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धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।
रायपुर में केंद्रीय गृह मंत्री की उच्चस्तरीय सुरक्षा व विकास समीक्षा बैठक
डबल इंजन सरकार में कभी नक्सल हिंसा का गढ़ रहा छत्तीसगढ़ बना विकास का प्रतीक
रायपुर / शौर्यपथ /
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में वामपंथी उग्रवाद पर एक उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इसके साथ ही राज्य में संचालित विभिन्न विकास कार्यों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में नक्सल प्रभावित राज्यों की सुरक्षा स्थिति, आपसी समन्वय, खुफिया तंत्र और भविष्य की रणनीति पर गहन मंथन हुआ।
बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, केंद्रीय गृह सचिव, खुफिया ब्यूरो के निदेशक, गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा), छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव सहित CRPF, NIA, BSF, ITBP के महानिदेशक तथा छत्तीसगढ़, तेलंगाना, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र के गृह सचिव एवं पुलिस महानिदेशक उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार की सुरक्षा-केंद्रित रणनीति, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, नक्सल फाइनेंशियल नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार तथा प्रभावी आत्मसमर्पण नीति के ठोस और सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि 31 मार्च 2026 से पहले देश पूरी तरह नक्सल-मुक्त हो जाएगा।
गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ कभी नक्सली हिंसा का गढ़ माना जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही डबल इंजन सरकार के कारण आज यह राज्य विकास का पर्याय बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवा अब खेल, फॉरेंसिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं और साथ ही अपनी संस्कृति व परंपराओं को भी सहेजकर रख रहे हैं।
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि माओवाद के विरुद्ध लड़ाई किसी एक राज्य या बिखरे प्रयासों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी नक्सल प्रभावित राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सतत, सशक्त और निर्बाध समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि शेष बचे माओवादी तत्वों को एक राज्य से दूसरे राज्य में भागने का अवसर नहीं मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में है। यह वही नक्सलवाद है जिसने दशकों तक देश की कई पीढ़ियों को गरीबी, अशिक्षा और भय के अंधकार में धकेल दिया। अब देश उस दौर से निर्णायक रूप से बाहर निकल रहा है।
गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने सुरक्षा और विकास — दोनों मोर्चों पर उल्लेखनीय प्रगति की है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों को भी विकास के समान अवसर, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की सुविधाएं मिलें।
उन्होंने विश्वास जताया कि सुरक्षा, विकास और विश्वास — इन तीन स्तंभों पर आधारित रणनीति से भारत शीघ्र ही नक्सलवाद के कलंक से पूरी तरह मुक्त होगा।
रायपुर / शौर्यपथ / पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), भारत सरकार, रायपुर के नेतृत्व में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में भारत सरकार प्रवर्तित लोक कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन एवं प्रगति के अवलोकन के साथ ही साथ इस केन्द्र शासित प्रदेश की कला, संस्कृति और विरासत को जानने व समझने के लिए छत्तीसगढ़ की 12 सदस्यीय मीडिया टीम आज, 08 फरवरी, 2026 को रायपुर से पोर्ट ब्लेयर के लिए रवाना हो रही है ।
इस मीडिया टीम में हरिभूमि से श्री ब्रम्हवीर सिंह, नवप्रदेश से श्री यशवंत धोटे, स्वदेश से श्री जयप्रकाश मिश्रा, पिपुल्स समाचार से श्री वरूण कुमार चौहान, पत्रिका से श्री राहुल जैन, नवभारत से श्री जितेन्द्र मिश्रा, छत्तीसगढ़ से श्री पी. श्रीनिवास राव, दि हितवाद से श्री अभिषेक कुमार, आईबीसी-24 टीवी से श्री सौरभ सिंह परिहार, लल्लुराम डॉट कॉम से श्री प्रतीक चौहान और पीआईबी-रायपुर के दो ऑफिशियल्स श्री रमेश जायभाये तथा श्री परमानन्द साहू शामिल हैं ।
छत्तीसगढ़ की मीडिया टीम 09 से 14 फरवरी, 2026 तक केन्द्र शासित प्रदेश का भ्रमण करेगी । इस दौरान मीडिया टीम 20 मेगावाट एनएलसी सोलर पावर प्लांट, डालीगंज, सेंट्रल आईलैंड एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट, प्राणीशास्त्र संग्रहालय, मानव विज्ञान संग्रहालय, सेलुलर जेल, नार्थ-बे एवं नार्थ-बे लाइटहाऊस, एनएच-4 अपग्रेडेशन परियोजना, स्मार्ट सिटी परियोजना, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी, मिडिल स्ट्रेट क्रीक ब्रिज, बाराटांग लाइमस्टोन गुफाएं, मड वाल्केनो (गारामुखी), हम्प्रे स्ट्रेट ब्रिज, अमकुंज ईको-डेवलपमेंट साइट, धानी नल्ला मैंग्रेाव, कालीपुर ईको-टूरिज्म परियोजना, रॉस एवं स्मिथ द्वीप, चेन्नई-अंडमान सबमरीन ओएफसी परियोजना, बीएसएनएल केबल लैंडिंग स्टेशन, लालाजी बे इको-टूरिज्म रिसार्ट परियोजना, प्रस्तावित सी-प्लेन जेट्टी साइट, ताज एक्सोटिका एवं न्यू ईको-टूरज्मि स्थल और राधानगर बीच का भ्रमण करेगी ।
इसके अलावा मीडिया टीम अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के उपराज्यपाल, मुख्य सचिव, मत्स्य एवं पर्यटन सचिव, फिशरी सर्वे ऑफ इंडिया, भारतीय नौसेना, भारतीय कोस्ट गार्ड और भारत संचार निगम लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेगी ।
जगदलपुर/बस्तर।
“मां दंतेश्वरी की जय… सियान-सज्जन, दादा-दीदी मनके जोहार।”
इन्हीं आत्मीय शब्दों के साथ भारत की राष्ट्रपति ने बस्तर पंडुम महोत्सव में अपने ऐतिहासिक संबोधन की शुरुआत की। मां दंतेश्वरी के पावन धाम में उपस्थित होकर राष्ट्रपति ने इसे अपना सौभाग्य बताया और कहा कि छत्तीसगढ़ आना उन्हें अपने घर आने जैसा लगता है। यहां के लोगों से मिलने वाला अपनत्व और स्नेह उनके लिए अमूल्य है।
राष्ट्रपति ने बस्तर को वीरों की धरती बताते हुए उन सभी सपूतों को नमन किया जिन्होंने भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक वैभव देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो मां दंतेश्वरी ने स्वयं इस धरती को संवारा हो।
राष्ट्रपति ने बस्तर की जनजातीय जीवन-शैली की सराहना करते हुए कहा कि यहां हर मौसम, हर फसल और हर ऋतु एक पंडुम है। बीज बोने से लेकर आम के मौसम तक, बस्तर के लोग जीवन को उत्सव के रूप में जीते हैं। यह जीवन-दर्शन पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष बस्तर पंडुम के माध्यम से देशभर के लोगों ने जनजातीय संस्कृति की झलक देखी थी और इस वर्ष 50 हजार से अधिक कलाकारों व प्रतिभागियों द्वारा जनजातीय संस्कृति और जीवन-शैली के विविध रूपों का प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की प्रशंसा की।
राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर क्षेत्र एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनने की पूरी क्षमता रखता है। यहां की प्राचीन संस्कृति, जलप्रपात, गुफाएं और प्रकृति पर्यटकों को आकर्षित करने में सक्षम हैं। उन्होंने होम-स्टे जैसे नए पर्यटन मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आत्मनिर्भरता मिलेगी।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चार दशकों तक बस्तर माओवाद की हिंसा से पीड़ित रहा, जिसका सबसे अधिक नुकसान युवाओं, आदिवासियों और दलित समुदायों को हुआ। लेकिन अब भारत सरकार और राज्य सरकार की निर्णायक कार्रवाई से भय और असुरक्षा का माहौल समाप्त हो रहा है।
उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में माओवाद से प्रभावित लोगों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है और सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि वे सम्मानजनक और सामान्य जीवन जी सकें। ‘नियद नेल्लानार योजना’ को उन्होंने ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
राष्ट्रपति ने कहा कि आज बस्तर में विकास का नया सूर्योदय हो रहा है। गांव-गांव बिजली, सड़क और पानी पहुंच रहा है। वर्षों से बंद पड़े स्कूल फिर से खुल रहे हैं और बच्चे शिक्षा की ओर लौट रहे हैं। यह बदलाव पूरे देश के लिए आशा और विश्वास का संदेश है।
हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान में आस्था रखकर ही आगे बढ़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की यही ताकत है कि ओडिशा के एक छोटे से गांव की बेटी आज भारत की राष्ट्रपति बनकर बस्तर की जनता को संबोधित कर रही है।
राष्ट्रपति ने बताया कि पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से सबसे पिछड़ी जनजातियों को विकास से जोड़ा जा रहा है। शिक्षा को उन्होंने व्यक्तिगत और सामुदायिक विकास की आधारशिला बताया और माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएं। जनजातीय क्षेत्रों में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों की स्थापना को उन्होंने भविष्य निर्माण की दिशा में अहम कदम बताया।
राष्ट्रपति ने वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार विजेताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि इस क्षेत्र के डॉक्टर बुधरी ताती, डॉक्टर रामचंद्र गोडबोले एवं सुनीता गोडबोले को समाज सेवा, महिला सशक्तिकरण, आदिवासी उत्थान और दूरस्थ क्षेत्रों में नि:शुल्क चिकित्सा सेवा के लिए सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे निस्वार्थ सेवाभावी लोग ही समाज को संवेदनशील और समावेशी बनाते हैं।
अपने संबोधन के समापन में राष्ट्रपति ने कहा कि मां दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा हमारी प्राचीन परंपराओं और भाईचारे का प्रतीक है। विकास का वही मॉडल सफल होता है जो विरासत को संजोते हुए आगे बढ़े। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक विकास के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण करें।
राष्ट्रपति ने बस्तरवासियों से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि आपकी प्रगति ही छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की नींव है।
“जय जय छत्तीसगढ़ महतारी” के उद्घोष के साथ उन्होंने मां दंतेश्वरी से देशवासियों के कल्याण की प्रार्थना की।
लेखक -डॉ. दीपक जायसवाल
पीढ़ियों से, भारत के श्रमिकों ने एक पुरानी और टुकड़ों में बंटी श्रम प्रणाली का बोझ उठाया है, जो अक्सर उनके वेतन, सुरक्षा और कार्यस्थल पर गरिमा की रक्षा करने में विफल रही है। असंगठित, संविदा और उभरते गिग क्षेत्रों के करोड़ों श्रमिक नीति-परिदृश्य में अदृश्य रहे हैं और बुनियादी सामाजिक सुरक्षा से वंचित रहे हैं। चार श्रम संहिताएँ इन ऐतिहासिक अन्यायों का सुधार करने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित प्रयास का प्रतिनिधित्व करती हैं। लगभग तीन दर्जन अलग-अलग कानूनों को एक सुसंगत, एकल ढांचे में लाकर, ये संहिताएँ न्यायसंगत वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और उन लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास करती हैं, जो लंबे समय से वंचित रहे हैं। वर्षों के परामर्श और बहस के बाद इनका कार्यान्वयन, श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करने तथा अधिक स्थिर और मानवतापूर्ण रोजगार वातावरण बनाने में निर्णायक क्षण का प्रतीक है।
एक जिम्मेदार ट्रेड यूनियन संगठन के रूप में, भारतीय ट्रेड यूनियनों का राष्ट्रीय मोर्चा (एनएफआईटीयू), कामगारों की दीर्घकालिक भलाई, गरिमा और सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मोर्चा दृढ़ता से मानता है कि 12 फरवरी को श्रम संहिताओं के खिलाफ हड़ताल में भाग लेना न तो आवश्यक है और न ही वर्तमान समय में श्रमिक वर्ग के सर्वोत्तम हित में है।
श्रम संहिताएं कोई अचानक या एकतरफा हस्तक्षेप नहीं हैं। ये दो दशकों से अधिक समय तक चली सुधार प्रक्रिया का परिणाम हैं। 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को चार व्यापक संहिताओं में समेकित करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी, ताकि अनुपालन को सरल बनाया जा सके, अस्पष्टता को कम किया जा सके तथा कार्य और रोजगार की बदलती वास्तविकताओं के अनुरूप भारत की श्रम रूपरेखा को आधुनिक बनाया जा सके।
श्रम संहिताओं को पूरी तरह खारिज करना उन मौलिक लाभों की उपेक्षा करता है, जो वे श्रमिकों को प्रदान करने का प्रयास करती हैं। वेतन संहिता सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन कवरेज और समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करती है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में लंबे समय से मौजूद वेतन सुरक्षा के अंतर को दूर किया जा सकता है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, पहली बार, असंगठित, संविदा, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की विधायी रूपरेखा तैयार करती है। इन श्रमिकों की संख्या लगभग 40 करोड़ है और पहले ये श्रमिक औपचारिक सुरक्षा व्यवस्था से बाहर थे। ये प्रावधान भारत में श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा कवरेज का ऐतिहासिक विस्तार प्रस्तुत करते हैं।
औद्योगिक संबंध संहिता तथा पेशे से जुड़ी सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-परिस्थिति संहिता का उद्देश्य औद्योगिक सद्भाव, तेज विवाद निवारण और सुरक्षित, स्वस्थ व अधिक सम्मानजनक कार्यस्थलों को बढ़ावा देना है। कुछ प्रावधानों को लेकर चिंताएँ हो सकती हैं, अनुभव बताते हैं कि व्यापक विरोध और हड़तालों से शायद ही रचनात्मक परिणाम मिलते हैं। संवाद, नियम-आधारित सुधार और मुद्दा-विशेष पर चर्चा के जरिये श्रमिकों के हित बेहतर तरीके से पूरे किये जा सकते हैं, बजाय इसके कि आपस में टकराव हो, जिससे पारिश्रमिक हानि, उत्पादन में रुकावट और रोजगार असुरक्षा का जोखिम पैदा होता है—विशेष रूप से श्रम बल के सबसे कमजोर वर्गों के लिए।
यह दावा करना भी गलत है कि श्रम संहिताएँ बिना परामर्श के लागू की गई हैं। सुधार प्रक्रिया में त्रिपक्षीय चर्चाओं के कई दौर, संसद की स्थायी समितियों में विचार-विमर्श और विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद शामिल थे। एक लोकतांत्रिक प्रणाली में, मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन इन्हें बातचीत और संस्थागत संवाद के माध्यम से हल किया जाना चाहिए, न कि उन व्यवधानों के द्वारा जो अंततः स्वयं श्रमिकों को ही नुकसान पहुंचाते हैं।
जब भारतीय अर्थव्यवस्था संरचनात्मक रूपांतरण के दौर से गुजर रही है और राष्ट्र विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है, श्रमिक संघों को विघटन के बजाय जिम्मेदार कार्रवाई का चयन करना चाहिए। हमारी भूमिका केवल सुधारों का विरोध करना नहीं है, बल्कि उन्हें इस तरह आकार देना है कि श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर गरिमा को प्रभावी क्रियान्वयन और सतत सुधार के माध्यम से व्यावहारिक तौर पर मजबूत किया जा सके।
श्रमिक संघों की वास्तविक जिम्मेदारी केवल विरोध करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मजदूरों को वास्तविक रूप में जमीनी स्तर पर लाभ हो। अब ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि श्रम संहिताओं को न्यायपूर्ण तरीके से लागू किया जाए और इन्हें हर उस मजदूर तक पहुँचाया जाए, जिसे सुरक्षा की आवश्यकता है। हड़ताल की बजाय संवाद, सहयोग और निरंतर सुधार चुनकर, श्रमिक संघ एक ऐसा प्रणाली बनाने में मदद कर सकते हैं, जो श्रमिकों के लिए नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और गरिमा प्रदान करती हो और साथ ही 2047 तक विकसित भारत की ओर देश की यात्रा का भी समर्थन करती हो।
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(लेखक, भारतीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय मोर्चा (एनएफआईटीयू) के अध्यक्ष हैं)
जगदलपुर, शौर्यपथ। शहर की भागदौड़, धूल और शोर-शराबे से दूर बस्तरवासियों को प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने का एक अनुपम स्थल मिल गया है। कुम्हड़ाकोट में निर्मित जनजातीय गौरव वाटिका का लोकार्पण शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप तथा विधायक किरण सिंह देव के कर-कमलों से हुआ। लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से विकसित यह वाटिका अब आमजन के लिए समर्पित कर दी गई है, जो बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी है।
लोकार्पण समारोह में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, छत्तीसगढ़ बेवरेजेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास मद्दी, मुख्य वन संरक्षक आलोक तिवारी, संचालक कांगेर वैली सुश्री स्टायलो मंडावी सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
लोकार्पण के पश्चात अतिथियों ने वाटिका का अवलोकन किया। वन मंडलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में फैली इस परियोजना की शुरुआत हेल्थ पार्क की अवधारणा से हुई थी, जिसे बाद में एक बहुआयामी और आकर्षक वाटिका के रूप में विकसित किया गया। उप मुख्यमंत्री ने 1700 मीटर लंबे वॉकिंग ट्रेल, योगा शेड, योगा जोन, ओपन जिम जैसी आधुनिक सुविधाओं की सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य जागरूकता की दिशा में सराहनीय पहल बताया।
वाटिका में बनाए गए गपशप जोन, पारिवारिक आयोजनों के लिए निर्मित पाँच सुंदर पगोड़ा, प्लास्टिक फ्री जोन की व्यवस्था तथा इको-फ्रेंडली अवधारणा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। परिसर के मध्य स्थित तालाब और आइलैंड ने वाटिका की सुंदरता को और निखार दिया है। आगंतुकों की सुविधा के लिए प्रवेश द्वार पर पार्किंग और प्रसाधन की समुचित व्यवस्था भी की गई है। वन विभाग द्वारा भविष्य में ट्री-हाउस और एडवेंचर गतिविधियों की योजना भी प्रस्तावित है। लोकार्पण के साथ ही जनजातीय गौरव वाटिका अब बस्तर के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख आकर्षण के रूप में दर्ज हो गई है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप द्वारा विभिन्न स्व-सहायता समूहों एवं हितग्राहियों को एक करोड़ 22 लाख रुपये से अधिक की सहायता राशि के चेक वितरित किए गए। वृत्त स्तरीय चक्रीय निधि के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एक करोड़ 20 लाख 13 हजार रुपये का ऋण प्रदान किया गया।
बकावण्ड की मां धारणी करणी स्व-सहायता समूह को काजू प्रसंस्करण एवं विपणन हेतु 50 लाख रुपये, आसना के गोधन स्व-सहायता समूह को गाय पालन के लिए 34 लाख रुपये, घोटिया एवं भानपुरी के समूहों को इमली संग्रहण व प्रसंस्करण के लिए 13-13 लाख रुपये तथा कोलेंग की समिति को दोना-पत्तल निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की सहायता दी गई। यह पहल स्थानीय रोजगार को मजबूती देने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान उप मुख्यमंत्री ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा बीमा योजना के तहत कुरंदी निवासी कमलोचन नाग को दो लाख रुपये की बीमा सहायता राशि का चेक सौंपा। यह सहायता उनकी पत्नी स्वर्गीय भारती नाग के आकस्मिक निधन के पश्चात स्वीकृत की गई थी।
उप मुख्यमंत्री ने महिला स्व-सहायता समूहों से संवाद करते हुए इमली एवं काजू प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों के विस्तार, बाजार उपलब्धता और मार्केटिंग व्यवस्था पर भी चर्चा की। यह कार्यक्रम न केवल विकास और पर्यटन को गति देने वाला रहा, बल्कि बस्तर के वनांचलों में रोजगार, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करता नजर आया।
आदिवासी-ओबीसी-माइनोरिटी समाजों ने जताई नाराज़गी
प्रमुख प्रश्न: DMFT व CSR फंड के उपयोग को लेकर पारदर्शिता की मांग
जगदलपुर, शौर्यपथ। वीर आदिवासी क्रांतिकारी गुंडाधुर की जयंती (भूमकाल दिवस) के आयोजन को लेकर बस्तर संभाग में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा कुछ प्रश्न और आपत्तियाँ सामने रखी गई हैं। सर्व आदिवासी समाज सहित एसटी-एससी-ओबीसी-माइनोरिटी समाजों का कहना है कि उन्होंने नगरनार स्टील लिमिटेड (NMDC) से कार्यक्रम के लिए सहयोग का अनुरोध किया था, लेकिन उन्हें सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
समाज प्रतिनिधियों के अनुसार, 10 फरवरी को प्रस्तावित गुंडाधुर जयंती कार्यक्रम के संबंध में बस्तर संभाग के विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने नगरनार स्टील लिमिटेड के एडीजीएम बाबजी से मुलाकात कर औपचारिक आमंत्रण सौंपा था। इस दौरान सामाजिक सहभागिता और सहयोग का निवेदन किया गया।
समाज प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्हें प्रबंधन की ओर से यह जानकारी दी गई कि स्टील प्लांट आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है, जिस कारण किसी प्रकार का सहयोग फिलहाल संभव नहीं है। इसके बाद उन्हें परियोजना से जुड़े अन्य अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी गई, जहाँ से भी उन्हें कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिल पाया।
प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि कार्यकारी निदेशक से मुलाकात के प्रयास के दौरान व्यस्तता का हवाला दिया गया, जिससे वे अपनी बात सीधे रखने में असमर्थ रहे। इस स्थिति से समाजों में असंतोष व्यक्त किया जा रहा है।
इसी क्रम में समाजों की ओर से यह प्रश्न भी उठाया गया है कि जिले के लिए स्वीकृत DMFT और CSR फंड का उपयोग किन-किन कार्यों में किया जा रहा है। समाजों का कहना है कि यदि यह राशि स्थानीय विकास और सामाजिक गतिविधियों के लिए है, तो ऐसे ऐतिहासिक व सांस्कृतिक आयोजनों में सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
सर्व आदिवासी समाज के संभागीय अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि गुंडाधुर जयंती बस्तर के आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। उन्होंने अपेक्षा जताई कि भविष्य में सामाजिक संवाद और समन्वय के माध्यम से ऐसे विषयों का समाधान निकाला जाएगा।
ओबीसी महासभा एवं अन्य समाज संगठनों ने मांग की है कि स्थानीय युवाओं के रोजगार, सामाजिक सहभागिता तथा DMFT-CSR फंड के उपयोग से संबंधित जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
समाज प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वे इस विषय पर संवाद और संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी बात रखना चाहते हैं।
10वें दिन 130 से अधिक प्रदर्शनों का आंकड़ा पार; अंतर्राष्ट्रीय नाटकों और नुक्कड़ नाटकों ने जीता दर्शकों का दिल
बिलासपुर / शौर्यपथ / नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (एनएसडी) द्वारा आयोजित दुनिया का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय थिएटर फेस्टिवल, 25वां भारत रंग महोत्सव (BRM), अपने 10वें दिन भी कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। सिल्वर जुबली मना रहे इस महोत्सव ने अपनी विविधता और भव्यता से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित देशभर के 19 केंद्रों पर थिएटर की एक नई ऊर्जा का संचार किया है। अब तक इस फेस्टिवल में 130 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन हो चुके हैं, जिनमें माइक्रो ड्रामा, वन-एक्ट प्ले और नुक्कड़ नाटक शामिल हैं।
महोत्सव के 10वें दिन कहानी कहने के कई अनूठे रंग देखने को मिले। दिल्ली के मंच पर "बदज़ात" और "डैडी" जैसे प्रभावशाली नाटकों का मंचन हुआ, वहीं कश्मीरी लोक परंपरा 'भांड पाथर' पर आधारित नाटक “अका नंदन (आँखों का तारा)” ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पोलैंड के प्रोडक्शन “उमादेवी ऑब्जर्व्स वांडा डायनोव्स्का” और रूस के नाटक “ए वेरी सिंपल स्टोरी” ने वैश्विक कलात्मक संवाद को मजबूती प्रदान की।एनएसडी स्टूडेंट्स यूनियन की पहल 'आद्वित्य' के तहत नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से गंभीर सामाजिक मुद्दों को उठाया गया। इसमें बाल शोषण जैसे संवेदनशील विषय पर "कुछ अनसुने", पेरेंटिंग स्टाइल पर आधारित "बेबी शार्क डू डू डू डू" और कैदियों के जीवन के संघर्ष को दर्शाते नाटकों ने युवाओं की रचनात्मक सोच और सामाजिक ज़िम्मेदारी को प्रदर्शित किया। इसके साथ ही एफटीआईआई की चुनिंदा डिप्लोमा फिल्मों की स्क्रीनिंग ने सिनेमाई बारीकियों से दर्शकों को परिचित कराया।
भारत रंग महोत्सव 2026 की खास बात इसकी व्यापक पहुंच है। दिल्ली के मुख्य केंद्र के साथ-साथ यह महोत्सव छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। रायपुर के रंगमंच प्रेमी इन उच्च स्तरीय प्रस्तुतियों का गवाह बन रहे हैं, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को एक अंतरराष्ट्रीय मंच और नई दृष्टि मिल रही है। रायपुर के अलावा बेंगलुरु, पटना, कोलकाता और पुणे जैसे शहरों में भी नाटकों का मंचन जारी है।
यह 25वां संस्करण 27 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक चलेगा। पूरे 25 दिनों के इस सफर में 9 देशों और भारत के हर राज्य व केंद्र शासित प्रदेश के थिएटर ग्रुप हिस्सा ले रहे हैं। कुल मिलाकर 228 भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में 277 से अधिक प्रोडक्शन दिखाए जाएंगे, जिनमें कई दुर्लभ और कम बोली जाने वाली भाषाएं भी शामिल हैं।
राजनांदगांव / शौर्यपथ / साहित्य समिति, भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, राजनांदगांव (छत्तीसगढ़) द्वारा वार्षिक साहित्यिक महोत्सव “आईरिस 2026” का आयोजन 2 फरवरी से 6 फरवरी 2026 तक किया गया। इस महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच, ज्ञान और अभिव्यक्ति क्षमता को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
पांच दिनों तक चले इस आयोजन के अंतर्गत विभिन्न साहित्यिक और शैक्षणिक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें मिथोलॉजिकल क्विज, स्लोगन लेखन, कविता पाठ, गेस द डिज़ीज, मेडिकल एटलस, मेडिकल क्विज, एक्सटेम्पोर और वाद-विवाद प्रमुख रहे। सभी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने पूरे जोश, आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने विचारों, ज्ञान और रचनात्मकता का अच्छा प्रदर्शन किया और अपनी प्रतिभा को सामने लाने का अवसर पाया।
सभी प्रतियोगिताओं का मूल्यांकन महाविद्यालय के अनुभवी और सम्मानित संकाय सदस्यों द्वारा निष्पक्ष रूप से किया गया। उनकी उपस्थिति और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा और कार्यक्रम की गुणवत्ता बनी रही।
महोत्सव के समापन पर पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया, जो माननीय अधिष्ठाता (डीन) डॉ. पी. एम. लुका की गरिमामयी उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ. लुका ने साहित्य समिति और आयोजक दल के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह संपूर्ण आयोजन संकाय समन्वयकों डॉ. दिव्या साहू, डॉ. अनिल बरन चौधरी, डॉ. इंदु पद्मेय एवं डॉ. रूबी साहू के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। वहीं छात्र समन्वयकों आशुतोष चंद्र कुमार एवं जी. सृष्टि ने कार्यक्रमों के सुचारु संचालन में अहम भूमिका निभाई और सभी व्यवस्थाओं को अच्छे ढंग से संभाला।
आईरिस 2026 का समापन अत्यंत सफल और यादगार रहा। इस महोत्सव ने विद्यार्थियों को सीखने, अपनी प्रतिभा दिखाने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अच्छा अवसर प्रदान किया, जिससे महाविद्यालय का शैक्षणिक और सांस्कृतिक वातावरण और भी समृद्ध हुआ।
इस प्रतिष्ठित क्विज़ प्रतियोगिता में देश के विभिन्न प्रमुख कॉर्पोरेट संगठनों से जुड़े अधिकारी एवं पेशेवर प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के विभिन्न चरणों में व्यावसायिक समझ, वित्त, अर्थशास्त्र, बाजार, समसामयिक घटनाओं तथा विश्लेषणात्मक क्षमता का गहन मूल्यांकन किया गया। सुश्री शालिनी चौरसिया ने अपने सशक्त ज्ञान, तार्किक सोच और समसामयिक विषयों पर मजबूत पकड़ के बल पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शीर्ष प्रतिभागियों में स्थान बनाया।
‘द हिंदू बिज़नेस लाइन सेरेब्रेशन कॉर्पोरेट क्विज़’ देश की सबसे प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट क्विज़ प्रतियोगिताओं में से एक है। यह प्रतियोगिता अपने 22वें संस्करण में आयोजित की जा रही है और बीते वर्षों में यह श्रृंखला कॉर्पोरेट जगत में ज्ञानवर्धन, रणनीतिक सोच और बौद्धिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने वाले एक सशक्त मंच के रूप में स्थापित हुई है।
22वें सेरेब्रेशन कॉर्पोरेट क्विज़ के अंतर्गत देश के प्रमुख शहरों में क्षेत्रीय दौर आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी राष्ट्रीय फाइनल के लिए चयनित होंगे।
सुश्री शालिनी चौरसिया की इस उपलब्धि पर भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारियों, सहकर्मियों एवं कर्मचारियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।
भिलाई।
युवाओं को नशे की गिरफ्त में जाने से रोकने के लिए दुर्ग पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और समन्वित कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एक साथ की गई छापेमारी में पुलिस ने गोगो/रोलिंग पेपर, हुक्का सामग्री, चिलम और प्रतिबंधित जर्दायुक्त पान मसाला की भारी खेप जब्त की है। इस दौरान COTPA Act के तहत 16 दुकानदारों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल के निर्देश पर संचालित विशेष अभियान के अंतर्गत की गई, जिसमें 35 से अधिक पुलिस टीमों ने एक साथ दुर्ग–भिलाई के संवेदनशील इलाकों में रेड की।
पुलिस जांच में सामने आया कि शहर के विभिन्न पान ठेले, गुमटियां और डेली नीड्स की दुकानों पर गांजा सेवन के लिए उपयोग होने वाले गोगो/रोलिंग पेपर, चिलम, हुक्का फ्लेवर और प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद खुलेआम बेचे जा रहे थे। यह बिक्री खासतौर पर शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों के आसपास की जा रही थी।
संयुक्त पुलिस टीमों ने नियमानुसार तलाशी लेकर करीब ₹2 लाख मूल्य का नशीला सामान जब्त किया। इसके साथ ही संबंधित दुकानों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत इस्तगासा प्रस्तुत कर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई।
रेड के दौरान:
मोहन नगर – 8 दुकानें
स्मृतिनगर – 5 दुकानें
नेवई – 2 दुकानें
दुर्ग – 1 दुकान
कुल 17 व्यक्तियों के खिलाफ COTPA Act के तहत कार्रवाई की गई है।
दुर्ग पुलिस ने जब्त सामग्री की सप्लाई चेन (Backward Linkage) का भी पता लगाया है। पुलिस के अनुसार, इन नशीले उत्पादों की आपूर्ति करने वालों के खिलाफ भी आगामी दिनों में वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
कार्रवाई के दौरान जिन दुकानदारों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए, उनमें प्रमुख रूप से—
अभिनंदन सिंह (30), प्रगति नगर
चित्रांश साहू उर्फ सोनू (23), रुआबांधा बस्ती, मिलाई
विजेश बारवे (44), मुखर्जी नगर, मोहन नगर
देवेन्द्र भोसले (20), सिकोला भाठा, दुर्ग
शंकर लाल बंछोर (65), मोहन नगर
संजय कुमार बडानी (48), दुर्ग
लोकेश कुमार साहू (35), मोहन नगर
कुशाल प्रजापति (30), मोहन नगर
अर्जुन यादव (46), मोहन नगर
राजकुमार महोबिया (39), दुर्ग
राजेश कुमार द्विवेदी (57), सुपेला/स्मृतिनगर
मनोज कुमार चौहान, मॉडल टाउन, स्मृतिनगर
त्रिवेणी साहू (50), जुनवानी
लक्की चंदानी (43), मोहन नगर
भगवान साहू, हाउसिंग बोर्ड
विमल जसवानी (23), सिंधी कॉलोनी, दुर्ग
दुर्ग पुलिस की इस कार्रवाई से साफ संकेत है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नशे के खिलाफ यह अभियान निरंतर और और भी सख्त रूप में जारी रहेगा।
भिलाई नगर।
आवासहीन और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को आवास सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भिलाई नगर निगम ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम तथा नगरपालिका (कालोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्बंधन तथा शर्तें) नियम, 2013 के तहत ईडब्ल्यूएस (EWS) भूमि प्रदान करने के एवज में जमा की जाने वाली राशि को ‘गरीबों की सेवा निधि’ के नाम से पृथक बैंक खाते में रखने का प्रावधान है।
छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 128-ग के अनुसार, इस सेवा निधि की राशि का उपयोग स्लम बस्तियों एवं आवासहीन व्यक्तियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में किया जा सकता है। इसी क्रम में निगम के विगत बजट में गरीबों की सेवा निधि से 3 करोड़ रुपये व्यय का प्रावधान किया गया है।
माननीय विधायक वैशाली नगर श्री रिकेश सेन द्वारा भी गरीबों की सेवा निधि के समुचित एवं जनोपयोगी उपयोग के संबंध में निगम प्रशासन से पत्राचार किया गया है। इसके फलस्वरूप वित्तीय वर्ष 2025–26 के बजट प्रावधानों के अंतर्गत एक अहम निर्णय लिया गया है।
निर्णय के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना – सबके लिए आवास मिशन (AHP घटक) के तहत ऐसे हितग्राही, जो 31 मार्च 2026 तक अपने आवास का 90 प्रतिशत अंशदान जमा करेंगे, उन्हें शेष 10 प्रतिशत राशि प्रोत्साहन स्वरूप गरीबों की सेवा निधि से प्रदान की जाएगी।
निगम आयुक्त ने बताया कि राज्य शासन द्वारा किए गए वैधानिक प्रावधानों का वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने सभी पात्र हितग्राहियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सीमा में आवश्यक राशि जमा कर इस योजना का लाभ उठाएं।
नगर निगम की यह पहल न केवल आवास योजना को गति देगी, बल्कि गरीबों की सेवा निधि के उद्देश्यपूर्ण और संवेदनशील उपयोग का भी उदाहरण बनेगी। इससे शहरी गरीबों और आवासहीन परिवारों को अपने सपनों का घर पाने में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
