August 12, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    बिलासपुर

    बिलासपुर (228)

    बिलासपुर / शौर्यपथ।
    देश की ऊर्जा सुरक्षा, संस्थागत सुधार और दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा को मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए कोल इंडिया लिमिटेड की प्रमुख सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने बिलासपुर स्थित अपने मुख्यालय में पहली बार ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया। यह शिविर आत्मनिर्भर भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप एसईसीएल के भविष्य को आकार देने के लिए एक संरचित, सहभागी और नेतृत्व-केंद्रित मंथन मंच के रूप में सामने आया।

    यह चिंतन शिविर हाल ही में नई दिल्ली में कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित चिंतन शिविर की पृष्ठभूमि में परिकल्पित किया गया था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय ऊर्जा प्राथमिकताओं के अनुरूप एसईसीएल की रणनीतिक दिशा को और अधिक सुदृढ़ करना रहा। इस प्रक्रिया की शुरुआत एसईसीएल के परिचालन क्षेत्रों में आंतरिक चिंतन शिविरों से हुई, जिन्हें समेकित करते हुए मुख्यालय स्तर पर व्यापक मंथन किया गया, ताकि संगठन के हर स्तर की सहभागिता और समग्र समीक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री हरिश दुहन के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर में कार्यात्मक निदेशक, मुख्य सतर्कता अधिकारी सहित मुख्यालय एवं सभी परिचालन क्षेत्रों के लगभग 200 अधिकारी शामिल हुए। इनमें क्षेत्रीय महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष तथा कार्यकारी ग्रेड–5 (ई-5) स्तर तक के बड़ी संख्या में युवा अधिकारी सम्मिलित रहे, जो संगठन की भावी नेतृत्व क्षमता पर विशेष फोकस को दर्शाता है।

    अपने संबोधन में अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक श्री दुहन ने कहा कि एसईसीएल को एक बार फिर देश की अग्रणी कोयला कंपनी के रूप में स्थापित करने के लिए संगठित और परिणामोन्मुख प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुधार केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि दैनिक कार्य संस्कृति और निर्णय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनें। दीर्घकालिक दृष्टि को रेखांकित करते हुए उन्होंने विविधीकरण, औद्योगिक सहभागिता और नेट-जीरो रोडमैप में अग्रणी भूमिका निभाने की आवश्यकता बताई तथा विज़न 2030 और विज़न 2047 को संगठन के मार्गदर्शक ढांचे के रूप में अपनाने का आह्वान किया। युवा अधिकारियों को संगठन की भविष्य की रीढ़ बताते हुए उन्होंने एसईसीएल को भविष्य के लिए तैयार संस्था में रूपांतरित करने में उनकी अग्रणी भूमिका पर विश्वास व्यक्त किया।

    चिंतन शिविर का मुख्य उद्देश्य संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा, कमियों की पहचान तथा कोयला उत्पादन, डिस्पैच व्यवस्था, खान सुरक्षा, लागत दक्षता, सतत विकास और डिजिटलीकरण को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट एवं समयबद्ध कार्य योजनाओं पर मंथन करना रहा। इसके साथ ही विविधीकरण, उद्योग से जुड़ाव और नेट-जीरो लक्ष्य जैसे दीर्घकालिक विषयों पर भी गहन चर्चा की गई।

    कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा 15 विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें भूमिगत उत्पादन योजना, गुणवत्ता नियंत्रण, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी संचालन, भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास, पर्यावरण एवं वन स्वीकृतियां, सौर एवं नवीन ऊर्जा, डिजिटलीकरण एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग, मानव संसाधन विकास, वित्त और संविदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

    प्रत्येक प्रस्तुति के पश्चात संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए गए, जिनमें अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, कार्यात्मक निदेशक और मुख्य सतर्कता अधिकारी की सक्रिय भागीदारी रही। इस खुले और सहभागी मंच ने नवाचारी विचारों, रचनात्मक सुझावों और जमीनी फीडबैक को प्रोत्साहित किया, जिससे शीर्ष-स्तरीय मार्गदर्शन और क्षेत्रीय अनुभवों के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित हुआ।

    एसईसीएल का यह पहला ‘चिंतन शिविर’ नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया को मजबूती देने की दिशा में एक ठोस आधार प्रदान करेगा। साथ ही यह संगठन की परिचालन उत्कृष्टता, सतत विकास और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को और अधिक सशक्त करने में मील का पत्थर साबित होगा।

    बिलासपुर ।
    व्हीबी–जी राम जी योजना को लेकर गुरुवार को बिलासपुर में एक बार फिर पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। यह वार्ता केंद्रीय मंत्री श्री तोखन साहू द्वारा आयोजित की गई, जिसमें पीआईसी के तत्वावधान में पावर प्रेजेंटेशन के माध्यम से योजना का पक्ष रखा गया। उल्लेखनीय है कि इससे एक दिन पूर्व 7 जनवरी को स्थानीय विधायक द्वारा भी इसी विषय पर पत्रकार वार्ता की जा चुकी है।

    लगातार हो रही पत्रकार वार्ताओं से यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार आजीविका मिशन से जुड़े इस नए अधिनियम को लेकर स्वयं भी असमंजस और दबाव में नजर आ रही है। मंत्री महोदय ने इसे “लोकतांत्रिक विमर्श” बताया, लेकिन सवाल यह उठता है कि यही लोकतांत्रिक विमर्श नोटबंदी, एकतरफा लॉकडाउन, किसान कानून और श्रम कानून लागू करते समय क्यों नहीं दिखाई दिया।

    पूरी योजना में जल और पानी को केंद्र में रखा गया है। इस संदर्भ में प्रसिद्ध समाज सुधारक रहीम का दोहा प्रासंगिक प्रतीत होता है—
    “रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून,
    पानी गए न ऊबरे, मोती मानस चून।”

    व्हीबी–जी राम जी योजना को कई योजनाओं का मिश्रण मात्र बताया जा रहा है। जिस तरह ठेले पर उपलब्ध तमाम व्यंजनों को देखकर ग्राहक भ्रमित हो जाता है और अंततः ‘गटपट’ मंगा लेता है, या रेस्तरां में ‘मिक्स वेज’ पर संतोष कर लेता है—कुछ वैसी ही स्थिति इस योजना की भी दिखाई देती है।

    मनरेगा को नए रूप में प्रस्तुत करते हुए इसे विकसित भारत की आधारशिला बताया जा रहा है, लेकिन विडंबना यह है कि बीते दस वर्षों में लाए गए ‘स्मार्ट सिटी’ जैसे बड़े कॉन्सेप्ट भी ज़मीनी हकीकत में पूरी तरह उतर नहीं पाए। उदाहरण के तौर पर बिलासपुर स्मार्ट सिटी को आज तक घोषित बजट का आधा हिस्सा भी प्राप्त नहीं हो सका।

    अब मनरेगा को भ्रष्ट व्यवस्था बताकर नए प्रयोगों के हवाले किया जा रहा है—मानो “बंदरों के हाथ में राम जी” सौंप दिए गए हों। ऐसे में जनता के बीच यह भाव और गहराता जा रहा है कि अब सब कुछ राम भरोसे ही है।

    इसी भाव को समेटते हुए अंत में यही पंक्तियाँ सटीक प्रतीत होती हैं—
    “जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए।”

    बिलासपुर नगर निगम एवं आसपास के क्षेत्रों के विकास को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित
    न्यायधानी बिलासपुर के समग्र विकास और मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को लेकर हुई व्यापक चर्चा

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में बिलासपुर नगर निगम एवं आसपास के क्षेत्रों के विकास को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में बिलासपुर शहर तथा बाह्य क्षेत्रों में संचालित एवं प्रस्तावित विकास कार्यों, मूलभूत सुविधाओं के विस्तार और निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तृत चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायधानी बिलासपुर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और बढ़ते शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए यहां संतुलित, समावेशी और योजनाबद्ध विकास आवश्यक है।
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की ओर अग्रसर है और इसी के अनुरूप शहरी अधोसंरचना को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रगतिरत योजनाओं को तय समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से स्वच्छ एवं नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और इससे जुड़ी परियोजनाओं पर गंभीरता से कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिलासपुर को उद्योग एवं पर्यटन की दृष्टि से प्राथमिकता में रखते हुए विकास की योजनाएं तैयार की जाएं। श्री साय ने बताया कि पिछले दो वर्षों में सरकार द्वारा निरंतर नए विकास कार्यों को स्वीकृति दी गई है। साथ ही आने वाला बजट भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगा और इसके माध्यम से “विकसित छत्तीसगढ़” की संकल्पना भी साकार होगी। उन्होंने कहा कि विभागों के आपसी समन्वय से ही बेहतर परिणाम सामने आएंगे और गांवों के साथ-साथ शहरों के विकास में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
    बैठक में सड़क, पुल-पुलिया, पेयजल, ड्रेनेज, प्रदूषण मुक्त शहर, यातायात व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल एवं युवा कल्याण, आवास, ई-बस सेवा, हवाई यातायात, ट्रांसपोर्ट नगर, उद्योग एवं व्यापार, पर्यटन तथा अरपा विशेष क्षेत्र विकास परियोजना (अरपा साडा) से जुड़े विषयों पर बिंदुवार मंथन किया गया और विभिन्न विषयों पर सहमति भी बनी। इसमें सिम्स के नए अस्पताल भवन के लिए एएस जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को पीपीपी मोड पर संचालित करने का निर्णय लिया गया। बिलासपुर एयरपोर्ट के विस्तार हेतु डिफेंस को राशि हस्तांतरित किए जाने की जानकारी दी गई, जिस पर जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। साथ ही एयरपोर्ट के अन्य विकास कार्यों एवं नाइट लैंडिंग सुविधा को शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिए गए। ट्रांसपोर्ट नगर सिलपहरी के विकास का कार्य सीएसआईडीसी द्वारा किए जाने तथा भूमि हेतु आवेदन प्रस्तुत करने पर सहमति बनी। उसलापुर रेलवे ओवरब्रिज के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने और इसे आगामी बजट में शामिल करने का निर्णय लिया गया।
    इसके अतिरिक्त बिलासपुर के राजीव गांधी चौक, नेहरू चौक, महामाया चौक (वाय आकार) - रतनपुर मार्ग तक 305 करोड़ की लागत से फ्लाई ओवर ब्रिज निर्माण, पुराना बस स्टैंड चौक पर सीएमडी चौक-इमलीपारा रोड-टैगोर चौक-जगमल चौक तक 115 करोड़ की लागत से फ्लाई ओवर का निर्माण, एफसीआई गोडाउन व्यापार विहार क्षेत्र को सिरगिट्टी-महमंद बायपास से जोड़ने हेतु 320 करोड़ की लागत से तारबहार फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार शहर के यातायात दबाव को कम करने हेतु 950 करोड़ की लागत से फोरलेन बिलासपुर रिंग रोड निर्माण के लिए एनएचएआई की सहमति के आधार पर लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रस्ताव भेजने पर सहमति बनी। खारंग जलाशय में पाराघाट व्यपवर्तन योजना के लिए 328 करोड़ रुपये, नगर निगम क्षेत्र में अरपा नदी के एसटीपी एवं ड्रेनेज कार्यों के लिए 252 करोड़ रुपये तथा बिलासपुर शहर की जलभराव समस्या के समाधान हेतु आपदा प्रबंधन निधि से 150 करोड़ रुपये दिए जाने की सहमति बनी। बिलासपुर में कैंसर अस्पताल के लिए टाटा मेमोरियल अस्पताल से चर्चा करने, कानन पेंडारी के सामने अंडरपास निर्माण, कोनी से बिरकोना–खमतराई–बहतराई मार्ग के निर्माण, 24×7 जल आपूर्ति योजना हेतु डीपीआर तैयार करने तथा अरपा साडा क्षेत्र के विकास के लिए टीएनसीपी एवं जिला अधिकारियों की बैठक कर पूर्व योजनाओं पर चर्चा तथा इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
    बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, विधायक अमर अग्रवाल, विधायक सुशांत शुक्ला, विधायक धरमलाल कौशिक, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह तथा विभिन्न विभागों के सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

         बिलासपुर/ शौर्यपथ /
    आज क्रिसमस मनाया जा रहा है बहुत से नेता जिनमे छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी शामिल है ने मसीह समाज को क्रिसमस की शुभकामनाएं दी पर यह कैसा क्रिसमस एक तरफ हिंदूवादी संगठनों ने 24 तारीख को छत्तीसगढ़ बंद किया और त्योहार की चमक को फीका कर दिया इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ में सीडीबीई के 19 स्कूल ये 19 स्कूल ईसाई समाज के इनमें 100 साल पुरानी परंपरा की क्रिसमस के पहले वेतन दे दिया जाता है। पर यह परंपरा साय की नौकरशाही ने तोड़ दी, एक माह पूर्व इन स्कूलों पर शासन के आदेश से प्रशासक नियुक्त हुआ है तो वेतन के देयक उसके हस्ताक्षर से ही बैंक पहुंचेंगे 19 स्कूल अलग-अलग जिलों में है हर जिले के स्कूल प्राचार्यों ने वेतन बिल बनाकर सीडीबीई के कार्यालय रायपुर पहुंचाएं और वहां से हस्ताक्षर होने के लिए रायपुर एसडीएम के पास पहुंचे पर टाल मटोल करते हुए अधिकारियों ने हस्ताक्षर नहीं किये।
    19 स्कूल में शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिला और वे कर्मचारी जो क्रिश्चियन है घर का चूल्हा त्यौहार ठंडा हो गया। क्या इसे ही सब का साथ कहा जा सकता है। पहले क्रिसमस के पूरे सौहार्द पूर्ण वातावरण को हिंदू संगठनों द्वारा सुनियोजित तरीके से बिगड़ गया व्यापारिक प्रतिष्ठानों में रखे क्रिसमस ट्री सांता क्लाज के स्टैचू को छती पहुंचाई गई 24 दिसंबर को ही छत्तीसगढ़ बंद रखा गया और अंतिम प्रहर की 19 स्कूलों का वेतन वितरण नहीं हुआ यह कैसी सरकार है।

       बिलासपुर / शौर्यपथ / बिलासपुर के बहतराई स्टेडियम में आज छत्तीसगढ़ राज्य युवा महोत्सव का शानदार शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस आयोजन का उद्घाटन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया। उन्होंने युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और सामथ्र्य को सलाम करते हुए कहा कि "युवा ही देश और प्रदेश का भविष्य हैं" और सरकार हर क्षेत्र में उन्हें नए अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।
    उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026 के शुभंकर 'मोर वीरÓ, थीम सॉन्ग और खेलो इंडिया टॉर्च का अनावरण किया। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण से हुई। अबूझमाड़ के युवा खिलाडिय़ों ने शानदार मलखंब प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया।
    मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि- मलखंब खिलाडिय़ों को 1लाख रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।खेलो इंडिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाडिय़ों को भी प्रोत्साहन राशि मिलेगी।अमेरिका गॉट टैलेंट में चयनित मलखंब खिलाड़ी अनतई पोटाई के अमेरिका आने-जाने का पूरा खर्च राज्य सरकार देगी।
    उन्होंने बताया कि इस युवा महोत्सव में प्रदेश के 3,000 से अधिक युवा शामिल हुए हैं, जो 14 सांस्कृतिक और 6 साहित्यिक एवं व्यक्तिगत प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं। विजेता प्रतिभागी आगामी वर्ष नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय युवा उत्सव में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगे।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हजार युवाओं की सहभागिता यह साबित करती है कि राज्य तीव्र गति से विकास और शांति की ओर बढ़ रहा है। जनजातीय क्षेत्रों की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने का संकल्प सरकार ने पुन: दोहराया।
    कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा ने भी युवाओं को संबोधित किया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सरगुजा में आगामी समय में ओलंपिक स्तर के खेल आयोजन कराने की घोषणा की। बदलते हुए छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति आज नए उत्साह और नई उमंग के साथ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान दर्ज कराने के लिए तैयार दिखी।

    बिलासपुर । शौर्यपथ
    परियोजना प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों की आधारभूत आवश्यकताओं को मजबूत करते हुए एनटीपीसी सीपत द्वारा कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के अंतर्गत किए जा रहे ₹6.25 करोड़ के विकास कार्यों का उद्घाटन और भूमिपूजन ग्राम पंचायत कर्रा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ₹4.53 करोड़ की लागत से पूर्ण 12 विकास कार्यों का लोकार्पण और ₹1.72 करोड़ के चार नए प्रस्तावित कार्यों का भूमिपूजन संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय राज्य मंत्री (आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय) तथा बिलासपुर सांसद श्री तोखन साहू ने इन कार्यों का विधिवत उद्घाटन किया। कार्यक्रम में मस्तूरी विधायक श्री दिलीप लहरिया, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, पूर्व विधायक डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, एवं एनटीपीसी सीपत के परियोजना प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक श्री विजय कृष्ण पाण्डेय विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

    कई गांवों में दर्जनों विकास कार्य पूरे

    एनटीपीसी सीपत ने अपने CSR कार्यक्रम के तहत परियोजना प्रभावित ग्राम पंचायतों—कर्रा, सीपत, गतौरा, रलिया, जांजी, देवरी, कौड़िया, रांक और दर्राभाटा—में कुल 12 विकास कार्य पूरे किए हैं, जिनमें

    आधारभूत संरचना निर्माण,तालाबों का पुनरुद्धार,शिक्षा सुविधाओं का विस्तारजैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल हैं।साथ ही चार नए विकास कार्यों के लिए भूमिपूजन किया गया।

    “सीएसआर ग्रामीण विकास की रीढ़” — केंद्रीय मंत्री तोखन साहू

    मुख्य अतिथि श्री तोखन साहू ने कहा कि एनटीपीसी सीपत द्वारा किए जा रहे कार्यों से क्षेत्रीय विकास को ठोस आधार मिला है। उन्होंने कहा कि “सीएसआर केवल एक दायित्व नहीं, बल्कि समावेशी विकास का मार्ग है।”
    उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ स्थित एनटीपीसी सीपत देश के कई राज्यों को विद्युत आपूर्ति कर रहा है और निर्माणाधीन 800 मेगावाट की नई इकाई से इसकी राष्ट्रीय भूमिका और सशक्त होगी।

    जनप्रतिनिधियों ने सराहा विकास मॉडल

    मस्तूरी विधायक श्री दिलीप लहरिया ने कहा कि ग्राम स्तर पर बुनियादी सुविधाओं का विस्तार ही समग्र विकास का वास्तविक मार्ग है और एनटीपीसी इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

    जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी ने कहा कि सीएसआर के ये कार्य ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।

    पूर्व विधायक डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी एवं जनपद अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती देवी ने कौशल विकास और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐसे प्रयासों को अत्यंत आवश्यक बताया।

    एनटीपीसी की प्रतिबद्धता

    परियोजना प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक श्री विजय कृष्ण पाण्डेय ने एनटीपीसी सीपत द्वारा संचालित CSR गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत करते हुए सामाजिक विकास के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता दोहराई तथा सभी अतिथियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के प्रति आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में एनटीपीसी सीपत के वरिष्ठ अधिकारी, जिला एवं जनपद पंचायत सदस्य, अनेक ग्राम पंचायतों के सरपंच, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सक्रिय सहभागिता के साथ कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

    बिलासपुर / शौर्यपथ /
    हालांकि अब रेलवे स्टेशन पर कुली जो लाल शर्ट पहना था अब उतना उपयोगी नहीं है जितना कि पहले कभी होता था। पर संख्या की दृष्टि से देखे तो बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर 152 कुली दर्ज है। इसके आराम के लिए पार्सल ऑफिस के पास एक छोटा सा कमरे की व्यवस्था है जो की बिल्कुल भी ठीक नहीं है। बैठने के लिए एक 3 सीटर स्टील की चेयर, सीमेंट का एक प्लेटफार्म और इस कमरे में प्रसाधन तीन पंखे क्या 152 कुली के लिए देश के सर्वाधिक कमाऊ जोन के लिए डीआरएम वाले स्टेशन बिलासपुर को मानव अधिकारों की तनिक भी परवाह नहीं है।

     

     बिलासपुर / शौर्यपथ /
    बिलासपुर स्टेशन पर अन्य स्थान की अपेक्षा स्टे इन की सफाई और चमक देखते ही बनती है। असल में यह आईआरसीटीसी का रिटर्निंग रूम है इसका संचालन मेजर्स दिनसा और रंजीत होटल प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा हो रहा है। प्रथम फ्लोर पर स्थित एसी डॉरमेट्री और कमरे सुसज्जित आरामदायक खुशबू नुमा एहसास देते हैं। यह आराम यात्रा की थकान को कुछ घंटे में ही गायब कर देते हैं।
    रिटर्निंग रूम की बुकिंग ऑनलाइन ऑफलाइन तरीके से की जा सकती है। डोर मैट्रिक में बड़ा एरिया आकर्षक है और मनोरंजन के सुविधा से लैस है। डोर मैट्रिक के केबिन में एक यात्री के लिए बिस्तर, आईना, मोबाइल चार्जर , पंखा पर्याप्त है। एरिया एसी किराया 3 घंटे का 177 रुपए और 24 घंटे का 432 रुपए डोर मैट्रिक के लिए निर्धारित है। व्यक्तिगत कमरा सुरुचि पूर्ण तरीके से सजाया हुआ है। कमरे में टीवी के अतिरिक्त एक सुविधा और है छोटा सा फ्रिज कमरे का किराया 3 घंटे के 444 रुपए 12 घंटे के 1284 और 24 घंटे के लिए 1599 रुपए यह किराये बाजार के स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक हैं। हालांकि यह सुविधा कितने दिन रहेगी नहीं कहा जा सकता क्योंकि बिलासपुर स्टेशन का विकास हवाई अड्डे की तर्ज पर हो रहा है तो यह रिटर्निंग रूम की सुविधा भी किसी अन्य जगह चली जाएगी।

     

    बिलासपुर से दिव्यांग सोनी की ख़ास रिपोर्ट
    बिलासपुर / शौर्यपथ / शहर का पुराना बस स्टैंड इलाका आज अवैध गतिविधियों का पर्याय बन चुका है। एक समय जहां यह क्षेत्र यात्रियों और व्यापारियों की आवाजाही से गुलजार रहता था,वहीं अब यहाँ खुलेआम नशे का कारोबार और अवैध चखना दुकानों की भरमार देखने को मिल रही है। क्षेत्र के लोग अब इसे “नशे का अड्डा” कहकर पुकारने लगे हैं।
    आबकारी अधिनियम के अनुसार, किसी भी अधिकृत शराब दुकान से 50 मीटर की परिधि में चखना दुकान या शराब सेवन स्थल संचालित करना पूर्णतः प्रतिबंधित है। मगर पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में यह नियम खुलेआम तोड़ा जा रहा है। दुकानदार बेखौफ तरीके से शराबियों को जगह-जगह बैठाकर चखना बेच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब आबकारी विभाग और पुलिस की मिलीभगत के बिना संभव ही नहीं हो सकता।
    स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इन दुकानों के चलते शाम ढलते ही यह क्षेत्र हुड़दंगियों और नशेड़ियों का अड्डा बन जाता है। आए दिन शराब के नशे में झगड़े,तोड़फोड़ और मारपीट की घटनाएँ होती रहती हैं। कई बार चाकूबाजी और गंभीर हिंसा तक के मामले सामने आ चुके हैं,लेकिन फिर भी प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
    नगर निगम ने कुछ समय पहले रेन बसेरा की दीवारें तोड़ दी थीं,जिसके बाद वहाँ खाली पड़ी जगह पर शराबियों ने स्थायी अड्डा बना लिया। अब यह इलाका दिन में भी असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बना रहता है। भगत लॉज के नीचे स्थित व्यापारियों ने बताया कि नशेड़ियों के आतंक से उनका व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुआ है — ग्राहक अब इस रास्ते से गुजरना भी पसंद नहीं करते।
    वहीं,स्थानीय युवाओं और अभिभावकों ने बताया कि अब यहाँ सिर्फ शराब ही नहीं,बल्कि गांजा,नाइट्रा टैबलेट,कफ सिरप और अन्य नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री हो रही है। कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद कार्रवाई न होने से लोग अब निराश हैं। “अगर आबकारी और पुलिस विभाग चाहें तो 24 घंटे के भीतर ये दुकानें बंद हो सकती हैं,लेकिन विभागीय संरक्षण के चलते यह धंधा लगातार चल रहा है,” एक व्यापारी ने नाराजगी जताई। शहर के बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्रशासन यदि समय रहते कदम नहीं उठाएगा तो यह क्षेत्र कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
    हालांकि पुलिस अधीक्षक रजनीश सिंह ने हाल के दिनों में नशे के खिलाफ सख्त अभियान चलाने के निर्देश जारी किए हैं,लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर अभी तक नज़र नहीं आ रहा। स्थानीय निवासियों ने जिला प्रशासन,पुलिस और आबकारी विभाग से तत्काल संयुक्त कार्रवाई की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि पुराने बस स्टैंड क्षेत्र की साख बचाने के लिए आवश्यक है कि यहाँ से अवैध दुकानों,नशे के अड्डों और असामाजिक तत्वों को जल्द से जल्द हटाया जाए।

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision