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May 15, 2026
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जहाँ सड़कें खत्म हुईं, वहाँ से शुरू हुई जिंदगी की जंग घने जंगल, उफनते नदी-नाले और 96 किमी का संघर्ष… ‘स्वस्थ बस्तर अभियान’ ने दो मासूमों को मौत के मुहाने से लौटाया

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माड़वी नन्दे और सुमड़ी को मिला नया जीवन, सुकमा में स्वास्थ्य कर्मियों की संवेदनशीलता और साहस की मिसाल

रायपुर/सुकमा/शौर्यपथ।
बस्तर के दुर्गम जंगलों में, जहाँ आज भी कई गाँव विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर हैं, वहाँ मानवता और प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल सामने आई है जिसने “सरकार अंतिम व्यक्ति तक” की परिभाषा को जीवंत कर दिया।

सुकमा जिले के दूरस्थ और पहुँचविहीन ग्राम दुरभा में ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत पहुँची स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दो मासूम बच्चियों — 5 वर्षीय माड़वी नन्दे और 4 वर्षीय माड़वी सुमड़ी — को मौत के मुहाने से वापस खींच लाया।

मलेरिया, गंभीर कुपोषण और शरीर में मात्र 2 से 3 ग्राम हीमोग्लोबिन जैसी बेहद गंभीर स्थिति में जी रहीं इन बच्चियों के लिए यह अभियान किसी जीवनदायिनी आशा से कम नहीं था।


जंगलों के बीच मानवता का सबसे कठिन सफर

कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के “स्वस्थ बस्तर” संकल्प को जमीन पर उतारते हुए अदम्य साहस का परिचय दिया।

स्वास्थ्य कर्मियों ने घने जंगलों, पथरीले रास्तों और नदी-नालों को पार कर दुरभा गाँव तक पहुँच बनाई। जब टीम ने बच्चियों की गंभीर हालत देखी, तो तत्काल उन्हें अस्पताल पहुँचाने का निर्णय लिया गया।

मीलों तक पैदल सफर कर बच्चियों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक लाया गया, जहाँ से एम्बुलेंस के जरिए लगभग 96 किलोमीटर दूर जिला चिकित्सालय सुकमा पहुँचाया गया।

यह सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं था, बल्कि प्रशासन और स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की जीवंत तस्वीर थी।


जब इलाज बना उम्मीद की नई किरण

जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने युद्ध स्तर पर उपचार शुरू किया।
एनीमिया और मलेरिया से जूझ रही बच्चियों को तत्काल रक्त चढ़ाया गया, मलेरिया का संपूर्ण उपचार दिया गया तथा पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में विशेष निगरानी में रखा गया।

कुछ ही दिनों में बच्चियों का हीमोग्लोबिन स्तर बढ़कर 9 ग्राम से अधिक हो गया और उनके चेहरों पर फिर से मुस्कान लौट आई।

इलाज के दौरान परिजनों को पोषण, स्वच्छता और बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सके।


उपचार ही नहीं, योजनाओं से भी जोड़ा गया परिवार

कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार यह मिशन केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं था।
बच्चियों और उनके परिवार को शासन की अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने हेतु आवश्यक दस्तावेज भी तैयार किए गए।

इलाज के बाद दोनों बच्चियों को सुरक्षित उनके गाँव वापस पहुँचाया गया, जहाँ अब उनकी खिलखिलाहट पूरे दुरभा गाँव में उम्मीद और विश्वास की नई कहानी लिख रही है।


‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ बना जनजीवन का सहारा

सुकमा जिले में इस महत्वाकांक्षी अभियान के तहत अब तक स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापक विस्तार किया गया है।

अभियान की प्रमुख उपलब्धियाँ :

  • कुल लक्ष्य: 2,93,386 लोगों की स्वास्थ्य जांच
  • अब तक जांच एवं उपचार: 1,74,770 लोग
  • रेफर किए गए गंभीर मरीज: 5,240

इन बीमारियों के मरीजों की पहचान कर उपचार हेतु भेजा गया :

  • मलेरिया
  • टीबी
  • कुष्ठ
  • मोतियाबिंद
  • खून की कमी
  • कुपोषित बच्चे
  • उच्च जोखिम गर्भवती महिलाएँ
  • बीपी एवं शुगर मरीज

बस्तर के अंतिम छोर तक पहुँची सरकार

दुरभा गाँव की यह कहानी केवल दो बच्चियों के उपचार की नहीं, बल्कि उस भरोसे की कहानी है जिसमें प्रशासन, स्वास्थ्य कर्मी और सरकार मिलकर यह संदेश दे रहे हैं कि —

“बस्तर का कोई भी जीवन अब दूरी और दुर्गमता के कारण असहाय नहीं छोड़ा जाएगा।”

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