August 13, 2026
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    आपदाओं से मुकाबला

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                 सम्पादकीय / शौर्यपथ /एक दुख हो या एक सुख, दोनों में से कोई अकेले नहीं आता। एक दुख के साथ कुछ अन्य दुख और एक सुख के साथ कुछ अन्य सुख अनायास आते हैं। बंगाल की खाड़ी से उठा तूफान अम्फान भी एक ऐसा दुख है, जो कोरोना के सतत होते दुख में शामिल होने आ गया है। इस तूफान पर सबकी नजर है। अम्फान को लेकर सकारात्मक बात यह है कि दुनिया भर के मौसम विज्ञानियों ने 14 मई के आसपास ही इससे बढ़ते खतरे का अंदाजा लगा लिया था। पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटीय इलाकों से जो खबरें आई हैं, उनसे पता चलता है, छह लाख से ज्यादा लोगों को प्रभावित होने वाले इलाकों से पहले ही निकाल लिया गया। लोगों को सचेत रहने के लिए कहा गया। ऐसा समुद्री तूफान 1999 के बाद से भारत में नहीं उठा था और यह भारत के साथ-साथ बांग्लादेश में भी तबाही की वजह बन सकता है। तूफान की गति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रेलगाड़ियों के डिब्बों को लोहे की चेन से बांधना पड़ा। तूफान की रफ्तार 200 किलोमीटर प्रति घंटा तक जाने की आशंका है। बहरहाल, पूर्व सूचना और सचेत होने का फायदा यह होगा कि जान का नुकसान कम से कम होगा, लेकिन माली नुकसान का आकलन आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
    आखिर क्यों उठते हैं ऐसे खतरनाक तूफान? वैज्ञानिक अध्ययनों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि जैसे-जैसे समुद्री जल गरम होता जाएगा, समुद्र से उठने वाले तूफानों की भयावहता बढ़ती जाएगी। 1979 से लेकर 2017 के बीच उठे तूफानों के सैटेलाइट आंकड़ों से पता चलता है, 185 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा की रफ्तार वाले घातक तूफानों की संख्या बढ़ती जा रही है। भौतिक विज्ञान पहले ही इस तथ्य को उजागर कर चुका है कि समुद्र अगर एक डिग्री सेल्सियस गरम होता है, तो उस पर चलने वाली हवाओं की रफ्तार में पांच से दस प्रतिशत की वृद्धि होती है। अब सवाल है, समुद्र का तापमान क्यों बढ़ रहा है, तो इसके जवाब पर भी फिर गौर कर लेना चाहिए, पर्यावरण में ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन के कारण पृथ्वी गरम हो रही है। कोरोना के दिनों में लॉकडाउन की वजह से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम हुआ है, जिसके कुछ फायदे साफ दिख रहे हैं। हमें ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को स्थाई रूप से कम करते जाने की पुख्ता व्यवस्था करनी पडे़गी, यह काम हम इंसानों के वश में है।
    आज तूफान और कोरोना के बीच जो लोग संबंध देख रहे हैं, तो वे गलत नहीं हैं। देश के अन्य हिस्सों की तरह पश्चिम बंगाल व ओडिशा में कोरोना की वजह से लोग पहले ही परेशान हैं और अब तूफान की आपदा से बचने की कोशिश में फिजिकल डिस्र्टेंंसग का कितना पालन हो सकेगा, कहना मुश्किल है। इन दोनों राज्यों की सरकारों और देश के लिए दोहरी चुनौती पैदा हो गई है। लोगों को आपदा से भी बचाना है और कोरोना से भी। यदि छह लाख से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं, तो यकीन मानिए, सबको संभालने के लिए राहत शिविरों में सावधानी और इंतजाम के पहले के तमाम कीर्तिमान तोड़ने पड़ेंगे। यह समय कदम-कदम पर चुनौती खड़ी कर रहा है और हमें प्रेरित कर रहा है कि हम अपनी और पृथ्वी की सुरक्षा के लिए सोलह आना ईमानदारी से काम करें। आपदाएं आएंगी-जाएंगी, इंसान जीतता रहा है, जीतता रहेगा।

     

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