथ दिलाने के साथ हुई। स्वागत उद्बोधन में मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) डी. सत्पथी ने बताया कि वर्ष 2024 में जहां 35 सेफ्टी सर्किल टीमों से यह पहल शुरू हुई थी, वहीं 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 83 हो गई। उन्होंने बताया कि ‘सुरक्षा-2026’ के लिए कुल 47 केस स्टडी प्राप्त हुईं, जो कर्मचारियों की बढ़ती सुरक्षा जागरूकता और सहभागिता का प्रमाण हैं।

    प्रतियोगिता के पहले दिन 20 टीमों और दूसरे दिन 27 टीमों ने अपने केस स्टडी चार मूल्यांकन पैनलों के समक्ष प्रस्तुत किए। प्रत्येक पैनल में दो विशेषज्ञ निर्णायक शामिल थे। प्रस्तुतियों में कार्यस्थल पर संभावित जोखिमों की पहचान, दुर्घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षित कार्य प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विकसित नवाचारी उपायों का प्रदर्शन किया गया।

    आयोजकों के अनुसार, प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों का चयन उच्च स्तरीय एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिताओं में भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाएगा।

    कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के मुख्य महाप्रबंधक, वरिष्ठ अधिकारी, निर्णायक, मेंटर, सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सेफ्टी सर्किल टीमों के सदस्य उपस्थित रहे।

    मुख्य बिंदु
    भिलाई इस्पात संयंत्र में आयोजित हुई ‘सुरक्षा-2026’ एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिता।
    47 सेफ्टी सर्किल टीमों ने सुरक्षा नवाचारों और केस स्टडी प्रस्तुत किए।
    प्रतियोगिता का उद्देश्य कार्यस्थल पर सुरक्षित कार्य संस्कृति और नवाचार को बढ़ावा देना।
    उत्कृष्ट टीमों को उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा।

    सुरक्षित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने दो दिवसीय आयोजन, उत्कृष्ट टीमें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में करेंगी बीएसपी का प्रतिनिधित्व

    भिलाई ।
    भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग द्वारा कार्यस्थल पर सुरक्षित कार्य संस्कृति, नवाचार और सतत सुधार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दो दिवसीय एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिता ‘सुरक्षा-2026’ का आयोजन 27 एवं 29 जून को मानव संसाधन विकास विभाग के सभागार में किया गया। प्रतियोगिता में संयंत्र के विभिन्न विभागों की 47 सेफ्टी सर्किल टीमों ने सुरक्षा से जुड़े नवाचारों और केस स्टडी प्रस्तुत किए।

    प्रतियोगिता का शुभारंभ मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (मार्केटिंग एंड यूटिलिटीज) बी.के. बेहरा ने किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा केवल नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। दुर्घटनारहित कार्यस्थल के निर्माण के लिए नवाचार और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

    कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के स्वागत और अजय टल्लू द्वारा प्रतिभागियों को सुरक्षा शपथ दिलाने के साथ हुई। स्वागत उद्बोधन में मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) डी. सत्पथी ने बताया कि वर्ष 2024 में जहां 35 सेफ्टी सर्किल टीमों से यह पहल शुरू हुई थी, वहीं 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 83 हो गई। उन्होंने बताया कि ‘सुरक्षा-2026’ के लिए कुल 47 केस स्टडी प्राप्त हुईं, जो कर्मचारियों की बढ़ती सुरक्षा जागरूकता और सहभागिता का प्रमाण हैं।

    प्रतियोगिता के पहले दिन 20 टीमों और दूसरे दिन 27 टीमों ने अपने केस स्टडी चार मूल्यांकन पैनलों के समक्ष प्रस्तुत किए। प्रत्येक पैनल में दो विशेषज्ञ निर्णायक शामिल थे। प्रस्तुतियों में कार्यस्थल पर संभावित जोखिमों की पहचान, दुर्घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षित कार्य प्रणालियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विकसित नवाचारी उपायों का प्रदर्शन किया गया।

    आयोजकों के अनुसार, प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों का चयन उच्च स्तरीय एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिताओं में भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया जाएगा।

    कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के मुख्य महाप्रबंधक, वरिष्ठ अधिकारी, निर्णायक, मेंटर, सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सेफ्टी सर्किल टीमों के सदस्य उपस्थित रहे।

    मुख्य बिंदु
    भिलाई इस्पात संयंत्र में आयोजित हुई ‘सुरक्षा-2026’ एकीकृत सेफ्टी सर्किल प्रतियोगिता।
    47 सेफ्टी सर्किल टीमों ने सुरक्षा नवाचारों और केस स्टडी प्रस्तुत किए।
    प्रतियोगिता का उद्देश्य कार्यस्थल पर सुरक्षित कार्य संस्कृति और नवाचार को बढ़ावा देना।
    उत्कृष्ट टीमों को उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा।

    पीटा एक्ट के तहत छापेमारी, तीन युवक और तीन युवतियां हिरासत में; लॉज संचालक की भूमिका की भी जांच

    दुर्ग । कोतवाली थाना पुलिस और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) की संयुक्त टीम ने रविवार को शहर के एक लॉज में छापेमारी कर कथित देह व्यापार का भंडाफोड़ किया। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीन युवकों और तीन युवतियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।

    पुलिस के अनुसार, कार्रवाई अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम (PITA) के तहत की गई। जिस भवन में छापेमारी हुई, उसके भूतल पर मिठाई की दुकान एवं आइसक्रीम पार्लर संचालित है, जबकि ऊपरी मंजिल पर स्थित लॉज में कथित तौर पर अवैध गतिविधियां संचालित होने की सूचना मिली थी।

    छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से कुछ दस्तावेज एवं जांच से संबंधित अन्य सामग्री भी जब्त की है। प्रारंभिक जांच में यह भी जानकारी सामने आई है कि लॉज में प्रवेश केवल पूर्व से दर्ज मोबाइल नंबरों के आधार पर ही दिया जाता था। हालांकि, पुलिस ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    कोतवाली पुलिस का कहना है कि पूरे नेटवर्क, लॉज संचालक की भूमिका तथा संभावित अन्य लोगों की संलिप्तता की जांच की जा रही है। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के विरुद्ध पीटा एक्ट सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

    नोट: यह कार्रवाई पुलिस की प्रारंभिक जांच पर आधारित है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

       दुर्ग / शौर्यपथ / राष्ट्रीय सघन पल्स पोलियो अभियान के पहले दिन दुर्ग जिले में निर्धारित 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 81 प्रतिशत बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई गई। अभियान का शुभारंभ शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पोटियाकला में जनप्रतिनिधियों एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ।
    जिला कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जिलेभर में अभियान की निगरानी की। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने बताया कि पालकों में बच्चों को पोलियो की दवा पिलाने को लेकर उत्साह देखने को मिला। जिला अस्पताल दुर्ग सहित बीएसपी सेक्टर-9 अस्पताल और निजी नर्सिंग होम में जन्मे नवजात शिशुओं को भी जन्म के साथ ही पोलियो की खुराक दी गई।
    अभियान के तहत ट्रांजिट और मोबाइल टीमों ने रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, झुग्गी-बस्तियों, ईंट भट्ठों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में पहुंचकर बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाई।
    स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि 29 एवं 30 जून को घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई जाएगी, ताकि जिले में अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाया जा सके।

      दुर्ग / शौर्यपथ / प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने केंद्रीय जेल दुर्ग का निरीक्षण कर बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं, स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता, भोजन व्यवस्था एवं विधिक सहायता की समीक्षा की। उन्होंने महिला एवं पुरुष बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और प्रकरणों की अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
    निरीक्षण के दौरान उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने तथा पात्र बंदियों के लंबित प्रकरणों की जानकारी प्राधिकरण को भेजने के निर्देश दिए।
    प्रधान जिला न्यायाधीश ने NALSA की SPRUHA योजना-2025 के तहत बंदियों के आश्रित परिवारों की समस्याओं की जानकारी लेकर उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने और पैरालीगल वालंटियर्स के माध्यम से फील्ड सत्यापन कराने के निर्देश भी दिए।
    उन्होंने जेल प्रशासन को सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए मानवीय गरिमा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।
    निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट भूपेश कुमार बसंत, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर, जेल अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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