August 11, 2026
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    दुर्ग. छत्तीसगढ़ के दुर्ग में खरीदी केंद्रों से धान भरकर निकले 105 वाहनों ने जीपीएस सिस्टम गायब हो गए हैं। ऐसे में अधिकारियों को यह तक पता नहीं चल पा रहा है कि वाहन किसी राइस मिलर्स के गोदाम में खाली हुआ भी है या नहीं। अब विभाग मैनुअली इन वाहनों की तलाश करेगी। खास बात यह है कि इन वाहनों में करीब 20 हजार 500 क्विंटल धान का परिवहन हुआ है और इसकी समर्थन मूल्य करीब 3 करोड़ 72 लाख 7 हजार रुपए का है। यह सारी गड़बड़ी का खुलासा भास्कर की पड़ताल में हुआ है।

    महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में अवैध शराब का तस्कर पकड़ में आया है। यह शख्स पेशे से पुलिस महकमे में हेड कॉन्स्टेबल है। खाकी की आड़ में अपने अवैध गोरखधंधे को अंजाम दे रहा था। मंगलवार की सुबह इसे गिरफ्तार कर लिया गया। पकड़ में आए कॉन्स्टेबल का नाम विरेंद्र भोई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक पंचायत चुनावों में यह शराब खपाने के मकसद से लाई जा रही थी। 
     

    फिल्हाल इस मामले में पुलिस ज्यादा जानकारी  देने से बच रही है। मीडिया के बढ़ते दबाव की वजह से पुलिस प्रशासन इस मामले में जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकता है। इस मामले में पुलिस और शराब तस्करों के बीच की साठ-गांठ के भी अहम खुलासे हो सकते हैं। कानूनी कार्रवाई के साथ ही आरोपी हवलदार पर विभागीय कार्रवाई करने की भी तैयारी की जा रही है। यह हवलदार जिले के सिंघोड़ा थाने में पदस्थ था।

    कमिश्नर ने कहा कि सभी सेक्टर अधिकारी मतदान के पूर्व अपने-अपने सेक्टर में आने वाले मतदान केंद्रों का व्यक्तिगत रूप से कम से कम तीन बार भ्रमण एवं अवलोकन कर वहां बिजली, पानी, छाया, शौचालय, फर्नीचर, दिव्यांग मतदाताओं के लिए रैम्प आदि सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराएं। वे सेक्टर का नजरी नक्शा, पहुंच मार्गों की जानकारी तथा अधिकारियों के फोन नंबर भी अपने साथ रखें। मतदान के एक दिन पूर्व वे अपने सेक्टर में ही रात्रि विश्राम करें, जिससे सुबह से ही वे अपने निर्वाचन कार्यों का संपादन कर सकें।

    जगदलपुर :- सालों से जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की प्रक्रिया एक कदम और आगे बढ़ गई है। अब इन आदिवासियाें की रिहाई के दस्तावेज न्यायालय तक पहुंच गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज ऐके पटनायक के नेतृत्व में बनी कमेटी ने 313 आदिवासियों को रिहा करने की अनुशंसा की थी। इसे राज्य सरकार ने मान लिया था और 313 आदिवासियों के मामलों की समीक्षा कर अब उनकी रिहाई के लिए कागजात अलग-अलग न्यायालयों में भेज दिए गए हैं। अब इन आदिवासियों के खिलाफ चल रहे प्रकरण न्यायालय के जरिए वापस होंगे। न्यायालय तक दस्तावेज पहुंचने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि फरवरी के पहले पखवाड़े या अंत तक इनकी रिहाई हो जाएगी। प्रदेश में यह पहला मौका है जब सरकार एक साथ इतने आदिवासियों को रिहा कर रही है। अभी तक सिर्फ आबकारी एक्ट के तहत जेलों में बंद किए गए आदिवासियों को रिहा किया जाता रहा है। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान वादा किया था कि जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों को जल्द रिहा करेगी। इसके बाद एक कमेटी का गठन भी किया गया जो लगातार जेलों में बंद आदिवासियों के मामलों की समीक्षा कर रही है।

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