August 13, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me

    15 अगस्त विशेष चिंतन रुपक :हर घर तिरंगा और विभूतियों की तस्वीर

    • doing of business

      शौर्यपथ लेख / 15 अगस्त 2026 को भारतवासी आजादी के 80 वां पर्वोल्लास से सराबोर होंगे।खुले आसमान में लहराते तिरंगा तले जयहिन्द, भारत माता की जय का उ‌द्घोष जनमन को भावविभोर कर देगा। यह विशेष दिवस आत्मविश्लेषण-आत्मचिंतन की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण दिवस होता है। यही वजह है कि देशभर में आजादी के पूर्व और बाद की स्थिति "अतीत से अद्यतन" की चर्चा इस पर्व पर विविध माध्यमों से की जाती है। वीर-वीरांगनाओं के त्याग- समर्पण का स्मरण करके उन्हे शत शत नमन् किया जाता है।
    स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास बताता है कि 15 अगस्त 1947 के पहले अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों और बढ़ते अत्याचारों के सामने हर हिंदुस्तानी दासत्व में जीने को विवश हो चला था। दिन में भी घटाटोप अंधियारी रात का अहसास होता था। ऐसे दमघोटू माहौल से आक्रोशित देशभक्त हिंदुस्तानियों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विरोध का बिगुल फूंक दिया। 1857 की क्रांति के साथ ही हर ओर भारत छोड़ो का नारा गूंज उठा था। उस दौर में क्रांतिकारियों के हृदय में धधकती ज्वाला को ओजस्वी शब्दों में चित्रित करते हुए कविश्री लिखते हैं उठो जवानों नाम मिटा दो,पापी और शैतान का, दुश्मन की छाती में गाड़ो झण्डा हिन्दुस्तान का।
    स्वतंत्र भारत की पवित्र धरा पर खुली हवा में सांस लेते हुए देशवासियों ने आज तक जो कुछ भी अर्जित किया है, वह प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष रूप से तीन सौ वर्षों की गुलामी की पीड़ा सहे वीर पूर्वजों की देन है। फिरंगियों के खिलाफ विद्रोह की मशाल लेकर क्रांति में कूदे, शहीद हुए माँ भारती के सपूतों की कुर्बानी का सुफल है।
    इस नाते सदैव नवपीढ़ी को यह स्मरण रखना होगा कि उन्हें विरासत में मिली आजादी की पूंजी खैरात की नहीं है। यह वीर वीरांगनाओं की कठोर तपस्या से तैयार की गई फसल से उपजी पूंजी है। इसकी हिफाजत हर हाल में किसी भी कीमत पर करने के लिए युवा वर्ग को तत्पर रहना होगा।
    प्रदेशवासियों के लिए गर्व की बात है कि आजादी की लड़ाई में छत्तीसगढ़ के सपूतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्ष 1824 में ही छत्तीसगढ़ के वीर आदिवासी सपूतों ने फिरंगियों के खिलाफ जंग छेड़ दी थी। आदिवासी सेनानियों की हुंकार से ताकतवर अंग्रेज हुकुमत थरथर कांपती थी।
    ऐसे पारंपरिक शौर्य का प्रदर्शन करने वालों में छत्तीसगढ़ महतारी के महावीर बेटो में वीर गेंदसिंह, गुंडापुर, इंदरू केवट, वीरनारायण सिंह, राजा भेरम देव आदि शामिल है। उन दिनों सोना खान के सपूत वीर नारायण सिंह का शौर्य और साहस जनगीत बनकर गुंजता था- परन ठान के,कफन बांध के,भारत माँ के करीन बिचार,गरजिस बधवा बीर नारायण, लिन तलवार निकाल।
    स्वराज पथ गामियों में अग्रणीय ऐसे आदिवासी समाज की विशेषताओं को अभिव्यक्त करती हैं ये पंक्तियां- छत्तीसगढ़ के आदिवासी भाईयों के मिजाज लाजवाब है, गणित की किताब में ये रखते गुलाब है।
    फिरंगियों के राज को नेस्तनाबूत करने के लिए छत्तीसगढ़ की वीरांगनाओं ने भी ब्रिटिश हुकूमत की ईंट से ईंट बजा दी थी। रणचंडी की तरह हूंकार भरती रौद्ररुपा डॉ. राधाबाई, रोहणी बाई परगनिहा, केतकी बाई, बेला बाई, फूलकुंवर बाई और मीनाक्षी देवी (मिनीमाता) की राष्ट्रवादी भावना के आगे अंग्रेजों के नापाक ईरादे ताश के पत्तों से बने मीनार की भांति भरभरा कर गिरते-टूटते चले गए थे।
    अंततः अंग्रेजों को मां भारती के वीर लाल और ललनाओं के सामने झुकना पड़ा। पराधीनता की बेड़ियों से माँ भारती को मुक्ति मिल गई। मां भारती की आन- बान- शान के लिए सब कुछ न्यौछावर करने वाले शूरवीरों की शहादत की कीमत चुकाना असंभव है। इसे अजर अमर बनाए रखने के लिए महान विभूतियों की तस्वीरें केवल शासकीय कार्यालयों में ही नहीं घर-घर में भी लगनी चाहिए।
    स्वतंत्रता सेनानियों ने देशवासियों पर जो उपकार किया है, वह अमूल्य है। अतुल्य है। वे पूज्य है अतः आजादी के पर्व पर एक नया संकल्प लें कि घर घर तिरंगा फहराएंगे। दीवारों पर परिवार के पूज्य सदस्यों की भांति कम से कम एक महान विभूति की तस्वीर लगाएंगे। यह नई पहल आत्मसुख देगी। नई पीढ़ी के मानस पटल पर देशभक्ति का बीजारोपण करने में अवश्य कारगर होगी। शूरवीरों को नमन करते हुए कहें दिल से - यही पूजा सुबह-शाम कर लें, देश के अमर शहीदों को बस प्रणाम कर लें।


    विजय मिश्रा 'अमित' अग्रोहा कॉलोनी रायपुर (छग) 492013 मो.9893123310

    Rate this item
    (0 votes)

    Leave a comment

    Make sure you enter all the required information, indicated by an asterisk (*). HTML code is not allowed.

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision