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रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा के विस्तार को महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ते हुए एक अनूठी पहल की है। द्वीप्ति (DWEEPTI) योजना, अर्थात डिसेंट्रलाइज्ड वूमेन एम्पावरमेंट ऑन एनर्जी एंड पॉलिसी फॉर ट्रांसफॉर्मेटिव इन्क्लूजन (Decentralised Women Empowerment on Energy and Policy for Transformative Inclusion), के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा क्षेत्र में विक्रेता, तकनीशियन, उद्यमी और सेवा प्रदाता के रूप में स्थापित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने तकनीकी सहयोगी संस्था ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के साथ मिलकर ग्रीन इकोनॉमी ट्रांजिशन मिशन के तहत इस नीति को विकसित किया है।
छत्तीसगढ पहला राज्य महिला नेतृत्व वाली विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा नीति
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है जिसने महिला नेतृत्व वाली विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा नीति को अपनाया है। योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 5,000 महिला ऊर्जा उद्यम स्थापित करने, 50,000 हरित रोजगार सृजित करने तथा राज्य के पांच लाख परिवारों और 10,000 संस्थानों तक स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रशिक्षित 'सोलर दीदी' की जा रही है तैयार
योजना के तहत छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) और जिला प्रशासनों के सहयोग से 12 जिलों के 13 संकुल स्तरीय संघो (सीएलएफ) को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अधिकृत विक्रेता के रूप में पंजीकृत किया गया है। महिलाओं को सौर संयंत्रों की स्थापना, संचालन, रखरखाव और जनजागरूकता का प्रशिक्षण देकर स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित 'सोलर दीदी' तैयार की जा रही हैं, जो अपने ही क्षेत्रों में तकनीकी सेवाएं उपलब्ध करा सकेंगी।
प्रधानमंत्री के 'लखपति दीदी' विजन के अनुरूप महिलाओं के लिए कौशल आधारित आजीविका के नए अवसर
सौर ऊर्जा प्रणाली को अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाने के लिए स्व-सहायता समूहों से जुड़े परिवारों को आसान किश्तों पर ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। यह वित्तीय मॉडल जहां स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देता है, वहीं महिला संचालित उद्यमों को टिकाऊ व्यवसाय विकसित करने का अवसर भी प्रदान करता है। यह पहल प्रधानमंत्री के 'लखपति दीदी' विजन के अनुरूप महिलाओं के लिए कौशल आधारित आजीविका के नए अवसर तैयार कर रही है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन से जोड़ने की राज्य सरकार की व्यापक सोच
यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन से जोड़ने की राज्य सरकार की व्यापक सोच को भी प्रतिबिंबित करती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय लगातार स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करने पर बल देते रहे हैं, जबकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा सामुदायिक संस्थाओं की भूमिका को सतत ग्रामीण विकास का आधार मानते हैं। द्वीप्ति योजना इन दोनों प्राथमिकताओं को एक साथ जोड़ते हुए महिलाओं को अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की मुख्यधारा में ला रही है।
ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छ ऊर्जा आधारित आत्मनिर्भर आजीविका से है जोड़ना
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह ने कहा कि अब तक अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका मुख्य रूप से लाभार्थी तक सीमित रही है। ड्वीप्टि योजना इस सोच को बदलते हुए महिलाओं को विक्रेता, तकनीशियन, प्रबंधक और उद्यमी के रूप में स्थापित कर रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के लखपति दीदी विजन को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो ग्रामीण महिलाओं को स्वच्छ ऊर्जा आधारित आत्मनिर्भर आजीविका से जोड़ती है।
कबीरधाम में नीति से धरातल तक पहुंची पहल
द्वीप्ति योजना का प्रभाव अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। कबीरधाम इस पहल को सफलतापूर्वक लागू करने वाले शुरुआती जिलों में शामिल है। सीएसपीडीसीएल- आरएपीएम, रायपुर के सहयोग से जिला पंचायत कबीरधाम (बिहान) ने वंदे मातरम् क्लस्टर लेवल फेडरेशन, कवर्धा को अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत कराया। टाटा के तकनीकी सहयोग से बिहान के स्व-सहायता समूहों की लगभग 35 महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर जिले की पहली 'सोलर दीदी' टीम तैयार की गई।
पहला रूफटॉप सोलर संयंत्र कबीरधाम जिले के समनापुर में
योजना के तहत पहला रूफटॉप सोलर संयंत्र कबीरधाम जिले के समनापुर गांव में स्थापित किया गया। प्रगति आजीविका ग्राम संगठन के अंतर्गत माता भवानी स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती अंजनी पटेल इस प्रशिक्षण से लाभान्वित होने वाली महिलाओं में शामिल हैं।
श्रीमती अंजनी पटेल ने कहा, "इस कार्य ने हमारे लिए आजीविका का नया रास्ता खोला है। हमें गर्व है कि अब स्व-सहायता समूहों की महिलाएं स्वयं सोलर सिस्टम स्थापित कर रही हैं। इससे यह विश्वास बढ़ा है कि यह अनेक ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी आय का मजबूत माध्यम बन सकता है।"
सोलर सिस्टम की बढ़ती मांग से प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर
कबीरधाम कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने कहा कि यह पहल आजीविका संवर्धन और अक्षय ऊर्जा को एक साथ जोड़ने का सफल उदाहरण है। उन्होंने कहा कि रूफटॉप सोलर सिस्टम की बढ़ती मांग से प्रशिक्षित ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
जिला पंचायत कबीरधाम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि यह मॉडल महिलाओं के लिए कौशल आधारित और टिकाऊ आजीविका विकसित करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर सिस्टम की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शुरुआती परिणाम उत्साहजनक रहे हैं। कबीरधाम जिले में अब तक स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और अन्य ग्रामीणों से रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के लगभग 40 ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं तथा कई संयंत्र स्थापित भी किए जा चुके हैं।
राज्य के अन्य जिलों में द्वीप्ति योजना के विस्तार के साथ महिला नेतृत्व वाले पंजीकृत महासंघों, प्रशिक्षित स्थानीय तकनीशियनों और आसान वित्तीय व्यवस्था पर आधारित यह मॉडल छत्तीसगढ़ में व्यापक स्तर पर लागू किए जाने योग्य एक प्रभावी उदाहरण के रूप में उभर रहा है।
द्वीप्ति योजना एक नजर में
• अगले पांच वर्षों में 5,000 महिला ऊर्जा उद्यम स्थापित किए जाएंगे।
• 50,000 हरित रोजगार सृजित होंगे।
• 5 लाख परिवारों तक स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।
• 10,000 संस्थानों को योजना से जोड़ा जाएगा।
• 12 जिलों के 13 क्लस्टर स्तरीय महासंघ अधिकृत सोलर वेंडर के रूप में पंजीकृत।
• कबीरधाम में 35 महिलाओं को 'सोलर दीदी' के रूप में प्रशिक्षित किया गया।
• कबीरधाम जिले में रूफटॉप सोलर सिस्टम के 40 से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए।
रायपुर / शौर्यपथ / राज्यपाल रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में राज्य के निजी विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित प्रावधानों पर राज्यपाल से विचार-विमर्श किया। श्री डेका ने राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के विस्तार के सबंद्ध में अपने विचार साझा किए।
इस अवसर पर मैट्स विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति गजराज पगारिया, श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई दुर्ग के कुलाधिपति आईपी मिश्रा, भारती विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलाधिपति सुशील चंद्राकर, कलिंगा विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति डॉ. संदीप अरोड़ा, आईएसबीएम विश्वविद्यालय, गरियाबंद और रायपुर के कुलपति डॉ. आनंद महलवार, अंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति अभिषेक अग्रवाल, दावड़ा विश्वविद्यालय रायपुर के सीईओ चिन्मय दावड़ा, कोलंबिया विश्वविद्यालय रायपुर के प्रो. कुलाधिपति हरजीत सिंह हूरा उपस्थित थे।
*तालाबों की धरती पर खुलेगी समृद्धि की नई राह, किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने का बन सकता है बड़ा माध्यम*
रायपुर / छत्तीसगढ़ को वर्षों से "धान का कटोरा" कहा जाता है, लेकिन अब यह राज्य मखाना उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बनाने की क्षमता रखता है। प्रदेश में हजारों तालाब, सिंचाई जलाशय, अनुकूल जलवायु और मेहनतकश मछुआरा समुदाय मखाना खेती के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से प्रयास किए जाएं तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख मखाना उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है।
मखाना आज केवल एक पारंपरिक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि देश-विदेश में लोकप्रिय "सुपरफूड" बन चुका है। उच्च पोषण मूल्य, स्वास्थ्य लाभ और बढ़ती बाजार मांग के कारण इसकी खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनती जा रही है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 में मखाना विकास के लिए 476.03 करोड़ रुपये की केंद्रीय क्षेत्र योजना शुरू की है, जिसमें छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया गया है।
*छत्तीसगढ़ के लिए क्यों है सुनहरा अवसर?*
प्रदेश के अधिकांश जिलों में बड़े और छोटे तालाबों का विशाल नेटवर्क मौजूद है। इनमें से अनेक जलाशयों का अभी भी पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है। यदि मछली पालन के साथ मखाना उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए, तो एक ही जलाशय से दोहरी आय प्राप्त की जा सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की कन्हार मिट्टी, पर्याप्त जल उपलब्धता और जलवायु मखाना उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त हैं। वैज्ञानिक खेती तकनीकों को अपनाकर यहां बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव है।
मखाना मिशन से बदल सकती है तस्वीर
केंद्र सरकार की मखाना विकास योजना के प्रमुख उद्देश्य गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, मखाना क्षेत्र का विस्तार, किसानों का प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास, वैज्ञानिक खेती तकनीकों का प्रसार, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और विपणन को बढ़ावा, निर्यात को प्रोत्साहन तथा अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना है।
यदि इन उद्देश्यों के अनुरूप प्रदेश में कार्य किया जाए, तो मखाना खेती किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और मछुआरा सहकारी समितियों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर खोल सकती है।
*नवाचार से मिली नई दिशा*
छत्तीसगढ़ में मखाना खेती को बढ़ावा देने में कृषि वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र चंद्राकर के प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रदेश की परिस्थितियां मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। उनके तकनीकी मार्गदर्शन में बालोद जिले में सफल मखाना खेती का प्रयोग किया गया है।
केवल खेती ही नहीं, बल्कि लगभग 1.35 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला मखाना प्रोसेसिंग सेंटर भी स्थापित किया गया, जिससे उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और विपणन तक की सुविधाएं उपलब्ध हो सकीं। "दाऊजी मखाना" ब्रांड ने भी बाजार में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है।
*मछली और मखाना: दोहरी कमाई का मॉडल*
फिश-कम-मखाना फार्मिंग मॉडल छत्तीसगढ़ के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। मछली पालन के साथ मखाना उत्पादन करने से एक ही जलाशय से दोहरी आय, मछुआरा समुदाय की आर्थिक स्थिति मजबूत, जल संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव, महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार मिलेगा।ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योग विकसित हो सकेंगे।
*महिला समूहों के लिए रोजगार के अवसर*
मखाना खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसके साथ जुड़े कई कार्य रोजगार सृजन के बड़े माध्यम बन सकते हैं, जैसे बीज प्रसंस्करण, मखाना भूनना और फोड़ना, ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग
*मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्माण*
मखाना आधारित लघु उद्योग स्थापित कर स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में एक समर्पित "छत्तीसगढ़ मखाना मिशन" शुरू किया जाना चाहिए। इसके तहत कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, सिंचाई और पंचायत विभागों को मिलकर कार्य करना होगा। साथ ही किसानों, युवाओं, महिला समूहों और मछुआरा समितियों को प्राथमिकता देकर उन्हें प्रशिक्षण, अनुदान और बाजार से जोड़ना होगा।
छत्तीसगढ़ के पास वह सब कुछ है, जो मखाना उत्पादन के लिए आवश्यक है जल, भूमि, श्रमशक्ति और संभावनाएं। यदि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और किसान मिलकर योजनाबद्ध तरीके से काम करें, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ केवल "धान का कटोरा" ही नहीं, बल्कि "देश का उभरता हुआ मखाना राज्य" भी कहलाएगा।
मखाना खेती किसानों की आय बढ़ाने, महिला सशक्तिकरण, मछुआरा समुदाय के आर्थिक उत्थान और ग्रामीण उद्योगों के विकास का प्रभावी माध्यम बन सकती है। अब आवश्यकता है दूरदर्शी सोच और ठोस पहल की।
एसपी भावना पांडेय के निर्देश पर आपातकालीन सेवा का आकस्मिक परीक्षण, काल्पनिक सड़क दुर्घटना की सूचना पर तुरंत सक्रिय हुई पुलिस टीम
धमतरी। आमजन को आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी पुलिस सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में धमतरी पुलिस लगातार सक्रिय है। इसी कड़ी में पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना पांडेय के निर्देश पर डायल-112 सेवा की कार्यक्षमता और रिस्पांस टाइम का आकस्मिक परीक्षण किया गया, जिसमें पुलिस टीम ने मात्र 5 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचकर अपनी तत्परता और दक्षता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
एएसपी ने खुद परखी डायल-112 की तैयारियां
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री शैलेन्द्र कुमार पांडेय ने डायल-112 सेवा की सरप्राइज चेकिंग करते हुए सड़क दुर्घटना की एक काल्पनिक सूचना कंट्रोल रूम को भेजी। सूचना मिलते ही डायल-112 टीम तत्काल सक्रिय हुई और महज पांच मिनट के भीतर निर्धारित स्थान पर पहुंच गई।
रिस्पांस टाइम और कार्यप्रणाली का किया निरीक्षण
घटनास्थल पर पहुंचे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री पांडेय ने स्वयं डायल-112 की रिस्पांस टाइम, टीम के समन्वय, कार्यप्रणाली और तत्परता का निरीक्षण किया। उन्होंने त्वरित कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सराहना की तथा भविष्य में भी इसी संवेदनशीलता और मुस्तैदी के साथ आमजन को पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
आपात स्थिति में तुरंत करें डायल-112 पर कॉल
धमतरी पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सड़क दुर्घटना, अपराध, विवाद, चिकित्सा सहायता अथवा किसी भी अन्य आपातकालीन स्थिति में बिना देर किए डायल-112 पर संपर्क करें। पुलिस की यह सेवा 24×7 आमजन की सुरक्षा और सहायता के लिए निरंतर उपलब्ध है।
शौर्यपथ विशेष
धमतरी पुलिस द्वारा किया गया यह सरप्राइज रिस्पांस टेस्ट दर्शाता है कि आपातकालीन सेवाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए पुलिस महकमा नियमित रूप से अपनी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहा है। ऐसी पहलें न केवल पुलिस की कार्यकुशलता बढ़ाती हैं, बल्कि आम नागरिकों का विश्वास भी मजबूत करती हैं।
गुंडरदेही
भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल गुण्डरदेही द्वारा आज धमतरी चौक में प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के विरुद्ध कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा की गई कथित अभद्र, अपमानजनक एवं आपत्तिजनक टिप्पणियों के विरोध में राहुल गांधी का पुतला दहन कर जोरदार प्रदर्शन किया गया।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन ने कहा कि "विरोध करना लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाना, संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करना और राजनीतिक नौटंकी करना कांग्रेस की पुरानी प्रवृत्ति रही है। भारतीय जनता पार्टी सदैव लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक परंपराओं एवं राष्ट्रहित की रक्षा के लिए दृढ़ता से खड़ी रहेगी। प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद की गरिमा के विरुद्ध की गई अभद्र टिप्पणियां किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।"
कार्यक्रम के दौरान भाजपा एवं भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कांग्रेस के विरोध में नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन जिला महामंत्री अनूप देशमुख, भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष नीतीश राजा सोनकर, सुभाष चंद्राकर, सौरभ चोपड़ा, गोकुल निषाद, संतोष नेताम , लालवीर सिंह, नमन जैन, सूरज यादव, मोपेंद्र साहू, कुणाल कुर्रे,पोषण सहित भाजपा एवं भाजयुमो के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
धमतरी। कृषि में आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में धमतरी जिले ने प्रदेश में नई मिसाल कायम की है। धमतरी छत्तीसगढ़ का पहला जिला बन गया है, जहां प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) के माध्यम से किसानों को ड्रोन आधारित कृषि सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। गुरुवार को ग्राम लोहरसी स्थित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति परिसर में आयोजित कार्यक्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने जिले की 10 समितियों में ड्रोन स्प्रेयर सुविधा का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं ड्रोन उड़ाकर इसकी कार्यप्रणाली का अवलोकन किया और किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में चयनित सभी समितियों के प्रशिक्षित ड्रोन पायलटों ने ड्रोन स्प्रेयर का प्रदर्शन किया। ड्रोन के माध्यम से उर्वरक और कीटनाशकों का सटीक छिड़काव, कम समय में अधिक क्षेत्र का उपचार, श्रम और लागत में कमी तथा सुरक्षित कृषि प्रबंधन की विशेषताओं से किसानों को अवगत कराया गया। किसानों ने भी इस नई तकनीक को खेती के लिए उपयोगी और समय की आवश्यकता बताया।
मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार खेती को आधुनिक और लाभकारी बनाने के लिए लगातार तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा दे रही है। सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक ड्रोन तकनीक पहुंचाने की यह पहल कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाएगी। इससे किसानों का समय बचेगा, श्रमिकों पर निर्भरता कम होगी, कम लागत में अधिक प्रभावी छिड़काव संभव होगा और उत्पादन क्षमता के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा कि धमतरी को कृषि नवाचारों का मॉडल जिला बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में इस सुविधा का विस्तार अन्य सहकारी समितियों तक भी किया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने समिति परिसर में कृषि एवं कीटनाशक विक्रय केंद्र का शुभारंभ किया। उन्होंने "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत पौधरोपण किया तथा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना के हितग्राहियों को ऋण स्वीकृति पत्र भी वितरित किए।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि जिले की बोड़रा, लोहरसी, दोनर, अछोटा, खरेंगा, भोथीडीह, कुंडेल, गाड़ाडीह, जुगदेही और करेली प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को ड्रोन स्प्रेयर सुविधा से जोड़ा गया है। इन समितियों के माध्यम से किसान नाममात्र के सेवा शुल्क पर ड्रोन से उर्वरक एवं कीटनाशकों का छिड़काव करा सकेंगे। इससे कृषि यंत्रीकरण को गति मिलेगी और आधुनिक तकनीक गांव-गांव तक पहुंचेगी।
उन्होंने बताया कि CSC e-Governance Services India Limited के सहयोग से इन समितियों को कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में भी विकसित किया जा रहा है, जिससे किसानों को ड्रोन सेवाओं के साथ विभिन्न डिजिटल और शासकीय सेवाएं भी एक ही स्थान पर मिल सकेंगी। इससे सहकारी समितियां ग्रामीण क्षेत्रों में बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित होंगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक से रसायनों का संतुलित एवं लक्षित छिड़काव होगा, पर्यावरणीय प्रभाव कम होगा, फसलों की गुणवत्ता में सुधार आएगा तथा खेतों में सीधे प्रवेश की आवश्यकता कम होने से फसलों को नुकसान भी नहीं पहुंचेगा। वहीं प्रशिक्षित युवाओं के लिए ड्रोन संचालन के क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष निरंजन सिन्हा, औषधि बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयंत नाहटा, डीएफओ कृष्ण जाधव, सहकारिता एवं कृषि विभाग के अधिकारी, CSC प्रतिनिधि, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे।
रायपुर । राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली से मानवाधिकार शिक्षा एवं लैंगिक समानता के विशेष पर्यवेक्षक प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने बुधवार कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर का दौरा किया। उन्होंने कुलपति प्रोफेसर डॉ. मनोज दयाल से भेंट कर मानवाधिकार संरक्षण, पत्रकारों के हितों, उनके उत्थान एवं कल्याण तथा मानवाधिकार शिक्षा को सुदृढ़ करने अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ है। इसलिए पत्रकारिता का मानवाधिकारों, संवैधानिक मूल्यों और लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय और जनहित के प्रति प्रतिबद्ध होना अत्यंत आवश्यक है। जिससे वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।
कांफ्रेंस रुम में प्राध्यापक, अधिकारी एवं कर्मचारियों से बैठक में मानवाधिकार, लैंगिक समानता और पत्रकारिता के विभिन्न आयामों पर प्रो. त्रिपाठी ने विस्तार से बात की। उन्होंने विश्वविद्यालय में पत्रकारिता और मानवाधिकार विषय पर नवीन पाठ्यक्रम, मानवाधिकार प्रकोष्ठ के गठन, विद्यार्थियों के लिए ह्यूमन राइट्स क्लब की स्थापना और जनसंचार एवं मानवाधिकार विषयक द्विभाषी शोध पत्रिका के प्रकाशन का प्रस्ताव दिया तथा केटीयू को मानवाधिकार जागरूकता, शोध एवं प्रशिक्षण गतिविधियों का केंद्र बनाने सुझाव दिए।
विशेष पर्यवेक्षक प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने अध्ययन संकाय, प्रशासनिक प्रभाग सहित परिसर का निरीक्षण किया। प्रो. त्रिपाठी ने सुझाव दिया कि पुस्तकालय के आधुनिकीकरण हो एवं ऑनलाइन डिजिटल लाइब्रेरी विकसित हो। टेलीविजन स्टूडियो और सामुदायिक रेडियो स्टेशन- रेडियों संवाद 90.8 एफएम में प्रो. त्रिपाठी ने विशेष भेंटवार्ता प्रोग्राम रिकार्डिंग की।
लैंगिक समानता एवं संवेदनशीलता के लिए नियमित प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यक्रम और संवाद तथा निःशुल्क चिकित्सकीय एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श के लिए विशेषज्ञ पैनल के गठन की अनुशंसा की गई। कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने उनके सुझावों पर शासन से समन्वय कर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।
(सुनील कुमार शर्मा)
कुलसचिव
ईमली पेड़ (दुलसिंह पेट्रोल पंप) के पास पानी निकासी नहीं होने से दुर्घटना का खतरा, स्थायी समाधान की मांग तेज
बरसात में सड़क बनी तालाब, आवागमन हुआ मुश्किल
कांकेर। जिले के सरोना से दुधावा राज्य सड़क मार्ग पर स्थित दुलसिंह पेट्रोल पंप के समीप ईमली पेड़ के पास ढलान वाली सड़क इन दिनों जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रही है। लगातार हो रही बारिश के कारण सड़क पर लगभग एक से दो फीट तक पानी जमा हो गया है। पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण यह स्थान किसी तालाब जैसा दिखाई देने लगा है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों की संख्या में ग्रामीण, किसान, विद्यार्थी, कर्मचारी एवं छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं, लेकिन जलभराव के कारण सभी को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर भरे पानी के कारण वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है।
पैदल यात्रियों और दोपहिया चालकों पर सबसे अधिक संकट
सड़क पर भरे पानी का सबसे अधिक असर पैदल चलने वालों, साइकिल सवारों और मोटरसाइकिल चालकों पर पड़ रहा है। तेज रफ्तार से गुजरने वाले बड़े वाहनों के कारण पानी के छींटे दूर तक उड़ते हैं, जिससे राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ती है। कई बार जल्दी निकलने की कोशिश में दोपहिया वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान पर आए दिन वाहन चालकों के बीच पानी उछालने को लेकर विवाद की स्थिति बन जाती है। कई बार कहासुनी हाथापाई तक पहुंच जाती है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना या जनहानि भी हो सकती है।
पानी निकासी मार्ग अवरुद्ध होने से बढ़ी समस्या, स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों और आसपास के लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर जलभराव हो रहा है, उसके आसपास इन दिनों नए भवनों का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान मिट्टी डालकर प्राकृतिक पानी निकासी मार्ग को बंद कर दिया गया है, जिससे बारिश का पानी सड़क पर ही जमा हो रहा है। यदि पानी के बहाव के लिए पर्याप्त नाली या निकासी मार्ग बनाया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। लोगों का आरोप है कि इस समस्या की जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभाग को कई बार दी गई, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, रखरखाव की कमी बनी चिंता
यह राज्य सड़क मार्ग लोक निर्माण विभाग के अधीन आता है, लेकिन सड़क के रखरखाव और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग द्वारा ऐसे संवेदनशील स्थानों का सर्वेक्षण नहीं किया जाता, जहां हर वर्ष जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है। सूत्रों के अनुसार विभाग में नियमित रूप से सड़क मरम्मत और रखरखाव करने वाले कर्मचारियों एवं मजदूरों की कमी है। यदि पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध होते तो समय-समय पर नालियों की सफाई, पानी निकासी की व्यवस्था और सड़क की मरम्मत कर समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता था। वर्तमान में कई स्थानों पर सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है और अनेक जगह जलभराव से लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग, विभाग और पंचायत से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा
सरोना क्षेत्र के नागरिकों ने लोक निर्माण विभाग तथा ग्राम पंचायत सरोना से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल अस्थायी रूप से पानी निकाल देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इस स्थान पर वैज्ञानिक ढंग से जल निकासी की स्थायी व्यवस्था, आवश्यकतानुसार नाली अथवा पुलिया का निर्माण तथा सड़क के ढलान का सुधार किया जाना चाहिए। साथ ही जिन निर्माण कार्यों के कारण प्राकृतिक जलनिकासी बाधित हुई है, उनकी भी जांच कर उचित कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में बरसात के दौरान यह समस्या और गंभीर रूप धारण कर सकती है तथा कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से जनहित को ध्यान में रखते हुए तत्काल निरीक्षण कर शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है।
कांकेर जिले के प्रगतिशील किसान परशुराम साहू प्राकृतिक खेती की बन रहे मिसाल
उत्तर बस्तर कांकेर, / खेती की बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती उर्वराशक्ति आज किसानों के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे समय में कृषि विभाग के मार्गदर्शन में विकासखंड चारामा के ग्राम गोलकुमड़ा के प्रगतिशील किसान श्री परशुराम साहू ने हरी खाद (ढैंचा) को अपनाकर यह साबित किया है कि प्राकृतिक तरीकों से भी कम लागत में बेहतर खेती की जा सकती है। उनका यह अनुभव क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रहा है। कृषक श्री साहू ने करीब तीन वर्ष पहले कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव पर धान की खेती में ढैंचा का उपयोग शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने प्रयोग के तौर पर इसे अपनाया, लेकिन सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब वे नियमित रूप से अपनी लगभग 03 एकड़ कृषि भूमि में धान की रोपाई से 40 से 45 दिन पहले ढैंचा की बुवाई करते हैं।
श्री साहू बताते हैं कि ढैंचा की फसल लगभग 35 से 40 दिन में तैयार हो जाती है। इसके बाद ट्रैक्टर या हल की सहायता से इसे खेत में पलटकर मिट्टी में मिला दिया जाता है। कुछ दिनों में यह पूरी तरह विघटित होकर उत्कृष्ट हरी खाद का रूप ले लेती है, जिससे भूमि को प्राकृतिक रूप से आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। वे बताते हैं कि ढैंचा अपनाने के बाद उनके खेत में रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता लगभग 50 प्रतिशत तक कम हो गई है। पहले जहां अधिक मात्रा में यूरिया एवं अन्य उर्वरकों का उपयोग करना पड़ता था, वहीं अब कम उर्वरक में भी अच्छी फसल मिल रही है। साथ ही उनकी भूमि पहले की तुलना में अधिक भुरभुरी, उपजाऊ और नमी बनाए रखने में सक्षम हो गई है।
विकासखंड चारामा के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री महेश कुमार सोनकर ने बताया कि ढैंचा दलहनी वर्ग की महत्वपूर्ण हरी खाद फसल है। इसकी जड़ों में विकसित होने वाली राइजोबियम जीवाणु ग्रंथियां वायुमंडल से नाइट्रोजन को स्थिर कर मिट्टी में उपलब्ध कराती हैं। एक हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार ढैंचा की हरी खाद से भूमि को लगभग 40 से 60 किलोग्राम नाइट्रोजन प्राकृतिक रूप से प्राप्त हो सकती है। इसके साथ ही यह मिट्टी में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ाती है, सूक्ष्मजीवों की सक्रियता को प्रोत्साहित करती है, जलधारण क्षमता में सुधार लाती है तथा मिट्टी की संरचना को बेहतर बनाती है। लगातार उपयोग से भूमि की उर्वराशक्ति लंबे समय तक बनी रहती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।
उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को ढैंचा बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक किसान प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती की इस वैज्ञानिक तकनीक को अपनाकर लाभान्वित हो सकें। खरीफ मौसम में धान की रोपाई से पहले ढैंचा की बुवाई कर उसे खेत में पलटने से मिट्टी में पर्याप्त जैविक पदार्थ एवं पोषक तत्व उपलब्ध होते हैं, जिससे धान की प्रारंभिक वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन क्षमता में भी सकारात्मक वृद्धि होती है। श्री परशुराम साहू का कहना है कि यदि किसान धीरे-धीरे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर हरी खाद, जैविक खाद तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन को अपनाएं, तो खेती अधिक लाभकारी बनने के साथ-साथ मिट्टी का स्वास्थ्य भी सुरक्षित रखा जा सकता है। उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती केवल लागत कम करने का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उपजाऊ भूमि सुरक्षित रखने का भी प्रभावी उपाय है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
