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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
राजनांदगांव /शौर्यपथ / 90s स्टूडियो एवं गिल्टी इंजीनियर्स प्रोडक्शन के बैनर तले बनी छत्तीसगढ़ी फीचर फिल्म 06 फरवरी को छत्तीसगढ़ी के सिनेमा घरों में रिलीज हो रही है ।इस फिल्म के निर्माता दीपेश साहू एवं नीरज ग्वाल फिल्म के निर्देशक एवं निर्माता है। फिल्म में मुख्य रूप से यशवंतानंद, सुरभि कृष्ण श्रीवास्तव, अनिल शर्मा, हीरा मानिकपुरी, अंजली सिंह चौहान, उपासना वैष्णव, नरेंद्र पटनारे ने अभिनय किया है । फिल्म के को प्रोड्यूसर दानेश साहू, विश्वनाथ साहू है और एसोसिएट प्रोड्यूसर अभिषेक ग्वाल और योगेश्वर साहू है ।
0 सामाजिक विषय पर बनी फिल्म
फिल्म सरकारी दमाद की कहानी एक सामाजिक मुद्दे पर आधारित है । फिल्म में सरकारी नौकरी न होने के कारण युवा वर्ग को विवाह में हो रही समस्या को दिखाने का प्रयास किया गया है। फिल्म की कहानी यशवंतानंद और रोहित राव ने लिखी है। फिल्म के स्क्रीनप्ले अथवा डायलॉग के लेखक क्रमशः यशवंतानंद, रोहित राव , मयंक आदिल, गिरधारी आर्यन है।
0 कॉमेडी, फैमिली ड्रामा, रोमांस, इमोशंस से लबरेज
इस फिल्म में सामाजिक मुद्दे को उठाने के साथ साथ भरपूर एंटरटेनमेंट भी देखने को मिलेगा। फिल्म को कॉमेडी , फैमिली ड्रामा , रोमांस , इमोशंस सब कुछ का एक कंप्लीट पैकेज माना जा सकता है।
0 ट्रेलर व गाने है खास
फिल्म का ट्रेलर और गाने अमारा म्यूजिक छत्तीसगढ़ के यूट्यूब चैनल में रिलीज हो गए है । गाने और ट्रेलर को दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। फिल्म का साउंड नीलेश जाटवा एवं म्यूजिक नीलेश पातंगे ने किया है।
0 फिल्म की स्क्रीनिंग को छालीवुड ने सराहा
सरकारी दमाद की स्क्रीनिंग बीते दिनों रायपुर के पी वी आर मैग्नेटो मॉल में सम्पन्न हुई । स्क्रीनिंग में उपस्थित छालीवुड के नामचीन कलाकार निर्देशक, निर्माताओं जैसे सतीश जैन, मनोज वर्मा, अनुज शर्मा, राज वर्मा ने फिल्म की कहानी, म्यूजिक , एक्टिंग, निर्देशन को काफी सराहा है।
0 सरकारी दमाद है राजनांदगांव के लिए खास
इस फिल्म की शूटिंग राजनांदगांव में हुई है। फिल्म में राजनांदगांव शहर अथवा पास के गांव को खूबसूरती से दिखाया है। फिल्म के लेखक अथवा अधिकांश कलाकार राजनांदगांव से है। फिल्म के मुख्य कलाकार यशवंतानंद एवं सुरभि कृष्ण श्रीवास्तव भी राजनांदगांव के है। भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान FTII पुणे से अध्ययनरत सुरभि कृष्ण श्रीवास्तव ने प्रसिद्ध फिल्म बंगाल 1947 जैसे बड़ी फिल्मों में पूर्व में अभिनय किया है तो दूसरी ओर कई वर्षों से थिएटर करने के साथ साथ यशवंतानंद चमन बहार जैसी फिल्मों में अभिनय कर चुके है। फिल्म में राजनांदगांव के कई दिग्गज कलाकारों जैसे शरद श्रीवास्तव, आमोद श्रीवास्तव, विनोद गौतम, भोलाराम बक्शी, सुरेंद्र चंद्राकर , सुदेश यादव , रितेश सिंघाड़े , पूजा शर्मा , देवेश वर्मा, नागेश पठारी ने अभिनय किया है । 0 टीम ने किया प्रशासन और राजनांदगांव वासियों का धन्यवाद फिल्म की शूटिंग राजनांदगांव शहर, ग्राम सुंदरा, जंगलेसर, मनघटा, मुड़ीपार में सम्पन्न हुई है। सफल शूटिंग के लिए टीम ने जिला प्रशासन और जनता को विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया ।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ । न्यू बस स्टैंड पर महापौर की तस्वीर को लेकर "शौर्यपथ" में प्रमुखता से प्रकाशित खबर का असर तुरंत देखने को मिला। खबर सामने आने के बाद निगम स्तर पर संज्ञान लिया गया और बस स्टैंड परिसर में लगे पोस्टर से पूर्व महापौर का फोटो हटा दिया गया।
अख़बार के माध्यम से उठे सवाल ने उस स्थिति की ओर ध्यान खींचा, जहां अन्य नेताओं की तस्वीरें तो समय के साथ बदली जा चुकी थीं, लेकिन महापौर की तस्वीर अपडेट होना जैसे यादों के भरोसे छोड़ दिया गया था। सवाल सामने आते ही तस्वीर हटाई गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सुधार की ज़रूरत पहले से थी, बस उसे रेखांकित किया जाना बाकी था।
यह संयोग ही कहा जाएगा कि जो बात लंबे समय तक नजरअंदाज होती रही, वह खबर प्रकाशित होते ही स्मरण में आ गई। कार्रवाई की गति ने यह भी दिखा दिया कि जब मुद्दा प्रमुखता से सामने आता है, तो समाधान में देर नहीं लगती।
फिलहाल, इस त्वरित सुधार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक स्थलों पर लगी तस्वीरें केवल सजावट नहीं होतीं, बल्कि वे व्यवस्था की सजगता और सतर्कता का भी संकेत देती हैं। जनहित से जुड़े विषयों को जब जिम्मेदारी से उजागर किया जाता है, तो व्यवस्था भी उसी जिम्मेदारी के साथ प्रतिक्रिया देती है।
व्यापार केवल आयात–निर्यात का खेल नहीं होता, वह राष्ट्रों की रणनीतिक स्वायत्तता, वैश्विक हैसियत और भविष्य की दिशा तय करता है।
3 फरवरी 2026 को अमेरिका और भारत के बीच हुआ नया व्यापार समझौता इसी कसौटी पर परखा जाना चाहिए।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब 2025 में लगाए गए 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ ने भारतीय निर्यात की रीढ़ तोड़ दी थी। उस पृष्ठभूमि में 18 प्रतिशत पर पहुँचना निश्चित रूप से राहत है—लेकिन सवाल यह है कि क्या यह भारत की जीत है, या हालात के आगे झुककर निकाला गया रास्ता?
इस समझौते के बाद अमेरिकी बाज़ार में भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क पूरी तरह हट गया है और पारस्परिक टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत रह गया है।
कपड़ा, रत्न-आभूषण, फार्मा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के लिए यह जीवनदान से कम नहीं।
लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि
2024 तक यही टैरिफ मात्र 3 प्रतिशत के आसपास था।
इस दृष्टि से देखा जाए तो भारत आज भी उस स्थिति से नीचे खड़ा है, जहाँ वह दो साल पहले था।
संपादकीय दृष्टि से इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं कि टैरिफ 18 प्रतिशत हुआ,
बल्कि यह है कि भारत 50 प्रतिशत के दंडात्मक व्यापार युद्ध से बाहर निकल पाया।
2025 में अमेरिकी प्रतिबंधों ने यह स्पष्ट कर दिया था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अब व्यापार केवल आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक हथियार बन चुका है।
ऐसे माहौल में भारत का समझौते की मेज़ पर लौटना एक व्यावहारिक निर्णय था।
यह समझौता भारत को एक ऐसे लाभकारी मोड़ पर ले आया है, जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती—
चीन पर आज भी 30–35% या उससे अधिक अमेरिकी टैरिफ लागू है
वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों पर लगभग 20% शुल्क है
जबकि भारत अब 18% पर है
यह स्थिति भारतीय निर्यात को अमेरिकी बाज़ार में स्पष्ट प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त देती है।
यह बढ़त 2024 में भारत के पास नहीं थी।
हर समझौते की एक कीमत होती है—और यह डील भी अपवाद नहीं।
भारत ने:
रूसी तेल की खरीद धीरे-धीरे बंद करने
अमेरिकी LNG और तकनीक के आयात बढ़ाने
तथा लगभग 500 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता ली है
यह सब भारत की ऊर्जा लागत और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ा सकता है।
सस्ती ऊर्जा छोड़कर महँगे विकल्प अपनाना, अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक चुनौती बन सकता है।
यह समझौता भारत की उस रणनीतिक स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े करता है,
जिस पर वह लंबे समय से गर्व करता आया है।
क्या वैश्विक दबावों के सामने भारत को बार-बार आर्थिक रियायतें देनी पड़ेंगी?
और क्या भविष्य में व्यापारिक फैसले विदेश नीति के दबाव में लिए जाते रहेंगे?
इन सवालों के उत्तर आसान नहीं हैं।
यह कहना गलत होगा कि भारत इस समझौते में हार गया।
यह कहना भी सच नहीं होगा कि भारत ने सब कुछ जीत लिया।
सच्चाई यह है कि—
भारत ने टकराव के दौर से निकलकर समझौते का रास्ता चुना है।
यह रास्ता महँगा है, समझौतों से भरा है,
लेकिन वैश्विक व्यापार की वर्तमान वास्तविकताओं में
शायद यही सबसे व्यावहारिक विकल्प भी था।
अब चुनौती यह है कि भारत इस मिली हुई प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को
निर्यात विस्तार, घरेलू उद्योग संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा में बदल पाए—
वरना यह समझौता केवल राहत बनकर रह जाएगा, उपलब्धि नहीं।
0 ग्रामीण भाजपा ने जताया हर्ष
राजनंदगांव/शौर्यपथ/ विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह लगातार अपनी विधानसभा के विकास कार्यों के लिए सतत प्रयास करते रहते हैं ,और लगातार विकास कार्यों को स्वीकृति प्रदान करने में लगे रहते हैं इसी कड़ी में आज डॉ रमन सिंह ने अपने विधानसभा के 45 कार्यों हेतु 2 करोड़ 8 लख रुपए की स्वीकृति प्रदान करवाई ।
विदित हो कि वित्तीय वर्ष 25 -26 में भाग संख्या 80 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण के लिए राशि में से प्रवधानित राशि की स्वीकृति प्रदान की गई । इस हेतु माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण द्वारा क्षेत्रीय आवश्यकताओं एवं जनहित को ध्यान में रखते हुए डॉ रमन सिंह द्वारा प्रेषित प्रस्ताव पर अमल करते हुए 2 करोड आठ लाख दस हजार रुपए की स्वीकृति प्राधिकरण के अनुमोदन की प्रत्याशा में दी गई है , जिसके अनुसार राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र के निम्न कार्यों की स्वीकृति दी गई है किचन शेड प्राथमिक शाला भवन ग्राम बम्हनी विकासखंड व जिला राजनांदगांव हेतु 5 लाख रुपए , नाली निर्माण शीतला मंदिर से नया तालाब ग्राम धनगांव हेतु 6 लाख रुपए, नाली निर्माण वार्ड नंबर 3 एवं 7 ग्राम बरगा चार लाख रुपए, सीसी रोड निर्माण जी रोड से तालाब तक ग्राम भानपुरी 5.20 लख रुपए, सीसी रोड निर्माण जी ई रोड से जसपाल घर तक ग्राम धर्मपुर 5.20 लख रुपए, निर्मला घाट निर्माण शीतल तालाब पार ग्राम भोथीपार खुर्द 5.20 लाख रुपए, नाली निर्माण शीतला मंदिर स्कूल के पास ग्राम कोपेडीह ₹4 लाख रुपये, सांस्कृतिक मंच निर्माण शीतला पारा ग्राम धामनसरा 2.50 लख रुपए, निर्मला घाट निर्माण रपटा तालाब ग्राम पनेका ₹5 लाख रुपये, निर्मला घाट निर्माण राजगामी तालाब में ग्राम बाकल 5.20 लाख रुपए, सीसी रोड निर्माण कार्य शासकीय प्राथमिक माध्यमिक शाला के पास ग्राम रीवागहन ₹5 लाख रुपए, पेपर ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ग्राम सुकुलदेहांन 3 लाख रुपये, बोर खनन हनुमान मंदिर के पाग्राम भानपुरी 1. 6 लाख रुपए, यात्री प्रतीक्षालय निर्माण कार्य मुख्य सड़क मार्ग में ग्राम महाराजपुर 5 लाख रुपये, नाली निर्माण कार्य आबादी पर से हरदी नाला तक ग्राम भंवरमरा 4 लाख रुपए, निर्मला घाट निर्माणकार्य छोटा तालाब में ग्राम सुंदरा विकासखंड 5 लाख रुपए, । निर्मला घाट निर्माण नया तालाब में ग्राम पारीकला 5 लाख रुपये, सीसी रोड निर्माण कार्य मुख्य मार्ग से डालू घर तक 5.20 लाख रुपए, सीसी रोड निर्माण कार्य गोपाल साहू घर से शमशान घाट तक ग्राम रानीतराई 5.20 लाख रुपए, कंक्रीटी कारण निर्माण कार्य कोथा में ग्राम बोरी 5.20 लख रुपए, नाली निर्माण कार्य चमारराय वर्मा घर से हालर चौक तक ग्राम डिलापहरी 6 लाख रुपए, सीसी रोड निर्माण कार्य मुख्य मार्ग से मुक्तिधाम तक ग्राम बरगाही 5.20 लाख रुपए, नाली निर्माण कार्य वार्ड नंबर 1 ग्राम लिटिया 5 लाख रुपये, मंच निर्माण कैलाश नगर ग्राम जगलेश्वर 3 लाख रुपए, कंक्रीटकरण निर्माण कार्य वार्ड नंबर 15 से 13 तक ग्राम रवेली 5.20 लख रुपए, पेपर ब्लॉक निर्माण मिडिल स्कूल मे ग्राम खैरा 7 लाख रुपए, यात्री प्रतीक्षालय सार्वजनिक मंच के पास ग्राम मनकी 5 लाख रुपए, सीसी रोड निर्माण वार्ड 6 कुशल साहू घर से शिवभवानी घर तक ग्राम टेडेसरा 5.20 लाख रुपए, निर्मला घाट निर्माण नया तालाब में ग्राम मौहाभांठा 2. 6 लाख रुपए, निर्मला घाट निर्माण डबरी तालाब में ग्राम इं इदावनी 5.20 लाख रुपए, मंच निर्माण वार्ड नंबर 17 सखा तालाब के पास ग्राम अंजोरा 5 लाख रुपए, निर्मला घाट निर्माण माता तालाब में ग्राम धीरी 2. 6 लाख रुपए, सीसी रोड निर्माण बांदा तालाब से शमशान घाट तक ग्राम मगरलोटा 5.20 लाख रुपए, शौचालय निर्माण माध्यमिक शाला में ग्राम बैगाटोला 3 लाख रुपए, सीसी रोड निर्माण हनुमान मंदिर से नानक सिंह के खेत तक ग्राम बिरेझर 2. 6 लाख रुपए, सीसी रोड निर्माण मिडिल स्कूल से शीतला मंदिर तक ग्राम ईरा 5.20 लाख रुपए, सीसी रोड निर्माण वार्ड नंबर 6 ग्राम फुलझर5.20 लाख रुपए, निर्मला घाट निर्माण तालाब ग्राम खुटेरी 5.20 लाख रुपए, निर्मला घाट निर्माण शीतल तालाब ग्राम मुड़पार 5.20 लाख रुपए, मैदान कांक्रीटिकरण कर्मा भवन के पास ग्राम मोखला 5.20 लाख रुपए, सीसी रोड निर्माण वार्ड नंबर 5 ग्राम सुरगी 5.20 लाख
भाजपा मीडिया सेल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार विकास कार्यों की स्वीकृति पर जिला भाजपा अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष मनोज साहू, खिलेश्वर साहू, रोहित चंद्राकर, लीलाधर साहू ,,जिला पंचायत सदस्य देवकुमारी साहू , प्रतीमा चंद्राकर सहित भाजपा नेताओ ने विकास कार्यों की स्वीकृति पर हर्ष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह का आभार व्यक्त किया है ।
By- नरेश देवांगन
जगदलपुर, शौर्यपथ । नगर निगम जगदलपुर में वर्तमान महापौर संजय पांडे हैं, लेकिन न्यू बस स्टैंड मे लगी पोस्टर कुछ और ही कहानी कहती नजर आ रही हैं। यहां अब भी पूर्व महापौर सफ़िरा साहू का फोटो प्रमुखता से लगा हुआ है, जबकि उसी बोर्ड पर मौजूद अन्य पूर्व नेताओं की तस्वीरों पर वर्तमान सरकार के नेताओं के फोटो चिपकाए जा चुके हैं।
हैरानी की बात यह है कि जहां “अपडेट” करने की फुर्ती दिखाई गई, वहां महापौर की तस्वीर को जस का तस छोड़ दिया गया। सवाल यह है कि क्या निगम की नज़र में महापौर का पद इतना गौण है कि उसकी तस्वीर बदलने की ज़रूरत ही नहीं समझी गई? या फिर जिम्मेदारों के लिए यह तय करना ही मुश्किल हो गया है कि शहर का वर्तमान महापौर आखिर है कौन?
शहर में यह चर्चा आम है कि निगम कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर लगी तस्वीरें सिर्फ शोपीस नहीं होतीं, वे व्यवस्था की सजगता भी दिखाती हैं। ऐसे में न्यू बस स्टैंड पर टंगी तस्वीरें निगम की प्राथमिकताओं पर तंज कसती प्रतीत हो रही हैं।
अब निगाहें निगम के जिम्मेदारों पर टिकी हैं—क्या वे इसे सामान्य भूल बताकर नजरअंदाज करेंगे, या फिर समय के साथ तस्वीरें भी बदलेंगी? फिलहाल, न्यू बस स्टैंड पर सवाल टंगा है, जवाब नहीं।
भिलाई। शौर्यपथ /
इस्पात नगरी भिलाई के लिए यह गर्व का क्षण है। भिलाई निवासी एवं अमेरिका में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर मयंक जैन के नेतृत्व में हिंदी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। उनकी संस्था हिंदी-यूएसए को अमेरिका की प्रतिष्ठित वैधानिक संस्था एक्रीडिटिंग कमीशन फॉर स्कूल्स – वेस्टर्न एसोसिएशन ऑफ स्कूल्स एंड कॉलेजेस (्रष्टस्-ङ्ख्रस्ष्ट) से प्रारंभिक मान्यता प्राप्त हुई है।
अमेरिका के सेंट लुइस, मिसूरी में रह रहे मयंक जैन ने बताया कि यह मान्यता विस्तृत आत्म-मूल्यांकन और ङ्ख्रस्ष्ट की आधिकारिक निरीक्षण टीम द्वारा शैक्षणिक संरचना, शिक्षण पद्धतियों और नेतृत्व क्षमता के गहन परीक्षण के बाद दी गई। उन्होंने कहा कि यह लगभग दो वर्षों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जो अमेरिका में हिंदी के प्रचार-प्रसार को नई मजबूती देगा।
ङ्ख्रस्ष्ट निरीक्षण समिति की सदस्य एलिज़ाबेथ ओबरराइटर ने हिंदी-यूएसए के पाठ्यक्रम और शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ के पूर्व छात्र आज स्वयं शिक्षक बनकर समाज को योगदान दे रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि हिंदी-यूएसए अमेरिका के 29 स्कूलों में संचालित एक पंजीकृत गैर-लाभकारी संस्था है, जो 4,000 से अधिक छात्रों को हिंदी शिक्षा प्रदान कर रही है। यह उपलब्धि भिलाई, छत्तीसगढ़ और पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।
डबल इंजन सरकार का ऐतिहासिक तोहफा, प्रधानमंत्री मोदी व रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का जताया आभार
रायपुर । शौर्यपथ ।
छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए राज्य को ?7,470 करोड़ का ऐतिहासिक बजट प्रावधान दिया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति प्रदेश की जनता की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इसे डबल इंजन सरकार की दूरदर्शी सोच और निरंतर प्रयासों का परिणाम बताया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2009-14 के दौरान जहां छत्तीसगढ़ को रेलवे विकास के लिए वार्षिक औसतन मात्र ?311 करोड़ प्राप्त होते थे, वहीं वर्ष 2026-27 में यह राशि बढ़कर ?7,470 करोड़ हो गई है, जो लगभग 24 गुना वृद्धि को दर्शाती है। वर्तमान में राज्य में ?51,080 करोड़ की लागत से रेलवे से जुड़े विभिन्न कार्य प्रगति पर हैं, जिनमें नए रेल ट्रैक का निर्माण, रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास और सुरक्षा व्यवस्था का उन्नयन प्रमुख रूप से शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदूर वनांचल बस्तर अंचल के विकास के लिए रावघाट–जगदलपुर रेल परियोजना का प्रारंभ होना जनजातीय समाज के लिए केंद्र सरकार का अमूल्य उपहार है। यह परियोजना न केवल आवागमन को सुगम बनाएगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।
उन्होंने बताया कि परमलकसा–खरसिया रेल कॉरिडोर के साथ-साथ नए फ्रेट कॉरिडोर को भी स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से राज्य में यात्री रेल सेवाओं की संख्या आने वाले समय में लगभग दोगुनी हो जाएगी और माल परिवहन को भी नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अमृत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इनमें डोंगरगढ़ (फेज-ढ्ढ), अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई और उरकुरा जैसे स्टेशन पूर्ण होकर यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही राज्य में वंदे भारत एक्सप्रेस की दो जोडिय़ां तथा अमृत भारत एक्सप्रेस की एक जोड़ी सेवाएं प्रारंभ होने से यात्रियों को तेज, सुरक्षित और विश्वस्तरीय रेल सुविधा मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से अब तक छत्तीसगढ़ में लगभग 1,200 किलोमीटर नए रेल ट्रैक का निर्माण, 100 प्रतिशत विद्युतीकरण, 170 से अधिक फ्लाईओवर एवं अंडरपास तथा 'कवचÓ जैसी अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणालियों की स्थापना की गई है। इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज रेलवे विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल होता जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह विकास केवल रेल पटरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रदेश के व्यापार, पर्यटन, उद्योग, रोजगार और आम नागरिकों के जीवन में नई ऊर्जा और अवसरों का सृजन हो रहा है। उन्होंने एक बार फिर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव को इन युगांतकारी पहलों के लिए छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से हृदय से धन्यवाद ज्ञापित किया।
नई दिल्ली।
लोकसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार, 2 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा उस समय तीखे राजनीतिक टकराव में बदल गई, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चीन और 2017 के डोकलाम विवाद को लेकर गंभीर दावे कर दिए। राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के एक अप्रकाशित संस्मरण (ठ्ठश्चह्वड्ढद्यद्बह्यद्धद्गस्र रूद्गद्वशद्बह्म्) का हवाला देते हुए कहा कि डोकलाम गतिरोध के दौरान चीनी टैंक भारतीय सीमा के बेहद करीब आ गए थे। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो जल्द ही भारी हंगामे में तब्दील हो गई।
राहुल गांधी ने अपने तर्क के समर्थन में पत्रिका 'द कारवांÓ (ञ्जद्धद्ग ष्टड्डह्म्ड्ड1ड्डठ्ठ) में प्रकाशित एक लेख का उल्लेख किया, जिसमें जनरल नरवणे की प्रस्तावित पुस्तक के अंश होने का दावा किया गया था। हालांकि सरकार ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि किसी अप्रकाशित और अप्रमाणित दस्तावेज का हवाला संसद के नियमों के खिलाफ है।
सरकार का कड़ा विरोध, स्पीकर का हस्तक्षेप
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के बयान पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई। सरकार का कहना था कि बिना आधिकारिक प्रकाशन और प्रमाणिकता के किसी पुस्तक या उसके कथित अंशों को सदन में उद्धृत नहीं किया जा सकता। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा के नियम 352 का हवाला देते हुए कहा कि सदन में असत्यापित या आपत्तिजनक दस्तावेज पेश करना नियमों का उल्लंघन है और इस पर कार्रवाई का प्रावधान है।
इस पूरे विवाद के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सरकार के पक्ष को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि बिना प्रमाणिकता वाली सामग्री को सदन के रिकॉर्ड में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने राहुल गांधी को कथित संस्मरण के अंश पढऩे की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
सदन के बाहर भी जारी रही जंग
सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार सच्चाई से डर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री महत्वपूर्ण निर्णय लेने के बजाय जिम्मेदारी दूसरों पर डालते हैं। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब पूर्व थल सेना प्रमुख की बात सामने आ रही है, तो सरकार उससे घबराकर उसे दबाने की कोशिश क्यों कर रही है।
इसके जवाब में भाजपा ने राहुल गांधी पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने और सेना को राजनीतिक विवाद में घसीटने का आरोप लगाया। सरकार की ओर से जनरल नरवणे का एक पुराना वीडियो भी सार्वजनिक किया गया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा था कि "भारत ने अपनी एक इंच जमीन भी नहीं खोई है।"
अप्रकाशित पुस्तक और रक्षा मंत्रालय की आपत्ति
जिस पुस्तक 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनीÓ (स्नशह्वह्म् स्ह्लड्डह्म्ह्य शद्घ ष्ठद्गह्यह्लद्बठ्ठ4) का उल्लेख राहुल गांधी ने किया, उसके प्रकाशन पर रक्षा मंत्रालय पहले ही कुछ आपत्तिजनक अंशों को लेकर आपत्ति जता चुका है। मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की सामग्री राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों को प्रभावित कर सकती है। राहुल गांधी का दावा है कि पुस्तक में डोकलाम और लद्दाख गतिरोध के दौरान सरकार की कथित अनिर्णय की स्थिति का उल्लेख है, जिसे कुछ मीडिया रिपोर्टों में उजागर किया गया है।
विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल
राहुल गांधी ने बहस को केवल सैन्य स्तर तक सीमित न रखते हुए भारत की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण चीन और पाकिस्तान एक-दूसरे के करीब आ गए हैं, जो देश की सुरक्षा के लिए "सबसे बड़ा खतरा" है। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में दोहराया कि भारत की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और रक्षा मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार किसी भी क्षेत्र में संप्रभुता से समझौता नहीं किया गया है।
हंगामे में बाधित हुई कार्यवाही
दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक और आरोप-प्रत्यारोप के चलते लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। अंतत: भारी हंगामे के बीच अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
यह विवाद एक बार फिर यह दर्शाता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना और विदेश नीति जैसे मुद्दे संसद में सबसे संवेदनशील और टकरावपूर्ण बहसों का केंद्र बने हुए हैं, जहां नियम, राजनीति और राष्ट्रहित आमने-सामने आ खड़े होते हैं।
रायपुर / शौर्यपथ / जब इरादे मजबूत हों, तो विपरीत परिस्थितियाँ भी रास्ता रोक नहीं पातीं। बिलासपुर के राज्य प्रशिक्षण केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे पैरा तीरंदाज श्री तोमन कुमार ने इसे साकार कर दिखाया है। उन्होंने 7वीं एनटीपीसी पैरा राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।
पंजाब के एनएसआईएस पटियाला में 30 जनवरी से 2 फरवरी तक आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में श्री तोमन कुमार ने व्यक्तिगत स्पर्धा में रजत पदक तथा टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य को दोहरी सफलता दिलाई। टीम स्पर्धा में उन्होंने श्री अमित कीर्तनिया के साथ मिलकर यह उपलब्धि हासिल की। श्री तोमन कुमार पिछले दो वर्षों से बिलासपुर आर्चरी एकेडमी में तीरंदाजी का नियमित प्रशिक्षण ले रहे हैं। वे छत्तीसगढ़ पैरा तीरंदाजी टीम के मुख्य प्रशिक्षक श्री मनमोहन पटेल के मार्गदर्शन में अभ्यास कर रहे हैं। उनकी उपलब्धियों में प्रशिक्षक श्री पंकज सिंह का भी महत्वपूर्ण योगदान है।
बालोद जिले के श्री तोमन कुमार सीआरपीएफ के जवान रह चुके हैं। नक्सल ऑपरेशन के दौरान आईईडी ब्लास्ट में उन्होंने अपना बायाँ पैर खो दिया, लेकिन इस कठिन हादसे ने उनके हौसले को कमजोर करने के बजाय और अधिक सशक्त बना दिया। जीवन की इस बड़ी चुनौती के बाद उन्होंने खेल को अपना संबल बनाया और पैरा तीरंदाजी में नया मुकाम हासिल किया। पैरा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के लिए पदक जीतना उनका सपना है।
श्री तोमन कुमार वर्ष 2017 तक सक्रिय रूप से देश सेवा में कार्यरत रहे और आज भी उसी राष्ट्रभक्ति और जज़्बे के साथ खेल के मैदान में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता से बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में खेल प्रेमियों में उत्साह और गर्व का माहौल है। उनकी संघर्ष गाथा न केवल पैरा खिलाडिय़ों, बल्कि सामान्य युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत है।
श्री तोमन कुमार अपनी उपलब्धियों और जज्बे से केवल एक सफल पैरा तीरंदाज ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के पैरा खेल जगत के लिए यूथ-आइकॉन के रूप में उभरकर सामने आए हैं। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश में पैरा खेलों को नई पहचान, आत्मविश्वास और दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उनकी उपलब्धि पर खेल अधिकारी श्री ए. एक्का सहित विभिन्न खेल संघों से जुड़े अधिकारियों ने शुभकामनाएं दी हैं।
अभियान चलाकर 15 दिन और धान खरीदी की जाये -कांग्रेस
रायपुर/ शौर्यपथ / प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बंद कर दिया है। लेकिन अभी भी प्रदेश के लाखों किसान अपना धान नहीं बेच पाये है। इस साल सरकार ने मात्र 53 दिन ही धान खरीदा। अंतिम तिथि भी 31 जनवरी थी, लेकिन अंतिम 2 दिन शनिवार और रविवार होने के कारण खरीदी नहीं हुई। पूर्व में घोषित 75 दिन भी पूरी खरीदी नहीं किया गया। इस वर्ष सरकार के द्वारा घोषित लक्ष्य 165 लाख मीट्रिक टन था, लेकिन सरकार ने मात्र 139 लाख 85 हजार मीट्रिक टन ही धान खरीदी किया गया। लक्ष्य से 25 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीदी किया गया। पिछले साल सरकार ने 149 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा था, इस वर्ष पिछले साल के मुकाबले 9 लाख 15 हजार मीट्रिक टन कम की खरीदी की गयी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कुल 27 लाख किसानों का पंजीयन हुआ था, जिसमें से 2.5 लाख किसान अपना धान नहीं बेच पाये। लगभग 5 लाख किसानो का एग्रीस्टेक पोर्टल की परेशानी के कारण पंजीयन नहीं हुआ। किसानों को धान बेचने से रोकने बिना सहमति जबरिया रकबा सरेंडर करवा दिया गया। पूर्व से जारी टोकन को निरस्त करवाया गया। हजारो किसान सरकार के इस षडयंत्र का शिकार हुये। धान का टोकन नहीं मिलने, धान की खरीदी नहीं होने के कारण प्रदेश के महासमुंद, कवर्धा, कोरबा, जैसे स्थानों पर अनेको किसानों ने आत्महत्या का प्रयास किया। एक ने आत्महत्या भी किया। यह बताता है कि प्रदेश में धान खरीदी के कारण किसान परेशान हुये। सिर्फ नारायणपुर, बलरामपुर, बस्तर में पिछले साल के लगभग बराबर धान की खरीदी हुई, शेष सभी जिलों में 5 प्रतिशत से लेकर 32 प्रतिशत तक कम खरीदी सरकार ने किया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार की तरफ से कम खरीदी के लिये जश्न मनाया गया। अपने कर्मचारियो को जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से जिलेवार हुई धान खरीदी के आंकड़े जारी किये गये, जिसमें किस जिले में कितनी खरीदी हुई। पिछले साल से कितने प्रतिशत कमी हुई इसका ब्योरा है। सरकार ने अपने आंकड़े में माना है कि प्रदेश के अधिकांश जिलो में पिछले साल के मुकाबले कम खरीदी हुई इसके लिये खाद विभाग, राजस्व विभाग, सहकारिता विभाग नान एवं जिला तथा ब्लाक के अधिकारियो को एसएमएस के जरिये बधाई दिया गया है। यदि लक्ष्य से कम खरीदी हुई है तो किस बात की बधाई। बधाई दे रहे मतलब साफ है आपका ईरादा कम खरीदी का था, आप उसमें कामयाब हुये। लक्ष्य से कम के लिये फटकार लगानी थी, नहीं लगाये क्यो? मतलब कम खरीदी ही आपका लक्ष्य था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सरकार अभियान चलाकर धान खरीदी 15 दिनों के लिये फिर शुरू करें ताकि बचे सभी किसानों का धान समर्थन मूल्य में खरीदा जा सके।
गरियाबंद की घटना बिगड़ती कानून व्यवस्था का परिणाम
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि गरियाबंद से बेहद ही दुर्भाग्यजनक खबर आ रही है, वहां के दुतकैया गांव में एक समुदाय के घरों को जला दिया गया। वहां पर एक अपराधी के द्वारा फैलाए जा रहे आतंक के कारण यह घटना घटी। यह घटना पुलिस और सरकार की लापरवाही का परिणाम है। पुलिस सचेत होती अराजक तत्व पर कार्यवाही करती तो शायद यह घटना नहीं होती। मै दोनों पक्षों से शांति की अपील करता हूं तथा घटना की न्यायिक जांच की मांग करता हूं। इसके पहले बलौदाबाजार, कवर्धा, बलरामपुर के बाद गरियाबंद में जनता ने कानून हाथ में लिया है। इससे साफ है लोगों का सरकार और उसके कानून व्यवस्था पर भरोसा नहीं है।
बजट से छत्तीसगढ़ ठगा गया
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कल मोदी सरकार का जो बजट प्रस्तुत हुआ। उसमें एक बार फिर छत्तीसगढ़ का उल्लेख सिर्फ एक जगह है। विशेष कारीडोर में वह भी छत्तीसगढ़ की जनता के लिये नहीं छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा का दोहन उद्योगपति मित्र आसानी से कर सके। इसलिये राज्य के विकास के लिये बस्तर, सरगुजा क विकास के लिये बजट में कुछ नहीं है।
एपस्टीन फाईल को लेकर भाजपा चुप क्यों है
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि एपस्टीन फाइल के बारे में मोदी और भाजपा चुप क्यों है इस मामले में प्रधानमंत्री और भाजपा को स्पष्टीकरण देना चाहिये की एपस्टीन फाइल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम से देश की छवि धूमिल हो रही है।
पत्रकार वार्ता में प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला, महामंत्री दीपक मिश्रा, सकलेन कामदार, वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर, सुरेन्द्र वर्मा, अशोक राज आहूजा, अमरजीत चावला, प्रवक्ता सत्य प्रकाश सिंह, अजय गंगवानी उपस्थित थे।
रायपुर/ शौर्यपथ / आम बजट में प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि इस बजट से महिलाएं काफी हताश एवं निराश है। आम बजट में महिलाओं को हर बार की तरह इस बार भी निराशा ही मिला। 2014 में 100 दिन में महंगाई कम करने की बात नरेन्द्र मोदी जी ने कहे थे महिलाओं को समझ नहीं आ रहा है कि नरेन्द्र मोदी के गिनती में 100 दिन आएंगे या नहीं। आम बजट पर महंगाई से निजात मिलेगा आश लगाये महिलाएं बैठी थी लेकिन बेलगाम महंगाई पर वित्त मंत्री भी चुप्पी साध ली है। जब सीतारमण जी वित्त मंत्री बनी तब महिलाओं में खुशी की लहर थी कि महिला वित्त मंत्री है तो हमारा किचन हरा भरा रहेगा, महिला होने के नाते महिलाओं की परेशानी अच्छा से समझेगी लेकिन सब विपरीत हो गया, किचन में संकट छा गया। किचन में लगने वाले चिमनी के दाम बढ़ाये गये है।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि बेलगाम महंगाई को कम करने के लिये केंद्र सरकार का कोई प्रयास नही है। आम बजट सिर्फ नाम का रह गया है। 9.6 करोड़ लोगों को मुफ्त गैस कनेक्शन देने की इस बजट में बात कही जा रही है लेकिन इस बात का जिक्र नही किया गया कि मोदी सरकार के गलत नीति के कारण गैस सिलेंडर के दाम 1200 रुपये हो गये है। दैनिक जीवन के आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार बढ़ती जा रही है। उस पर इस बजट में कुछ भी नही। सोना, चांदी आम व्यक्ति के पहुँच से पहले ही बाहर थी अब इस बजट के बाद से सोना, चांदी को लोग सिर्फ सपने में देखेंगे हकीकत में खरीदने के बारे में सोचेगे भी नहीं। मोदी ने कहा था कि सबके खाते में 15-15 लाख आयेंगे महिलाएं बेसब्री से इंतजार कर रही थी कि इस बजट से 15 लाख मिल जायेंगे लेकिन इस बार भी निराशा ही हाथ लगा।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत ने कहा कि सीता रमन जी का नवां बजट था इस बजट ने भी पिछले बजट के समान आधी आबादी महिलाओं का बजट में अनदेखी किया गया है। महिला सुरक्षा के नाम पर बजट में कुछ नही। इस बजट से हर वर्ग निराश है। बजट के नाम से जनता के साथ धोखा है।
पाटन।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन का नववर्ष मिलन एवं सम्मान समारोह शुक्रवार 31 जनवरी 2026 को पाटन में गरिमामयी वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में कर्मचारियों के आपसी समन्वय, एकता और संगठनात्मक मजबूती का स्पष्ट संदेश देखने को मिला।
समारोह के मुख्य अतिथि फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक एवं छत्तीसगढ़ राजपत्रित अधिकारी संघ के अध्यक्ष कमल वर्मा रहे, जबकि अध्यक्षता संभाग प्रभारी छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन एवं प्रांताध्यक्ष छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक संघ राजेश चटर्जी ने की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रांतीय उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ शिक्षक फेडरेशन चंद्रशेखर चन्द्राकर, जनपद पंचायत पाटन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जागेन्द्र साहू एवं अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्वेता यादव की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
स्वागत भाषण कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन पाटन के संयोजक एवं पंचायत सचिव संघ, जिला दुर्ग के अध्यक्ष महेन्द्र कुमार साहू ने दिया।
कार्यक्रम का संचालन प्रांतीय सह-प्रवक्ता छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ललित बिजौरा ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन फेडरेशन पाटन के संरक्षक टिकेन्द्र नाथ वर्मा द्वारा किया गया।
मुख्य अतिथि कमल वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि कर्मचारी हितों की रक्षा, पारदर्शी प्रशासन और कर्तव्यनिष्ठ कार्य संस्कृति ही फेडरेशन का मूल संकल्प है। उन्होंने नए वर्ष में संगठित होकर अधिकारों एवं दायित्वों के संतुलन के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर फेडरेशन द्वारा उन कर्मचारियों एवं अधिकारियों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जिन्होंने विगत वर्ष अपने-अपने दायित्वों का उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय निर्वहन किया।
समारोह में प्रमुख रूप से हेमंत कुमार वर्मा (मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पंचायत पाटन), छाया वर्मा (महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी), भानु प्रताप यादव (जिलाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ एवं जिला मीडिया प्रभारी), रोशनी धुरंधर, चंचल द्विवेदी, गिरधर वर्मा, वरुण साहू, पूर्णनेंद्र बंछोर, कन्हैया लाल मन्नाड़े, प्रमेश साहू, प्रदीप चंद्राकर, हीरा सिंह वर्मा, देवेन्द्र कुमार साहू सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन पाटन के सदस्य उपस्थित रहे।
उक्त जानकारी छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के जिला मीडिया प्रभारी भानु प्रताप यादव द्वारा दी गई।
lwriter - श्री पंकज जोशी
कुशल शासन की दिशा में भारत की यात्रा अक्सर एक विशाल संघीय ढांचे के तहत कार्यान्वयन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों को रेखांकित करती है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2015 में स्थापित ‘प्रगति’ [सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन)] नामक पहल, नौकरशाही की पेचीदगियों को दूर करने के एक शक्तिशाली तंत्र के रूप में कार्य करती है। एक ओर जहां यह विभिन्न राष्ट्रीय परियोजनाओं को गति प्रदान करती है, वहीं इसका प्रभाव शायद राज्य स्तर पर सबसे अधिक स्पष्ट होता है। आर्थिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण विशिष्ट क्षेत्रीय परियोजनाओं की सटीक निगरानी राज्य स्तर पर की जाती है। गुजरात में, ‘प्रगति’ के तहत की गई समीक्षाओं ने बुनियादी ढांचे, ऊर्जा तथा सामाजिक कल्याण से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं में आने वाली अड़चनों को व्यवस्थित रूप से दूर किया है और सहकारी संघवाद के एक मजबूत मॉडल को मूर्त रूप दिया है।
‘प्रगति’ ने न सिर्फ समीक्षा के एक मंच, बल्कि एक पूर्वानुमानित शासन के रूप में भी कार्य किया है। महीने की शुरुआत में अग्रिम रूप से एजेंडा का वितरण राज्य के संबंधित विभागों, जिला प्रशासन और कार्यान्वयन एजेंसियों की केन्द्रित भागीदारी को बढ़ावा देने में सहायक रहा। सक्रिय अनुवर्ती कार्रवाई के परिणामस्वरूप, ‘प्रगति’ की निर्धारित बैठकों से पहले ही कई समस्याओं का निराकरण हो गया। लिहाजा, ऐसे एजेंडा मदों को अंतिम समीक्षा से हटा दिया गया। यह उच्चस्तरीय हस्तक्षेप से पहले ही राज्य स्तर पर उनके समाधान को दर्शाता है।
राज्य-आधारित तेजी हेतु एक डिजिटल समन्वय
‘प्रगति’ की सफलता का मूल राज्य और केन्द्रीय प्रशासन के शीर्ष स्तरों को जवाबदेही-आधारित एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की इसकी क्षमता में निहित है। हर महीने, यह इंटरफ़ेस उन परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा को संभव बनाता है जो अंतर-विभागीय मतभेदों या भूमि अधिग्रहण संबंधी अड़चनों की वजह से रुक सकती हैं।
रणनीतिक विकास हेतु विभागीय सीमाओं को तोड़ना: दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारा (डीएमआईसी)
डीएमआईसी को सीधे प्रधानमंत्री की समीक्षा के अधीन रखकर, ‘प्रगति’ ने धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण, विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों और निजी हितधारकों से जुड़ी समस्याओं पर वास्तविक समय में चर्चा किया जाना सुनिश्चित किया। इस प्रक्रिया ने निर्णय लेने की कवायद को गति दी, नौकरशाही में व्याप्त लालफीताशाही को कम किया और सभी संबंधित पक्षों को स्पष्ट व समयबद्ध दिशा-निर्देश प्रदान किए, जिससे भारत के औद्योगिक भविष्य की बुनियाद मानी जाने वाली इस परियोजना को गति मिली।
‘प्रगति’ के तहत होने वाली समीक्षाओं ने धोलेरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अहमदाबाद-धोलेरा एक्सप्रेसवे के बुनियादी ढांचे के समयबद्ध विकास को सुनिश्चित किया है। यह 109 किलोमीटर लंबी एक महत्वपूर्ण ग्रीनफील्ड परियोजना है, जिसे अहमदाबाद को धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (एसआईआर) से जोड़ने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। सेमीकंडक्टर निर्माण संयंत्र हेतु कुल 91,000 करोड़ रुपये के मुख्य परियोजना निवेश के साथ, यह इलाका भारत का सेमीकंडक्टर हब बनने के लिए तैयार है और यहां देश के पहले स्वदेशी चिप्स का उत्पादन होगा। इस राज्य की सीमाओं के भीतर संचालित होने वाली ऐसी उच्च-मूल्य वाली केन्द्रीय परियोजनाएं उस ‘प्रगति’ तंत्र का हिस्सा बनने की आदर्श हकदार हैं, जो राज्य के कार्यान्वयन और राष्ट्रीय दृष्टिकोण के बीच तालमेल सुनिश्चित करती हैं।
गुजरात की हरित ऊर्जा क्रांति को गति
गुजरात नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी है और ‘प्रगति’ इसकी विशाल क्षमता को मूर्त रूप देने में अहम भूमिका निभा रही है। बड़े पैमाने की विविध सौर एवं पवन परियोजनाएं इस लक्ष्य को रेखांकित करती हैं। कुल 1200 मेगावाट क्षमता वाली खावड़ा सौर पीवी परियोजना (6284 करोड़ रुपये) और 1255 मेगावाट क्षमता वाली खावड़ा सौर पीवी परियोजना (7180 करोड़ रुपये) इस पहल की प्रमुख घटक हैं। कुल 300 मेगावाट क्षमता वाली भुज सौर पीवी परियोजना (1443 करोड़ रुपये) और खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क से अतिरिक्त 7 गीगावाट बिजली की निकासी से संबंधित पारेषण प्रणाली (4231 करोड़ रुपये) की भी समीक्षा की गई। इस समीक्षा में ऊर्जा, राजस्व और वन एवं पर्यावरण विभागों ने भाग लिया।
इस प्लेटफॉर्म की व्यवस्थित निगरानी प्रणाली राज्य के विभिन्न विभागों और केन्द्रीय संस्थाओं के बीच निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करती है, जोकि भूमि और पर्यावरण संबंधी जटिल मंजूरियों की जरूरत वाली परियोजनाओं के लिए बेहद अहम है।
सरदार सरोवर कमान क्षेत्र के विकास को सुव्यवस्थित करना
सरदार सरोवर परियोजना (एसएसपी) और व्यापक राष्ट्रीय सिंचाई परियोजनाओं के संदर्भ में, माननीय प्रधानमंत्री द्वारा ‘प्रगति’ के तहत की गई समीक्षा पारंपरिक बाढ़ सिंचाई से हटकर सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों की दिशा में बदलाव में निर्णायक कारक साबित हुई है। ‘प्रगति’ के नीति निर्देशों के अनुसार, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों का परियोजना अनुमोदन और वित्तपोषण अनिवार्य कर दिया गया। साथ ही, सरदार सरोवर परियोजना, जिसे जल संकट को दूर करने में इसकी भूमिका के कारण अक्सर गुजरात की जीवनरेखा कहा जाता है, ने ‘प्रगति’ के तहत होने वाली समीक्षाओं के परिणामस्वरूप भूमिगत पाइपलाइन (यूजीपीएल) प्रणाली को अपनाया। पारंपरिक खुली नहरों से हटकर हुए इस बदलाव का उद्देश्य जल संरक्षण, भूमि विखंडन को कम करने और निर्माण में लगने वाले समय को घटाकर दक्षता एवं जलापूर्ति को बेहतर बनाना था।
बुनियादी ढांचे से परे: सामाजिक दायित्व
‘प्रगति’ का दायरा भौतिक बुनियादी ढांचे से कहीं आगे जाता है। यह पहल समाज कल्याण की प्रमुख योजनाओं के कार्यान्वयन की निगरानी करने और अंतिम छोर तक उनकी सुलभता सुनिश्चित करने में भी समान रूप से प्रभावी है।
* प्रधानमंत्री-आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभीम): स्वास्थ्य संबंधी इस महत्वपूर्ण पहल की समयबद्ध और प्रभावी कवरेज सुनिश्चित करने हेतु निगरानी की गई। नागरिकों को मिलने वाले प्रमुख लाभ हैं: उन्नत आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (एएएम) के जरिए स्वास्थ्य सेवा तक बेहतर पहुंच; देखभाल की बेहतर गुणवत्ता; वित्तीय बोझ में कमी; आईटी-आधारित रोग निगरानी प्रणाली तथा प्रयोगशालाओं के नेटवर्क के विकास द्वारा महामारी से निपटने की बेहतर तैयारी एवं प्रतिक्रिया; व्यापक प्राथमिक देखभाल; और डिजिटल स्वास्थ्य एकीकरण।
* पीएम स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (पीएमश्री): स्कूली अवसंरचना के आधुनिकीकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस योजना की प्रगति की समीक्षा ‘प्रगति’ के जरिए की जाती है। परिणामस्वरूप, गुजरात के 448 सरकारी स्कूलों में स्कूल अवसंरचना का तेजी से उन्नयन हो रहा है।
* “लखपति दीदी” योजना: ग्रामीण विकास के जरिए महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू की गई इस महत्वपूर्ण पहल की निगरानी भी ‘प्रगति’ प्लेटफॉर्म पर की जाती है। गुजरात में 6 लाख से अधिक लखपति दीदियों को कौशल विकास, वित्तीय समावेशन, डिजिटल साक्षरता और बाजार के संपर्क जैसे विभिन्न उपायों के जरिए स्थायी आय प्राप्त हो रही है।
शीर्ष स्तर पर इन योजनाओं की समीक्षा करके, ‘प्रगति’ जवाबदेही तय करती है और गुजरात के लक्षित लाभार्थियों को समय पर सरकारी सेवाएं सुलभ होना सुनिश्चित करती है।
गुजरात का सशक्तिकरण: प्रगति के जरिए भारत सरकार का परिवर्तनकारी समर्थन
राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति की सफलता के बाद, गुजरात सरकार ने शिकायतों एवं परियोजनाओं के प्रबंधन हेतु एक उन्नत प्रणाली के रूप में ‘स्वागत 2.0’ की शुरुआत की। यह ऑटो एस्केलेशन मैट्रिक्स से लैस है, जो महत्वपूर्ण बाधाओं से संबंधित ‘प्रगति’ की व्यवस्थित एस्केलेशन प्रणाली पर आधारित है। ‘प्रगति’ की परियोजना निगरानी संबंधी खूबियों से प्रेरित, संशोधित ‘स्वागत’ में अब समर्पित निगरानी और प्रदर्शन डैशबोर्ड शामिल हैं। ये डैशबोर्ड मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) को अधिकारियों की व्यक्तिगत कार्यकुशलता का आकलन करने और उन जिलों की पहचान करने में सक्षम बनाते हैं जहां बड़ी संख्या में अनसुलझी शिकायतें हैं। परियोजना संबंधी समीक्षाओं के जरिए प्रणालीगत सुधार लाने की ‘प्रगति’ की क्षमता की तरह, नई ‘स्वागत’ प्रणाली डैशबोर्ड डेटा का उपयोग करके बार-बार उभरने वाली उन समस्याओं की पहचान करती है जिनके लिए सिर्फ शिकायत समाधान के बजाय नीति-स्तर पर बदलाव की जरूरत होती है। ‘स्वागत 2.0’ के जरिए, गुजरात के मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से मासिक रूप से जटिल मामलों - जैसे आवास परियोजनाएं और बुनियादी ढांचे में देरी - की समीक्षा करते हैं और समाधान के लिए सख्त व समयबद्ध निर्देश जारी करते हैं, जो ‘प्रगति’ के “समयबद्ध कार्यान्वयन” के मूल उद्देश्य का अभिन्न अंग है।
गुजरात की उल्लेखनीय विकास यात्रा माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रदान किए गए दूरदर्शी समर्थन और सहयोगात्मक नेतृत्व का उत्कृष्ट प्रमाण है। ‘प्रगति’ नामक एक अग्रणी कदम के जरिए, केन्द्र सरकार ने इस राज्य को अमूल्य सहयोग प्रदान किया है। इससे इस राज्य को अपनी पूरी क्षमता का दोहन करने हेतु आवश्यक तकनीकी अवसंरचना और रणनीतिक मार्गदर्शन हासिल हुआ है।
(लेखक आईएएस (सेवानिवृत्त), जीईआरसी के अध्यक्ष/गुजरात के पूर्व मुख्य सचिव हैं)
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
