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भिलाई। छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज भिलाई एवं स्वावलंबी भारत अभियान के संयुक्त तत्वावधान में वर्ष 2026 के शेष महीनों में व्यापार, उद्योग, युवा जागरूकता एवं स्थानीय बाजारों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से विभिन्न जनहितैषी कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी।
यह आयोजन प्रदेश महामंत्री अजय भसीन व भिलाई चेम्बर अध्यक्ष गार्गी शंकर मिश्रा के नेतृत्व में आयोजन सम्पन्न होंगे।
अजय भसीन ने एक पत्रकार वार्ता में बताया कि इन आयोजनों का उद्देश्य व्यापारियों के हितों की रक्षा, युवाओं को स्वावलंबन के लिए प्रेरित करना तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। अभियान की शुरुवात हो चुकी है। 16 जुलाई से कर्मकार व्यक्तित्व विकास प्रशिक्षण शिविर प्रारंभहुआ था। शनिवार को इस शिविर का द्वितीय सत्र का समापन हुआ। इस शिविर में विभिन्न प्रतिष्ठान के
कर्मकारों ने प्रशिक्षण लिया।
इस अभियान की शुरुआत अगस्त माह से होगी। 22 अगस्त से 2 अक्टूबर तक शहर के 10 स्कूलों एवं 10 महाविद्यालयों में जिंदगी न मिलेगी दोबारा विषय पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के वक्ता विद्यार्थियों को स्वावलंबन, भारतीय संस्कार, नैतिक जिम्मेदारी, व्यक्तित्व विकास, राष्ट्र निर्माण तथा जीवन में सही दिशा के महत्व पर प्रेरक विचारों से अवगत कराएंगे। इसका उद्देश्य युवाओं को जागरूक, जिम्मेदार एवं आत्मनिर्भर नागरिक बनाना है। इसी क्रम में देश के भविष्य माने जाने वाले जेन जेड वर्ग के 30 चयनित युवाओं को 17 अगस्त से 23 अगस्त तक अहमदाबाद के अध्ययन भ्रमण पर ले जाया जाएगा। इस यात्रा के दौरान उन्हें भविष्य के व्यापार एवं उद्योग, नवाचार, स्टार्टअप, आधुनिक तकनीक तथा उद्यमिता के नए अवसरों की जानकारी दी जाएगी ।
दुर्ग/ शौर्यपथ / सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और नाबालिगों द्वारा वाहन संचालन पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से यातायात पुलिस दुर्ग द्वारा चलाए जा रहे 'ऑपरेशन विश्वासÓ के तहत सेक्टर-4 भिलाई स्थित एसएनजी स्कूल में व्यापक यातायात जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, अभिभावकों, स्कूल प्रबंधन तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों को सड़क सुरक्षा, महिला सुरक्षा और साइबर सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) कौशलेन्द्र देव पटेल ने बताया कि पिछले पांच दिनों से चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान करीब 2,000 नाबालिग वाहन चालकों की जांच की गई, जिनमें 95 नाबालिग चालकों पर मोटरयान अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की गई। इसके अलावा 21 स्कूलों में लगभग 15,000 विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया गया।
पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को हेलमेट और सीट बेल्ट के महत्व, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के कानूनी परिणाम, स्कूल बस सुरक्षा नियम, अभिभावकों की जिम्मेदारी तथा विद्यालय प्रबंधन की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वैध ड्राइविंग लाइसेंस मिलने से पहले किसी भी नाबालिग को वाहन नहीं दिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में उप पुलिस अधीक्षक भारती मरकाम ने पिंक पेट्रोलिंग, महिला सुरक्षा और आपातकालीन सहायता सेवाओं की जानकारी देते हुए छात्राओं को सुरक्षा संबंधी आवश्यक सुझाव दिए। वहीं उपनिरीक्षक डॉ. संकल्प राय ने साइबर सुरक्षा पर व्याख्यान देते हुए सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, ऑनलाइन ठगी से बचाव, ओटीपी और बैंकिंग संबंधी सावधानियों के बारे में जानकारी साझा की।
जिला परिवहन अधिकारी मृत्युंजय देव पटेल ने अभियान की सराहना करते हुए ड्राइविंग लाइसेंस नियमों में हुए बदलाव, स्कूल बसों के परमिट नियम तथा सड़क सुरक्षा से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में जिला शिक्षा अधिकारी, पेरेंट्स यूनियन, बीएसपी के अधिकारी, एक्स आर्मी संगठन के प्रतिनिधि, स्कूल प्रबंधन, मीडिया एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान बीएसपी की 'टीम इंद्रधनुषÓ ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सड़क सुरक्षा का संदेश दिया। साथ ही यातायात पुलिस ने नेहरू नगर स्थित यातायात कार्यालय में ई-चालान का नि:शुल्क भुगतान किए जाने की सुविधा की जानकारी भी दी।
समापन अवसर पर उप पुलिस अधीक्षक (यातायात) विशाल सोम ने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने नाबालिग बच्चों को किसी भी परिस्थिति में वाहन न दें और स्वयं भी यातायात नियमों का पालन कर बच्चों के लिए सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करें। यातायात पुलिस ने नागरिकों से सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और सुरक्षित, दुर्घटनामुक्त समाज के निर्माण में सहयोग करने का आग्रह किया।
भिलाई। पतंजलि योग समिति, जिला दुर्ग द्वारा गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व वीरा का आंगन, सिरसा रोड, आर्य नगर (भिलाई) में श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के बीच मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ से हुआ, जिसमें सभी के उत्तम स्वास्थ्य, समाज की खुशहाली और राष्ट्र की समृद्धि की कामना की गई।
जिला प्रभारी नरेंद्र पटेल ने योग गुरु स्वामी रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण के राष्ट्र निर्माण, योग और आयुर्वेद के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों पर प्रकाश डालते हुए सभी से समाज और राष्ट्र सेवा में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। इस अवसर पर उपस्थित योग शिक्षकों, पदाधिकारियों और साधकों ने गुरु वंदना कर राष्ट्र सेवा एवं मानव कल्याण के लिए समर्पित रहने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में भजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और नागरिक सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन विषय पर जानकारी भी दी गई। योग एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कई योग शिक्षकों एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। अंत में संगठन के पदाधिकारियों ने योग, स्वास्थ्य और सेवा कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में पतंजलि योग समिति, भारत स्वाभिमान, युवा भारत, किसान पंचायत सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी, योग शिक्षक एवं साधक उपस्थित रहे।
कोर्ट के आदेश पर उतई थाना पुलिस ने दर्ज किया मामला, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराएं लगाई गईं
दुर्ग/भिलाई। करीब 4 करोड़ 39 लाख 50 हजार रुपये की कथित भूमि धोखाधड़ी के मामले में न्यायालय के आदेश पर उतई थाना पुलिस ने भिलाई नगर निगम की महिला पार्षद रीता सिंह, उनके पति रमेश चंद्र सिंह राजपूत तथा मानव चंद सिंह के विरुद्ध अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(2), 318(3), 318(4), 338, 336(3) एवं 340 के तहत मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है। मामला न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद पर सुनवाई के बाद दर्ज किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, परिवादी बी.बी. सिंह ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने ग्राम घोंटा, तहसील पाटन, जिला दुर्ग स्थित विभिन्न खसरा नंबरों की भूमि का विक्रय करने का अनुबंध किया। इनमें निजी भूमि के साथ-साथ दान भूमि (इकरारित भूमि) तथा एक हाइड्रोलिक एक्सकेवेटर और भारत बेंज टिपर ट्रक जैसी चल संपत्तियां भी शामिल थीं। 29 जनवरी 2024 को हुए लिखित इकरारनामे के आधार पर परिवादी से करोड़ों रुपये प्राप्त किए गए।
शिकायत के अनुसार, सौदे के दौरान कुछ भूमि ऐसी बताई गई जो आरोपियों के स्वामित्व में ही नहीं थी, जबकि कुछ भूमि अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज थी। आरोप है कि इन तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया। इतना ही नहीं, परिवादी का यह भी आरोप है कि सौदे में शासकीय लीज भूमि को भी शामिल कर उसके हस्तांतरण का आश्वासन दिया गया, जबकि इसके लिए शासन की अनुमति आवश्यक थी।
परिवाद में यह भी उल्लेख किया गया है कि जब दस्तावेजों और स्वामित्व को लेकर सवाल उठाए गए तो आरोपियों ने बैंक से एनओसी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, लेकिन वह आज तक प्रस्तुत नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि तीनों आरोपियों ने एक राय होकर तथ्यों को छिपाते हुए उसे भ्रमित किया और बड़ी राशि प्राप्त कर आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
समाचार पत्र में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, विवादित संपत्तियों का सौदा 4 करोड़ 50 लाख रुपये में तय हुआ था, जिसमें से परिवादी द्वारा 4 करोड़ 39 लाख 50 हजार रुपये का भुगतान किए जाने का दावा किया गया है। न्यायालय के आदेश के पालन में उतई पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में दस्तावेजों, भूमि स्वामित्व और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है।
भिलाई / शौर्यपथ / दुर्ग पुलिस की सोशल पुलिसिंग से 200 लोगों के गुम मोबाइल फोन उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाया गया। लगभग 60 लाख रुपये की संपत्ति उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाई गई। दुर्ग पुलिस के सतत तकनीकी एवं मैदानी प्रयासों से गुम हुए 200 मोबाइल फोन बरामद किए गए। शनिवार को पुलिस नियंत्रण कक्ष, सेक्टर-06 दुर्ग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय शर्मा ने मोबाइल फोन का वितरण किया।
दुर्ग पुलिस द्वारा आम नागरिकों की गुम हुई संपत्ति को उनके वास्तविक स्वामियों तक वापस पहुंचाने के उद्देश्य से लगातार विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को पुलिस नियंत्रण कक्ष, सेक्टर-06, दुर्ग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, दुर्ग द्वारा जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से गुम हुए एवं साइबर तकनीकी सहायता से बरामद किए गए 200 मोबाइल फोन, जिनकी अनुमानित कुल कीमत लगभग 60 लाख रुपये है, उनके वास्तविक स्वामियों को विधिवत सुपुर्द किए गए।
गुम मोबाइल की सूचना प्राप्त होने के पश्चात जिले की साइबर सेल एवं संबंधित थाना पुलिस द्वारा प्रत्येक प्रकरण का तकनीकी विश्लेषण किया गया। सीईआईआर (CEIR) पोर्टल, तकनीकी ट्रैकिंग, विभिन्न दूरसंचार सेवा प्रदाताओं से समन्वय तथा अन्य राज्यों एवं जिलों की पुलिस इकाइयों के सहयोग से मोबाइल फोनों का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित बरामद किया गया। आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत सभी मोबाइल उनके वास्तविक स्वामियों को वापस सौंपे गए। कार्यक्रम के दौरान मोबाइल प्राप्त करने वाले नागरिकों ने अपने खोए हुए मोबाइल वापस मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए दुर्ग पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया। कई नागरिकों ने बताया कि उन्हें अपने मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी थी, किन्तु दुर्ग पुलिस के निरंतर प्रयासों से उनकी महत्वपूर्ण संपत्ति पुनः प्राप्त हो सकी।
दुर्ग पुलिस द्वारा संचालित यह अभियान केवल गुम संपत्ति की बरामदगी तक सीमित नहीं है, बल्कि सोशल पुलिसिंग की अवधारणा को सशक्त बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान, पारदर्शी कार्यप्रणाली एवं संवेदनशील पुलिसिंग के माध्यम से पुलिस एवं नागरिकों के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत किया जा रहा है। दुर्ग पुलिस भविष्य में भी इसी प्रकार आम नागरिकों की सहायता एवं जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देते हुए निरंतर प्रभावी कार्यवाही करती रहेगी। कार्यक्रम के दौरान मोबाइल प्राप्त करने वाले नागरिकों ने अपने खोए हुए मोबाइल वापस मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए दुर्ग पुलिस के प्रति आभार व्यक्त किया। कई नागरिकों ने बताया कि उन्हें अपने मोबाइल वापस मिलने की उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी थी, किन्तु दुर्ग पुलिस के निरंतर प्रयासों से उनकी महत्वपूर्ण संपत्ति पुनः प्राप्त हो सकी।
उक्त कार्यवाही में जिला साइबर सेल, समस्त थाना एवं चौकी प्रभारियों, विवेचना अधिकारियों तथा मोबाइल रिकवरी अभियान में संलग्न समस्त पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही। सभी के समन्वित प्रयास, तकनीकी दक्षता एवं सतत फॉलोअप के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में गुम मोबाइल बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को लौटाया जा सका। दुर्ग पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि मोबाइल गुम होने अथवा चोरी होने की स्थिति में तत्काल संबंधित थाना, साइबर सेल अथवा CEIR पोर्टल के माध्यम से सूचना दर्ज कराएं। समय पर सूचना एवं आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने से मोबाइल की शीघ्र ट्रैकिंग एवं बरामदगी की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही अपने मोबाइल की सुरक्षा के लिए स्क्रीन लॉक, पासवर्ड, बायोमेट्रिक सुरक्षा एवं आवश्यक सुरक्षा सुविधाओं का उपयोग अवश्य करें।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में 29 जुलाई को डब्ल्यूबी-16 स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कार्यपालक निदेशक (संकार्य) राकेश कुमार, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (सर्विसेज) तुषार कांत, मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (एम एंड यू) बिजय कुमार बेहेरा, मुख्य महाप्रबंधक (ब्लास्ट फर्नेस) मनोज कुमार, महाप्रबंधक (एसएमएस-2) सुशांत कुमार घोषाल, मुख्य महाप्रबंधक (एसएमएस-3) त्रिभुवन बैठा, मुख्य महाप्रबंधक (रिफ्रैक्ट्री) प्रोसेनजीत दास सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यपालक निदेशक (संकार्य) राकेश कुमार ने इस सफलता के लिए सभी संबंधित विभागों की टीमों को बधाई देते हुए कहा कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय, तकनीकी दक्षता और टीमवर्क के कारण ही यह उपलब्धि संभव हो सकी। उन्होंने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए रखते हुए लागत में कमी, परिचालन उत्कृष्टता और भविष्य में इससे भी बेहतर मानक स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
टीएलसी-207 की रिकॉर्ड लाइफ हासिल करने में रिफ्रैक्ट्री इंजीनियरिंग विभाग (आरईडी), ब्लास्ट फर्नेस, ट्रैफिक एंड डिस्पैच तथा एसएमएस-3 के बीच उत्कृष्ट समन्वय और प्रभावी कार्यप्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका रही। ब्लास्ट फर्नेस विभाग में मनोज कुमार के मार्गदर्शन में परिचालन का सफल संचालन किया गया, जबकि पी. आर. अजयन और दिनेश राव ने बेहतर परिचालन पद्धतियों को बनाए रखने में उल्लेखनीय योगदान दिया।
रिफ्रैक्ट्री अनुरक्षण एवं तकनीकी सुधार कार्य प्रोसेनजीत दास के नेतृत्व में संपन्न हुए। टॉरपीडो लैडल रिफ्रैक्ट्री अनुरक्षण का नेतृत्व मोहम्मद साबिर ने किया, जबकि जे. आर. मारकंडे और हर्ष वर्धन सिंह ने संबंधित एजेंसी के साथ समन्वय स्थापित कर तकनीकी नवाचार और कार्य निष्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह उपलब्धि भिलाई इस्पात संयंत्र की तकनीकी क्षमता, अनुशासित परिचालन, प्रभावी अनुरक्षण व्यवस्था और सामूहिक टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है। इससे संयंत्र ने इस्पात उत्पादन के क्षेत्र में एक और नया मानक स्थापित किया है।
भिलाई-03। सावन के पहले ही दिन भिलाई-चरौदा नगर निगम ने स्वास्थ्य विभाग के महिला एवं पुरुष कर्मचारियों को रेनकोट वितरित किए। निगम महापौर निर्मल कोसरे, सभापति कृष्णा चंद्राकर एवं निगम आयुक्त डी.एस. राजपूत की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में कर्मचारियों को बरसात के दौरान सुरक्षित एवं निर्बाध रूप से कार्य करने के लिए रेनकोट उपलब्ध कराए गए।
महापौर निर्मल कोसरे ने कहा कि निगम के स्वास्थ्य कर्मचारी हर मौसम में शहर की स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखने के लिए मैदान में रहते हैं। लगातार हो रही बारिश के बीच उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसी उद्देश्य से रेनकोट वितरित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि वर्षा ऋतु में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में रेनकोट कर्मचारियों को बारिश, नमी और कीट-पतंगों से बचाने में भी सहायक होंगे, जिससे वे अधिक सुरक्षित वातावरण में अपनी सेवाएं दे सकेंगे।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के सभी महिला एवं पुरुष कर्मचारी उपस्थित रहे। निगम प्रशासन ने कर्मचारियों के कार्य के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए भविष्य में भी उनकी सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही।
रिसाली / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम रिसाली में 'कैच द रेन' अभियान के तहत जल संरक्षण विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। निगम आयुक्त मोनिका वर्मा के निर्देश पर आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र की महिलाओं को वर्षा जल संग्रहण और भूजल संरक्षण के महत्व की जानकारी दी गई।
उप अभियंता डिगेश्वरी चंद्राकर ने कहा कि जल बचाने और उसे संरक्षित करने में महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि घरों में पानी का सबसे अधिक उपयोग महिलाएं करती हैं, इसलिए भविष्य में संभावित जल संकट से निपटने के लिए उन्हें जल संरक्षण के प्रति जागरूक होकर समाज का नेतृत्व करना होगा।
कार्यशाला का उद्देश्य वर्षा जल को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से संग्रहित कर भूजल स्तर बढ़ाना और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति लोगों को प्रेरित करना था। कार्यक्रम में शामिल वूमेन फॉर ट्री से जुड़ी महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूह की सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया।
जल संरक्षण के लिए दिए गए प्रमुख सुझाव:
वर्षा जल को पात्रों में एकत्र कर घरेलू उपयोग में लें।
साफ वर्षा जल को पाइप के माध्यम से बोरवेल एवं कुओं में रिचार्ज करें।
घर के आसपास सोक पिट का निर्माण कर भूजल स्तर बढ़ाने में सहयोग करें।
अधिक से अधिक पौधरोपण कर जल संरक्षण को बढ़ावा दें।
आमजन को वर्षा जल संचयन और जल बचाने के लिए प्रेरित करें।
भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई की आयुक्त सुरुचि सिंह की अध्यक्षता में निगम सभागार में राजस्व आय एवं विभिन्न स्थानीय करों की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में निगम की वर्तमान राजस्व वसूली की स्थिति की विस्तार से समीक्षा करते हुए संग्रह बढ़ाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
आयुक्त ने कर वसूली में लगी एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर शत-प्रतिशत वसूली का लक्ष्य हासिल किया जाए। उन्होंने बड़े राजस्व बकाएदारों की सूची तैयार कर तत्काल नोटिस जारी करने तथा नियमानुसार वसूली की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में आम नागरिकों को कर भुगतान में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली एवं ऑनलाइन पोर्टल को और अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। साथ ही राजस्व विभाग के अधिकारियों को एजेंसी के कार्यों की प्रतिदिन निगरानी कर नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
आयुक्त सुरुचि सिंह ने कहा कि "निगम क्षेत्र के सुनियोजित विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए समय पर राजस्व प्राप्त होना अत्यंत आवश्यक है। कर वसूली के कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
बैठक में अपर आयुक्त राजेंद्र कुमार दोहरे, उपायुक्त डी.के. कोसरिया, जोन आयुक्त अमरनाथ दुबे, येशा लहरे एवं कुलदीप गुप्ता, लेखाधिकारी चन्द्रभूषण साहू, स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली, राजस्व अधिकारी जे.पी. तिवारी, सहायक राजस्व अधिकारी तथा राजस्व वसूली एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
