August 10, 2026
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    पर्यावरण दिवस 5 जून चिंतन आलेख.....सुख उपजाते हैं सूखे पत्ते

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     छत्तीसगढ़ / टन-टन-टन की आवाज के साथ मेरे घर के निकट स्थित घण्टा घर ने रात के तीन बजने की सूचना दी। घण्टे की आवाज से मेरी नींद टूट गई। दोबारा सोने की मेरी कोशिश को गरमी ने नाकाम कर दिया।मैं पसीना पोंछते हुए करवट बदलकर सोने की कोशिश करता रहा। तभी मुझे किसी के रोने सिसकने की आवाज सुनाई दी।
              रोने की आवाज से बेचैन मन लिए मैं अपने घर के पीछे स्थित बगीचे के उस दिशा में चल पड़ा,जहाॅ से रोने सिसकने की आवाज आ रही थी। वहाॅ पेड़,पौधों से टूटकर गिरे सूखे पत्तों पर जब जब मेरे पैर पड़ते थे,तब तब चर्र-चर्र चर्र-चर्र की आवाज आती थी। इसे सुनकर मुझे ऐसे लगा मानों सूखे पत्ते ही रो रहे हैं,सिसक रहें हैं। मैंने अपने पैरों के नीचे दबे पत्ते को उठाते हुए पूूछा- क्यों रो रहे हो भाई ?
              मेरे इस प्रश्न पर सूखे पत्ते ने आहें भरते हुए कहा- हमारे हिस्से में तो अब रोना ही बचा है। क्योंकि बड़ी पुरानी कहावत है ‘सबका पकना अच्छा लगता है,पर पत्तों का पकना उनके पतन का सूचक होता है’। पेड़ पर लगे हरे-हरे पत्ते जब पीले होकर शाखाओं से टूटकर जमीन पर गिरते हैं तो लोग ऐसे पत्तों को कूड़ा करकट मान लेते हैं और बड़ी बेरहमी से जला देते हैं। ऐसी हरकत से वे अपनी नासमझी का परिचय देते हुए खुद के पाॅव पर कुल्हाड़ी मारने का काम करते हैं    
            दरअसल ऐसे लोग इस बात से अनभिज्ञ होते हैं कि डगालियों से टूटकर गिरे हुए पत्ते भी बहुपयोगी होते हैं।
    पत्ते के साथ बातचीत की रोचकता बढ़ती जा रही थी, मैंने जिज्ञासावश पूछा - पत्ता भाई सूखे पत्ते भला कैसे बहुपयोगी होते हैं? मेरे इस प्रश्न पर मुरझाये पीले पड़ चुके  पत्ते पर भी एक मुस्कान आ गई । वह बोला - पेड़ पौधों का नाता जन्म जन्म से जीव,जंतुओं और मानव समुदाय से जुड़ा होता है। तीज त्यौहारों पर तथा विभिन्न परंपराओं -संस्कारों में पेड़ पौधों सहित उनके फल, फूल पत्तों और डगालियों का उपयोग अनादिकाल से मानव समुदाय करता आया है। जीवनकाल की पूर्णता पर सूखे पेड़ भी विविध रूपों में उपयोगी होते हैं।
             लकड़ियों के उपयोग का ज्ञान तो मुझे भली भाॅति हैं,पर पत्तों का क्या उपयोग ? मैंने बातचीत के बीच में पुनः यह सवाल उठाया। तब पत्ते ने कहा- पत्तों का उपयोग औषधी,कच्ची मिटटी के घरों में छावन, पत्तल-दोना,खिलौना, झाडू जैसे अनगिनत कामों में होता है। पेड़ से गिरे सूखे पत्तों को जलाने से विषैली गैस निकलती है,जो कि वातावरण के लिए घातक है।इससे वातावरण की नमी का भी नाश होता है।
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    पत्ते से बातचीत करते हुए नये नये ज्ञान की प्राप्ति हो रही थी। बातचीत को आगे बढ़ाते हुए मैंने पूछा- पत्ते पीले पड़कर क्यों गिर जाते हैं? इस प्रश्न का जवाब देते हुए पत्ते ने कहा- हरे पत्तों में हरित पर्ण (क्लोरोफील) नामक एक पदार्थ होता है। मनी प्लांट सहित अनेक क्रोटन प्रजाति के पौधों के पत्ते में कहीं-कहीं क्लोरोफील का अभाव होता है जिससे वे चितकबरे दिखाई देते हैं। पत्तों में उपस्थित क्लोरोफील पेड़ पौधों के लिए भोजन बनाने का काम करते हुए प्राणवायु आक्सीजन का उत्सर्जन करता है। इसी हरित पर्ण की समाप्ति पर ही पत्ते पीले पड़ जाते हैं और सूखकर पेड़ों से गिर जाते हैं।
             पर ऐसे सूखे पत्तों में भी प्रोटीन,विटामीन, नाइट्रोजन आदि बहुमूल्य तत्वों की उपस्थिति बनी होती है। यही वजह है कि सूखे पत्ते सड़ कर ‘‘कम्पोस्ट खाद’’ बन जाते हैं, जो कि पेड़ पौधे,साग भाजी,अनाज,फल-फूल के पौधों को नवजीवन के साथ मजबूती प्रदान करते हैं।
             पत्ते की बातें सुनकर मैं उसकी पीठ थपथपाने लगा। तब उसने कहा कि सूखे पत्तों की सुरक्षा के लिए नेशनल ग्रिन ट्रिब्यूनल (हरित न्यायाधीकरण) ने कड़े कानून भी बनाये हैं। इसके बावजूद जन जागरूकता के अभाव में लोग अपने फायदे के लिए जंगलों में आग लगा देते हैं। पेड़-पौधों की कटाई करते हैं। जंगलों में और सूखे पत्तों में आग लगाने वालों को स्मरण में रखना होगा कि इससे जीव जंतु,जलकर मर जाते हैं,उनका वंश विनाश हो जाता है। अनेक जंतुओं की स्थिति इसलिए लुप्तप्राय भी हो चली है।
               पत्ते से बातचीत करते हुए मुझे भी अपनी एक गलती का एहसास हुआ कि हम वन भ्रमण, पर्यटन पर रहते हैं तो जलती हुई बीड़ी,सिगरेट फेंक देते हैं अथवा पिकनिक के दौरान जलाये गये चूल्हे को बिना बुझाये छोड़ देते हैं, जिससे कभी कभी जंगलों में भयानक आग लग जाती है।पत्ते के साथ अपनी बात को समाप्त करते हुए मैंने कहा कि आज के बाद अपने साथ ही अपने साथियों को भी यह सिखाता रहूंगा कि पेड़ पौधे से गिरे पत्तों को जलाने में नहीं, बचाने में ही समझदारी है। तभी तो किसी ने क्या खूब लिखा है-
    नीचे गिरे सूखे पत्तों पर अदब से चलना जरा,
    कभी कड़ी धूप में तुमने इनसे ही पनाह मांगी थी।
    विजय मिश्रा‘अमित’
    पूर्व अति महाप्रबंधक(जन)
    एम-8, सेक्टर-2, अग्रोहा सोसायटी पो आ- सुंदरनगर,रायपुर (छग)492013
    मोबा 9893123310

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