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स्कूल शिक्षा विभाग के कड़े निर्देश- 15 जून तक पूरे करें मरम्मत के कार्य, प्रिंट-रिच और आकर्षक बनाए जाएंगे स्कूल
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्य सरकार विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ, सुंदर और गुणवत्तापूर्ण माहौल तैयार करने जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (हृश्वक्क 2020) के अनुरूप, प्रदेशभर में 16 जून 2026 से शाला प्रवेश उत्सव 2026 का गरिमामय आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने मंत्रालय महानदी भवन (नवा रायपुर) से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
गांवों और शहरों में होगी मुनादी, जनभागीदारी पर जोर
प्रवेश उत्सव को एक उत्सव का रूप देने के लिए इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके तहत गांवों और शहरी वार्डों में मुनादी कराई जाएगी। बैनर-पोस्टर और रैलियों के जरिए जागरूकता बढ़ाई जाएगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शाला विकास समितियों और पालकों (अभिभावकों) की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
विभाग ने निर्देश दिया है कि स्कूल खुलने से पहले भवनों, परिसरों और कक्षाओं की पूरी साफ-सफाई और आवश्यक मरम्मत कर ली जाए। मरम्मत योग्य भवनों का काम 15 जून 2026 तक हर हाल में पूरा करने को कहा गया है ताकि बच्चों को एक आकर्षक और प्रिंट-रिच (शैक्षणिक चित्रों और दीवारों पर लिखी जानकारियों से लैस) वातावरण मिल सके।
शाला त्यागी बच्चों की वापसी और अगली कक्षा में सीधा प्रवेश
प्रवेश प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया है। कक्षा पहली में आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों की सूची प्राप्त कर सीधे स्कूलों में प्रवेश दिया जाएगा। कक्षा छठवीं में प्राथमिक शालाओं से कक्षा 5वीं उत्तीर्ण छात्रों की सूची और टीसी (स्थानांतरण प्रमाण-पत्र) लेकर कक्षा 6वीं में उनका दाखिला सुनिश्चित किया जाएगा। शाला त्यागी बच्चे, जो बच्चे पढ़ाई छोड़ चुके हैं, उन्हें ढूंढकर दोबारा मुख्यधारा से जोडऩे पर विशेष जोर रहेगा। इसके अलावा, स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की 100 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा शिक्षकों के लंबित मामलों का त्वरित निपटारा करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी विषय शिक्षकों को आगामी तीन महीनों का शैक्षणिक रोडमैप भी तैयार करना होगा।
मिलेगी मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल
उत्सव के दौरान स्कूल पहुंचने वाले नवप्रवेशी बच्चों का तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया जाएगा। इस मौके पर पात्र छात्रों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें (किताबें), स्कूल गणवेश (यूनिफॉर्म), साइकिल का वितरण किया जाएगा। बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में टॉप करने वाले होनहार विद्यार्थियों और उत्कृष्ट पालकों को भी सम्मानित किया जाएगा। इस अभियान में स्थानीय समुदाय, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, स्व-सहायता समूहों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सहयोग लिया जाएगा। इच्छुक नागरिक अपनी ओर से बच्चों को स्लेट, पेंसिल, कॉपी, कंपास बॉक्स और स्कूल बैग जैसी सामग्रियां भी दान कर सकेंगे।
स्थानीय संसाधनों से होगा आयोजन
स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि शाला प्रवेश उत्सव के लिए कोई पृथक (अलग से) बजट जारी नहीं किया जाएगा। इसका आयोजन जिलों में पहले से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से ही करना होगा। कार्यक्रम के सुचारू संचालन के लिए संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक, प्राचार्य डाइट, विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों को विद्यालयों का सतत निरीक्षण कर आवश्यक अकादमिक मार्गदर्शन प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने उम्मीद जताई है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी छात्रहित में व्यक्तिगत रुचि लेकर इस अभियान को सफल बनाएंगे, जिससे नए शिक्षा सत्र 2026-27 में प्रदेश को बेहतर शैक्षणिक परिणाम हासिल हो सकें।
मनपसंद समितियों को प्राथमिकता देने और कथित लेन-देन के आरोपों पर स्वाभिमान मंच ने संभाग आयुक्त से की शिकायत
दुर्ग। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेह प्रशासन को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्रत्येक योजना का लाभ निष्पक्षता के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं में किसी प्रकार का भेदभाव या मनमानी न हो। इसके बावजूद कुछ विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली शासन की इस सकारात्मक छवि को धूमिल करने का प्रयास करती दिखाई दे रही है।
इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरन लाल साहू ने दुर्ग संभाग के आयुक्त को एक विस्तृत शिकायत सौंपते हुए जिला विपणन कार्यालय (DMO), दुर्ग में धान उठाव एवं डिलीवरी ऑर्डर (DO) जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पक्षपातपूर्ण रवैये तथा संदिग्ध कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
शिकायत के अनुसार जिले की सेवा सहकारी समितियों द्वारा किसानों से धान का उपार्जन कर शासन को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और किसानों को उनके धान का भुगतान भी प्राप्त हो चुका है। वर्तमान विवाद किसानों के भुगतान से नहीं, बल्कि समितियों से धान उठाव एवं मिलरों को DO जारी करने की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है।
स्वाभिमान मंच का आरोप है कि DMO कार्यालय में DO जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं दिखाई दे रही है। शिकायत में कहा गया है कि कई समितियां नियमों के अनुरूप अपने क्रम की प्रतीक्षा कर रही हैं, लेकिन उन्हें समय पर DO नहीं मिल पा रहा है। वहीं कुछ चुनिंदा समितियों एवं मिलरों को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे विभागीय निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है तथा समितियों के बीच असंतोष का वातावरण निर्मित हो रहा है।
शिकायत में विशेष रूप से DMO कार्यालय में पदस्थ कंप्यूटर ऑपरेटर कमल चंद्राकर की भूमिका का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि DO वितरण की प्रक्रिया में मनमानी एवं पक्षपातपूर्ण निर्णय लिए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने आशंका व्यक्त की है कि कुछ समितियों और मिलरों को प्राथमिकता देने के पीछे कथित आर्थिक लेन-देन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी, लेकिन शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है।
स्वाभिमान मंच का कहना है कि यदि DO वितरण और धान उठाव की प्रक्रिया में इसी प्रकार का भेदभाव जारी रहा तो इसका सीधा प्रभाव सहकारी समितियों की वित्तीय एवं संचालन क्षमता पर पड़ सकता है। कई समितियां निर्धारित समय पर धान उठाव नहीं होने के कारण अतिरिक्त प्रबंधन संबंधी समस्याओं का सामना कर रही हैं। ऐसी स्थिति में शासन की योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने वाली समितियों का मनोबल भी प्रभावित होने की आशंका है।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि पूर्व में भी कुछ समितियों के बीच DO वितरण को लेकर असंतोष की स्थिति बनी थी। ऐसे में आवश्यक है कि पूरे मामले की विभागीय स्तर पर गहन जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि DO जारी करने की प्राथमिकता किन मानकों के आधार पर तय की जा रही है और कहीं किसी स्तर पर पक्षपात या अनियमितता तो नहीं हो रही।
पूरन लाल साहू ने संभाग आयुक्त से मांग की है कि जिले की सभी धान उठाव प्रभावित समितियों से संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए, DO वितरण की प्रक्रिया का ऑडिट कराया जाए तथा शिकायत में नामित कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए DO प्रणाली को पूर्णतः ऑनलाइन, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए, जिससे किसी भी व्यक्ति विशेष की मनमर्जी या हस्तक्षेप की गुंजाइश समाप्त हो सके।
प्रदेश में सुशासन और पारदर्शी प्रशासन को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को देखते हुए अब सभी की निगाहें संभागीय प्रशासन पर टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों में सत्यता पाई जाती है तो यह केवल एक कर्मचारी का मामला नहीं होगा, बल्कि पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय करने का विषय बन जाएगा। वहीं यदि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होती है तो इससे शासन की पारदर्शिता के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा समितियों के हितों की भी रक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
महापौर अलका बाघमार के सामने निष्पक्षता की अग्निपरीक्षा
दुर्ग। नगर पालिका निगम दुर्ग द्वारा हाल ही में शहर को पोस्टर-बैनर मुक्त बनाने और बिजली के खंभों, सार्वजनिक दीवारों तथा अन्य सरकारी संपत्तियों पर अवैध प्रचार सामग्री लगाने पर प्रतिबंध की घोषणा की गई है। 10 जून को जारी प्रेस विज्ञप्ति में निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस अभियान के दौरान एक सकारात्मक उदाहरण स्वयं महापौर अलका बाघमार ने प्रस्तुत किया था। अपने जन्मदिन के अवसर पर लगाए गए पोस्टर और बैनरों को उन्होंने हटवाकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि नियम सभी के लिए समान हैं और शहर की सुंदरता तथा स्वच्छता सर्वोपरि है।
लेकिन अब शहर की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा हो गया है। 15 जून को स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का जन्मदिन है और उनके समर्थकों द्वारा शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पोस्टर-बैनर लगाए जा रहे हैं। कई स्थानों पर बिजली के खंभों और सार्वजनिक स्थलों पर मंत्री के जन्मदिन की शुभकामनाओं वाले पोस्टर दिखाई दे रहे हैं।
ऐसे में नगर निगम की घोषित नीति और जमीनी स्थिति के बीच तुलना स्वाभाविक रूप से होने लगी है। शहर में चर्चा इस बात की है कि क्या निगम प्रशासन और महापौर अपने ही जारी निर्देशों का पालन कराते हुए इन पोस्टरों को भी हटवाएंगे, या फिर राजनीतिक दबाव और सत्ता समीकरणों के कारण नियमों के पालन में भेदभाव दिखाई देगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल पोस्टर-बैनर का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता और कानून के समान अनुपालन की परीक्षा भी है। यदि नियम बनाए गए हैं तो उनका पालन हर व्यक्ति, संगठन और राजनीतिक दल पर समान रूप से लागू होना चाहिए। वहीं यदि कार्रवाई नहीं होती है तो निगम प्रशासन की मंशा और उसकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठ सकते हैं।
अब सबकी निगाहें महापौर अलका बाघमार और निगम प्रशासन पर टिकी हैं। संविधान और कानून के प्रति समान निष्ठा की बात करने वाली शहरी सरकार क्या अपने ही आदेशों को प्रभावी ढंग से लागू करेगी, या फिर यह मामला भी राजनीतिक अपवाद बनकर रह जाएगा? आने वाले दिनों में निगम का कदम इस प्रश्न का उत्तर तय करेगा।
(नोट: यह विषय सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर-बैनर संबंधी नियमों के समान अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा राजनीतिक-प्रशासनिक प्रश्न है।)
कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिला मुख्यालय में इन दिनों पेट्रोल और डीजल की अचानक कमी से आम जनता और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म होने की स्थिति बन गई है, वहीं कुछ पंपों को अस्थायी रूप से बंद भी करना पड़ा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह से ही कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कई उपभोक्ताओं को घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इस स्थिति ने परिवहन व्यवस्था के साथ-साथ कृषि कार्यों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
मामले की पड़ताल के लिए आसपास के जिलों—कांकेर, नारायणपुर और जगदलपुर—में संपर्क किया गया, जहां से जानकारी मिली कि वहां पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है और सामान्य रूप से आपूर्ति जारी है। ऐसे में कोंडागांव में ही इस तरह की किल्लत सामने आना कई सवाल खड़े कर रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब आसपास के जिलों में पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है, तो कोंडागांव में कमी क्यों? क्या यह कृत्रिम संकट पैदा कर कीमत बढ़ने की आशंका में ईंधन का भंडारण (डंपिंग) किया जा रहा है? या फिर कालाबाजारी के लिए आपूर्ति को जानबूझकर रोका जा रहा है?
इस मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आम नागरिकों और किसानों ने जिला प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित करने और ईंधन की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या का समाधान कितनी जल्दी करता है और जनता को राहत कब तक मिल पाती है।
1.242 किलो नकली सोने के बिस्किट, सिक्का, कार व मोबाइल जब्त; सस्ते दाम में सोना बेचने का लालच देकर बनाते थे शिकार
दुर्ग। जमीन में दबा खजाना मिलने की मनगढ़ंत कहानी सुनाकर लोगों को नकली सोना बेचने वाले अंतरजिला ठगी गिरोह का दुर्ग पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। थाना उतई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से करीब 1.242 किलोग्राम नकली सोने जैसे धातु के बिस्किट, एक नकली सिक्का, घटना में प्रयुक्त कार, मोबाइल फोन तथा अन्य साक्ष्य सामग्री बरामद की गई है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि बोरसी निवासी जितेंद्र साहू की शिकायत पर उतई थाना में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को यह विश्वास दिलाते थे कि उन्हें जमीन में गड़ा हुआ हंडा मिला है, जिसमें सोने के बिस्किट और प्राचीन सिक्के हैं। इसके बाद वे नकली धातु को असली सोना बताकर बाजार मूल्य से बहुत कम कीमत पर बेचने का लालच देते थे और लाखों रुपये की ठगी कर लेते थे।
पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, निगरानी और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर विभिन्न जिलों में दबिश दी और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस जांच में आरोपी पन्नालाल कुर्रे के खिलाफ इसी प्रकार की ठगी के अन्य मामलों की जानकारी मिली है। वहीं दिनेश कुमार टंडन के विरुद्ध पूर्व से मारपीट और संपत्ति संबंधी अपराध दर्ज पाए गए हैं।
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से सस्ते दाम में सोना-चांदी या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदने के लालच में न आने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि किसी भी लेन-देन से पहले वस्तु का सत्यापन अवश्य करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें।
तकनीकी साक्ष्यों और त्वरित कार्रवाई के आधार पर इस संगठित अंतरजिला ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है। मामले में आगे की जांच जारी है।
5 संस्थानों और व्यक्तियों को नोटिस जारी, 50 हजार रुपये जुर्माना की तैयारी
दुर्ग, । नगर पालिक निगम दुर्ग ने शहर की सुंदरता और सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए अवैध होर्डिंग एवं प्रचार सामग्री लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। निगम आयुक्त श्री सुमित अग्रवाल के निर्देश पर बाजार विभाग द्वारा चलाए गए विशेष निरीक्षण अभियान में बिजली खंभों, पेड़ों और सार्वजनिक संपत्तियों पर बिना अनुमति विज्ञापन लगाए जाने के कई मामले सामने आए।
निरीक्षण के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में बिजली के खंभों एवं पोलों पर निजी चिकित्सा संस्थानों के प्रचार संबंधी होर्डिंग लगाए गए पाए गए। वहीं शहर के उद्यानों की दीवारों तथा अन्य सार्वजनिक स्थलों का भी व्यावसायिक प्रचार-प्रसार के लिए उपयोग किया जा रहा था।
जांच में पेड़ों पर शैक्षणिक संस्थानों के प्रवेश संबंधी विज्ञापन तथा बिजली खंभों पर प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग से जुड़े प्रचार बोर्ड लगाए जाने की पुष्टि हुई। निगम अधिकारियों ने इसे नगर निगम अधिनियम एवं विज्ञापन नियमों का उल्लंघन मानते हुए संबंधित संस्थानों एवं व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।
मौका निरीक्षण के उपरांत बाजार विभाग द्वारा अवैध रूप से होर्डिंग एवं प्रचार सामग्री लगाने वाले पांच संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थानों को नोटिस जारी किया गया है। निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक प्रकरण में 50 हजार रुपये तक जुर्माना अधिरोपित किया जा सकता है। निर्धारित समयावधि में संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर नियमानुसार आर्थिक दंड के साथ अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।
नगर निगम आयुक्त श्री सुमित अग्रवाल ने कहा कि शहर की स्वच्छता, सौंदर्यता एवं हरित वातावरण बनाए रखना निगम की प्राथमिकता है। सार्वजनिक स्थलों, बिजली खंभों, पेड़ों एवं शासकीय संपत्तियों का अवैध विज्ञापन के लिए उपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि निगम द्वारा ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भविष्य में भी अभियान जारी रहेगा। शहर की पहचान और सौंदर्य को प्रभावित करने वाले तत्वों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
थोक कचरा उत्पादकों पर निगम की सख्ती, नियमों की अनदेखी पर होगी वैधानिक कार्रवाई
दुर्ग, । स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत भारत सरकार एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप लागू किए गए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत नगर निगम क्षेत्र के सभी थोक अपशिष्ट उत्पादकों (बल्क वेस्ट जनरेटर्स) के लिए नियमों का पालन अनिवार्य कर दिया गया है। नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम आयुक्त श्री सुमित अग्रवाल ने बताया कि ऐसे संस्थान, आवासीय परिसर, होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज गार्डन, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल, छात्रावास, व्यावसायिक प्रतिष्ठान एवं अन्य बड़े परिसर जहां प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है, उन्हें अपने परिसर में उत्पन्न गीले (जैविक) कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण एवं निपटान स्वयं करना होगा।
उन्होंने बताया कि इसके लिए कम्पोस्टिंग, बायोगैस, बायो-मीथनेशन अथवा अन्य स्वीकृत तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही सभी थोक अपशिष्ट उत्पादकों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीयन कराना होगा तथा आवश्यक जानकारियां समय-समय पर पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी।
निगम प्रशासन के अनुसार गीले एवं सूखे कचरे का स्रोत स्तर पर पृथक्करण करना भी अनिवार्य रहेगा। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है और निगम की टीमें विभिन्न संस्थानों का निरीक्षण कर नियमों के पालन की समीक्षा करेंगी।
निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संस्थान को नोटिस जारी किया जाएगा। निर्धारित अवधि में सुधार नहीं करने पर जुर्माना, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तथा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नियमों की लगातार अवहेलना करने वाले थोक अपशिष्ट उत्पादकों के विरुद्ध बिजली एवं जल प्रदाय सेवाएं बंद करने जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागों को भी कार्रवाई हेतु अनुशंसा भेजी जाएगी।
नगर निगम प्रशासन ने सभी थोक अपशिष्ट उत्पादकों से पर्यावरण संरक्षण एवं शहर की स्वच्छता में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। गीले कचरे का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण करने से लैंडफिल पर भार कम होगा, जैविक खाद एवं ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा तथा शहर को स्वच्छ, स्वस्थ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी।
आयुक्त श्री सुमित अग्रवाल ने कहा कि स्वच्छ एवं सतत शहर निर्माण के लिए सभी संस्थानों का सहयोग आवश्यक है। नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रत्येक संस्था की जिम्मेदारी है और उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सीसी रोड, नाली और पुलिया निर्माण से मजबूत होगी आधारभूत संरचना, नागरिकों को मिलेगी बेहतर सुविधा
दुर्ग, । नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा शहर में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार एवं नागरिकों को बेहतर आवागमन और जल निकासी व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभिन्न विकास कार्यों को लगातार गति दी जा रही है। इसी क्रम में महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने वार्ड क्रमांक 38 एवं 39 में सीसी रोड, आरसीसी नाली एवं पुलिया निर्माण कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया।
वार्ड क्रमांक 39 में डॉ. कौशिक के निवास से मुकुंद भवन तक सीसी रोड एवं नाली निर्माण कार्य की आधारशिला रखी गई। वहीं वार्ड क्रमांक 38 में पदम पाटनी के निवास से आशीष मारूति के निवास तक, मधुबन वाटिका से खंडेलवाल कॉलोनी तक तथा अन्य विभिन्न स्थानों पर आरसीसी नाली एवं पुलिया निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया गया। इसके अतिरिक्त मिलपारा क्षेत्र में भी नाली एवं पुलिया निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया।
भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महापौर श्रीमती अलका बाघमार ने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य प्रत्येक वार्ड में नागरिकों को बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में जलभराव और आवागमन संबंधी समस्याओं को रोकने के लिए सड़क, नाली और पुलिया निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन निर्माण कार्यों के पूर्ण होने से क्षेत्र में जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी और नागरिकों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। नगर निगम जनहित से जुड़े विकास कार्यों को निरंतर गति प्रदान कर रहा है तथा नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाबद्ध ढंग से विकास कार्य किए जा रहे हैं।
लोक कर्म प्रभारी श्री देव नारायण चन्द्राकर ने कहा कि निगम क्षेत्र में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। सड़क, नाली एवं पुलिया जैसे निर्माण कार्य सीधे तौर पर आम नागरिकों की सुविधा से जुड़े होते हैं, इसलिए इनके गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर वार्डों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं, ताकि लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
इस अवसर पर एमआईसी सदस्य श्री शेखर चन्द्राकर, श्री नीलेश अग्रवाल, पार्षद श्री गुलाब वर्मा, श्री रामचंद्र सेन, श्रीमती रंजीता पाटिल, सहायक अभियंता श्री सुरेश केवलानी, उप अभियंता श्री मोहित मरकाम सहित बड़ी संख्या में वार्डवासी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने बारिश से पूर्व महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की सौगात मिलने पर महापौर श्रीमती अलका बाघमार एवं नगर निगम प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विकास कार्यों की सराहना की।
प्रतिभाओं का समर कैंप समापन समारोह में समिति अध्यक्ष दीपक कुमार हुए सम्मानित
भिलाई। खुर्सीपार में आयोजित एक माह के "प्रतिभाओं का समर कैंप" के समापन समारोह में समाजसेवा एवं मानवता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए निस्वार्थ सेवा भाव समिति का सम्मान किया गया। समिति के अध्यक्ष दीपक कुमार को रक्तदान जागरूकता एवं रक्तदान सेवा के माध्यम से हजारों जरूरतमंदों के जीवन में नई आशा का संचार करने के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
गौरतलब है कि खुर्सीपार में 9 मई से 7 जून तक आयोजित समर कैंप में लगभग 700 बच्चों ने योग, फिजिकल ट्रेनिंग, कराटे, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स, क्रिकेट एवं फुटबॉल सहित विभिन्न खेल एवं शारीरिक गतिविधियों में भाग लिया। कैंप का उद्देश्य बच्चों में खेल प्रतिभा, अनुशासन और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करना था।
समापन समारोह का आयोजन खुर्सीपार स्थित श्रीराम चौक दशहरा मैदान में किया गया, जिसमें विधायक देवेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया।
इसी क्रम में निस्वार्थ सेवा भाव समिति के अध्यक्ष दीपक कुमार को रक्तदान के क्षेत्र में किए जा रहे सतत जनसेवा कार्यों, रक्तदाताओं को प्रेरित करने तथा जरूरतमंद मरीजों तक समय पर रक्त उपलब्ध कराने में उल्लेखनीय भूमिका निभाने के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर, खेल प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण जैन, भिलाई की प्रथम महापौर नीता लोधी, एमआईसी सदस्य लक्ष्मीपति राजू, ब्लॉक अध्यक्ष गुड्डू खान, विधायक प्रतिनिधि इंद्रजीत सिंह सेनी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं नागरिक उपस्थित रहे।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
