August 10, 2026
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    “शांति का टापू” से अपराध और नशे के गढ़ तक पहुंचा छत्तीसगढ़ : राहुल शर्मा

    दुर्ग / शौर्यपथ। जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग के महामंत्री राहुल शर्मा ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए छत्तीसगढ़ में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, बढ़ते अपराध और नशे के कारोबार को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कभी छत्तीसगढ़ की पहचान “शांति का टापू” के रूप में होती थी, लेकिन भाजपा की डबल इंजन सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में प्रदेश अपराध, नशे और माफियाराज की गिरफ्त में पहुंच गया है।

    राहुल शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हरेली, तीजा, दीपावली, दशहरा सहित सभी त्योहार लोग प्रेम, भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाते थे। महिलाएं रात के समय भी स्वयं को सुरक्षित महसूस करती थीं। लेकिन आज परिस्थितियां बदल गई हैं। त्योहारों के दौरान भी चोरी, गुंडागर्दी, नशे में मारपीट और आपराधिक घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल-कॉलेजों के आसपास 200 से 300 मीटर के दायरे में ड्रग्स, गांजा, स्मैक और अवैध शराब आसानी से उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। पुलिस की नाक के नीचे नशे के अड्डे संचालित होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि इसका सबसे गंभीर असर प्रदेश के युवाओं पर पड़ रहा है। हजारों युवा नशे की गिरफ्त में आकर अपना भविष्य बर्बाद कर रहे हैं।

    कांग्रेस नेता ने NCRB के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि छत्तीसगढ़ में हत्या, लूट, डकैती, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 200 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि व्यापारी, किसान और आम नागरिक सहित कोई भी वर्ग स्वयं को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है।

    राहुल शर्मा ने प्रदेश के गृहमंत्री से सवाल करते हुए कहा, “नशा माफिया को किसका संरक्षण प्राप्त है? सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था सुधारने के बजाय इसे बदहाल क्यों होने दिया गया?” उन्होंने कहा कि सरकार को केवल दावे करने के बजाय नशे के नेटवर्क और उसके पीछे सक्रिय लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

    उन्होंने सरकार से मांग की कि नशा माफिया और उनके संरक्षणदाताओं के खिलाफ NSA/रासुका के तहत कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही प्रदेश के प्रत्येक जिले में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित की जाए, ताकि नशे के कारोबार की जड़ तक पहुंचकर कार्रवाई की जा सके।

    राहुल शर्मा ने त्योहारों के दौरान विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू करने, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त बढ़ाने और युवाओं को नशे से बचाने के लिए प्रभावी अभियान चलाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को गंभीरता से कदम उठाकर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को मजबूत करना होगा।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि सरकार अपराध और नशे के खिलाफ ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई करे, ताकि छत्तीसगढ़ की पुरानी पहचान “शांति का टापू” के रूप में फिर से स्थापित हो सके।

       धमतरी / शौर्यपथ / भारतीय जनता पार्टी संगठन द्वारा जारी नई नियुक्तियों में राजेशनाथ गोसाई को भारतीय जनता पार्टी, मंडल नगरी का मंडल अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति से मंडल नगरी सहित क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं में हर्ष एवं उत्साह का वातावरण है। कार्यकर्ताओं ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में संगठन और अधिक सशक्त एवं गतिशील बनेगा।
    मंडल अध्यक्ष नियुक्त होने पर राजेशनाथ गोसाई ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व, राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं समस्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों, प्रदेश नेतृत्व, प्रदेश अध्यक्ष एवं समस्त प्रदेश पदाधिकारियों, जिला नेतृत्व एवं समस्त कार्यकर्ताओं के प्रति हृदय से आभार एवं कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन ने एक सामान्य कार्यकर्ता पर जो विश्वास व्यक्त किया है, वह उनके लिए गौरव के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है।
    उन्होंने कहा कि वे पार्टी की विचारधारा, सिद्धांतों एवं संगठन की रीति-नीति के अनुरूप पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ कार्य करेंगे तथा मंडल नगरी में संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे।
    श्री गोसाई ने मंडल नगरी सहित समस्त वरिष्ठजनों, पदाधिकारियों एवं सभी कार्यकर्ताओं के स्नेह, विश्वास, शुभकामनाओं एवं सहयोग के लिए भी हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं के सामूहिक सहयोग और मार्गदर्शन से संगठन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने एवं जनसेवा के कार्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने का सतत प्रयास किया जाएगा।

       धमतरी / शौर्यपथ / सिहावा विधानसभा क्षेत्र की पूर्व विधायक लक्ष्मी ध्रुव ने मध्य प्रदेश एवं बिहार के उपचुनाव परिणामों को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि इन चुनाव परिणामों से यह संकेत मिलता है कि भाजपा के प्रति जनता का विश्वास धीरे-धीरे कम हो रहा है।
    उन्होंने मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह की जीत का स्वागत करते हुए कहा कि जनता ने लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास व्यक्त करते हुए कांग्रेस के पक्ष में जनादेश दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती को राजनीतिक साजिश के तहत हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन उपचुनाव के परिणाम भाजपा के लिए बड़ा झटका साबित हुए।
    पूर्व विधायक ने बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने भाजपा प्रत्याशी को 18,953 मतों के अंतर से पराजित किया, जिससे भाजपा की राजनीतिक स्थिति पर प्रश्नचिह्न खड़ा हुआ है।
    लक्ष्मी ध्रुव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने चुनावी वादों को प्रभावी ढंग से पूरा नहीं किया तथा सरकार के कार्यों में जनहित की अपेक्षा तानाशाही और दबाव की राजनीति अधिक दिखाई दी। उन्होंने कहा कि जनता अब इन बातों को समझ चुकी है और आने वाले समय में कांग्रेस को व्यापक जनसमर्थन मिलेगा।
    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में कांग्रेस दिल्ली, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में भी मजबूत वापसी करेगी।

    नई दिल्ली/भोपाल। मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा क्षेत्र की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार पूर्व गृह मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बूथ पर कांग्रेस प्रत्याशी श्री घनश्याम सिंह को बढ़त/जीत मिली है। इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के निर्वाचन क्षेत्र में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा है। इन दोनों परिणामों के बाद राजनीतिक हलकों में पार्टी के भीतर जवाबदेही और अनुशासन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि चुनावी प्रदर्शन के आधार पर किसी नेता की जवाबदेही तय की जाती है, तो समान परिस्थितियों में सभी नेताओं के लिए एक समान मानदंड अपनाया जाना चाहिए। सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर भी यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी एक नेता पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात होती है, तो समान परिस्थितियों वाले अन्य नेताओं पर भी वही कसौटी लागू होनी चाहिए। हालांकि, भाजपा की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान या अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि चुनावी परिणामों के बाद पार्टी संगठन आमतौर पर विस्तृत समीक्षा करता है और स्थानीय परिस्थितियों, संगठनात्मक मजबूती तथा अन्य कारकों का भी आकलन किया जाता है। ऐसे में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व के स्तर पर ही लिया जाएगा। फिलहाल, दतिया और राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र के चुनावी परिणाम भाजपा के भीतर राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।

      जांजगीर / शौर्यपथ / बिजली दरों में बढ़ोतरी, स्मार्ट मीटर हटाने और 400 यूनिट तक की बिजली बिल हाफ योजना को पुन: लागू करने की मांग को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने पत्रकार वार्ता में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि अगस्त माह से कांग्रेस कार्यकर्ता घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर हटाने और बिजली दर वृद्धि वापस लेने के समर्थन में आवेदन एवं विरोध-पत्र भरवाएंगे।
    उन्होंने बताया कि दो माह तक पूरे प्रदेश में आम जनता से आवेदन एकत्र किए जाएंगे। इसके बाद जिला मुख्यालयों में बिजली विभाग के कार्यालयों का घेराव कर आवेदन सौंपे जाएंगे और उनकी पावती ली जाएगी। इसके पश्चात प्रदेशभर से प्राप्त पावतियों के साथ मुख्यमंत्री निवास का घेराव कर सरकार के समक्ष मांगें रखी जाएंगी।
    पत्रकार वार्ता में जांजगीर-चांपा विधायक व्यास कश्यप ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने जुलाई से घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तथा गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की है। वहीं कृषि पंपों की बिजली दरों में भी 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। उनका दावा था कि भाजपा सरकार बनने के बाद यह बिजली दरों में पांचवीं वृद्धि है और अब तक कुल 31.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा चुकी है।
    कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में बिजली बिल तीन से चार गुना तक बढ़कर आ रहे हैं। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना अनुबंधित भार क्षमता बढ़ाई जा रही है और स्मार्ट मीटर अधिक खपत दर्ज कर रहे हैं, जिसके आधार पर अतिरिक्त शुल्क और अर्थदंड जोड़कर बिल भेजे जा रहे हैं। कांग्रेस ने अधिक बिजली बिल के लिए तीन प्रमुख कारण बताए—बिजली दरों में वृद्धि, बिजली बिल हाफ योजना का बंद होना और स्मार्ट मीटर के कारण कथित रूप से बढ़ी हुई रीडिंग।
    पत्रकार वार्ता में पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश शर्मा, नारायण सोनी, गिरधारी यादव, रफीक सिद्दीकी, नागेंद्र गुप्ता, सेवक बूटू देवांगन, भगवान दास गढ़वाल, शिशिर द्विवेदी, दुर्गा कुर्रे, सुनील साधवानी, रामविलास राठौर, राजकुमार सरोज एवं हरीश श्रीवास सहित कांग्रेस के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    दुर्ग में कार्यशाला संपन्न, वाराणसी से पवित्र माटी व जल लाकर प्रदेशभर के मंदिरों तक पहुंचाने की बनी रणनीति

    दुर्ग। संत शिरोमणि रविदास महाराज की 650वीं जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों तथा 10 से 15 अगस्त तक प्रस्तावित तिरंगा यात्रा की तैयारियों को लेकर भाजपा की महत्वपूर्ण कार्यशाला जिला भाजपा कार्यालय में संपन्न हुई। कार्यशाला में प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय मुख्य अतिथि एवं जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक अध्यक्षता में शामिल हुए। इस दौरान संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और कार्यक्रमों को बूथ स्तर तक सफल बनाने की रणनीति तैयार की गई।

    कार्यशाला में कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं संभाग प्रभारी जगन्नाथ पाणिग्रही, प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन, विधायक ललित चंद्राकर, ईश्वर साहू, प्रदेश मंत्री जितेंद्र वर्मा, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष जितेंद्र साहू, महापौर अलका बाघमार, जिला महामंत्री दिलीप साहू और विनोद अरोरा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि व पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय ने कहा कि संत रविदास का जीवन सामाजिक समरसता, समानता और बंधुत्व का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वाराणसी में संत रविदास का भव्य स्मारक बन रहा है। 27 जुलाई को भाजपा की विशेष टीम स्मारक स्थल से कलश में पवित्र माटी और जल लेकर छत्तीसगढ़ आएगी, जिसे प्रदेश के प्रमुख मंदिरों और देवस्थलों तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही सामाजिक समरसता यात्राएं, विचार गोष्ठियां, स्वच्छता अभियान, सेवा कार्य, निबंध, चित्रकला एवं विचार-विमर्श प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि 10 से 15 अगस्त तक प्रदेशभर में तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी तथा हर बूथ और हर घर पर तिरंगा फहराने का अभियान चलाया जाएगा।

    प्रदेश उपाध्यक्ष जगन्नाथ पाणिग्रही ने कहा कि यह अभियान केवल आयोजन नहीं, बल्कि संत रविदास के संदेश को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प है। वहीं प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन ने बताया कि 25 से 27 जुलाई तक सभी जिलों में कार्यशालाएं आयोजित कर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं ताकि कार्यक्रम ऐतिहासिक बन सके।

    जिला भाजपा अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक ने कहा कि संत रविदास की 650वीं जयंती भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर है। उन्होंने बताया कि जिला से मंडल और बूथ स्तर तक कार्यक्रमों के संचालन के लिए टीमों का गठन कर दिया गया है और सभी कार्यकर्ताओं से समन्वय के साथ अभियान को सफल बनाने का आह्वान किया।

    कार्यशाला में भाजपा के जिला एवं मंडल पदाधिकारी, विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

    *विपक्ष जनता की आवाज़, सरकार सवालों से मुंह मोड़ रही*

    दुर्ग। पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता ताम्रध्वज साहू ने कहा है कि विपक्ष की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता की आवाज़ को मजबूती से सरकार तक पहुंचाना और जनहित के मुद्दों पर जवाबदेही तय करना है।

    गुरुवार को जारी बयान में श्री साहू ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता विपक्ष श्री राहुल गांधी लगातार युवाओं, छात्रों और आम जनता के मुद्दों को सड़क से लेकर संसद तक उठा रहे हैं। 

    उन्होंने आरोप लगाया कि "इस देश का दुर्भाग्य है कि सरकार जनता के सवालों का जवाब देने के बजाय आवाज़ उठाने वालों को दबाने का प्रयास कर रही है।" 

    श्री साहू ने की कहा, "भाजपा याद रखे, लोकतंत्र में आवाज़ दबाने से सवाल खत्म नहीं होते। देश का युवा न्याय मांग रहा है, जवाब मांग रहा है और कांग्रेस उनकी आवाज़ बनकर मजबूती से खड़ी है।"

    पूर्व गृहमंत्री ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक और छात्रों की समस्याओं जैसे मुद्दों पर सरकार चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इन सभी मुद्दों पर जनता के साथ खड़ी है और सदन के अंदर व बाहर संघर्ष जारी रखेगी।

    दुर्ग । शौर्यपथ । 

    जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग के महामंत्री राहुल शर्मा ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने वादों से मुंह मोड़कर शिक्षकों, छात्रों और पूरे शिक्षा तंत्र के साथ अन्याय किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीतियां लगातार यह साबित कर रही हैं कि सरकार शिक्षा और शिक्षक—दोनों के प्रति संवेदनहीन है।

    राहुल शर्मा ने कहा कि नियमितीकरण एवं अन्य जायज मांगों को लेकर अतिथि शिक्षक संघ पिछले 23 दिनों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहा था, लेकिन छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार ने उनकी समस्याओं की ओर ध्यान देना भी उचित नहीं समझा। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर अतिथि शिक्षकों की मांगों का समाधान करने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आते ही वह अपना वादा भूल गई। यह भाजपा की पुरानी कार्यशैली बन चुकी है कि चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं और सरकार बनने के बाद उन्हें भुला दिया जाता है।

    उन्होंने आरोप लगाया कि मांगों के समाधान के बजाय सरकार ने आंदोलनरत शिक्षकों के साथ दमनकारी रवैया अपनाया। पुलिस प्रशासन द्वारा धरनास्थल से टेंट हटाए गए और शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि सरकार को दमन की जगह संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए था और अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण, सम्मानजनक मानदेय तथा स्थायी नीति पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए।

    राहुल शर्मा ने कहा कि "शिक्षा के मंदिर को बचाने वाले गुरुजनों पर तानाशाही और अत्याचार की जितनी भी निंदा की जाए, कम है।" उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज का भविष्य गढ़ते हैं और उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार किसी भी संवेदनशील सरकार को शोभा नहीं देता।

    कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया। उनके अनुसार इस मामले में लगभग 20 लाख छात्र-छात्राओं की मेहनत प्रभावित हुई, लेकिन दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से छात्रों में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर कथित लाठीचार्ज किया गया, जिसमें कई छात्र घायल हुए और एक छात्र की मृत्यु होने का भी दावा किया गया।

    उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करती तो केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे स्पष्ट है कि भाजपा सरकार शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भी जवाबदेही से बचने का प्रयास कर रही है।

    राहुल शर्मा ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य—दोनों स्तरों पर भाजपा सरकारों की नीतियां शिक्षा, शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों के विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षा के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह व्यवस्था स्थापित नहीं होगी, तब तक देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था को न्याय नहीं मिल सकेगा।

    विधानसभा चुनाव की चर्चाओं के बीच राजनीतिक विश्लेषकों की राय—यदि सक्रिय राजनीति में आना है तो किसी एक दल के साथ स्पष्ट वैचारिक प्रतिबद्धता दिखानी होगी, अन्यथा समाजसेवा की सर्वस्वीकार्य छवि ही सबसे बड़ी पूंजी बनी रहेगी।
    शौर्यपथ राजनितिक विश्लेषण
    दुर्ग शहर के प्रमुख व्यापारी एवं समाजसेवी इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ इन दिनों एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। हाल ही में उनके जन्मदिवस का भव्य आयोजन और उसमें विभिन्न क्षेत्रों के लोगों की बड़ी भागीदारी ने यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या वे भविष्य में विधानसभा चुनाव की राजनीति में कदम रख सकते हैं।
    प्रदेश की वर्तमान राजनीति पर नजर डालें तो मुकाबला मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सिमटता दिखाई देता है। क्षेत्रीय दलों का प्रभाव लगातार कम हुआ है और मतदाताओं का झुकाव भी दो प्रमुख राष्ट्रीय दलों के इर्द-गिर्द केंद्रित होता जा रहा है। ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में यदि कोई नया चेहरा चुनावी राजनीति में उतरना चाहता है, तो उसके लिए केवल लोकप्रिय होना पर्याप्त नहीं, बल्कि किसी एक राजनीतिक विचारधारा के साथ स्पष्ट रूप से खड़ा होना भी आवश्यक माना जाता है।
    इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ की सबसे बड़ी ताकत उनकी सामाजिक सक्रियता और जनसंपर्क है। वर्षों से वे विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और जनहित के कार्यों में सक्रिय रहे हैं, जिसके कारण उन्हें लगभग सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और समाज के विभिन्न वर्गों का सम्मान मिलता है। यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी भी है।
    हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजसेवा और सक्रिय राजनीति की कार्यशैली अलग-अलग होती है। समाजसेवी सभी वर्गों के बीच समान स्वीकार्यता बनाए रख सकता है, लेकिन राजनीति में अंतत: किसी एक दल, उसकी विचारधारा और संगठन के साथ स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखानी पड़ती है।
    वर्तमान समय में भाजपा अपने लंबे समय से कार्य कर रहे संगठनात्मक कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देती रही है। वहीं कांग्रेस को लेकर कभी यह धारणा रही कि वह बाहरी या तथाकथित "हेलीकॉप्टर प्रत्याशियों" को भी अवसर देती है, लेकिन बदलते राजनीतिक माहौल में कांग्रेस संगठन भी अब लंबे समय से संघर्ष कर रहे कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे में किसी भी नए चेहरे के लिए केवल लोकप्रियता के आधार पर टिकट प्राप्त करना पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
    इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ के समर्थकों की संख्या भी कम नहीं है, लेकिन यह भी एक चर्चा का विषय है कि उनके अधिकांश समर्थक व्यापारी और परिचित वर्ग से जुड़े दिखाई देते हैं जिनकी सामजिक एवं आम जनता से दुरी स्पष्ट नजर आता है । यदि वे भविष्य में राजनीति को अपना लक्ष्य बनाते हैं तो उन्हें ऐसा मजबूत संगठन तैयार करना होगा, जो उनकी अनुपस्थिति में भी आम जनता की समस्याओं को सुने, उनके बीच लगातार सक्रिय रहे और राजनीतिक आधार को मजबूत करे जिनकी आज कमी है ।
    राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में अभी पर्याप्त समय शेष है। यदि इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ वास्तव में राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं, तो उन्हें अभी से किसी एक दल और उसकी विचारधारा के प्रति अपना स्पष्ट झुकाव दिखाना होगा। राजनीति में लंबे समय तक दोनों पक्षों के साथ समान दूरी या समान निकटता बनाए रखने की रणनीति अब पहले जैसी प्रभावी नहीं मानी जाती।
    दूसरी ओर, यदि वे राजनीति से दूरी बनाकर केवल समाजसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं, तो उनकी निष्पक्ष और सर्वस्वीकार्य छवि और अधिक मजबूत हो सकती है। समाजसेवा के क्षेत्र में उनकी पहचान किसी राजनीतिक सीमा में बंधे बिना लगातार विस्तार पा सकती है और यही उनकी सबसे बड़ी विरासत भी बन सकती है।
    अंतत: फैसला इंद्रजीत सिंह 'छोटूÓ को ही करना है कि वे अपनी पहचान एक सफल समाजसेवी के रूप में आगे बढ़ाना चाहते हैं या फिर सक्रिय राजनीति की चुनौतियों को स्वीकार कर किसी राजनीतिक दल के साथ नई पारी शुरू करेंगे। आने वाले समय में उनका निर्णय न केवल उनकी राजनीतिक दिशा तय करेगा, बल्कि दुर्ग की राजनीति में भी नई चर्चाओं को जन्म दे सकता है।

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