August 13, 2026
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    योगिनी एकादशी 24 को और आषाढ़ द्वादशी व्रत 25 जून को, दोनों दिन होती है भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा

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           धर्म संसार /शौर्यपथ /निर्जला एकादशी के बाद और देवशयनी से पहले आने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी कहा गया है। ये आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष में आती है। इस बार 24 जून, शुक्रवार को रहेगी। इस दिन भगवान विष्णु के वामन रूप और योगीराज श्रीकृष्ण की पूजा करने का विधान बताया गया है।
    इस व्रत से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं और 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन करवाने का पुण्य फल मिलता है। इसके अगले दिन द्वादशी तिथि रहेगी। इसलिए इन दोनों दिनों में भगवान विष्णु की पूजा और व्रत-उपवास किए जाएंगे।
    तीन शुभ योगों में एकादशी व्रत
    24 जून, शुक्रवार को तीन शुभ योगों में एकादशी व्रत शुरू होगा। इस दिन सूर्योदय के समय सुकर्मा, सर्वार्थसिद्धि और लक्ष्मी नारायण योग रहेगा। इन योगों में व्रत का संकल्प लेना शुभ रहेगा। गुरु, शुक्र और शनि, तीनों ग्रह अपनी ही राशियों में रहेंगे। इससे सितारों की शुभ स्थिति में शुरू हुए इस व्रत का पुण्य तीन गुना हो जाएगा। शुक्रवार को एकादशी होने का विशेष महत्व है। इस दिन एकादशी व्रत रखने से घर में सुख, शांति, समृद्धि आती है।
    त्रिपुष्कर योग में द्वादशी व्रत
    आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि 25 जून, शनिवार को रहेगी। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर पानी में गंगाजल और तिल मिलाकर नहाते हैं। इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प लिया जाता है। फिर व्रत रखकर भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करते हैं। पीपल में भी जल चढ़ाते हैं। दिनभर जरुरतमंद लोगों को दान किया जाता है। इस तिथि के स्वामी खुद भगवान विष्णु ही हैं। इसलिए द्वादशी तिथि पर इनकी विशेष पूजा करने का विधान है।
    आषाढ़ मास के देवता हैं वामन
    स्कंद पुराण के मुताबिक आषाढ़ महीने में भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करने का विधान है। क्योंकि इस महीने के देवता भगवान वामन ही हैं। इसलिए आषाढ़ मास की दोनों एकादशी और द्वादशी तिथियों पर भगवान वामन की विशेष पूजा और व्रत करने की परंपरा है। वामन पुराण के मुताबिक आषाढ़ महीने के दौरान भगवान विष्णु के इस अवतार की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। संतान सुख मिलता है, जाने-अनजाने में हुए पाप और शारीरिक परेशानियां भी खत्म हो जाती हैं।

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