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Shourya Path News - धान का कटोरा और धान के किसान हमारी पहचान है, अर्थव्यवस्था की धूरी है, इसे मिटाने पर तुली है सरकार Google Analytics —— Meta Pixel
June 20, 2026
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धान का कटोरा और धान के किसान हमारी पहचान है, अर्थव्यवस्था की धूरी है, इसे मिटाने पर तुली है सरकार

  • rounak group
   रायपुर/ । धान के अलावा अन्य फसल लेने पर 15000 रू. प्रति क्विंटल देने के फैसले को भेदभाव पूर्ण और धान के किसान विरोधी बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, धान के किसान हमारी पहचान है, प्रदेश के अर्थव्यवस्था की धूरी है, भाजपा की सरकार दुर्भावना पूर्वक इसे मिटाने पर तुली है। आखिर इस सरकार को धान के किसानों से इतनी हिकारत क्यों? प्रदेश का जनवायु और मानसून धान के अनुकूल है। दलहन, तिलहन एवं अन्य फसल लेने के लिये न किसानों की तैयारी है, न ही वातावरण अनुकूल। सरकार पहले जो खाद का संकट सामने खड़ा है, उसका निराकरण करे।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार का फैसला अव्यावहारिक है। धान के खेत में तिली, राहेर, कोदो, कुटकी, रागी, कपास, उड़द, मूंग कैसे बोयेंगे किसान? क्या किसान मेढ़ पार फोड़ कर, धान के खेत को पाट कर भर्री बना दे? छत्तीसगढ़ में मानसून, वर्षा, मिट्टी, जलवायु, धान के खेती के अनुकूल है, जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराने में नाकाम सरकार अपनी अक्षमता छुपाने अब 15 हजार का प्रलोभन दे रही है, पहले अन्य फसलो की समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था करें सरकार।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि यह सरकार खाद नहीं दे पा रही है इसलिए प्रलोभन दे रही है। पिछले तीन साल में धान की एमएसपी वृद्धि का लाभ पहले ही किसानों से छीन लिया गया है, साय सरकार आने के बाद 117 फिर 69 और 72 रुपए की वृद्धि धान के एमएसपी में हो चुकी है कुल 258 रुपए बढ़े है लेकिन यह सरकार 3358 की जगह केवल 3100 रुपए प्रति क्विंटल ही दे रही है, आगे भी धान की कीमत बढ़ाने का इरादा इस सरकार का नहीं है जबकि कृषि लागत पिछले ढाई साल में 12 से 15 हजार रुपए प्रति एकड़ बढ़ चुका है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार बताये, खरीफ के लिये कितने उर्वरको की व्यवस्था हो पाई है? सरकार का खुद का दावा है कि लक्ष्य 15 लाख 54 हजार मीट्रिक टन के लक्ष्य के विपरीत केवल 11 लाख 11 हजार मीट्रिक टन का कुल भंडारण है, जिसमें से अभी तक कुल केवल 4 लाख 11 हजार मीट्रिक टन का वितरण हुआ है जो कुल डिमांड का मात्र 26 प्रतिशत है। सोसायटियों तक पर्याप्त खाद कब तक पहुंचेगा? सरकार किसानों के लिये आवश्यक यूरिया डीएपी की व्यवस्था करे।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि मोदी निर्मित महंगाई के कारण खेती की लागत बढ़ गई है, डीजल महंगा होने से जुताई, मताई, हार्वेस्टिंग की लागत 20 प्रतिशत बढ़ गया है, खाद बीज के दाम बढ़ाए, पोटास एन पी के महंगा हुआ है, एक तरफ यह सरकार एनपीके को डीएपी का विकल्प बता रही है, दूसरी तरफ एन पी के और पोटास के दाम में 15 और 30 प्रतिशत की वृद्धि कर देती है, यह कैसा विकल्प? यह तो किसानों पर दुगुना आर्थिक बोझ है। कृषि की लागत पिछले साल की तुलना में कम से कम 12 से 15 हजार रुपए प्रति एकड़ बढ़ गई है। वैकल्पिक खाद, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी की गुणवत्ता पर किसानों को भरोसा नहीं है। भाजपा की सरकार में छत्तीसगढ़ नकली खाद नकली बीज अमानत दावों को खपाने का संरक्षण स्थल बन चुका है सत्ता के संरक्षण में जमकर कालाबाजारी हो रही है किसान शोषण के शिकार हैं। कीटनाशक के दाम बढ़ाए, लेकिन धान के एम एस पी में वृद्धि का लाभ किसानों को नहीं मिलेगा? कांग्रेस ने 2500 का दावा करके 2640 और 2660 रुपए दिया यह सरकार एम एस पी वृद्धि को खुद ही खा रही है। यह सरकार तरह-तरह के बहाने बनाकर अड़ंगे लगा रही है। किसानों को पिछले खरीफ सीजन में दिए गए डीएपी की मात्रा से 40 प्रतिशत और यूरिया में 20 प्रतिशत कम देने का तुगलकी फरमान जारी किया गया है। सहकारी समितियों से खाद का कोटा तय करके (प्रति एकड़ के हिसाब से) कम खाद का वितरित किया जा रहा है। पिछले साल तक किसानों को सोसायटी से नगदी और सामग्री का अनुपात 60रू40 था जिसे अब घटाकर 70रू30 कर दिया गया है अर्थात खाद बीज (सामग्री) लेने की की लिमिट 10 प्रतिशत घटा दिया गया है। यदि राहत देना है तो बिना भेदभाव के सभी किसानों को 15 हजार प्रति एकड़ की दर से इनपुट सब्सिडी दे सरकार।

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