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*पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी की कॉरपोरेट भूमिका क्यों,रायगढ़-तमनार के संदर्भ में यह नियुक्ति और भी अधिक संदिग्ध और चिंताजनक- संजीत विश्वकर्मा प्रदेश संगठन मंत्री आप*
रायपुर। जिंदल समूह द्वारा पूर्व भारतीय वन सेवा वरिष्ठ अधिकारी एस.एस. बाजाज को कॉरपोरेट लाइजनिंग का छत्तीसगढ़ राज्य प्रमुख नियुक्त किया गया है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री संजीत विश्वकर्मा ने कहा है कि यह नियुक्त बहुत साधारण सी लगती है लेकिन यह केवल एक पदस्थापना नहीं, बल्कि राज्य में कॉरपोरेट प्रभाव, प्रशासनिक पहुंच और सत्ता-संबंधों के खतरनाक गठजोड़ का संकेत है। सरकार, प्रशासन और पर्यावरणीय नियम-कानूनों की पूरी समझ रखने वाले ऐसे अधिकारी के पास पद, पहुँच और संवेदनशील जानकारियों का जो प्रभाव है, उसका दुरुपयोग होने की पूरी आशंका है। यह स्थिति जनहित और पारदर्शिता, दोनों के लिए गंभीर खतरा है। यह सांठगांठ, छत्तीसगढ़ में सरकार, अफसरशाही और कॉरपोरेट गठजोड़ के उस काले चेहरे को उजागर करता है, जिसके कारण जल, जंगल, जमीन और जनता के अधिकारों की खुलेआम नीलामी की बड़ी तैयारी की जा रही है।
लोक सभा अध्यक्ष श्रीमती गीतेश्वरी बघेल कि यह बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला है। जिन अधिकारियों पर जनता के संसाधनों की रक्षा करने, कानून का पालन कराने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, वही लोग अब कॉरपोरेट घरानों के लिए रास्ता साफ करने के काम में लग जाएं, तो यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि सत्ता और पूंजी के गठबंधन से चलने वाली लूट की व्यवस्था है।आखिर छत्तीसगढ़ की जनता यह कैसे माने कि जिन लोगों ने शासन तंत्र, नीतियों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और संवेदनशील निर्णयों के बीच वर्षों तक काम किया, वे अब उन्हीं जानकारियों और संबंधों का इस्तेमाल कॉरपोरेट हित साधने के लिए नहीं करेंगे? यह सीधा-सीधा हितों का टकराव है। यह नैतिक पतन है। यह छत्तीसगढ़ की जनता के सार्वजनिक विश्वास के साथ विश्वासघात है। रायगढ़, तमनार और आसपास के क्षेत्रों में पहले से ही जनता जमीन, पर्यावरण, प्रदूषण, विस्थापन और जल संकट को लेकर त्रस्त है। वहां यदि कॉरपोरेट कंपनियां पूर्व अधिकारियों को लाइजनिंग के लिए आगे कर रही हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि वे जनता की आवाज को दबाकर, प्रशासन पर प्रभाव डालकर और नियम-कानून को मोड़कर अपने हित सुरक्षित करना चाहती हैं।उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि छत्तीसगढ़ कोई कॉरपोरेट कंपनियों की जागीर नहीं है। यह राज्य यहां की जनता का है, आदिवासियों का है, किसानों का है, युवाओं का है, श्रमिकों का है। लेकिन भाजपा की सरकार ने इसे दलालों, पूंजीपतियों और सत्ता संरक्षित अफसरशाही के हवाले कर दिया है।
हम मांग करते हैं कि इस तरह की नियुक्तियों की स्वतंत्र जांच हो। पूर्व अधिकारियों के कॉरपोरेट रोल पर सख्त नियम बनें। और रायगढ़-तमनार सहित संवेदनशील क्षेत्रों में चल रही सभी कॉरपोरेट गतिविधियों की पारदर्शी समीक्षा की जाए। यदि सरकार ने इस मामले को हल्के में लिया, तो आम आदमी पार्टी सड़क में जाकर इस मुद्दे को उठाएगी। छत्तीसगढ़ महतारी को लूटने वालों, जनता के अधिकारों का सौदा करने वालों और अफसरशाही को कॉरपोरेट दलाली में बदलने वालों को जनता कभी माफ नहीं करेगी।
दुर्ग।
शहर में कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से मध्य, दक्षिण, पूर्वी, पश्चिम एवं उत्तर—सभी ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों की महत्वपूर्ण बैठकें क्रमशः संपन्न हुईं। इन बैठकों ने न केवल संगठनात्मक सक्रियता का संदेश दिया, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति की स्पष्ट झलक भी प्रस्तुत की।
मध्य ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की बैठक ब्लॉक अध्यक्ष श्री अल्ताफ अहमद की अध्यक्षता में आयोजित हुई, जिसमें प्रभारी श्रीमती सीमा वर्मा एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री धीरज बाकलीवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसी क्रम में दक्षिण ब्लॉक की बैठक श्री गुरदीप सिंह भाटिया, पूर्वी ब्लॉक की बैठक श्री मनीष बघेल, पश्चिम ब्लॉक की बैठक श्री आनंद कपूर ताम्रकार तथा उत्तर ब्लॉक की बैठक श्री देवीश्री साहू की अध्यक्षता में संपन्न हुईं। सभी बैठकों में प्रभारी सीमा वर्मा और जिला अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल की सक्रिय मौजूदगी ने संगठन को एकजुटता का स्पष्ट संदेश दिया।
इन बैठकों की सबसे खास बात यह रही कि हर ब्लॉक में वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। अनुभवी नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच संवाद ने बैठकों को न केवल सार्थक बनाया, बल्कि संगठनात्मक मजबूती की दिशा में ठोस आधार भी तैयार किया।
सूत्रों के अनुसार, बैठकों में बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, आमजन से सीधा संवाद बढ़ाने, और स्थानीय मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, कार्यकर्ताओं को आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए तैयार रहने और आपसी समन्वय को मजबूत करने के निर्देश भी दिए गए।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो इन बैठकों को कांग्रेस के “संगठन सुदृढ़ीकरण अभियान” का हिस्सा माना जा रहा है। जिस तरह पांचों ब्लॉकों में एकसाथ बैठकें आयोजित की गईं, उससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी अब बिखरी हुई गतिविधियों के बजाय समन्वित और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की रणनीति पर काम कर रही है।
हालांकि, इन बैठकों के बाद सबसे बड़ा सवाल यह भी उठता है कि क्या यह संगठनात्मक सक्रियता जमीनी स्तर पर चुनावी परिणामों में तब्दील हो पाएगी। क्योंकि दुर्ग की राजनीति में कांग्रेस को पिछले कुछ समय से आंतरिक गुटबाजी और निष्क्रियता के आरोपों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में यह बैठकों की श्रृंखला पार्टी के लिए एक अवसर भी है और परीक्षा भी।
निष्कर्ष:
पांचों ब्लॉकों की सफल बैठकों ने कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक ऊर्जा का संचार जरूर किया है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि यह ऊर्जा जनसमर्थन में कितनी प्रभावी ढंग से परिवर्तित हो पाती है।
दुर्ग / शौर्यपथ।
दुर्ग विधानसभा के मिलपारा वार्ड क्रमांक 38 में इन दिनों स्थानीय राजनीति गरमाई हुई है। वार्ड पार्षद रामचंद्र सेन पर लगातार भेदभाव, निष्क्रियता और जनता से दूरी के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन अब मामला केवल वार्ड की समस्याओं तक सीमित नहीं रहा—बल्कि सीधे प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की छवि तक जुड़ता नजर आ रहा है।
वार्ड के कई मोहल्लों से लगातार यह शिकायत सामने आती रही है कि पार्षद न तो नियमित रूप से क्षेत्र में दिखाई देते हैं और न ही सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है। निचले स्तर की सफाई व्यवस्था और जनसमस्याओं की अनदेखी ने पहले ही वार्डवासियों में असंतोष का माहौल बना रखा है। ऐसे में जब मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र के वार्डों का दौरा कर जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की पहल की गई, तो वार्ड क्रमांक 38 के लोगों को भी उम्मीद जगी।
“इंतजार करता रहा मोहल्ला, पर नहीं पहुंचे मंत्री”
जानकारी के अनुसार, मां संकट हरनी मंदिर लाइन (बरपेड चौक) क्षेत्र के लोग मंत्री के स्वागत और अपनी समस्याएं बताने के लिए एकत्रित हुए थे। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पार्षद रामचंद्र सेन मंत्री को उस इलाके में लेकर ही नहीं पहुंचे, जहां उनके खिलाफ सबसे ज्यादा आक्रोश था। नतीजतन, मोहल्लेवासी लंबे समय तक इंतजार करते रहे और बाद में उन्हें पता चला कि मंत्री का दौरा महज 10-15 मिनट में समाप्त कर दिया गया।
“दौरे को सीमित कर क्या छिपाना चाहते हैं पार्षद?”
स्थानीय चर्चाओं में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या पार्षद ने जानबूझकर मंत्री का दौरा उन इलाकों तक सीमित रखा, जहां विरोध कम था? क्या यह उनकी निष्क्रियता और जनता के आक्रोश को छिपाने की कोशिश थी?
चुनाव के दौरान घंटों वार्ड में घूम-घूमकर समर्थन मांगने वाले पार्षद पर अब आरोप है कि जीत के बाद वे जनता से दूर हो गए हैं। ऐसे में मंत्री के दौरे को भी सीमित कर देना कई सवाल खड़े करता है।
मंत्री की पहल पर “स्थानीय बाधा”?
गौरतलब है कि मंत्री गजेंद्र यादव लगातार अपने क्षेत्र में जनसमस्याओं को समझने और उनका समाधान करने के लिए सक्रिय नजर आ रहे हैं। लेकिन वार्ड 38 की घटना ने यह संकेत दिया है कि जमीनी स्तर पर कुछ जनप्रतिनिधि ही इस प्रक्रिया में बाधा बन रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मंत्री तक वास्तविक स्थिति नहीं पहुंचने दी जाएगी, तो इससे न केवल विकास कार्य प्रभावित होंगे बल्कि उनकी जन-छवि पर भी अनावश्यक सवाल खड़े हो सकते हैं।
जनता में बढ़ता असंतोष, जवाबदेही की मांग
वार्ड के रहवासियों में अब यह मांग तेज हो रही है कि पार्षद की कार्यप्रणाली की समीक्षा हो और मंत्री स्वयं बिना स्थानीय फिल्टर के सीधे जनता से संवाद करें।
फिलहाल, मिलपारा वार्ड में एक ही चर्चा जोरों पर है—
“क्या पार्षद की निष्क्रियता मंत्री की सक्रियता पर भारी पड़ रही है?”
अब देखना होगा कि इस पूरे घटनाक्रम पर पार्षद रामचंद्र सेन और मंत्री गजेंद्र यादव की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, और क्या वार्ड 38 की जनता को उनके सवालों का जवाब मिल पाता है या नहीं।
महिला एवं बाल विकास विभाग भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया
भाजपा सरकार कमीशनखोरी में लगी, बिना कमीशन के काम नहीं होता
रायपुर/शौर्यपथ (राजनितिक)/ पूरी की पूरी भाजपा सरकार कमीशनखोरी में लगी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि साय सरकार में कोई ऐसा विभाग नहीं है जहां बिना कमीशन के काम हो जाए। सरकार का महिला एवं बाल विकास विभाग तो भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को छोटी साड़ी देकर सरकार ने भ्रष्टाचार की इंतहा को पार कर दिया। सरकार ने बहनों का चीरहरण घोटाला कर दिया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को 6.3 मीटर की जगह 5 मीटर और 4.5 मीटर से भी कम लंबाई और चौड़ाई एवं घाटिया साड़ियां महिला एवं बाल विकास विभाग में वितरण किया गया है। साड़ियों के लंबाई और चौड़ाई में कम होने के कारण महिलाएं साड़ी का उपयोग नहीं कर पा रही। जो साड़ी हथकरघा के बुनकरों से 500 रू. में लेना था वही साड़ी गुजरात से 100 रू. में खरीद कर 500 रू. की बिलिंग करवा ली गयी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग में एक महिला मंत्री के होते हुए महिलाओं के साथ उनके अधिकार पर डाका डाला जा रहा है और महिला मंत्री कमीशन-कमीशन खेल रही हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग में यह पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले भी कई भ्रष्टाचार सामने आए हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में 40 करोड़ से अधिक की पोषण सामग्री खरीद में अनियमितता की गयी तथा सामूहिक कन्या विवाह योजना में बिना टेंडर वर्क आर्डर के काम दे दिया गया एवं प्रदेश के लगभग 2899 आंगनबाड़ी केंद्रों में 16 करोड़ की लागत से टीवी और आरओ यूनिट की खरीद में नियमों की अनदेखी की गई है, इसमें केंद्रीकृत टेंडर के बजाय टुकड़ों में खरीद कर भ्रष्टाचार किया गया है। यही नहीं सुचिता योजना के तहत सेनेटरी पैड जैसे समान की खरीदी पर भ्रष्टाचार किया गया, पूरा विभाग भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आंगनवाड़ी के कार्यकर्ता और सहायिकाओं को जो घटिया गुणवत्ताहीन साड़ियां बांटी गई है, वह साड़ियां महिला एवं बाल विकास विभाग वापस ले और साथ ही आंगनवाड़ी के बहनों को अच्छी क्वालिटी का साड़ी प्रदान करें। 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए जो साड़ी खरीदी गई थी वह साड़ी महिला एवं बाल विकास विभाग के मंत्री जो स्वयं महिला है उसको देखे कैसे उस साड़ी को लोग पहनेंगे? महिला एवं बाल विकास विभाग में बार-बार ऐसा भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी का खेल सामने आने के बाद मंत्री अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार कर इस्तीफा दे।
बाकलीवाल की ‘नई कांग्रेस’ की मुहिम को झटका? निष्क्रिय और विवादित चेहरों की एंट्री से कार्यकर्ताओं में असंतोष
दुर्ग / शौर्यपथ / विशेष रिपोर्ट
दुर्ग शहर कांग्रेस में चार दशक तक वोरा परिवार के वर्चस्व के बाद जब प्रदेश नेतृत्व ने बड़ा फैसला लेते हुए संगठन की कमान धीरज बाकलीवाल को सौंपी, तब कार्यकर्ताओं के बीच एक नई ऊर्जा और बदलाव की उम्मीद जगी थी। लंबे समय से उठ रहे “परिवारवाद और अवसरवाद” के आरोपों के बीच यह बदलाव कांग्रेस के लिए एक नई शुरुआत माना गया।
धीरज बाकलीवाल ने अध्यक्ष पद संभालते ही जिस तरह जमीनी और सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिला कांग्रेस कमेटी में जगह दी, उसने न केवल संगठन में नई जान फूंकी, बल्कि वर्षों से उपेक्षित कार्यकर्ताओं को भी एक मंच दिया। इस फैसले की शहरभर में सराहना हुई और इसे कांग्रेस के पुनरुत्थान की दिशा में अहम कदम माना गया।
लेकिन…
यह “नई सोच” ब्लॉक स्तर तक पहुंचते-पहुंचते कमजोर पड़ती नजर आ रही है।
? दक्षिण ब्लॉक की सूची: बदलाव या पुनरावृत्ति?
हाल ही में घोषित दुर्ग शहर दक्षिणी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी सूची ने एक बार फिर संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूची सामने आते ही कांग्रेसी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।
आरोप है कि—
कई ऐसे नाम शामिल किए गए हैं जो लंबे समय से निष्क्रिय रहे हैं
कुछ पदाधिकारी विवादित छवि के माने जाते हैं
और कुछ ऐसे चेहरे भी हैं जिनकी जनाधार क्षमता पर ही सवाल खड़े हैं
यहां तक कि संगठन के भीतर ही यह चर्चा है कि कुछ नाम ऐसे हैं जो “अपने घर या मोहल्ले के चार वोट तक कांग्रेस के पक्ष में नहीं ला सकते।”
? कार्यकर्ताओं में निराशा, सवालों की भरमार
जिस जोश और उम्मीद के साथ जिला स्तर पर नई टीम का गठन हुआ था, वह ब्लॉक स्तर पर आते-आते फीका पड़ता दिखाई दे रहा है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि अगर ब्लॉक स्तर पर ही “पुरानी और निष्क्रिय सोच” हावी रही, तो संगठन की मजबूती केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।
कई कार्यकर्ता इसे “अवसरवाद की वापसी” भी बता रहे हैं, जहां सक्रियता और संघर्ष की बजाय समीकरण और व्यक्तिगत हित हावी हो रहे हैं।
? क्या बाकलीवाल की रणनीति को लगेगा झटका?
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो धीरज बाकलीवाल ने जिस साहस के साथ संगठन में नई शुरुआत की थी, उसे जमीनी स्तर पर लागू करना सबसे बड़ी चुनौती है।
अगर ब्लॉक इकाइयों में पुराने और निष्क्रिय चेहरों को ही तवज्जो मिलती रही, तो यह न केवल संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि आगामी चुनावों में कांग्रेस की स्थिति को भी कमजोर कर सकता है।
? आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
? क्या दक्षिण ब्लॉक के पदाधिकारी संगठन को मजबूत करने के लिए काम करेंगे?
? या फिर यह नियुक्तियां केवल “पद और प्रभाव” तक सीमित रह जाएंगी?
दुर्ग कांग्रेस के भीतर उठती यह असंतोष की लहर आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक रूप ले सकती है। फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संगठन इन आलोचनाओं को गंभीरता से लेगा या फिर “पुरानी राह” पर ही आगे बढ़ेगा।
(विशेष टिप्पणी):
दुर्ग कांग्रेस के लिए यह समय आत्ममंथन का है—क्योंकि बदलाव केवल चेहरे बदलने से नहीं, सोच बदलने से आता है।
? दुर्ग / शौर्यपथ
भारतीय जनता पार्टी के 6 अप्रैल स्थापना दिवस को लेकर दुर्ग जिला भाजपा कार्यालय में जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण तैयारी बैठक संपन्न हुई। बैठक में कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिला संगठन प्रभारी नंदन जैन, विधायक ललित चंद्राकर सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।
बैठक में स्थापना दिवस एवं 14 अप्रैल को बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के आयोजन की रूपरेखा तय करते हुए विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि स्थापना दिवस को पूरे उत्साह और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए यह “मां के जन्म उत्सव” के समान है, जिसे हर बूथ तक पहुंचाकर ऐतिहासिक बनाना है।
प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाएं और प्रत्येक बूथ पर भाजपा का ध्वज फहराकर माहौल को पूर्णतः भाजपा-मय बनाएं।
जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कौशिक ने बताया कि 6 अप्रैल को ध्वजारोहण, मिष्ठान वितरण, सोशल मीडिया अभियान, बूथ स्तर पर कार्यक्रम, तथा 7 से 12 अप्रैल तक “गांव-बस्ती चलो अभियान” चलाया जाएगा। वहीं 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती पर स्वच्छता अभियान, दीप उत्सव और संगोष्ठी जैसे कार्यक्रम आयोजित होंगे।
बैठक में महापौर अलका बाघमार, जिला पंचायत अध्यक्ष सरस्वती बंजारे सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
? कुल मिलाकर भाजपा ने स्थापना दिवस को बूथ से लेकर जिला स्तर तक व्यापक रूप से मनाने की रणनीति तय कर दी है।
भिलाई/दुर्ग | विशेष राजनीतिक विश्लेषण
भिलाई नगर निगम चुनाव में भले अभी लगभग छह महीने का समय शेष हो, लेकिन सियासी सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। आरक्षण के बाद महापौर पद के लिए पिछड़ा वर्ग से प्रत्याशी तय होना है, और इसी के साथ भारतीय जनता पार्टी के भीतर नामों की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। इन नामों में सबसे प्रमुख नाम महेश वर्मा का उभरकर सामने आ रहा है—जो वर्तमान में भिलाई नगर निगम के पार्षद हैं और लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण संगठन के भीतर एक मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं।
महेश वर्मा: अनुभव बनाम समीकरण
महेश वर्मा का नाम केवल “सांसद विजय बघेल के करीबी” होने के कारण ही नहीं, बल्कि
नगर निगम की राजनीति में सक्रिय भूमिका
स्थानीय मुद्दों की गहरी समझ
संगठनात्मक अनुभव और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव
के चलते भी प्रमुखता से लिया जा रहा है।
यही वजह है कि उन्हें एक ग्राउंडेड और अनुभवी चेहरा माना जा रहा है, जो महापौर पद की जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हो सकते हैं।
दुर्ग का ‘रिपोर्ट कार्ड’ बना सियासी मुद्दा
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद हुए नगरीय निकाय चुनाव में विजय बघेल की पसंद को प्राथमिकता मिली थी। लेकिन दुर्ग की महापौर अलका बाघमार की कार्यप्रणाली पिछले एक साल में कई विवादों में घिरी रही।
मुख्य आरोपों में शामिल हैं:
गरीबों के ठेले-गुमटी पर सख्ती, लेकिन अमीरों के अतिक्रमण पर नरमी
गणेश मंदिर के सामने कथित अवैध निर्माण पर चुप्पी
बस स्टैंड की जमीन पर अनुबंध समाप्ति के बाद भी कब्जा
शनिवार बाजार और चौक-चौराहों पर लगातार बढ़ता अतिक्रमण
सफाई व्यवस्था की बदहाली और पेयजल संकट
इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई न होने से जनता ही नहीं, पार्टी के पार्षदों में भी असंतोष बढ़ा है।
जब अपनी ही पार्टी ने उठाए सवाल
हाल ही में सामान्य सभा में जो हुआ, उसने इस असंतोष को सार्वजनिक कर दिया।
सभापति ने खुलकर कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए
कई भाजपा पार्षदों ने इसे पार्टी की साख से जोड़ते हुए नाराज़गी जताई
यह घटनाक्रम बताता है कि मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संकट बन चुका है।
भिलाई में प्रत्याशी चयन पर असर तय
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दुर्ग के अनुभव का असर भिलाई नगर निगम चुनाव में प्रत्याशी चयन पर पड़ेगा?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि:
संगठन इस बार सिर्फ “पसंद” नहीं, “परफॉर्मेंस” को भी तवज्जो देगा
महेश वर्मा का नाम मजबूत जरूर है, लेकिन अंतिम निर्णय में कई अन्य समीकरण भी प्रभाव डालेंगे
इसी बीच, वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की धर्मपत्नी के भी दावेदारी पेश करने की चर्चाएं हैं, जिससे मुकाबला और रोचक हो सकता है।
विजय बघेल की भूमिका पर नजर
दुर्ग में महापौर चयन में अहम भूमिका निभाने वाले सांसद विजय बघेल की राय इस बार भी महत्वपूर्ण रहेगी।
लेकिन पार्टी के भीतर उठ रहे सवाल यह संकेत दे रहे हैं कि
“क्या इस बार उनकी पसंद को उतनी ही प्राथमिकता मिलेगी?”
यदि संगठन महेश वर्मा के नाम को दरकिनार करता है, तो इसे सीधे तौर पर
दुर्ग महापौर के प्रदर्शन और अंदरूनी नाराज़गी से जोड़कर देखा जाएगा।
कांग्रेस नहीं, भाजपा में ज्यादा हलचल
आम तौर पर चुनावी हलचल कांग्रेस में ज्यादा देखने को मिलती है, लेकिन इस बार स्थिति उलट दिख रही है।
भाजपा के भीतर ही खींचतान, असंतोष और रणनीतिक मंथन तेज हो गया है।
निष्कर्ष:
भिलाई नगर निगम चुनाव अब सिर्फ एक स्थानीय चुनाव नहीं, बल्कि
भाजपा के लिए “आंतरिक संतुलन और विश्वसनीयता” की परीक्षा बनता जा रहा है।
आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि—
? पार्टी अनुभव और जमीनी पकड़ वाले चेहरों को आगे लाती है
या
? फिर राजनीतिक समीकरणों को प्राथमिकता देती है
लेकिन इतना तय है कि
दुर्ग की सियासत ने भिलाई की रणनीति को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।
रायपुर/शौर्यपथ / रसोई गैस के लिए जनता परेशान और भाजपा के नेता मोदी की चाटुकारिता में धृतराष्ट्र बने हुए है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि प्रदेश की कोई ऐसी एजेंसी नहीं है जहां सुचारू रूप से गैस मिल रहा हो। भाजपा के हर बड़े-छोटे नेता बड़ी बेशर्मीपूर्वक गैस के संकट को नकार रहे है। भाजपा नेता, जनता के जले पर नमक छिड़क रहे है। एक तरफ सरकार जनता को गैस नहीं दिला पा रही, दूसरी ओर झूठ बोल कर जनता का मजाक बना रहे है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि गैस एजेंसियों में लगी कतारें यदि भाजपा नेताओं को नहीं दिख रही तो उनको अपने नजर और नजरिये दोनों का इलाज कराने की जरूरत है। जब कोई राजनैतिक दल जनता की समस्या से इस प्रकार मुंह मोड़कर जनता को झूठा ठहराने लगती है तो उसकी विदाई तय हो जाती है। कुछ ऐसी ही स्थिति भाजपा की हो गयी है।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि लोगों के घर में गैस नहीं होने के कारण चूल्हे नहीं जल रहे और भाजपा कहती है अफवाहों पर ध्यान मत दे। सरकार ने अचानक से कमर्शियल गैस की सप्लाई क्यों बंद कर दिया? अचानक से कमर्शियल गैस की सप्लाई अघोषित तौर पर रोक देने से घरेलू गैस सिलेंडरों का दुरुपयोग हो रहा कालाबाजारी होगी और होटल व्यवसाईयों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा, जिससे कुक्ड फूड के दाम भी प्रभावित हो रहे है। प्रदेश के लगभग आधे रेस्टोरेंट गैस की किल्लत के कारण बंद होने की स्थिति में है।
रायपुर/शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि प्रीमियम पेट्रोल के दाम 2.5 रू. और औद्योगिक डीजल के दाम 22 रू. जनता पर अत्याचार है। औद्योगिक डीजल के दाम बढ़ाने से औद्योगिक उत्पादों के रेट बढ़ेगे और महंगाई और बढ़ोगी। सरकार ने तथा पेट्रोलियम कंपनियो पिछले 8 सालो में पेट्रोलियम पदार्थो पर बेतहाशा मुनाफा कमाया है। पेट्रोलियम कंपनिया 32 लाख करोड़ रू. क्रूड आयल के दाम जब सस्ते हुये थे, तब अतिरिक्त कमाई की थी। पूरी दुनिया में जब क्रूड आयल का दाम 116 रू. से घटकर 75 रू. हुआ था, तब भी पेट्रोल डीजल के दाम कम नहीं किया गया था। आज जब वैश्विक संकट की स्थिति है तो केन्द्र सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों को अपने जमा किये गये अतिरिक्त मुनाफे से जनता को राहत दे।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि ने कहा कि केन्द्र सरकार पेट्रोल डीजल पर बेतहाशा एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है। करोनाकाल में मोदी सरकार ने युक्तीयुक्त करण के नाम पर जो एक्साईज ड्यूटी बढ़ाकर बेतहाशा कमाई की थी, अब समय आ गया है कि जनता को उस कमाई से राहत दिया जाये।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि ने कहा कि अभी केवल प्रीमियम पेट्रोल और औद्योगिक डीजल के दाम बढ़ाये गये है। लेकिन सरकार को जो रवैया है वह ठीक नही है। सरकार बहुत जल्दी सामान्य पेट्रोल-डीजल के भी रेट बढ़ायेगी। रसोई गैस के कारण जनता परेशान तो है आने वाले समय में पेट्रोल भी जनता की परेशानी का कारण बनेगी।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
