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दुर्ग/भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट से कथित रूप से पिछले 40 वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के लोहे की चोरी के आरोपों के बीच एक नया विवाद सामने आया है। इस बार चर्चा का केंद्र कोई राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक वरिष्ठ पत्रकार के सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकाशित और बाद में हटाई गई पोस्ट बन गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब केवल निष्पक्ष और विधिसम्मत जांच से ही सामने आ सकता है।
भोपाल से प्रकाशित बताए जाने वाले साप्ताहिक समाचार पत्र 'जगत विजन' की एडिटर के रूप में अपना परिचय देने वाली विजया पाठक ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में भिलाई के प्रतिष्ठित व्यापारी इन्द्रजीत सिंह उर्फ छोटू का नाम लेते हुए उन पर वर्षों से कथित लोहा चोरी सिंडिकेट संचालित करने सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। पोस्ट में पुलिस, भिलाई स्टील प्लांट के अधिकारियों और अन्य प्रभावशाली लोगों की कथित मिलीभगत तक का उल्लेख किया गया था।
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर vijaya pathak की पोस्ट पर अभी भी समाचार लिखे जाने तक देखी जा सकती है। पोस्ट को शौर्यपथ की टीम ने उसका स्क्रीनशॉट और वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर ली थी, जिससे यह पुष्टि होती है कि उक्त सामग्री वास्तव में संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रकाशित हुई है।
रिकेश सेन लगातार उठा रहे हैं 10 हजार करोड़ के कथित घोटाले का मुद्दा
उल्लेखनीय है कि वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन पिछले कई दिनों से अपने सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए भिलाई स्टील प्लांट में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के कथित लोहा चोरी प्रकरण को लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने विभिन्न पोस्ट में बड़े खुलासे, जिम्मेदार लोगों के नाम सामने आने, केंद्रीय एजेंसियों को कार्रवाई के निर्देश दिलाने तथा विधानसभा में मामला उठाने जैसी बातें कही हैं।
हालांकि अब तक विधायक ने किसी भी व्यक्ति विशेष का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं लिया है। राजनीतिक और संवैधानिक मर्यादाओं को देखते हुए उनका यह रुख समझा जा सकता है, लेकिन लगातार संकेतों और दावों के बीच नाम सामने न आने से जनमानस में संशय की स्थिति भी बनी हुई है।
मुख्यमंत्री ने भी नहीं दिया था स्पष्ट जवाब
इसी मुद्दे पर जब प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मीडिया ने सवाल किया था, तब उन्होंने इस विषय पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की थी। ऐसे में मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
पोस्ट के बाद उठे कई महत्वपूर्ण सवाल
सोशल मीडिया पर हुए पोस्ट के बाद हिसार में एक बार फिर चर्चा का विषय है कि क्या मामले की जांच की दिशा अब आगे बढ़ेगी या फिर सोशल मीडिया में हुए पोस्ट को हटाने का दबाव बनाया जाएगा?
यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और उसके संभावित दुरुपयोग पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। बिना न्यायिक निष्कर्ष या आधिकारिक पुष्टि के किसी व्यक्ति का नाम सार्वजनिक कर देना उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है। वहीं यदि आरोप सही हैं, तो संबंधित एजेंसियों द्वारा निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है।
दोनों परिस्थितियों में जांच जरूरी
यह मामला अब केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रह गया है। निष्पक्षता की दृष्टि से दोनों संभावनाओं की समान रूप से जांच होनी चाहिए—
यदि पोस्ट में लगाए गए आरोप प्रमाणित और तथ्यों पर आधारित हैं, तो पूरे कथित लोहा चोरी नेटवर्क की गहन जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
यदि आरोप निराधार या अपुष्ट थे, तो किसी प्रतिष्ठित नागरिक की छवि को नुकसान पहुंचाने के प्रयास की भी विधिसम्मत जांच होनी चाहिए तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब निगाहें आगे की कार्रवाई पर
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इन्द्रजीत सिंह उर्फ छोटू इस मामले में कानूनी कार्रवाई करते हुए शिकायत दर्ज कराएंगे और पोस्ट के पीछे के तथ्यों की जांच की मांग करेंगे, अथवा इस पूरे विवाद को नजरअंदाज करने का रास्ता अपनाएंगे।
वहीं दूसरी ओर, भिलाई स्टील प्लांट में कथित 10 हजार करोड़ रुपये के लोहा चोरी प्रकरण को लगातार उठा रहे वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन से भी अब यह अपेक्षा बढ़ गई है कि यदि उनके पास इस संबंध में ठोस तथ्य और साक्ष्य हैं तो उन्हें उचित मंच पर सार्वजनिक करें, ताकि आरोप, संकेत और अटकलों की जगह सत्य सामने आ सके।
(नोट : यह समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सोशल मीडिया पोस्ट, उसके स्क्रीनशॉट तथा विभिन्न सार्वजनिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें वर्णित आरोप संबंधित पोस्ट और सार्वजनिक दावों का उल्लेख हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध दोष सिद्ध होना शेष है।)
ढाई वर्ष के कार्यकाल में जनता, जनप्रतिनिधियों, मीडिया और पुलिस परिवार के सहयोग के लिए जताया आभार, कहा— दुर्ग की यादें रहेंगी हमेशा साथ
दुर्ग/शौर्यपथ।
दुर्ग शहर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) सुखनंदन राठौर का लगभग ढाई वर्ष का कार्यकाल भावनात्मक विदाई के साथ संपन्न हो गया। उनका स्थानांतरण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगदलपुर के रूप में होने के बाद उन्होंने दुर्ग शहर के प्रभार से स्वयं को मुक्त करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से एक भावुक संदेश जारी किया, जिसने आम नागरिकों, पुलिस अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और मीडिया जगत को भावुक कर दिया।
अपने संदेश में एएसपी राठौर ने कहा कि मार्च 2024 में दुर्ग जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) के रूप में शुरू हुआ उनका प्रशासनिक सफर अब सुनहरी यादों के साथ समाप्त हो रहा है। इस दौरान उन्हें जनता, जनप्रतिनिधियों, मीडिया के साथियों, समाजसेवियों, विभिन्न संस्थाओं, अधिकारियों, कर्मचारियों, मित्रों, शुभचिंतकों एवं सहयोगियों से भरपूर स्नेह, विश्वास और सहयोग प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग और विश्वास के कारण ही वे अपने दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन कर सके। इसके लिए उन्होंने सभी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि स्थानांतरण के बाद भी दुर्गवासियों का स्नेह और अपनापन उन्हें इसी प्रकार मिलता रहेगा।
एएसपी राठौर ने अपने संदेश में दुर्ग की धार्मिक आस्था का भी उल्लेख करते हुए कहा कि दुर्ग चंडी माई एवं सेक्टर-9 हनुमान जी की कृपा सदैव उन पर बनी रहे। उन्होंने कहा कि दुर्ग और भिलाई से जुड़ी मधुर स्मृतियाँ उनके मन-मस्तिष्क में हमेशा जीवित रहेंगी और जीवनभर उन्हें प्रेरित करती रहेंगी।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने सभी नागरिकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए भावुक शब्दों में लिखा—
"अलविदा दुर्ग... अलविदा भिलाई।"
एएसपी सुखनंदन राठौर के इस विदाई संदेश पर बड़ी संख्या में नागरिकों, पुलिस अधिकारियों, सामाजिक संगठनों और मीडिया प्रतिनिधियों ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए जगदलपुर में भी सफल एवं जनहितकारी कार्यकाल की कामना की।
दुर्ग / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा इस वर्ष का भव्य सावन मेला छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक सहभागिता का अनूठा उत्सव बनने जा रहा है। महापौर अलका बाघमार के मार्गदर्शन में सांस्कृतिक पर्यटन, मनोरंजन एवं विरासत संरक्षण समिति की प्रभारी हर्षिका संभव जैन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मेले की तैयारियों को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि इस बार सावन मेले को पहले से अधिक आकर्षक, व्यवस्थित और जनभागीदारी से परिपूर्ण बनाया जाएगा।
समिति ने निर्णय लिया कि मेले में केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। स्थानीय कलाकारों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक एवं पारंपरिक प्रतियोगिताओं का मंच उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए कार्यक्रमों की तिथियां, आयोजन स्थल, पंजीयन प्रक्रिया और व्यवस्थाओं की विस्तृत कार्ययोजना शीघ्र तैयार की जाएगी।
लोक संस्कृति और पारंपरिक खेल होंगे मुख्य आकर्षण
सावन मेले में पारंपरिक खेलों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिनमें फुगड़ी, रस्सीकूद, रस्साकशी, कंची दौड़, मटका फोड़ तथा दौड़ प्रतियोगिताएं शामिल रहेंगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए अरसा, ठेठरी-खुर्मी, फरा और चीला जैसे पारंपरिक व्यंजनों की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
मेले में छत्तीसगढ़ी वेशभूषा प्रतियोगिता, छत्तीसगढ़ी मॉडलिंग, लोक गायन प्रतियोगिता तथा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। समिति का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है।
'सावन मेला हमारी संस्कृति का उत्सव है'
समिति की प्रभारी हर्षिका संभव जैन ने कहा कि सावन मेला केवल मनोरंजन का आयोजन नहीं, बल्कि हमारी लोक संस्कृति, परंपराओं और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सभी समिति सदस्यों से समन्वय, सक्रिय सहभागिता और बेहतर व्यवस्थाओं के साथ आयोजन को सफल एवं यादगार बनाने का आह्वान किया।
बैठक में पार्षद विद्यावती सिंह, मनीष कोठारी, युवराज कुंजाम, लोकेश्वरी ठाकुर, शरद निर्मलकर, रामचंद सेन, लिपिक लता यादव, विकल निर्मलकर सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी सदस्यों ने आयोजन को भव्य बनाने के लिए अपने सुझाव दिए तथा विभिन्न व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की।
भिलाईनगर / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम भिलाई की नवनियुक्त आयुक्त सुश्री सुरूचि सिंह ने शुक्रवार को निगम सभागार में शहर के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया प्रतिनिधियों के साथ पहली बार परिचयात्मक एवं सीधा संवाद स्थापित किया। इस संवाद में 50 से अधिक मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया और शहर के विकास, नागरिक सुविधाओं तथा निगम की कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर खुलकर चर्चा की।
आयुक्त ने कहा कि नगर निगम का मूल उद्देश्य नागरिकों को बेहतर, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेयजल, स्वच्छता, सड़क, जलनिकासी और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शहर के समग्र विकास के लिए प्रभावी कार्ययोजना पर काम किया जाएगा।
वर्षा में जलभराव वाले क्षेत्रों पर होगी त्वरित कार्रवाई
संवाद के दौरान आयुक्त ने कहा कि बारिश के दौरान जिन क्षेत्रों में जलभराव की समस्या सामने आ रही है, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्य कर नागरिकों को राहत पहुंचाई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों का नियमित निरीक्षण कर स्थायी समाधान तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
बीएसपी के साथ बेहतर समन्वय से सुधरेंगी नागरिक सुविधाएं
सुश्री सिंह ने बताया कि भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्यों को गति दी जाएगी। विशेष रूप से बीएसपी क्षेत्र की सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार के लिए बीएसपी प्रबंधन के साथ नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी।
हर सोमवार होगी जनसुनवाई, लंबित प्रकरणों का होगा त्वरित निराकरण
आयुक्त ने घोषणा की कि प्रत्येक सोमवार सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक निगम कार्यालय में नियमित जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, जहां नागरिकों की समस्याएं सीधे सुनी जाएंगी और उनके त्वरित समाधान का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि निगम में लंबित फाइलों की समीक्षा कर विलंब के कारणों का विश्लेषण किया जाएगा तथा सभी प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
100 प्रतिशत ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने का लक्ष्य
निगम की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली को शत-प्रतिशत लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे फाइलों के निस्तारण में गति आएगी और कार्यों की ऑनलाइन निगरानी भी संभव होगी।
राजस्व बढ़ाने के लिए कर वसूली और दुकानों की पारदर्शी नीलामी
नगर निगम की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए करों की समयबद्ध वसूली पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही निगम की दुकानों की पारदर्शी नीलामी कर राजस्व में वृद्धि के प्रयास किए जाएंगे, ताकि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की उपलब्धता बढ़ सके।
'मिशन क्लीन सिटी' में शामिल कराने की तैयारी
स्वच्छता को लेकर आयुक्त ने कहा कि भिलाई को 'मिशन क्लीन सिटी' में शामिल कराने के लिए आवश्यक प्रयास किए जा रहे हैं। इससे शासन से अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्राप्त होगी और शहर की सफाई व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।
नई पानी टंकियां, शहीद पार्क और संजय नगर तालाब भी प्राथमिकता में
आयुक्त ने बताया कि शहर की पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नई पानी टंकियों के निर्माण की योजना तैयार की जा रही है। इसके साथ ही शहीद पार्क सेक्टर-5 के बेहतर संचालन, राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) की योजनाओं को गति देने तथा संजय नगर तालाब के सौंदर्यीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
मॉल पार्किंग व्यवस्था होगी व्यवस्थित
शहर के प्रमुख मॉलों में पार्किंग शुल्क और पार्किंग व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी आयुक्त ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने कहा कि संबंधित पक्षों से चर्चा कर नागरिकों की सुविधा के अनुरूप व्यवस्थित और पारदर्शी पार्किंग व्यवस्था विकसित करने की दिशा में पहल की जाएगी।
मीडिया के सुझावों का होगा स्वागत
संवाद के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने जलभराव, स्वच्छता, पेयजल, कर वसूली, पार्किंग, बीएसपी क्षेत्र की समस्याओं सहित अनेक जनहित के मुद्दे उठाए। आयुक्त ने सभी प्रश्नों का तथ्यपरक एवं विस्तार से उत्तर देते हुए भरोसा दिलाया कि नगर निगम पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसहभागिता के साथ शहर के समग्र विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेगा।
उन्होंने कहा कि मीडिया और नगर निगम के बीच सकारात्मक समन्वय शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए नागरिकों तक विकास कार्यों की सही और समय पर जानकारी पहुंचाने के लिए संवाद की यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी।
दुर्ग । शौर्यपथ । पंचशील नगर स्थित चंद्रशेखर आज़ाद स्कूल में कुछ बच्चों की तबीयत बिगड़ने की घटना को लेकर पटरी पार मंडल अध्यक्ष मनमोहन शर्मा ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पूरे मामले की जानकारी दी और निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कथित रूप से एक छात्र द्वारा अन्य बच्चों को गोलियां दिए जाने के बाद कई बच्चों की तबीयत खराब हो गई। घटना की सूचना मिलते ही मनमोहन शर्मा ने तत्काल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को अवगत कराते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा वास्तविक तथ्यों को सामने लाने की मांग की।
मनमोहन शर्मा ने कहा कि जामुल हॉस्पिटल में भर्ती सभी बच्चों के उपचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि घटना के वास्तविक कारणों का शीघ्र पता लगाया जाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस दौरान मंडल उपाध्यक्ष बलराम यादव, कोषाध्यक्ष यशवंत चंद्राकर, महेंद्र यादव, चंद्रशेखर यादव एवं सुदीप शर्मा भी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में घटना की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की।
दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका, डॉग स्क्वाड और क्राइम ब्रांच जांच में जुटी
दुर्ग। पुलगांव थाना क्षेत्र में शुक्रवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब पुलगांव नाला किनारे जंगलनुमा क्षेत्र में एक 55 वर्षीय महिला का अर्धनग्न शव बरामद हुआ। मृतका की पहचान उरला निवासी भगवंतीन बाई (55 वर्ष) के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार, महिला गुरुवार से लापता थी। परिजनों ने शुक्रवार को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसी बीच पुलगांव नाला के पास जंगलनुमा इलाके में उसका शव मिलने की सूचना पुलिस को मिली।
सूचना मिलते ही पुलगांव थाना पुलिस, क्राइम ब्रांच और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची। घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया। साक्ष्य जुटाने के लिए डॉग स्क्वाड की भी मदद ली जा रही है।
महिला का शव अर्धनग्न अवस्था में मिलने से दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी किसी भी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है।
कोतवाली हत्याकांड में लाइन अटैच की कार्रवाई का फिर हो रहा उल्लेख, विभागीय जांच के बीच अगले प्रशासनिक निर्णय पर निगाहें
दुर्ग, शौर्यपथ। कुंदरापारा में हुए चर्चित गैंगवार और लेखराम कोठारी हत्याकांड के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली प्रशासनिक समीक्षा के दायरे में आ गई है। नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) हर्षित मेहर(आईपीएस) ने पद्मनाभपुर थाना प्रभारी प्रमोद रूसिया को कर्तव्य निर्वहन में कथित लापरवाही के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में घटना से पहले और बाद की पुलिस कार्रवाई से जुड़े कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
सीएसपी कार्यालय से जारी नोटिस के अनुसार, हत्या की सूचना समय पर वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई गई। साथ ही, थाना प्रभारी के तत्काल घटनास्थल पर नहीं पहुंचने के कारण घटनास्थल का निरीक्षण और शव को मर्च्युरी भेजने जैसी प्रारंभिक कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं करनी पड़ी। नोटिस में यह भी उल्लेख है कि गैंगवार के बाद अस्पताल ले जाए गए आरोपियों में से एक आरोपी लक्ष्मी चेलक पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया था, जिसे बाद में एसीसीयू टीम ने गिरफ्तार किया।
विभागीय नोटिस में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु 12 जुलाई की सुबह करीब 4 बजे हुई प्रारंभिक हिंसक झड़प को माना गया है। उल्लेख किया गया है कि दोनों पक्ष थाना पहुंचे थे, लेकिन तत्काल गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज करने के बजाय केवल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। विभाग का मानना है कि यदि उस समय उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाती और वरिष्ठ अधिकारियों को समय पर जानकारी दी जाती, तो बाद में हुई गंभीर घटना की संभावना कम हो सकती थी। यह विभागीय जांच का विषय है।
इसी घटनाक्रम के बीच वर्ष 2025 के संतोष आचार्य हत्याकांड का मामला भी पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। उस समय सिटी कोतवाली थाना प्रभारी तापेश्वर सिंह नेताम को प्रशासनिक जवाबदेही तय करते हुए तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर रक्षित केंद्र भेज दिया गया था। हालांकि, उसी मामले में कोतवाली पुलिस ने देर रात हुई घटना के चंद घंटो में ही 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था ।वही गिरफ्तारी के तीन से चार घंटो के भीतर ही कोतवाली प्रभारी के लाइन अटैच के आदेश तब शहर में चर्चा का विषय बना हुआ था . यहाँ यह बताना अत्यंत आवश्यक है कि गत नवरात्री में देर रात तक चली चुनरी यात्रा भी निर्विवाद रूप से सराहनीय चर्चा का विषय रही जिसके बाद तात्कालिक कोतवाली प्रभारी सहित नगर पुलिस अधीक्षक एवं जिले के कप्तान की आम जनता ने खुले मन से प्रशंसा की थी .
पुलिस विभाग के जानकारों का कहना है कि अलग-अलग मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई संबंधित परिस्थितियों, उपलब्ध तथ्यों और विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर तय की जाती है। ऐसे में वर्तमान मामले में भी अंतिम निर्णय विभागीय जांच और वरिष्ठ अधिकारियों के परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा।
फिलहाल पद्मनाभपुर थाना प्रभारी से कारण बताओ नोटिस का जवाब मांगा गया है। इसके बाद जांच प्रतिवेदन और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा। इस कारण पुलिस महकमे और शहरवासियों की निगाहें अब दुर्ग पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।
नोट: समाचार लिखे जाने तक वर्तमान में पद्मनाभपुर थाना प्रभारी के विरुद्ध केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उनके विरुद्ध किसी अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का निर्णय अभी विभागीय जांच पूर्ण होने के बाद ही लिया जाएगा।
सुबह की हिंसक झड़प पर नहीं हुई कड़ी कार्रवाई, शाम तक गैंगवार में गई लेखराम कोठारी की जान; पद्मनाभपुर टीआई प्रमोद रूसिया को कारण बताओ नोटिस
दुर्ग | शौर्यपथ
दुर्ग के पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र में 12 जुलाई को हुए खूनी गैंगवार और लेखराम कोठारी की हत्या मामले में पुलिस विभाग के भीतर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की शुरुआत हो गई है। नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) हर्षित मेहर IPS ने मामले में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर थाना प्रभारी प्रमोद रूसिया को कड़े शब्दों में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यदि समय रहते थाना प्रभारी ने अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन किया होता, तो संभवतः यह विवाद गैंगवार और हत्या तक नहीं पहुंचता।
सुबह 4 बजे मिला था विवाद का संकेत, लेकिन टीआई ने नहीं दिखाई गंभीरता
नोटिस के अनुसार, 12 जुलाई की सुबह करीब 4 बजे दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। दोनों पक्ष घायल अवस्था में पद्मनाभपुर थाने पहुंचे थे। यह गंभीर अपराध का मामला था, जिसमें तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए थी। लेकिन थाना प्रभारी ने केवल घायलों का मुलाहजा कराकर सामान्य प्रतिबंधात्मक कार्रवाई तक ही मामला सीमित रखा। इस ढिलाई से दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया और देर रात खूनी गैंगवार में बदल गया, जिसमें लेखराम कोठारी की हत्या हो गई।
हत्या की सूचना भी वरिष्ठ अधिकारी से छिपाई
सीएसपी द्वारा जारी नोटिस में यह भी उल्लेख है कि हत्या जैसी गंभीर घटना होने के बाद भी थाना प्रभारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारी CSP हर्षित मेहर IPS को तत्काल सूचना नहीं दी। कंट्रोल रूम और डायल-112 के माध्यम से जानकारी मिलने के बाद स्वयं CSP को घटनास्थल पहुंचना पड़ा।
CSP ने संभाली कमान, खुद कराया शव मर्चुरी शिफ्ट
नोटिस में कहा गया है कि घटनास्थल का निरीक्षण कर मृतक के शव को मर्चुरी भेजने और मौके को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी थाना प्रभारी की थी। लेकिन यह जिम्मेदारी भी उन्होंने नहीं निभाई। अंततः स्वयं CSP हर्षित मेहर IPS ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली, शव को मर्चुरी भिजवाया और घटनास्थल की निगरानी सुनिश्चित कराई।
पुलिस की ढिलाई से अस्पताल से फरार हुआ आरोपी
गैंगवार के बाद दोनों पक्षों के घायलों को अस्पताल भेजा गया था। इसी दौरान हत्या का आरोपी लक्ष्मी चेलक अस्पताल से फरार हो गया। नोटिस में इसे भी थाना प्रभारी की गंभीर लापरवाही बताया गया है। बाद में क्राइम ब्रांच/एसीसीयू टीम की सक्रियता से आरोपी को दोबारा गिरफ्तार किया गया। यदि आरोपी फरार रहते हुए कोई और वारदात कर देता, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होती—यह सवाल भी नोटिस में उठाया गया है।
चार गंभीर लापरवाहियां, जवाब मांगा
सीएसपी हर्षित मेहर IPS द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस में थाना प्रभारी की चार प्रमुख चूकें दर्ज की गई हैं—
हत्या की सूचना वरिष्ठ अधिकारी को समय पर नहीं देना।
घटनास्थल का निरीक्षण एवं शव को मर्चुरी भेजने जैसी जिम्मेदारी नहीं निभाना।
आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी में विफल रहना, जिससे एक आरोपी अस्पताल से फरार हो गया।
सुबह हुई हिंसक झड़प के बाद समय रहते एफआईआर और प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं करना तथा वरिष्ठ अधिकारियों को सही रिपोर्टिंग नहीं करना।
सख्त पुलिसिंग का संदेश
इस कार्रवाई से स्पष्ट संकेत मिला है कि CSP हर्षित मेहर IPS कानून-व्यवस्था के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने तथ्यों के आधार पर थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जवाब तलब किया है। यह कार्रवाई पुलिस महकमे में जवाबदेही और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अब विभागीय कार्रवाई पर नजर
पद्मनाभपुर गैंगवार और लेखराम कोठारी हत्याकांड में जारी इस कारण बताओ नोटिस के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि थाना प्रभारी के जवाब के आधार पर पुलिस विभाग क्या विभागीय कार्रवाई करता है। यह मामला केवल एक हत्या का नहीं, बल्कि समय पर प्रभावी पुलिस कार्रवाई नहीं होने के संभावित परिणामों का भी गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है।
निशांत ताम्रकर (क्राइम रिपोर्ट)
दुर्ग / शौर्यपथ / पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र के कुंदरापारा में रविवार रात करीब 9:30 बजे हुई सनसनीखेज हत्या ने एक ओर शहर की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए, तो दूसरी ओर दुर्ग पुलिस ने दावा किया कि महज 12 घंटे के भीतर वारदात में शामिल एक ही परिवार के छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के अनुसार, जैतखाम के पास करीब तीन वर्ष पुरानी रंजिश के चलते अक्षय कोठारी, उनके भाई लेखराम कोठारी, गोपा उर्फ सूर्यदेव कोठारी और उनके चाचा बल्ला उर्फ रोशन कोठारी पर लाठी, डंडे, ईंट और चाकू से हमला किया गया। गंभीर रूप से घायल लेखराम कोठारी की मौत हो गई, जबकि अन्य घायलों का अस्पताल में उपचार जारी है।
पुलिस का कहना है कि सूचना मिलते ही एफएसएल टीम को बुलाकर वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए और घेराबंदी कर लक्ष्मी चेलक, आकाश चेलक, सत्यम चेलक, खेलू चेलक, प्रकाश चेलक तथा देवचंद चेलक को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त ईंट, डंडे, चाकू और वारदात के समय पहने गए कपड़े भी जब्त किए गए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने पुरानी रंजिश के चलते हत्या करना स्वीकार किया है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर दिया गया।
मृतक
स्मार्ट पुलिसिंग पर उठे सवाल
हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन वारदात ने शहर की तथाकथित "स्मार्ट पुलिसिंग" पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रात करीब साढ़े नौ बजे घनी आबादी वाले कुंदरापारा में दो पक्षों के बीच लंबे समय तक खूनी संघर्ष चलता रहा। स्थानीय लोगों के सामने एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला हुआ, लेकिन इलाके में समय रहते पुलिस की मौजूदगी नहीं दिखी।
इलाके के लोगों में भय का माहौल भी चर्चा का विषय बना रहा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अपराधियों के डर से लोग पुलिस को सूचना देने से भी हिचकते हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठे। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई करते हुए वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए गए और 12 घंटे के भीतर सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस हत्याकांड ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि केवल त्वरित गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपराध पर पहले से प्रभावी नियंत्रण और लोगों में सुरक्षा का भरोसा भी उतना ही जरूरी है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
