
CONTECT NO. - 8962936808
EMAIL ID - shouryapath12@gmail.com
Address - SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
Google Analytics —— Meta Pixel
दुर्ग।
दुर्ग नगर निगम की अतिक्रमण कार्रवाई अब गंभीर विवादों के घेरे में है। आरोप है कि शहरी सरकार की कार्रवाई निष्पक्ष होने के बजाय “चुनिंदा टारगेट” पर केंद्रित होती जा रही है। ताजा मामला पुलगांव चौक क्षेत्र का है, जहां एक गन्ना रस की छोटी दुकान चलाने वाले परिवार ने निगम की लगातार कार्रवाई से परेशान होकर सामूहिक आत्महत्या तक की चेतावनी दे डाली है।
परिवार के मुखिया का कहना है कि क्षेत्र में दर्जनों अतिक्रमण मौजूद हैं, लेकिन बार-बार केवल उनकी ही दुकान को निशाना बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि निगम का अमला उन्हें लगातार हटाने, तोड़ने और दबाव बनाने की कार्रवाई कर रहा है, जिससे उनका जीवनयापन संकट में आ गया है। परिवार की इस चेतावनी ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
चुनिंदा कार्रवाई पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के बीच भी यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई समान रूप से क्यों नहीं हो रही। कुआं चौक और पुलगांव चौक जैसे व्यस्त इलाकों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण होने के बावजूद कार्रवाई सीमित नजर आती है, जबकि छोटे दुकानदारों पर सख्ती दिखाई जा रही है।
आरोप यह भी है कि पुलगांव चौक के पास कपड़ा मार्केट क्षेत्र में कई दुकानों के बीच सिर्फ एक दुकान पर बार-बार बुलडोजर चलाना “भेदभावपूर्ण नीति” को दर्शाता है।
बड़े अतिक्रमण पर ‘मौन’ क्यों?
शहर में कई बड़े और स्थायी अतिक्रमणों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चतुर्भुज राठी से जुड़े कथित निर्माण, ओम ज्वैलर्स द्वारा सड़क तक फैले कब्जे, समृद्धि बाजार के सामने बने स्थायी ढांचे और चर्च मार्ग पर लगने वाले साप्ताहिक बाजार जैसे मामलों में कार्रवाई नहीं होने को लेकर महापौर अलका बाघमार की कार्यशैली पर विपक्ष ही नहीं, सत्ता पक्ष के पार्षद भी सवाल उठा चुके हैं।
हाल ही में हुई सामान्य सभा की बैठक में भी सत्ता पक्ष के पार्षदों ने खुलकर निगम प्रशासन और महापौर पर भेदभाव के आरोप लगाए थे, जिससे यह मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग ले चुका है।
सत्ता पक्ष में भी असंतोष
नगर निगम की सामान्य सभा में जिस तरह सत्ता पक्ष के पार्षदों ने ही अपनी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, उससे साफ है कि असंतोष अब अंदरूनी स्तर पर भी गहराता जा रहा है। सभापति द्वारा भी इस स्थिति पर चिंता जताई गई थी, जो इस पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को दर्शाता है।
“सुशासन” पर सवाल
प्रदेश में “सुशासन” की बात करने वाली सरकार के बीच दुर्ग की शहरी सरकार की कार्यशैली अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि निगम की मनमानी न केवल आम जनता को प्रभावित कर रही है, बल्कि इससे प्रदेश सरकार की छवि पर भी असर पड़ रहा है।
जनता की नजर अब मंत्री पर
मामले को लेकर अब लोगों की उम्मीदें क्षेत्रीय विधायक एवं मंत्री गजेंद्र यादव पर टिक गई हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष और समान कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए, तो ऐसे मामले और बढ़ सकते हैं।
स्पष्ट संदेश की जरूरत
इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमों के तहत सभी पर समान रूप से लागू होगी, या फिर “चुनिंदा कार्रवाई” का आरोप यूं ही गूंजता रहेगा?
(नोट: शौर्यपथ समाचार किसी भी अतिक्रमण का समर्थन नहीं करता, बल्कि निष्पक्ष और समान कार्रवाई की पक्षधरता करता है।)
Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
