August 22, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    दुर्ग । शौर्यपथ । जिला कार्यकारी अध्यक्ष सोनू साहू के नेतृत्व में पिछले कुछ दिनों से RTE के तहत प्रवेश में जो समस्या आ रहे…

    Dhamtari/Shorypath/Rajshekhar Nair

    सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर प्रतिवर्षानुसार 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर सभी कार्यालयों में एकता की शपथ दिलाई जाएगी। कलेक्टर श्री जयप्रकाश ने छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग से जारी पत्र के हवाले से जिले के सभी कार्यालय प्रमुखों को पत्र जारी कर निर्देशित किया है कि उक्त तिथि को सुबह 11 बजे अपने-अपने कार्यालय में अधीनस्थों को राष्ट्रीय एकता की शपथ निर्धारित प्रपत्र के अनुसार दिलाएं तथा कोविड-19 के दिशानिर्देशों का अनिवार्यतः पालन करें।

    काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए शुभारम्भ
    हितग्राहीमूलक योजनाओं के तहत प्रत्येक विकासखण्ड से 25-25 हितग्राहियों को वितरित किया जाएगा चेक

    Dhamtari/Shorypath/Rajshekhar Nair

    विधिक सेवा प्राधिकरण के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के सभी जिलों में ई-मेगा कैम्प का आयोजन किया जाएगा, जिसका शुभारम्भ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के न्यायमूर्ति श्री प्रशांत कुमार मिश्रा एवं कार्यपालक अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा वीडियो काॅन्फे्रंसिग के जरिए शनिवार 31 अक्टूबर को सुबह 10.30 बजे किया जाएगा। इस अवसर पर न्यायमूर्ति श्री मनीन्द्र मोहन श्रीवास्तव तथा श्री गौतम भादुड़ी न्यायाधीश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति भी उपस्थित रहेंगे। इसमें उच्च न्यायालय के एन.आई.सी से एक साथ प्रदेश भर के सभी 23 सिविल जिलों व 64 तहसीलों को भी वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जोड़ा जाएगा।
    उक्त शुभारम्भ समारोह के अवसर पर वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री सुधीर कुमार के अलावा जिले के कलेक्टर श्री जयप्रकाश मौर्य, एस.पी. श्री बी.पी. राजभानू सहित समस्त न्यायाधीश, समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग के अतिरिक्त अन्य प्रतिभागी विभागों के अधिकारी भी जुड़ेंगे। जिले के साथ-साथ तहसील स्तर पर पदस्थ न्यायिक अधिकारीगण वी.सी. के माध्यम से जुड़ेंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार सुबह 10.30 बजे सम्माननीय अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलित किया जाएगा, तदुपरांत 10.40 बजे ई-मेगा कैम्प सिरीज का शुभारम्भ न्यायमूर्ति श्री प्रशांत कुमार मिश्रा के द्वारा किया जाएगा। सुबह 10.50 बजे रजिस्ट्रार जनरल श्री दीपक कुमार तिवारी के द्वारा संबोधित किया जाएगा, उसके बाद सुबह 10.55 बजे मूक बधिरों के लिए सद्भावना सिरीज (जनचेतना पर आधारित यू-ट्यूब चैनल) का उद्घाटन सम्माननीय अतिथियों के द्वारा किया जाएगा। तत्पश्चात् 11 बजे न्यायाधीश श्री गौतम भादुड़ी के विशेष संबोधन दिया जाएगा। इसके बाद सुबह 11.10 बजे न्यायमूर्ति श्री मनीन्द्र मोहन श्रीवास्तव के द्वारा अध्यक्षीय उद्बोधन दिया जाएगा। तदुपरांत 11.20 बजे न्यायमूर्ति श्री मिश्रा के द्वारा शुभारम्भ उद्बोधन दिया जाएगा। समारोह के अंत में सदस्य सचिव छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण श्री सिद्धार्थ अग्रवाल के द्वारा आभार प्रकट किया जाएगा।
    राज्य स्तरीय कार्यक्रम के समापन के उपरांत जिला स्तर पर नालसा एवं शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के संबंध में जिला एवं सत्र न्यायाधीश और कलेक्टर के द्वारा जानकारी दी जाएगी। इसके बाद विभिन्न विभागीय हितग्राहीमूलक योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को चेक एवं उपकरण वितरित किए जाएंगे। इस संबंध में बताया गया है कि इसके तहत जिले के लगभग 4500 हितग्राहियों को लाभान्वित किया जाएगा, जबकि जिला मुख्यालय से वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले के प्रत्येक विकासखण्ड से 25-25 हितग्राहियों के नामों की घोषणा कर उन्हें प्रतीकात्मक रूप से वितरण किया जाएगा।

    Dhamtari/Shorypath/Rajshekhar Nair

    कोविड 19 कोरोना वायरस के संक्रमण से नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए एकीकृत बाल विकास परियोजना धमतरी शहरी में कोरोना जागरूकता रैली निकाली गई। इस दौरान ’दो गज दूरी, मास्क है जरूरी’ संदेश के साथ ही इम्यूनिटी बढ़ाने के उपाय, साबून से हाथ धोने इत्यादि की समझाईश दी गई। साथ ही सर्दी-खांसी, बुखार होने पर तत्काल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं मितानिन को सूचना देने और स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह भी दी गई। कोरोना संक्रमण से सुरक्षा और बचाव के संदेश की इस रैली में परियोजना अधिकारी श्रीमती चित्ररेखा यादव सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं पर्यवेक्षक उपस्थित रहे।

    अंजोरा विश्वविद्यालय के कुलपति ने महापौर से की सौजन्य मुलाकात

    दुर्ग / शौर्यपथ / नगर पालिक निगम दुर्ग सीमा क्षेत्र के पशु पालकों को अब अपने बीमार मवेशियों का ईलाज कराने अंजोरा पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय नहीं जाना पड़ेगा । उन्हें दुर्ग शहर में ही महिला समृद्धि बाजार के बाजू प्रारंभ हो रहे दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय में सभी प्रकार की सुविधा प्राप्त होगी। इस संबंध में आज अंजोरा विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ0 ण्म.पी. दक्षिणकर ने आज महापौर श्री धीरज बाकलीवाल से सौजन्य मुलाकात कर उन्हें उद्घाटन कार्यक्रम के लिए आमत्रित किये । कल 11 बजे उसका उद्घाटन किया जावेगा। दाऊ वासुदेव कामधेनु विश्वविद्यालय का उद्घाटन कांगे्रस उपाध्याक्ष एवं पूर्व विधायक श्रीमती प्रतिमा चंद्राकर द्वारा किया जावेगा। इस मौके पर विशेष अतिथि के रुप में महापौर धीरज बाकलीवाल, सभापति राजेश यादव, ऋषभ जैन, भोला महोबिया, एल्डरमेन अजय गुप्ता एवं अन्य उपस्थित रहेगें।

    15 से 20 प्रतिशत बचे कार्यो को 15 दिनों में करें पूरा करने अधिकारियों को दिये निर्देश दुर्ग / शौर्यपथ / निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन द्वारा आज निगम डाटा सेंटर…
    नई दिल्ली / शौर्यपथ / गोरखपुर के ललित नारायण मिश्रा रेलवे हॉस्पिटल के एक टॉयलेट में समाजवादी पार्टी के झंडे के रंग वाले टाइल्स को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो…

    राजनांदगांव / शौर्यपथ /जिले में खरीफ फसलों की कटाई जोरों-शोरो से चल रही है जिसके बाद गेंहूँ, चना, मसूर, सरसों आदि रबी फसलों की बोआई की जानी है जिसके लिए विभिन्न रबी फसलों की बोआई का कार्यक्रम तैयार किया गया है। जिसमें जिले में संचालित जल सिंचाई परियोजनाओं में जल की उपलब्धता के आधार पर दलहनी एवं तिलहनी फसलों की बोनी किया जाना है इस वर्ष जल सिंचाई परियोजना के माध्यम से केवल दलहनी एवं तिलहनी फसलों के लिये सिंचाई हेतु जल उपलब्ध कराया जायेगा ग्रीष्मकालीन धान उत्पादक किसानों को परियोजना से सिंचाई उपलब्ध नहीं किया जाना है क्योंकि ग्रीष्मकालीन धान में अत्यधिक सिंचाई जल एवं वातावरण में विपरित प्रभाव पड़ता है। वहीं ग्रीष्मकालीन धान उत्पादन लेने में लगने वाले सिंचाई जल की मात्रा से दोगुने दलहनी एवं तिलहनी फसलों की सिंचाई कर कम लागत में अधिक उत्पादन एवं लाभ प्राप्त किया जा सकता है। किसान ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहनी फसलें जैसे- चना, तिवड़ा, मटर, उड़द, मूंग, कुल्थी तथा तिलहनी फसलें जैसे- अलसी, सुर्यमुखी, कुसुम, सरसों एवं अनाज वाली फसलों में मक्का फसल का आसानी से सफलता पूर्वक उत्पादन ले सकते है।
    जिले में संचालित विभिन्न मध्यम सिंचाई परियोजनावार- रूसे जलाशय परियोजना, पिपरिया जलाशय, मोंगरा जलाशय, सूखानाला जलाशय, घुमरिया नाला बैराज के माध्यम से कुल रकबा 3020 हेक्टेयर में रबी दलहनी एवं तिलहनी फसलों के लिए सिंचाई जल दिये जाने का कार्यक्रम तैयार किया गया है। इसी प्रकार लघु सिंचाई परियोजना से 1000 हेक्टेयर रकबा में सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाना है।
    धान के 1 किलो चावल उत्पादन के लिए 500 लीटर सिंचाई जल की आवश्यकता होती है जो किसी भी फसल में लगने वाली जल मांग की तुलना में बहुत ही अधिक है ग्रीष्मकालीन धान उत्पादक किसान ज्यादातर नलकूप के माध्यम से सिंचाई करते है जिससे भू-जलस्तर में गिरावट होने से जल निस्तारी आपूर्ति की समस्या निर्मित हो सकती है। आगामी दिनों में भू-जलस्तर में गिरावट होने पर ग्रीष्मकालीन धान उत्पादक किसानों की नलकूप विद्युत कटौती भी की जा सकती है।
    रबी 2020-21 में विभिन्न फसलों की बीज मांग की गई है जिसमें दलहन फसल में 10980 क्विंटल तथा तिलहनी फसलों में 980 क्विंटल की बीज मांग की गई है जिनमें से गेंहूँ 986 क्विंटल, चना 2805 क्विंटल तथा अन्य फसलें 100 क्विंटल बीज सहकारी समितियों में भण्डारित की गई है साथ ही दलहनी, तिलहनी फसलों के क्षेत्र विस्तार के लिए कृषि विभाग में संचालित योजनाओं के तहत प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है। किसानों से आग्रह है कि ग्रीष्मकालीन धान के बदले अन्य दलहनी, तिलहनी एवं मक्का फसल की बोनी करें।

    राजनांदगांव / शौर्यपथ / जिले में धान फसल की कटाई प्रारंभ हो चुकी है, जिन क्षेत्रों में धान के बाद रबी फसल लिया जाता है वहाँ किसान धान कटाई के बाद खेत में पड़े पराली को जला देते है। इसके संबंध में किसानों को भ्रम है कि पराली जलाने के बाद अवशेष (राख) से खेत को खाद मिलेगा तथा खेत साफ हो जाएगा, लेकिन यह सोचना गलत है, क्योंकि पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता तथा लाभदायक कीट भी खत्म हो जाती है। साथ ही वायु प्रदुषण का कारण बनती है जिससे मनुष्य, पशु पंक्षी सभी को विभिन्न प्रकार की बीमारियां भी होती है जिसका उदाहरण -दिल्ली, पंजाब, हरियाणा जैसे शहरों में कुछ वर्षो से देखने को मिल रहा है।
    धान की पराली जलाने से होने वाले नुकसान -
    एक टन धान पराली जलाने से हवा में 3 किलो ग्राम कार्बन, 513 किलो ग्राम कार्बन डाई-आक्साईड, 92 किलो ग्राम कार्बन मोनो आक्साईड तथा 250 किलो ग्राम राख घुल जाती है। धान पराली जलाने से वायु प्रदुषित होने से आँखो में जलन एवं सांस संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पराली जलाने से भूमि की उपजाऊ क्षमता लगातार घट रही है इस कारण भूमि में 80 प्रतिशत तक नाईट्रोजन, सल्फर एवं 20 प्रतिशत अन्य पोषक तत्व की कमी आ रही है। मित्र कीट की मृत्यु होने से नई-नई बीमारियाँ उत्पन्न होती है। एक टन धान पराली जले से 5.5 किलो ग्राम नाईट्रोजन, 2 किलो ग्राम फास्फोरस और 1.2 किलो ग्राम सल्फर जैसे पोषक तत्व नष्ट हो जाते है। पशुओं के लिए वर्ष भर चारा आपूर्ति की समस्या बन जाती है।
    फसल अवशेष/पराली/नरवाई जलाने पर आर्थिक दंड -
    आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा वायु (प्रदुषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा 19(5) के अंतर्गत फसल अपशिष्ट को जलाया जाना प्रतिबंधित किया गया है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के तहत खेती में कृषि अवशेषों को जलाये जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है जिसके तहत पराली जलाने वाले व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आर्थिक दंड के रूप में 2 एकड़ से कम खेत पर 2500 रूपए, 2 से 5 एकड़ खेत पर 5000 रूपए तथा 5 एकड़ से अधिक पर 15000 रूपए जुर्माना लगाया जाएगा।
    पराली का निर्मित गौठान में दान -
    जिले में सुराजी गांव योजना के तहत गौठान निर्मित किए गए है जिसमें धान पराली का दान करें, ताकि गौठान में वर्षभर पशुओं के लिए चारा आपूर्ति बनी रहें। पैरादान करने के लिए संबंधित गौठान समिति/ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क कर सकते है।
    पराली का प्रबंधन -
    स्टा मल्चर मशीन की सहायता से पराली को गठ्ठे में एक कर उपयोग कर सकते है। वेस्ट डी-कम्पोजर के 200 लीटर प्रति एकड़ घोल को फसल कटाई उपरांत खेतो में पड़े अवशेषों के उपर छिड़काव कर सड़ा सकते है। जिससे खेतों में ही पोषक तत्व प्रबंधन किया जा सकता है। वेस्ट डी-कम्पोजर बनाने के लिए 200 लीटर पानी में 2 किलो ग्राम गुड़ मिलाकर वेस्ट डी-कम्पोजर का 20 ग्राम का घोल डालकर 6 से 7 दिन के लिए ढककर रख देते है। प्रतिदिन दो बार डंडे से उसे अच्छी तरह मिलाना चाहिए। धान के पराली का यूरिया से उपचार करके पशु चारे के रूप में उपयोग कर सकते है।

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