August 10, 2026
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    भारत

    भारत (1080)

    नई दिल्ली / शौर्यपथ / 

    लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने महाराष्ट्र के नासिक में अशोका हेल्थ सिटी का उद्घाटन करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, चिकित्सा अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने के लिए सरकार और निजी क्षेत्र के संयुक्त प्रयासों पर जोर दिया।

    श्री बिरला ने कहा कि केंद्र सरकार मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिकल कॉलेजों में सीट वृद्धि और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने चिकित्सा संस्थानों से नई और उभरती बीमारियों की चुनौतियों से निपटने के लिए अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

    उन्होंने कहा कि अशोका हेल्थ सिटी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कैंसर उपचार, सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं तथा चिकित्सा अनुसंधान का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। साथ ही चिकित्सा शिक्षा को जनसेवा से जोड़ते हुए डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता बताई।

    लोकसभा अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि अशोका हेल्थ सिटी उत्तर महाराष्ट्र क्षेत्र में किफायती, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और चिकित्सा अनुसंधान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    गुजरात / शौर्यपथ / 

    गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में मियावाकी पद्धति से मात्र एक घंटे में 3.61 लाख से अधिक पौधारोपण कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया गया। इस उपलब्धि पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, 25 हजार से अधिक वॉलंटियर्स और क्षेत्रवासियों को बधाई दी।

    श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में चल रहा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन का रूप दे रहा है। गांधीनगर में सार्वजनिक वृक्षारोपण अभियान के तहत अब तक 1.26 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं, जिनमें 404 सार्वजनिक स्थलों पर 1.15 करोड़ से अधिक तथा निजी परिसरों में 11 लाख से अधिक पौधे शामिल हैं।

    उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन पार्कों के निर्माण, तालाबों के पुनर्जीवन और व्यापक वृक्षारोपण जैसे प्रयासों से गांधीनगर पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरा है। साथ ही नागरिकों से पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल और संरक्षण का भी संकल्प लेने का आह्वान किया।

    बस्तर में 12 वर्षों के जमीनी अनुभव और 7 वर्षों के ऐतिहासिक नेतृत्व का मिलेगा देश को लाभ, आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर निभाएंगे अहम भूमिका 

    रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक और ऐतिहासिक अभियान का नेतृत्व करने वाले 2003 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पी. सुंदरराज (Sundarraj P.) को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में इंस्पेक्टर जनरल (IG) के पद पर नियुक्त किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जून 2026 में उनकी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को मंजूरी देते हुए आदेश जारी किए थे।

    पी. सुंदरराज का नाम बस्तर में नक्सल विरोधी अभियानों की सफलता का पर्याय माना जाता है। उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक बस्तर संभाग में अपनी सेवाएं दीं और लगातार 7 वर्षों तक बस्तर रेंज के आईजी के रूप में कार्य करते हुए दक्षिण छत्तीसगढ़ के सात सर्वाधिक संवेदनशील जिलों में सुरक्षा अभियानों का प्रभावी नेतृत्व किया।

    उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए, जिससे नक्सलियों के सुरक्षित ठिकाने लगातार कमजोर होते गए। कई बड़े माओवादी कमांडर मारे गए, जबकि सैकड़ों नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की। उनकी रणनीति ने बस्तर में सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान की और नक्सल विरोधी अभियानों को नई दिशा दी।

    गृह मंत्रालय ने उनके उत्कृष्ट ट्रैक रिकॉर्ड, रणनीतिक सोच और जमीनी अनुभव को देखते हुए उन्हें देश की प्रमुख आतंकवाद रोधी जांच एजेंसी एनआईए में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। एनआईए आतंकवाद, उग्रवाद, अलगाववाद और नक्सलवाद से जुड़े गंभीर मामलों की जांच करने वाली देश की सर्वोच्च केंद्रीय एजेंसी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर के चुनौतीपूर्ण हालात में वर्षों तक काम करने का उनका अनुभव अब राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच और रणनीति निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

    46 वर्षीय पी. सुंदरराज मूल रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर के निवासी हैं। उन्होंने बी.एससी. (कृषि विज्ञान) की पढ़ाई के बाद संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें पुलिस वीरता पदक (Police Medal for Gallantry) तथा सराहनीय सेवा पदक सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

    पी. सुंदरराज की यह नियुक्ति न केवल छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि बस्तर में उनके नेतृत्व में किए गए प्रभावी नक्सल विरोधी अभियानों को राष्ट्रीय स्तर पर भी उच्च सम्मान और मान्यता मिली है।

    कांग्रेस नेता ने कथित चोरी की तुलना महमूद गजनवी के हमलों से की; ट्रस्ट और भाजपा की ओर से आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

    नई दिल्ली/अयोध्या।
    राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

    प्रेस वार्ता के दौरान पवन खेड़ा ने दावा किया कि इतिहास में महमूद गजनवी ने 27 वर्षों में 17 बार मंदिरों पर हमले किए थे, जबकि राम मंदिर में कथित रूप से 42–45 दिनों के भीतर 70 बार चढ़ावा चोरी होने की बात सामने आई है। उन्होंने इस तुलना के जरिए मामले की गंभीरता को रेखांकित किया।

    खेड़ा ने कहा कि धार्मिक शास्त्रों के अनुसार 'देव द्रव्य' (भगवान की संपत्ति) की चोरी अक्षम्य मानी जाती है। उनका आरोप है कि मामले में केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई कर वास्तविक जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस कथित अनियमितता के पीछे "असल जिम्मेदार" कौन हैं और उनकी भूमिका की जांच क्यों नहीं हो रही।

    कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    इस बीच, राम मंदिर के चढ़ावा प्रबंधन और ट्रस्ट से जुड़ी खबरों के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। हालांकि, पवन खेड़ा के आरोप उनके राजनीतिक बयान हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में जांच एवं कानूनी प्रक्रिया जारी है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, भाजपा या आरएसएस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर उसे भी समान प्रमुखता से शामिल किया जाएगा ।

    CBI जांच की मांग, आरोपियों की पैरवी करने वाले वकीलों पर ₹5 लाख जुर्माने का प्रस्ताव; ट्रस्ट की ओर से आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

      अयोध्या।
    राम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित हेराफेरी के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अयोध्या (फैजाबाद) बार एसोसिएशन ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। बार एसोसिएशन ने सार्वजनिक रूप से तीनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ने या कानूनी कार्रवाई का सामना करने जैसी चेतावनी दी है।

    बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा के अनुसार, यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो अधिवक्ता आंदोलन तेज करेंगे। उन्होंने शहरव्यापी विरोध और चक्का जाम की भी चेतावनी दी है।

    आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे वकील

    बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा है कि इस कथित चढ़ावा घोटाले के आरोपियों की ओर से कोई अधिवक्ता अदालत में पैरवी नहीं करेगा। प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई वकील इस निर्णय का उल्लंघन करता है तो उस पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। एसोसिएशन का कहना है कि यह राशि मामले की कानूनी लड़ाई में उपयोग की जाएगी।

    क्या है पूरा मामला?

    यह विवाद राम मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे की नकदी की कथित हेराफेरी से जुड़ा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नकदी की गिनती से जुड़े आठ आरोपियों को पहले ही न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। बार एसोसिएशन का आरोप है कि इतने बड़े स्तर की कथित अनियमितता बिना उच्च स्तर की लापरवाही या संरक्षण के संभव नहीं हो सकती, इसलिए ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

    CBI जांच की मांग

    बार एसोसिएशन ने पूरे प्रकरण की CBI जांच कराने की मांग की है। साथ ही, आवश्यकता पड़ने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की भी बात कही है।

    इस्तीफे की चर्चाएं, आधिकारिक पुष्टि नहीं

    कुछ मीडिया और सोशल मीडिया रिपोर्टों में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे की चर्चाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, इस संबंध में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    महत्वपूर्ण तथ्य
    अयोध्या बार एसोसिएशन ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
    तीन दिन के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन और चक्का जाम की चेतावनी।
    आरोपियों की पैरवी करने वाले वकीलों पर ₹5 लाख जुर्माने का प्रस्ताव।
    पूरे मामले की CBI जांच की मांग।
    ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों पर लगे आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं, और इस संबंध में सक्षम एजेंसियों की जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर विधानसभा सीट को लेकर नया कानूनी मोड़ आ गया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी की चुनाव याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। याचिका में उन्होंने भाजपा नेता एवं वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की भवानीपुर सीट से हुई जीत को चुनौती देते हुए मतगणना के दौरान कथित अनियमितताओं और धांधली के आरोप लगाए हैं।

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चुनावी साक्ष्यों के संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण अंतरिम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) तथा संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों को निर्देश दिया है कि चुनाव में प्रयुक्त EVM और VVPAT मशीनों को सुरक्षित रखा जाए। साथ ही मतगणना केंद्र शेखावाटी मेमोरियल गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल के भीतर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग भी संरक्षित रखने का आदेश दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी रिकॉर्डिंग नष्ट या डिलीट नहीं की जाएगी।

    उच्च न्यायालय ने मामले में दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई लगभग दो महीने बाद निर्धारित की गई है।

    इस बीच, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दो सीटों से जीतने के बाद संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नंदीग्राम विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने मई 2026 में विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस को अपना त्यागपत्र सौंपा। अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखने का निर्णय लिया, जहां उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 मतों के अंतर से पराजित किया था। वहीं नंदीग्राम सीट पर उन्होंने टीएमसी प्रत्याशी पवित्र कर को 9,665 वोटों से हराया था।

    नंदीग्राम सीट खाली होने के बाद वहां अब उपचुनाव कराया जाएगा, जबकि भवानीपुर सीट का चुनाव परिणाम फिलहाल न्यायिक समीक्षा के दायरे में रहेगा।

    राजनीतिक महत्व:

    हाईकोर्ट का यह आदेश चुनाव परिणाम पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं है, बल्कि संभावित न्यायिक जांच के लिए चुनावी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की प्रक्रिया का हिस्सा है। अंतिम फैसला न्यायालय में सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।

    भिवंडी पुलिस की छापेमारी में खुला बड़ा नेटवर्क, 1.5 करोड़ की डील का खुलासा; 3 आरोपी गिरफ्तार, हरियाणा-बिहार कनेक्शन की जांच, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने SIT जांच के दिए आदेश।

    मुंबई । महाराष्ट्र में लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ी Maha TET 2026 परीक्षा पेपर लीक के सनसनीखेज खुलासे के बाद स्थगित कर दी गई है। परीक्षा शुरू होने से महज 24 घंटे पहले हुए इस खुलासे ने पूरे राज्य की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    भिवंडी पुलिस को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर शनिवार को की गई छापेमारी में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से बरामद संदिग्ध प्रश्नपत्रों का महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (MSCE) ने सत्यापन कराया, जिसमें यह पुष्टि हुई कि बरामद प्रश्न वास्तविक परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं। इसके बाद परिषद ने रविवार, 28 जून 2026 को आयोजित होने वाली परीक्षा को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने का निर्णय लिया।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि लीक हुए प्रश्नपत्र की बिक्री के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये की बड़ी डील तय की गई थी। जांच एजेंसियों को इस पूरे रैकेट के तार हरियाणा और बिहार तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं, जिससे यह मामला एक अंतरराज्यीय संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पूरे प्रकरण की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने के आदेश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

    इस घटना ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था और पेपर लीक माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने की आवश्यकता को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। लाखों अभ्यर्थी अब नई परीक्षा तिथि की घोषणा और निष्पक्ष जांच के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं।

    नई दिल्ली / सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कुछ पोस्टों में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा 28 जुलाई, 2025 को संसद में दिए गए भाषण को गलत तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। इन पोस्टों में भाषण के एक चुनिंदा अंश को उद्धृत करके यह झूठा दावा किया गया है कि रक्षा मंत्री ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किसी भी भारतीय सैनिक की जान नहीं गई। ये पोस्ट जानबूझकर भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।

    रक्षा मंत्री के संसदीय भाषण को विवाद का मुद्दा बनाने की कोशिश करने वालों ने जानबूझकर उनके बयान के पूरे संदर्भ को नजरअंदाज किया है। यह याद रखना जरूरी है कि रक्षा मंत्री के भाषण के समय, मीडिया के कुछ वर्गों और सोशल मीडिया पर एक बेहद प्रचलित और प्रभावी धारणा फैली हुई थी, जिसमें दावा किया गया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय पायलट लापता हो गए थे। यह धारणा पूरी तरह से झूठी थी, फिर भी इसे ऑपरेशन की सफलता को कम करने और जनता का मनोबल गिराने के स्पष्ट इरादे से आक्रामक रूप से फैलाया जा रहा था। उसी संदर्भ में रक्षा मंत्री ने यह बयान दिया था इसलिए, उनकी टिप्पणी उस समय बेहद तेजी से फैल रहे झूठ का लक्षित और प्रासंगिक जवाब थी।

    रक्षा मंत्री के भाषण को उसके संपूर्ण और उचित संदर्भ में समझना भी महत्वपूर्ण है। संसद में दिया गया उनका भाषण, संपूर्ण रूप से, ऑपरेशन सिंदूर की उल्लेखनीय सफलता का गौरवपूर्ण और सटीक वर्णन था। इस ऑपरेशन में भारतीय रक्षा बलों ने अद्वितीय सटीकता, दृढ़ संकल्प और सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया। ऑपरेशन के दौरान 100 से अधिक आतंकवादियों और पाकिस्तानी सैनिकों को निशाना बनाया गया था। इसके साथ ही नियंत्रण रेखा पर स्थित पाकिस्तानी हवाई ठिकानों और तैनाती क्षमता को व्यापक एवं महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचागत क्षति भी पहुंची। यह भाषण भारतीय रक्षा बलों के साहस और क्षमता को उचित श्रद्धांजलि थी और भारत को नुकसान पहुंचाने की इच्छा रखने वालों के लिए एक स्पष्ट संदेश था।

    रक्षा मंत्री और भारत सरकार भारतीय रक्षा बलों के प्रत्येक सदस्य के प्रति, और विशेष रूप से राष्ट्र की रक्षा में प्राणों की आहुति देने वालों के प्रति, अपना आदर, कृतज्ञता और श्रद्धा व्यक्त करते हैं। उनका बलिदान मातृभूमि की सर्वोच्च सेवा है और इसे सदा गरिमा, गौरव और सम्मान के साथ याद किया जाएगा।

    उनके सर्वोच्च बलिदान को मान्यता देते हुए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि उनके नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की दीवारों पर अंकित हों। सरकार ने वीर शहीदों के परिवार/आश्रितों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं में रियायतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।

    पीआईबी ने भ्रामक दावों का किया खंडन, शहीदों को समय पर मिली श्रद्धांजलि और वीरता सम्मान

        नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले छह वीर सैनिकों के सम्मान को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया मंचों पर प्रसारित भ्रामक दावों का स्पष्ट खंडन किया है। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने कहा है कि यह दावा पूरी तरह तथ्यात्मक नहीं है कि इन सैनिकों के बलिदान को हाल ही में पहली बार आधिकारिक मान्यता दी गई या सार्वजनिक किया गया।
    पीआईबी के अनुसार, राष्ट्र ने इन अमर वीरों को उनके बलिदान के तुरंत बाद ही पूरे सम्मान के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की थी। 11 मई 2025 को आयोजित आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तत्कालीन डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स (DGMO) ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान शहीद हुए इन सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनके सर्वोच्च बलिदान का सार्वजनिक रूप से उल्लेख किया था।
    इसके बाद 14 अगस्त 2025 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इन वीर सैनिकों को प्रदान किए गए वीरता पुरस्कारों की जानकारी सार्वजनिक की गई। भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों पर तत्काल श्रद्धांजलि अर्पित कर इन वीरों के अदम्य साहस और राष्ट्रसेवा को नमन किया।
    पीआईबी ने बताया कि 15 जनवरी 2026 को जयपुर में आयोजित आर्मी डे परेड के दौरान सेना प्रमुख ने तीन शहीद सैनिकों के परिजनों को सेना मेडल (वीरता) प्रदान किया। वहीं 8 अक्टूबर 2025 को आयोजित विशेष समारोह में वायु सेना प्रमुख ने संबंधित शहीदों के परिजनों को वीरता सम्मान सौंपा। यह भारतीय सशस्त्र बलों की उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले प्रत्येक सैनिक का सम्मान सर्वोच्च गरिमा के साथ किया जाता है।
    सरकार ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय समर स्मारक पर शहीदों के नाम अंकित करने की एक निर्धारित और सम्मानजनक प्रक्रिया होती है, जिसका भारतीय सशस्त्र बल पूरी गंभीरता और प्रोटोकॉल के साथ पालन करते हैं। इसलिए यह कहना कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तथ्यात्मक रूप से गलत है।
    पीआईबी ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के निराधार दावे न केवल तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करते हैं, बल्कि शहीदों के परिजनों को अनावश्यक पीड़ा पहुंचाने और राष्ट्र के वीर सपूतों के सम्मान को ठेस पहुंचाने का जोखिम भी पैदा करते हैं। सभी मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील की गई है कि शहीद सैनिकों से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और तथ्यात्मकता का पालन करें तथा अपुष्ट सूचनाओं के प्रसार से बचें।

    राष्ट्र का प्रण
    भारतीय सशस्त्र बलों ने दोहराया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के छहों वीर सैनिक राष्ट्र के अमर नायक हैं। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। उनकी स्मृति का सम्मान हमेशा पूर्ण गरिमा, कृतज्ञता और श्रद्धा के साथ किया जाता रहेगा।

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