August 14, 2026
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    ममता सरकार को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार की ओर से गठित आयोग को पेगासस मामले की जांच से रोका

    • doing of business

    आयोग द्वारा पेगासस मामले की जांच जारी रखने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की.CJI एन वी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने यह सुनवाई की.

    नई दिल्‍ली /शौर्यपथ/

     पेगासस मामले  की जांच पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित जस्टिस लोकुर आयोग  नहीं करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस लोकुर आयोग की जांच की कार्यवाही पर रोक लगाई और साथ ही नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सुनवाई के दौरान CJI रमना ने पश्चिम बंगाल की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा कि आपने पिछली बार कहा था कि जांच आगे नहीं बढ़ेगी. सिंघवी ने कहा कि उन्होंने ये कहा था कि वो आयोग को बता देंगे. आयोग वैधानिक बॉडी है और उसे सरकार आदेश जारी नहीं कर सकती.

    आयोग द्वारा पेगासस मामले की जांच जारी रखने के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की.CJI एन वी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने यह सुनवाई की. याचिका में जस्टिस लोकुर आयोग द्वारा जांच करने रोक लगाने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने कहा है कि राज्य सरकार के जस्टिस लोकुर आयोग ने कोर्ट के आदेशों के बावजूद जांच जारी रखी है, इस पर CJI एन वी रमना ने कहा था कि पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा था कि वो आगे नहीं बढ़ेंगे. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस मामले की जांच के लिए 27 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस आर वी रविंद्रन की अध्यक्षता में जांच के आदेश जारी किए थे. हालांकि सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल ने भरोसा दिलाया था कि वो जांच में आगे नहीं बढ़ेंगे लेकिन सुप्रीम कोर्ट के कमेटी गठित करने के आदेश के बाद जस्टिस लोकुर कमेटी ने जांच जारी रखी है. इस संबंध में आयोग ने कुछ लोगों को नोटिस भी भेजा है.इसी के खिलाफ NGO ग्लोबल विलेज फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई की मांग की थी.

    दरअसल पेगासस जासूसी आरोपों की जांच के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जांच आयोग के गठन को चुनौती देने वाली याचिका दाखिल की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पेगासस मामले की SIT जांच वाली याचिकाओं के साथ टैग किया था. 25 अगस्त को पश्चिम बंगाल सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि सुप्रीम कोर्ट में मामले के लंबित रहने तक न्यायिक आयोग जांच शुरु नहीं करेगा.सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को पेगासस जासूसी आरोपों की जांच के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा जांच आयोग के गठन को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था.सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका पर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया था. इस मामले में NGO ग्लोबल विलेज फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिसमें कहा गया है कि जब सुप्रीम कोर्ट खुद इस मामले की सुनवाई कर रहा है तो आयोग का गठन क्यों किया गया? याचिका में पश्चिम बंगाल सरकार के 27 जुलाई के नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग की गई थी. याचिका में कमीशन पर रोक लगाने का आदेश देने की गुहार भी लगाई गई थी. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील सौरभ मिश्रा ने पीठ से कहा था कि उन्होंने राज्य सरकार द्वारा जांच आयोग गठित करने की अधिसूचना को अधिकार क्षेत्र के आधार पर चुनौती दी है. इसमें कहा गया है कि जब सुप्रीम कोर्ट खुद इस मामले की सुनवाई कर रहा है तो ममता सरकार द्वारा आयोग का गठन क्यों किया गया?दरअसल ममता सरकार ने 27 जुलाई को अधिसूचना जारी कर पेगासस जासूसी मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था.राज्य सरकार की इस जांच कमेटी में हाईकोर्ट के दो रिटायर्ड जज भी शामिल हैं.ये कमेटी पश्चिम बंगाल में फोन हैकिंग, ट्रैकिंग और फोन रिकॉर्डिंग के आरोपों की जांच कर रही है.

     

     

     

     

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