August 10, 2026
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    दुर्ग। दुर्ग पुलिस द्वारा "जन मित्र" अभियान के तहत मेघगंगा ग्रुप एवं स्पर्श अस्पताल के संयुक्त तत्वावधान में नई पुलिस लाइन, थगड़ा बांध में रविवार को एक दिवसीय मेगा मेडिकल कैंप आयोजित किया गया। शिविर का शुभारंभ पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने वृक्षारोपण एवं फीता काटकर किया। इस दौरान 843 पुलिस अधिकारी, कर्मचारी, सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी तथा उनके परिजनों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

    पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने कहा कि पुलिसकर्मी तनावपूर्ण एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करते हैं, इसलिए उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर देते हुए कहा कि स्वस्थ पुलिस बल ही बेहतर कानून व्यवस्था की आधारशिला है।

    कार्यक्रम में अभिषेक शांडिल्य ने कहा कि अनियमित दिनचर्या के कारण पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे स्वास्थ्य शिविर गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान करने और पुलिस बल को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं विजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि शिविर का उद्देश्य पुलिसकर्मियों के साथ-साथ सेवानिवृत्त कर्मियों एवं उनके परिवारों को भी विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

    मेगा मेडिकल कैंप में 22 विभागों के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सेवाएं प्रदान कीं। शिविर में NABL प्रमाणित पैथोलॉजी जांच, नेत्र एवं दंत परीक्षण, संपूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण तथा विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गईं। विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य परीक्षण के साथ आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श भी दिया।

    इस अवसर पर कलेक्टर अभिजीत सिंह, पुलिस विभाग एवं नगर सेना के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, पुलिस अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में उनके परिजन उपस्थित रहे। अधिकारियों ने मेघगंगा ग्रुप, स्पर्श अस्पताल और लाइफ केयर डायग्नोस्टिक सेंटर के सहयोग की सराहना करते हुए शिविर को पुलिस कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

      भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई के आयुक्त राजीव कुमार पांडेय के अपर आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग, नवा रायपुर में स्थानांतरण पर निगम परिवार ने होटल अमित पार्क इंटरनेशनल में भावभीना विदाई समारोह आयोजित किया। कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके कार्यकाल, कुशल प्रशासन, सौम्य व्यवहार एवं विकास कार्यों में योगदान को याद करते हुए शुभकामनाएं दीं।

    अपने संबोधन में राजीव कुमार पांडेय ने निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, निर्माणाधीन स्विमिंग पूल, नालंदा परिसर, हॉर्स राइडिंग, स्केटिंग ट्रैक एवं रेलवे किनारे बायपास रोड जैसी प्रमुख परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने पर जोर दिया। साथ ही कार्यकाल के दौरान अनजाने में हुई किसी भी त्रुटि के लिए खेद भी व्यक्त किया।

    समारोह में मुख्य अभियंता अजीत कुमार तिग्गा, उपायुक्त डी.के. कोसरिया, जोन आयुक्त अमरनाथ दुबे, येशा लहरे, कुलदीप गुप्ता सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने श्री पांडेय को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य और नए दायित्व के लिए शुभकामनाएं दीं।

      रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई संपत्ति पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का सकारात्मक प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है, जिससे हजारों परिवारों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिला है और महिलाओं की संपत्ति में भागीदारी तेजी से बढ़ी है।

    32 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत हुई महिलाओं की हिस्सेदारी

    पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा 6 मई से 30 जून 2026 की अवधि का पिछले वर्ष की समान अवधि से तुलनात्मक अध्ययन किया गया। इसके अनुसार वर्ष 2025 में महिलाओं के पक्ष में पंजीकृत विक्रय विलेखों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई। वहीं महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या 14,668 से बढ़कर 21,292 हो गई, जो लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।

    75 प्रतिशत जिलों में दर्ज हुई उल्लेखनीय बढ़ोतरी

    राज्य के लगभग 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से अधिक वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। विशेष रूप से जांजगीर-चांपा, बलोद, कोरिया, रायपुर और कांकेर जैसे जिलों में इस योजना के बेहतर परिणाम सामने आए हैं।

    50.14 करोड़ रुपये का मिला प्रत्यक्ष लाभ

    पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट के कारण इस अवधि में नागरिकों को करीब 50.14 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिला। इस पहल से न केवल परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हुआ, बल्कि महिलाओं के नाम संपत्ति दर्ज कराने की प्रवृत्ति को भी उल्लेखनीय बढ़ावा मिला।

    महिलाओं का संपत्ति स्वामित्व सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम : मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का निर्णय इसी सोच का परिणाम है। संपत्ति का स्वामित्व महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा के साथ परिवार और समाज में सम्मान तथा निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से बड़ी संख्या में परिवार लाभान्वित हुए हैं और महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार ऐसी नीतियों को लगातार बढ़ावा दे रही है, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर, सशक्त और विकास यात्रा की समान भागीदार बनाएं।

    सिर्फ आंकड़े नहीं, सामाजिक बदलाव का संकेत : ओ.पी. चौधरी

    वित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में हुई यह वृद्धि केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का संकेत है। जब किसी महिला के नाम संपत्ति होती है तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है, परिवार में उसकी निर्णयात्मक भूमिका मजबूत होती है और आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं को विकास प्रक्रिया के केंद्र में रखकर कार्य कर रही है। पंजीयन शुल्क में दी गई 50 प्रतिशत छूट का उद्देश्य केवल आर्थिक राहत देना नहीं, बल्कि महिलाओं को संपत्ति स्वामित्व से जोड़कर उन्हें वास्तविक अर्थों में सशक्त बनाना है। प्रारंभिक परिणाम इस नीति की सफलता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

    मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार नागरिक-केंद्रित, पारदर्शी और समावेशी पंजीयन व्यवस्था विकसित करने के लिए लगातार सुधार कर रही है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के सुधारात्मक और प्रोत्साहनात्मक प्रयासों का उद्देश्य शासन की योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है।

        रायपुर, । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि श्रीमद्भागवत कथा समाज को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक विरासत प्रदेश की सबसे बड़ी धरोहर है, जिसके संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री रविवार शाम राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। उन्होंने कथा व्यास श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया तथा श्रीमद्भागवत जी की विधिवत आरती एवं वंदन किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका होने के साथ-साथ भगवान श्रीराम की वनगमन स्थली भी है, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान और अधिक गौरवशाली बनती है। उन्होंने शिवरीनारायण, राजिम कुंभ तथा प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये स्थल छत्तीसगढ़ की समृद्ध धार्मिक परंपरा के प्रतीक हैं।

    श्री साय ने बताया कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का प्रभावी संचालन कर रही है। उन्होंने कहा कि अब तक करीब 50 हजार श्रद्धालु रामलला दर्शन योजना का लाभ ले चुके हैं, जबकि बुजुर्गों को विभिन्न तीर्थस्थलों के दर्शन भी कराए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए राज्य सरकार धर्म स्वातंत्र्य कानून को प्रभावी ढंग से लागू कर रही है। साथ ही गौधाम योजना के माध्यम से गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में सेवा, करुणा, सद्भाव, नैतिकता और लोककल्याण की भावना को मजबूत करते हैं। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीवलोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

    भिलाई / शौर्यपथ / भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के यूनिवर्सल रेल मिल (यूआरएम) में रविवार को एक दर्दनाक हादसे में कर्मचारी विनोद कुमार यादव (38) की करंट लगने से मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब वे ओवरहेड क्रेन पर कार्य कर रहे थे। घटना के बाद संयंत्र में शोक का माहौल है।
    O 30-40 फीट ऊंचाई पर लगा हाई वोल्टेज करंट
    जानकारी के अनुसार वैशाली सेक्टर निवासी विनोद कुमार यादव यूनिवर्सल रेल मिल में जूनियर इंजीनियर एसोसिएट के पद पर कार्यरत थे। वे द्वितीय पाली में ड्यूटी पर पहुंचे थे। शाम करीब 4:30 बजे 30 से 40 फीट ऊंचे ओवरहेड क्रेन पर कार्य के लिए चढ़े। इसी दौरान उन्हें हाई वोल्टेज डीसी करंट लग गया और वे मौके पर ही बेहोश हो गए।
    O 20 मिनट तक ऊंचाई पर फंसे रहे कर्मचारी
    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कर्मचारी को नीचे उतारने में करीब 15 से 20 मिनट लग गए। इसके बाद उन्हें मेडिकल पोस्ट ले जाया गया, जहां से सेक्टर-9 अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
    O बंद होनी थी बिजली, फिर कैसे दौड़ा करंट?
    घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब भी कोई कर्मचारी ओवरहेड क्रेन पर कार्य करने जाता है, तो पहले विद्युत सप्लाई पूरी तरह बंद कर दी जाती है। इसके बावजूद कर्मचारी के ऊपर चढ़ने के बाद करंट लगना गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है।
    सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप
    कर्मचारियों का आरोप है कि ऐसे कार्य के दौरान कम से कम तीन प्रशिक्षित कर्मचारियों की मौजूदगी अनिवार्य होती है। लेकिन घटना के समय प्रबंधन ने केवल एक अप्रशिक्षित (अनस्किल्ड) ठेका श्रमिक को तैनात किया था। उसके पास आपात स्थिति से निपटने का अनुभव नहीं था, जिससे समय पर बचाव नहीं हो सका।
    जांच और जवाबदेही की मांग
    हादसे के बाद कर्मचारियों में आक्रोश है। वे पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, सुरक्षा मानकों की समीक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि यदि सुरक्षा प्रोटोकॉल का सही तरीके से पालन किया गया होता तो यह हादसा टाला जा सकता था।

      राजनांदगांव / शौर्यपथ / आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को संविधान के तहत मिले 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रभावी लाभ छत्तीसगढ़ में सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है। श्री राजपूत करणी सेना (कालवी विचारधारा) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय बहादुर सिंह के नेतृत्व में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इसमें राज्य में ईडब्ल्यूएस आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की गई।
    प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि संविधान के 103वें संशोधन के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार मिला है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसका लाभ सभी पात्र लोगों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है। राजस्थान सहित कई राज्यों में इस दिशा में बेहतर व्यवस्था लागू की गई है, इसलिए छत्तीसगढ़ में भी इसे पूरी गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए।
    राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संजय बहादुर सिंह ने कहा कि यह किसी वर्ग विशेष की नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकारों को हर पात्र नागरिक तक पहुंचाने की मांग है। ज्ञापन में राज्य सरकार से जल्द आवश्यक निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।
    समाज ने रखी चार प्रमुख मांगें
    राज्य में ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रभावी और पूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। ईडब्ल्यूएस आरक्षण के पालन की निगरानी के लिए राज्यस्तरीय मॉनिटरिंग बोर्ड का गठन किया जाए। ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी और प्रभावी कार्यप्रणाली (एसओपी/दिशा-निर्देश) तैयार कर सभी विभागों में लागू की जाए। राजस्थान मॉडल के अनुरूप राज्य में लागू हो ईडब्ल्यूएस के सभी प्रावधान ,समयबद्ध तरीके से ईडब्ल्यूएस की कार्ययोजना और बजटीय प्रावधान हो
    ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रदेश सह सचिव गोल्डी भदोरिया, जिलाध्यक्ष अमन बहादुर सिंह, संजय सिंह राजपूत,अजय कुशवाहा,कपिल चौहान, अभिनव सिंह, चंदन सिंह, संतोष ठाकुर सहित महिला विंग की महिलाएं उपस्थित रहीं.

    मृणेन्द्र चौबे
    राजनांदगांव/शौर्यपथ / कोरकोट्टी नक्सली हमले की 17वीं बरसी पर रविवार को राजनांदगांव पुलिस ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक स्व. विनोद कुमार चौबे सहित 29 वीर पुलिस जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षित केंद्र स्थित शहीद स्मारक एवं मंगल भवन में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में शहीदों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा गया।
    पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने शहीद परिवारों का शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मान किया और उनसे आत्मीय संवाद करते हुए उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने परिवारों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निराकरण किया जाएगा। एसपी ने कहा कि शहीदों का सर्वोच्च बलिदान सदैव पुलिस परिवार और समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।
    शहीदों की स्मृति में आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण एवं स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस दौरान 21 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारियों ने रक्तदान कर वीर शहीदों को अनूठी श्रद्धांजलि दी।
    समारोह में सांसद संतोष पांडे, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, महापौर मधुसूदन यादव, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। जनप्रतिनिधियों ने शहीद परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
    कार्यक्रम में कलेक्टर जितेन्द्र यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर, डीएसपी किरण चौधरी, रक्षित निरीक्षक लोकेश कुमार कसेर, जिले के पुलिस अधिकारी-कर्मचारी, शहीद परिवारों के सदस्य, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं पत्रकार उपस्थित रहे। अंत में सभी ने वीर शहीदों के साहस, राष्ट्रभक्ति और सर्वोच्च बलिदान को सदैव स्मरण रखते हुए राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहने का संकल्प लिया।

    सूत्रों का दावा- बेलर, उमरगांव और सिहावा के कुछ खाद कारोबारियों का नेटवर्क सक्रिय, POC नियमों पर उठे सवाल; कृषि विभाग से जांच की मांग

    थरुण कुमार की खास रिपोर्ट
    धमतरी/नगरी। धमतरी जिले के बेलर क्षेत्र में किसानों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली रासायनिक खाद की कथित अवैध तस्करी का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार बेलर, उमरगांव और सिहावा क्षेत्र के कुछ खाद कारोबारियों का सिंडिकेट सक्रिय है, जो बड़ी मात्रा में खाद को गोदामों में डंप कर जैतपुरी मार्ग या नवागांव रास्ते ओडिशा भेज रहा है। यदि यह आरोप सही हैं तो इससे स्थानीय किसानों के लिए खाद की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
    सूत्रों का दावा है कि प्रतिदिन ट्रैक्टर पिकअप वाहनों के माध्यम से खाद की खेप सीमा पार भेजी जा रही है। बताया जा रहा है कि बेलर क्षेत्र इस कथित नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, जहां से खाद का संग्रहण और परिवहन किया जा रहा है।
    नियमों के अनुसार खाद की बिक्री पीओएस (POS/POC) मशीन के माध्यम से की जाती है, जिसमें खरीदार का आधार कार्ड और भूमि संबंधी दस्तावेज दर्ज किए जाते हैं। कृषि विभाग का भी कहना है कि बिना आधार और भूमि रिकॉर्ड के खाद की बिक्री नहीं की जा सकती। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि खाद वास्तव में दूसरे राज्य भेजी जा रही है तो उसकी बिक्री का रिकॉर्ड किसके नाम पर दर्ज किया जा रहा है।
    सूत्रों का यह भी दावा है कि कुछ कारोबारी खुलेआम यह कहते हैं कि उन्हें किसी कार्रवाई का डर नहीं है क्योंकि संबंधित अधिकारियों तक पैसा पहुंचता है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
    यह केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों पर भी सीधा असर डालने वाला मामला होगा। स्थानीय किसानों का कहना है कि कई बार खाद की कमी का सामना करना पड़ता है, जबकि दूसरी ओर बड़े पैमाने पर खाद बाहर भेजे जाने की चर्चा लगातार होती रहती है।
    अब जरूरत इस बात की है कि कृषि विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस संयुक्त रूप से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें। खाद विक्रेताओं के गोदामों का भौतिक सत्यापन, पीओएस मशीनों के रिकॉर्ड का मिलान तथा सीमा क्षेत्रों में वाहनों की निगरानी से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी .

    उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने किया लोकार्पण, जब्त संपत्तियों की ऑनलाइन ट्रैकिंग से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही; नई बस सहित चार वाहनों को भी दिखाई हरी झंडी

    रायपुर/कांकेर ।

    छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था के आधुनिकीकरण और डिजिटल सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। उप मुख्यमंत्री एवं कांकेर जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव ने शनिवार को कांकेर सिटी कोतवाली में प्रदेश के पहले क्यूआर कोड आधारित डिजिटल ई-मालखाना का शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने जिला पुलिस को मिली नई बस सहित चार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

    इस अभिनव व्यवस्था के माध्यम से अब अपराध प्रकरणों में जब्त किए गए सामानों का रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल होगा। क्यूआर कोड स्कैन करते ही संबंधित प्रकरण, जब्त सामग्री, संख्या और तिथि सहित संपूर्ण जानकारी तत्काल उपलब्ध हो जाएगी। इससे मालखाना प्रबंधन अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और व्यवस्थित बनेगा।

    एक स्कैन में पूरी जानकारी

    कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने ई-मालखाना का निरीक्षण कर जब्तशुदा सामानों की ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने कांकेर पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से पुलिस व्यवस्था अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनविश्वास के अनुरूप बनेगी।

    पुलिस अधीक्षक श्री निखिल राखेचा ने बताया कि ई-मालखाना प्रणाली के अंतर्गत अपराधों में जब्त किए गए वाहन, मोबाइल फोन, नकदी, हथियार, आभूषण, मादक पदार्थ, प्रॉपर्टी दस्तावेज़ तथा अन्य केस प्रॉपर्टी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे न्यायालयीन प्रक्रिया और विवेचना के दौरान आवश्यक सामग्री को शीघ्रता से उपलब्ध कराना आसान होगा।

    बारकोड से आगे, अब क्यूआर कोड तकनीक

    अब तक प्रदेश के थानों में बारकोड आधारित व्यवस्था का उपयोग किया जाता था, लेकिन क्यूआर कोड आधारित डिजिटल मालखाना प्रबंधन प्रणाली पहली बार कांकेर पुलिस ने लागू की है। प्रत्येक बॉक्स पर अलग क्यूआर कोड लगाया गया है, जिसे स्कैन करते ही संबंधित केस की पूरी जानकारी स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाती है। इससे रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, पेपरलेस कार्यप्रणाली को बढ़ावा मिलेगा और जब्त संपत्तियों के रखरखाव में जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।

    उत्कृष्ट पुलिस कर्मियों का हुआ सम्मान

    कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने उत्कृष्ट सेवा देने वाले पुलिस अधिकारियों एवं जवानों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

    इस अवसर पर सांसद श्री भोजराज नाग, विधायक श्री आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण नरेटी, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरुण कौशिक, उपाध्यक्ष श्री उत्तम यादव, श्री सतीश लाटिया, श्री महेश जैन, श्री आलोक ठाकुर, पूर्व विधायक श्रीमती सुमित्रा मारकोले, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री आकाश श्रीश्रीमाल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी, गृह विभाग के अधिकारी तथा बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे।

    डिजिटल पुलिसिंग की नई मिसाल

    कांकेर में शुरू हुई यह क्यूआर कोड आधारित ई-मालखाना व्यवस्था न केवल छत्तीसगढ़ पुलिस के आधुनिकीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, बल्कि पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक-सक्षम पुलिसिंग की नई मिसाल भी स्थापित करेगी। यह मॉडल भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

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