August 19, 2026
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    शौर्यपथ

    शौर्यपथ

    मनोंरंजन / शौर्यपथ / बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली ने शादी के बाद इंडस्ट्री में वापसी की है। फिल्म 'सीजन्स ग्रीटिंग' से इन्होंने एक्टिंग की दुनिया में धमाकेदार एंट्री मारी है। हाल ही में एक इंटरव्यू में सेलिना ने बताया कि अच्छी एक्टिंग और एक टैलेंटेड एक्टर होने के बावजूद मुझे इंडस्ट्री को अलविदा कहना पड़ा। मेरे बच्चे और शादी इसके पीछे की वजह कभी नहीं रही, बल्कि मुझे अच्छे रोल्स ऑफर नहीं किए जा रहे थे यह सोचकर कि मैं एक आउटसाइडर हूं, इसलिए मैंने इंडस्ट्री को अलविदा कहा था। ब्रेक लिया था।

    न्यूज पोर्टल से बातचीत में सेलिना ने बताया कि मैंने जानबूझकर इंडस्ट्री से ब्रेक लिया। शादी और बच्चे इसकी वजह कभी नहीं रहे। मैं थक चुकी थी। अच्छे रोल्स नहीं मिल रहे थे। एक आउटसाइडर होने की वजह से मैं अपने अंदर के एक्टर को सेलिब्रेट ही नहीं कर पा रही थी। मुझे हर बार खुद को प्रूव करना पड़ रहा था। हर किसी के आगे अच्छे रोल के लिए हाथ फैलाना पड़ रहा था। पिछले साल मेरी मां का देहांत हो गया। तब मैंने फिल्मों में वापसी करने का तय किया। मेरी मां की आखिरी ख्वाहिश थी कि मैं एक्टिंग की दुनिया में दोबारा कदम रखूं और फिल्म करूं।

    गौरतलब है कि एक इंटरव्यू में सेलिना ने बताया था कि माता-पिता की मौत के बाद और बेटे के जन्म के बाद वह डिप्रेशन में आ गई थीं। डिप्रेशन एक ऐसी चीज है जो किसी को भी किसी भी उम्र में हो सकती है। ऐसा नहीं है कि इसे ठीक नहीं किया जा सकता। सपोर्ट सिस्टम के साथ आप इसे ठीक कर सकते हैं, बस इसे कभी इग्नोर न करें।
    सुशांत सिंह राजपूत की मौत से सेलिना जेटली को धक्का लगा। सुशांत ने 14 जून को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह, डिप्रेशन से जूझ रहे थे। एक्टर की मौत पर शोक जताते हुए सेलिना कहती हैं कि बहुत दुखद खबर है यह, क्योंकि हम सभी ने एक बहुत ही शानदार एक्टर को खोया है। किसी ने अपने बेटे को खोया है, किसी ने अपने प्यार को खोया है, किसी का भाई गया है और फिल्म इंडस्ट्री का एक चमकता सितारा गया है। एक शानदार टैलेंटेड एक्टर, जो भविष्य में भारत का पहला ऑस्कर जीतने का दम रखता था, आप नहीं जानते। पता नहीं ऐसा क्या हुआ जिसने सुशांत को यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

    आपको बता दें कि सेलिना जेटली को उनके पति ने काफी सपोर्ट किया। डिप्रेशन पर सेलिना कहती हैं कि मैं उन लोगों से घिरी थी जो मुझे बहुत प्यार करते हैं। मेरे पति ने मेरी बहुत देखभाल की। डॉक्टर्स ने मेरी मदद की। हालांकि, यह अभी तक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है लेकिन मैं पहले से बेहतर महसूस कर रही हूं।

     

    सम्पादकीय लेख / शौर्यपथ / कोरोना, बारिश और त्योहारों के समय गरीब वर्ग को अन्न से संबल देने का प्रयास सराहनीय और स्वागतयोग्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताजा घोषणा मूल रूप से देश के दरिद्र नारायण की सुधि लेने की ऐसी कोशिश है, जिसकी उम्मीद पिछले एक महीने से बंधी हुई थी। सरकार ने जुलाई से नवंबर तक पूरे पांच महीने तक देश के करीब 80 करोड़ जरूरतमंदों को पांच-पांच किलो गेहूं या चावल और चना मुफ्त देने का जो फैसला किया है, उससे देश को एक मानवीय आधार मिलेगा। यह आधार पूरे गुजारे के लिए भले पर्याप्त न हो, लेकिन इससे अभावग्रस्त परिवारों का मनोबल बढे़गा। इस राहत के उपरांत वे अपने थोडे़ से प्रयास या रोजगार योजनाओं का लाभ उठाकर अपने दिन ठीक से गुजार सकेंगे। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के नवंबर तक विस्तार से अभावग्रस्त लोगों को अपने यथास्थान रहने की प्रेरणा भी मिलेगी। विशेष रूप से बिहार जैसे श्रमिक बहुल राज्य में छठ पूजा का बहुत महत्व है, जिसे प्रधानमंत्री ने भी जाहिर किया है। बड़ी संख्या में ऐसे कामगार होंगे, जो अब नवंबर में छठ पूजा के समापन के बाद ही यात्रा की योजना बनाएंगे। बेशक, देखने वाले इस घोषणा को चुनाव से जोड़कर भी देखेंगे, लेकिन वह भी इस योजना के व्यापक महत्व से इनकार नहीं कर पाएंगे। एक और अच्छी बात है कि इस योजना का श्रेय किसानों और ईमानदार करदाताओं को दिया गया है।
    जब देश में कोरोना का संक्रमण बढ़ता जा रहा है, तब सरकार का लोक-कल्याणकारी स्वरूप सशक्त होना ही चाहिए। इस योजना के विस्तार पर अगर 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होंगे, तो कोई बात नहीं। इस देश में ऐसी क्षमता है कि वह गरीबों के साथ खड़ा हो सकता है। यदि कोरोना के समय अमेरिका की कुल जनसंख्या से तीन गुना अधिक लोगों को हमारी सरकारों ने मुफ्त अनाज दिया है, तो कोई आश्चर्य नहीं। बहरहाल, यह भी जरूरी है कि ऐसी उदार योजनाओं का लाभ पूरी ईमानदारी से जरूरतमंदों तक पहुंचे। निचले स्तर पर वितरण से जुड़े लोगों के लिए भी यह परीक्षा और दरिद्र नारायण की सच्ची सेवा का समय है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी बहाने से किसी भी जरूरतमंद को योजनाओं के लाभ से वंचित न किया जाए।
    प्रधानमंत्री के भाषण में एक और महत्वपूर्ण बात शामिल है, जो सबका ध्यान खींच रही है। ‘एक देश एक राशन कार्ड’ की घोषणा वैसे तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मई महीने के मध्य में ही कर दी थी और उन्होंने यह भी बता दिया था कि ऐसा मार्च 2021 में संभव हो जाएगा, लेकिन प्रधानमंत्री के बोलने से लोगों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। एक देश एक राशन कार्ड लंबे समय से इस देश की जरूरत रही है। सभी राज्य अगर इस व्यवस्था को मिलकर पहले ही साकार कर लेते, तो संभव है, कोरोना के समय लाखों की संख्या में लोगों को अपने घर न लौटना पड़ता। जो जहां है, वहीं रहता और वहीं उसे राशन कार्ड के तहत जरूरी सामान और अनाज उपलब्ध करा दिया जाता। अब समय आ गया है कि एक देश एक राशन कार्ड और मुफ्त अनाज जैसे बुनियादी इंतजामों को स्थानीय सियासत से परे रखकर मदद का स्थाई ढांचा विकसित किया जाए। ऐसी मदद की व्यवस्था जितनी उदार और व्यापक बनेगी, हमारा देश उतनी ही राहत और खुशी महसूस करेगा।

     

    नजरिया /शौर्यपथ / इस साल दसवीं में बागपत की रिया जैन ने दसवीं की बोर्ड परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया है। रिया ने 96.67 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। बागपत की रहने वाली रिया श्रीराम एस एम इंटर कॉलेज की छात्रा है। इस परीक्षा में आठ लाख से अधिक विद्यार्थी बैठे थे। रिया के पिता भारत भूषण की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। वह पटरी पर चुन्नियां बेचने का काम करते हैं। घर का गुजारा मुश्किल से चलता है। रिया की फीस देने को भी पैसे नहीं थे। तब स्कूल मैनेजमेंट ने रिया की फीस चुकाई। पिता अपनी बच्ची की सफलता से बहुत खुश हैं। उन्हें शहर के बड़े-बड़े अधिकारी फोन करके बधाई दे रहे हैं। वह कहते हैं कि उनकी बेटी के कारण ही यह सब हो सका। रिया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि मेहनत से बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। पैसे की तंगी भी उसमें बाधा नहीं बनती। अगर कोई बाधा है, तो मदद के हाथ भी उठते हैं। जैसे, उसकी परेशानी जानकर स्कूल प्रबंधन आगे आया। रिया ने बताया कि वह हर रोज चौदह-पंद्रह घंटे पढ़ाई करती थी। मुश्किलों का हल उसने परिश्रम में ढूंढ़ा। परेशानी से हार न मानने का उसका फैसला अनुकरणीय है।
    दूसरे स्थान पर बाराबंकी के अभिमन्यु वर्मा रहे, उन्हें 95.83 प्रतिशत अंक मिले। तीसरा स्थान भी बाराबंकी के योगेश प्रताप सिंह को मिला। छोटे शहरों के इन बच्चों की कहानियां अभूतपूर्व हैं। ऐसी ही एक बच्ची के पिता मजदूर हैं। लॉकडाउन के दौरान उनका काम भी छूट गया था, मगर उसने भी बहुत अच्छे अंक प्राप्त किए हैं।
    बच्चे आफत में भी सफलता हासिल कर सकते हैं। गरीबी उन्हें आगे बढ़ने से नहीं रोक पाती। इससे मध्यवर्ग के उन माता-पिता को जरूर सबक लेना चाहिए, जिन्हें लगता है कि जब तक बच्चे किसी नामी-गिरामी स्कूल में नहीं पढ़ेंगे, तब तक वे कुछ कर ही नहीं सकते। इसके लिए उनकी गुंजाइश हो न हो, वे बड़े-बड़े स्कूलों की तरफ भागते हैं। कर्ज भी लेना पड़े, तो बच्चों की ऊंची फीस भरते हैं। दिल्ली में यह मारामारी बहुत दिखाई देती है। आज के दिन में, जब बहुत से लोगों की नौकरियां चली गई हैं, वे बातचीत में पहली चिंता यही प्रकट करते हैं कि अब बच्चों की हजारों की फीस और ऊपरी खर्चे कहां से देंगे? बच्चे को किसी सरकारी स्कूल में भेजना नहीं चाहते। समाज और जान-पहचान वालों में हंसी उड़ेगी, सो अलग। इसके अलावा माता-पिता सोचते हैं कि जिन कठिनाइयों का सामना उन्होंने अपने बचपन में किया था, वे अपने बच्चों को उनसे बचाएं। इसीलिए वे बच्चे की हर इच्छा पूरी करने की कोशिश करते हैं, जबकि अनेक विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को मुश्किलों का सामना करना सिखाना चाहिए, क्योंकि माता-पिता उनकी मदद करने के लिए हमेशा नहीं रहेंगे। इस दुनिया का सामना उन्हें अपने दम पर ही करना होगा। यह भी कहा जाता है कि जिन बच्चों ने कभी कठिनाइयां नहीं देखीं, यदि उनके सामने अचानक मुश्किलें आएं, तो वे उनका सामना नहीं कर पाते हैं। वे उनसे दूर भागते हैं। कई बार अवसाद का शिकार हो जाते हैं। और आत्महत्या जैसे घातक कदम भी उठा लेते हैं।
    रिया जैन के बारे में जानकर अपने पुराने नेता याद आते हैं। कितनों की कहानियां हमने पढ़ी हैं। गांधीजी अपनी पुस्तक सत्य के प्रयोग में अनेक परेशानियों का जिक्र करते हैं, पर कभी घुटने नहीं टेकते हैं। परेशानियों का सामना करने का हौसला उनमें हमेशा दिखाई देता है। किसी भी बड़ी हस्ती को बनाने में चुनौतियों का बड़ा हाथ होता है। इसी तरह से भूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण है। बताया जाता है कि नदी पार करके उन्हें स्कूल जाना पड़ता था। वह तैरकर नदी पार करते थे। जाहिर है, मल्लाह को देने के लिए पैसे नहीं रहे होंगे। जब वह प्रधानमंत्री बने, तब भी उनके पास बहुत मामूली कपड़े थे। उन्हें फटे कपड़े पहनने से भी परहेज नहीं था। उन्होंने पद के कारण अपने रहन-सहन और सादगी से कोई समझौता नहीं किया। इस तरह की कथाओं से हमारा इतिहास भरा पड़ा है। सादगी एक बड़ा जीवन मूल्य है। पंक्ति के अंतिम आदमी की चिंता ने भी इसे हमेशा बनाए रखा है। अपने बड़े नेताओं के संघर्ष और उनकी सफलता से भी तो बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
    सोहनलाल द्विवेदी की मशहूर पंक्तियां हैं, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
    (ये लेखिका के अपने विचार हैं)क्षमा शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार

     

    मेलबॉक्स / शौर्यपथ / दुनिया भर में कोरोना वायरस का कहर जारी है। पूरी प्रबलता के साथ इससे बचने के उपाय भी ढूंढ़े जा रहे हैं, मगर अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने भी ठोस कदम उठाए हैं। यहां लॉकडाउन का विकल्प भी अपनाया गया। इस दौरान बेशक कई परेशानियां आईं, जैसे- विकास दर का गिरना, शैक्षणिक कार्यों में स्थिरता, मजदूरों और गरीब वर्गों पर भुखमरी की मार, मगर हम सब कहीं न कहीं सुरक्षित जरूर थे। हालांकि, जैसे-जैसे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई, लोगों ने समझा कि शायद वे अब कोरोना से बच गए हैं। जिस वक्त हमें सर्वाधिक सचेत रहने की जरूरत है, हम उसी समय लापरवाही कर रहे हैं। इस कारण से हमारे देश में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। हमें यह समझना होगा कि सरकार तभी तक सहायक है, जब हम खुद सावधान हैं। चूंकि यह जंग लंबी चलेगी, इसलिए सबको मिलकर सावधानी से धैर्यपूर्वक इसका सामना करना होगा।
    निशा कश्यप, औरंगाबाद, बिहार

    यादों में नागार्जुन
    पिछले दिनों ज्येष्ठ पूर्णिमा को हमने बाबा नागार्जुन का जन्मदिन मनाया। बाबा का जन्म दरभंगा के तरौनी गांव में हुआ था और अपनी अनोखी लेखनी से उन्होंने देश-दुनिया में नाम कमाया। वह घुमक्कड़ी के शौकीन और फक्कड़ स्वभाव के थे। देखा जाए, तो मनुष्य अनुभवों से ही सीखता है और सीखने की इस प्रक्रिया में यात्राएं अलग मुकाम रखती हैं। यही वजह है कि नागार्जुन की लेखनी में आम लोग थे, उनका दर्द था और उनकी उम्मीदें थीं। उन्होंने खुद एक बार कहा था कि जिसने जनजीवन को नजदीक से नहीं देखा, वह भला अच्छी रचनाएं कैसे कर सकता है? बहरहाल, जिस तरह की उनकी लेखनी सांप्रदायिक और फासीवादी ताकतों के खिलाफ रही, उसकी आज भी हमें जरूरत है। ऐसे कवि कभी नहीं मरते।
    गौरव सक्सेना, करमगंज, इटावा

    अच्छा फैसला
    भारत सरकार ने चीन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसके 59 एप प्रतिबंधित कर दिए। भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए यह एक सराहनीय कदम है। करोड़ों भारतीय इन एप से जुड़े थे, और उनके डाटा के गलत इस्तेमाल की आशंका बढ़ रही थी। टिक टॉक पर तो बच्चे और युवा वीडियो बनाने के इतने आदी हो गए थे कि ज्यादातर किशोरों का वक्त हमेशा मोबाइल पर ही बीतने लगा था। अब चूंकि चीन के प्रति लोगों की भावनाएं बदली हैं, इसलिए सरकार ने भी सुखद फैसला लिया है। ऐसा करके सरकार ने देश की जनता के विश्वास को और अधिक मजबूत किया है। स्वदेश प्रेम की भावना को दृढ़ करके हमें पूरी सकारात्मकता के साथ अपनी सरकार का साथ देना चाहिए।
    हरीश कुमार शर्मा, दिल्ली

    विकल्प तलाशना जरूरी
    हमारी सरकार द्वारा चीनी एप को प्रतिबंधित किए जाने से कुछ तो प्रभाव पडे़गा ही। आखिर हमारे बाजार का उपयोग करके चीन हमारे विरुद्ध ही अपने संसाधनों का इस्तेमाल कर रहा था। कम कीमत और अधिक उत्पादन के कारण चीन की कंपनियां पूरी दुनिया में अपना दबदबा बनाती जा रही हैं। यह एक ऐसी आर्थिक शक्ति है, जिसका हाथ दूसरे देश भी नहीं छोड़ना चाहते। यही कारण है कि भारत के पड़ोसी देश भी चीन के पाले में जाते हुए दिख रहे हैं। पाकिस्तान के बाद अब नेपाल भी कहीं न कहीं भारत के खिलाफ जाने की सोचने लगा है। साफ है, हमें अब हर सीमा पर सावधान रहना होगा। ऐसे में, किसी भी वस्तु का बहिष्कार करने से पहले हमें उसका विकल्प तलाशना होगा। उसके अपने देश में उत्पादन पर ध्यान देना होगा। ऐसा करने पर ही बहिष्कार प्रभावी हो सकेगा। अन्यथा एक बहिष्कार से कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।
    मोहम्मद आसिफ
    जामिया नगर, दिल्ली

     

    ओपिनियन / शौर्यपथ /केंद्र सरकार ने 59 स्मार्टफोन एप को प्रतिबंधित करके चीन के प्रति अपना सख्त रुख दिखाया है। अब तक भारत में भी यही सोच हावी थी कि दोनों देशों का कारोबारी रिश्ता जितना मजबूत होगा, उतनी ही राजनीतिक घनिष्ठता बढ़ेगी, जिससे दोनों मुल्कों का नैसर्गिक विकास होगा। कहा भी जा रहा था कि मौजूदा सदी एशिया की है, जिसमें चीन और भारत मिलकर तरक्की की एक नई इबारत लिख सकते हैं। मगर चीन की हरकतें बताती हैं कि वह इससे इत्तिफाक नहीं रखता। उसकी नजर में यह सदी ‘चीन-केंद्रित’ है, जिसमें भारत की कोई जगह नहीं है। पूर्वी लद्दाख के गलवान का खूनी संघर्ष उसकी इसी सोच का नतीजा था। मगर अब कई चीनी एप पर पाबंदी लगाकर भारत ने साफ कर दिया है कि भारतीय बाजार में चीन की कंपनियों का दखल और सीमा पर खूनी टकराव, दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते।
    सवाल यह है कि चीन को इससे कितना नुकसान और हमें कितना फायदा होगा? इसके आर्थिक नुकसान का आकलन फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि ज्यादातर एप मुफ्त होते हैं। मगर, उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने से एप पर आने वाले विज्ञापनों से डेवलपर्स (एप बनाने वाली कंपनी) को काफी फायदा मिलता है। चीन अपने यहां से यही लाभ उठाता रहा है। सेंसर टावर के आंकड़े बताते हैं कि 2019 में डाउनलोड किए गए नॉन-गेमिंग एप (खेल से जुड़े एप से अलग) में टिक टॉक सबसे ऊपर था, जबकि शीर्ष 10 एप में छह चीन के थे। चीन ने यह पैठ महज चार वर्षों में बनाई थी, क्योंकि इसी आंकडे़ के मुताबिक, 2015 में अपने यहां अमूमन अमेरिकी एप लोकप्रिय थे। यह देखते हुए कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा खुला बाजार है, केंद्र सरकार के फैसले से चीन को मिलने वाले फायदे में स्वाभाविक तौर पर कमी आ सकती है।
    जाहिर है, यह आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया गया पहला ठोस कदम है। यह हमारे लिए अवसरों के कई दरवाजे खोल सकता है। संभव है कि आने वाले दिनों में चीन से आयात पर रोक लगे और फिर, उन उत्पादों का स्वेदशी निर्माण हो। दरअसल, चीन किसी भी देश के बाजार में इसलिए दबदबा बनाता रहा है, क्योंकि उसके उत्पाद सस्ते होते हैं। प्रतिस्पद्र्धा खुले बाजार की मांग है, पर चीन की कंपनियां अपने सरकार द्वारा मिलने वाले प्रोत्साहन की वजह से उत्पादों की कीमतें अपेक्षाकृत कम रखती हैं। चीन की सरकार अपनी कंपनियों को सब्सिडी देकर दूसरे देश के बाजारों में पैठ जमाने में मदद करती है, और यह सुविधा सरकारी ही नहीं, निजी कंपनियों को भी हासिल है। नतीजतन, चीनी कंपनियां अन्य देशों के बाजार पर कब्जा करने में सफल रही हैं। भारत में भी उनके बढ़ते दबदबे की वजह यही है। यहां मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक ही नहीं, इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी चीन की कंपनियां ठेके हासिल कर रही हैं। ऐसे में, यदि भारतीय बाजार के दरवाजे उनके लिए बंद हो जाते हैं, तो उनकी आर्थिक सेहत को काफी चोट पहुंचेगी।
    चीनी एप पर जासूसी के आरोप बेजा नहीं हैं। हमें यह तो नहीं पता कि अपने एप के माध्यम से चीन ने अब तक हमारी कितनी जानकारियां हासिल कर ली हैं, मगर वह किस तरह से हमारा डाटा इकट्ठा कर रहा है, इसे कैमस्कैनर नामक एक एप के उदाहरण से समझा जा सकता है। इस एप से हम जिस दस्तावेज को स्कैन करते हैं, वह भारत से बाहर चीनी कंपनी के सर्वर पर सेव हो जाता है। इसका अर्थ है कि कैमस्कैनर से स्कैन की गई कोई जानकारी गोपनीय नहीं रहती। संभवत: इन्हीं वजहों से साल 2017 में रक्षा मंत्रालय ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए चीन से संचालित 42 एप के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी थी। कहा तो यह भी जाता है कि चीन ने अपनी डिजिटल इंडस्ट्री अमेरिका से चोरी करके तैयार की है। चीन पर जासूसी करने का आरोप पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट सी ओब्रेन ने भी लगाया है। 26 जून को दिए गए अपने एक वक्तव्य में उन्होंने बताया है कि किस तरह चीन से आने वाले छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों से गे्रजुएट करने के बाद अमेरिकी कंपनियों में काम हासिल करते हैं और यहां की तकनीक चुराकर चीन ले जाते हैं।
    साफ है, केंद्र सरकार के ताजा फैसले से न सिर्फ हम अपने डाटा को सुरक्षित रखने में सफल हो सकेंगे, बल्कि भारतीय एप को भी इससे प्रोत्साहन मिलेगा। तमाम क्षेत्रों में चीन पर बढ़ी हमारी निर्भरता को कम करने की भी यह एक अच्छी शुरुआत है। हालांकि, हमारे स्टार्ट-अप में चीन का काफी निवेश है, इसलिए बायकॉट और पाबंदी के इतर हमारी कोशिश यह भी होनी चाहिए कि चीनी निवेशकों को हतोत्साहित करें। इसके लिए हमें आने वाले समय में बाजार या निवेश में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी होगी और चीन की हिस्सेदारी कम करनी होगी। पिछले पांच वर्षों में जिस तरह से हमारी साइबर दुनिया में चीन का दखल बढ़ा है, उसी तरह से अगले पांच साल में उसे कम करने का लक्ष्य हमें बनाना होगा।
    जरूरत चीन का विकल्प खोजने की भी है। हरेक क्षेत्र में हमें उसका तोड़ निकालना होगा। चीन से यदि हम अपना आयात रोकते हैं, तो हमें उन उत्पादों को अपने यहां बनाना होगा या फिर दूसरे देशों से उनका आयात करना होगा। इलेक्ट्रॉनिक चीजों के आयात के लिहाज से दक्षिण कोरिया, ताइवान और जापान जैसे देश चीन का विकल्प बन सकते हैं।
    चीन का दबदबा घटाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि यह स्थानीय विकल्पों को खत्म कर देता है। जैसे, चीन की ज्यादातर इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियां सरकारी हैं, इसलिए सरकारी प्रोत्साहन पाकर वे बहुत कम कीमतों में ढांचागत निर्माण करती हैं। इससे स्थानीय कंपनियों का काम सिमटने लगता है। यह परंपरा अब बंद हो जानी चाहिए। चीन को आर्थिक चोट पहुंचाने की शुरुआत करके भारत सरकार ने यह साफ कर दिया है कि सीमा पर तनाव का जवाब सिर्फ बंदूक नहीं है।
    (ये लेखक के अपने विचार हैं)प्रांजल शर्मा, डिजिटल नीति विशेषज्ञ

     

    दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग-भिलाई सहित जिले के पत्रकारों की एक बैठक आज दक्षिण गंगोत्री सुपेला में हुई। पत्रकारों के हित के लिए चर्चा करते हुए उपस्थित सभी पत्रकारों ने दुर्ग जिला प्रेस क्लब का गठन किया एवं पत्रकारों के अधिकारों और हित के लिए आवाज उठाने की बात कही। इसके लिए दुर्ग जिला प्रेस क्लब के पदाधिकारियों का चयन किया गया जिसमें वरिष्ठ पत्रकार शमशेर खान को क्लब का अध्यक्ष चुना गया वहीं उपाध्यक्ष सौरभ शर्मा(लक्की), कोषाध्यक्ष पवन केसवानी और सचिव सुनील सोनी, सह सचिव राजेन्द्र गाड़े को बनाया गया। वही कही कार्यकारिणी सदस्य के रूप में शरद पंसारी, मनोज कुमार देवांगन, अभिषेक सावल, प्रहलाद दुबे, ऐनु देवांगन, रवि सोनकर, अशीष तिवारी, मन्ना सेन, राकेश जयसवाल, ओमप्रकाश बंछोर, राकेश जसपाल (अहिवारा) को चुना गया। इसके साथ ही बैठक में आगे कार्य करने की रणनीति पर भी चर्चा की गई।
    बैठक में पत्रकारिता जगत से मुख्य रूप से मनोज कुमार, सुरेंद्र सिंह, बबला मानस, चंद्रकांत साहू, अभिषेक शावल, प्रहलाद दुबे, राकेश जसपाल, ओमप्रकाश, आशीष तिवारी, राजेन्द्र गाड़े, रविकांत मिश्रा, अखिलेख श्रीवास्तव, ओमप्रकाश ढीमर, चंद्रकांत साहू, माधुरी मंडावी, मनीष कुमार, गौतम कुमार डे,रविकांत मिश्रा व अनेक पत्रकार बंधु उपस्थित थे।

    दुर्ग / शौर्यपथ / आज सुबह 6:30 बजे प्रारंभ हुई तेज बारिश से शहर की निचली बस्तियों में तेजी से पानी भरने की सूचना जैसे ही मिली महापौर धीरज बाकलीवाल ने तत्काल निगम की टीम को लेकर अधिकारियों के साथ मौके का मुआयना किया जहां-जहां पानी भराव की स्थिति थी निकासी की व्यवस्था कराएं । इसके अंतर्गत सिंधी कालोनी,रायपुर नाका,पद्मनाभपुर,शंकर नगर क्षेत्र, गुरुद्वारा के पीछे अग्रेसन चौक के पास महात्मा गांधी मार्केट, मालवीय नगर,प्रेम नगर सिकोला बस्ती की नालियों, नाला की स्थिति का जायजा लिया ।
    जिला कलेक्टर सर्वेश्वर नरेन्द्र भूरे ने निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन के साथ बारिश से जलभराव वाली स्थलों का भ्रमण कर जायजा लिया । उन्होंने गिरधारी नाला शंकर नाला संतरा बाड़ी सदानी नगर आदि क्षेत्रों का भ्रमण कर पानी निकासी की व्यवस्था करने निगम के स्वास्थ्य विभाग के दल को निर्देश दिए । बारिश के पानी का प्रवाह तेज था और दबाव भी इसके चलते दुर्गा चौक शंकर नगर क्षेत्र में के कुछ गली और बस्तियों में नाला से नीचे जगह होने के कारण पानी का भराव वहां हो गया था । भ्रमण के दौरान जहां भी पानी भरने की समस्या आईइस संबंध में जिला कलेक्टर श्री भूरे के निर्देश पर आयुक्त श्री भ्रमण द्वारा आने वाले समय के लिए जलभराव ना हो इसकी कार्य योजना बनाने की बात बताई गई। शहर के नालियों और नाला का मेहता सफाई होने के कारण 2 घंटे लगातार बारिश होने के बावजूद कहीं पर भी अधिक देर तक घरों में पानी भरने की समस्या नहीं आई डेढ़ से 2 घंटे के अंदर पानी का बहाव से पूरा क्षेत्र खाली हो गया ।
    महापौर बाकलीवाल ने बताया सुबह के समय जैसे ही बारिश चालू हुई उसके आधे घंटे के बाद से लगातार अनेक बस्तियों से मुझे सूचना मिली वे निगम की टीम को लेकर तत्काल मौके पर पहुंचे । उन्होंने निगम अधिकारियों ईई मोहनपुरी गोस्वमी,जितेंद्र समैया,आरके पालिया के साथ भ्रमण कर शहर के किसी भी नाली और नाला में जाम की स्थिति ना हो इसका ध्यान रखने निर्देश विभागीय अधिकारी को दिए। साथ ही जलभराव से बचाव का स्थायी समाधान हेतु विस्तृत कार्य योजना तैयार करने निर्देश दिये । उन्होंनें न्यू पुलिस लाइन नाले के पानी के प्रवाह को कम करने नाले में बने एनीकेट के वाल को बंद करवा कर तालाब में पानी को डायवर्ट करवाया ।
    उन्होनें ,उरला,दीपक नगर,आदर्श नगर, मुक्त नगर, केलाबाड़ी, कसारीडीह के अलावा अन्य जगहों के मुख्य नालाओं व बस्तियो का भी भ्रमण किए। इस दौरान पूर्व महापौर आर. एन वर्मा पूर्व सभापति राजकुमार नारायणी पार्षद सतीश देवांगन विजेन्द्र भारद्वाज काशीराम कोसरे, आयुष शर्मा,अजय मिश्रा,हेमंत तिवारी एव अन्य मौजूद थे।

    दुर्ग / शौर्यपथ / सहकारी बैंक के संचालक मंडल की अहम बैठक आज जिला सहकारी बैंक के मुख्यालय में हुई। यहां लोन प्रकरणों की स्वीकृति के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि पशुपालन के लिए एवं ग्रामीण विकास के अन्य कार्य के लिए किसानों द्वारा कार्य करने की इच्छा जताई जाती है। बैंक इस ओर उन्हें प्रेरित करें। ऐसे मामलों में बैंक की गाइडलाइन के मुताबिक बैंक ऋण आवेदन स्वीकार करें और इन पर उचित निर्णय कर इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करें। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि पशुधन को आगे लाने से खेती किसानी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि किसानों की आय को बढ़ाना है तो पशुधन की ओर उन्हें प्रोत्साहित करना होगा।
    पशुपालन के साथ मछलीपालन के लिए भी प्रोत्साहित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि क्रेडिट उपलब्ध होने से किसान इन चीजों की ओर आगे बढ़ते हैं। हमें किसानों को प्रोत्साहित करना है और उनकी राह आसान करनी है। जिले में हम किसानों को प्रगतिशील उद्यमों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं। इसके लिए बैंक की मदद भी आवश्यक होगी। इस तरह के मामलों में ऋण आसानी से मिलने से किसानों की राह आसान हो जाती है। बैठक में बैंक के सावधि जमा के ब्याज दरों से संबंधित एवं बैंक के अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

    रायपुर / शौर्यपथ / मुख्यमंत्री बघेल ने प्रदेश के यात्री बस संचालकों को कोरोना संकट से उत्पन्न हुई विषम परिस्थितियों में बड़ी राहत दी है। उन्होंने यात्री बस संचालकों को जून माह के मासिक कर में भी छूट प्रदान कर दी है। इसके पहले राज्य सरकार द्वारा अप्रैल और मई माह के मासिक कर में छूट प्रदान की गई थी। इस तरह छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा बस ऑपरेटरों को अप्रैल, मई और जून तीन माह के मासिक कर के भुगतान की छूट मिली है। राज्य शासन के इस निर्णय से प्रदेश के यात्री बस संचालकों को लगभग पांच करोड़ रूपए का लाभ प्राप्त होगा।
    गौरतलब है कि कोरोना वायरस (कोविड-19) के दौरान लॉकडाउन से उत्पन्न परिस्थिति में प्रदेश के बस ऑपरेटरों की विभिन्न कठिनाईयों का सामना करना पड़ा। जिनसे राहत पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने परिवहन विभाग को निर्देश दिए थे। लॉकडाउन की अवधि में यात्री बसों का उनके निर्धारित मार्ग में संचालन बंद रहा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर परिवहन विभाग द्वारा बीते 4 जून को प्रदेश के अंतर्राज्यीय व अखिल भारतीय पर्यटक परमिट तथा समस्त मंजिली यात्री वाहनों को माह अप्रैल और मई की अवधि के लिए मासिक कर के भुगतान से पूरी छूट दी गई थी। प्रदेश के विभिन्न मार्गों में नियमित रूप से चलने वाली यात्री बसों का संचालन जून माह की अवधि में भी पूर्णत: बंद रहा है। जिससे प्रभावित बस संचालकों द्वारा टैक्स में छूट की मांग पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जून माह में भी देय मासिक कर में छूट प्रदान कर दी है। जिससे आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे बस संचालक लाभान्वित होंगे।
    राज्य शासन के इस निर्णय से प्रदेश के यात्री बस संचालकों को देय राशि लगभग पांच करोड़ रूपए का लाभ होगा। इसी प्रकार मुख्यमंत्री श्री बघेल ने वाहन निष्प्रयोग में रखने के पूर्व अग्रिम देय मासिक कर जमा करने के प्रावधानों से भी दो माह की अवधि के लिए छूट दिए जाने संबंधी कार्यवाही के निर्देश परिवहन विभाग को दिए हैं।

    दुर्ग / शौर्यपथ / दुर्ग नगर पालिक निगम प्रशासन की सफाई और नियमो का पालन करवाने के लिए की जा रही कार्यवाही से शहर की जनता में ये विश्वास जगा है कि शहर के आयुक्त और निगम प्रशासन शहर के लिए कुछ अच्छा कर रहे है किन्तु यही विश्वास तब डगमगा जाता है जब इस तरह की शिकायत किसी धनवानों के अतिक्रमण पर की जाती है या जनहित के कार्यो के लिए की जाती है . निगम प्रशासन की ऐसी कार्यवाही क्या कुछ चुनिन्दा वर्ग के लिए है या सीढ़ी साधी जनता में प्रशासनिक दहशत के लिए है जबकि निगम प्रशासन की नजरो के सामने ही ऐसे कई अवैधानिक कार्य हो रहे है जिनकी शिकायत या सुचना के बाद भी निगम प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी मौन रहते है. शिकायतों पर कार्यवाही की तत्परता दिखाने वाले निगम प्रशासन आखिर कई शिकायतों पर ध्यान क्यों नहीं देता जबकि इसकी सुचना कई बार दी जा चुकी है .
    आयुक्त के निर्देश पर 10000 रु0 लगाया गया जुर्माना
    निगम से प्राप्त जानकारी के अनुसार आज आशा नगर क्षेत्र वार्ड 21 में निरजचंद सूर्या को सड़क किनारे कच्च्ी नाली के ऊपर अपना भवन सामग्री रेत, गिट्टी रखने पर निगम स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता द्वारा उनके घर जाकर 10,000 रु0 का जुर्माना काटा ।
    उल्लेखनीय है कि शहर में दो घंटे हुई लगातार बारिश से आशा नगर क्षेत्र से शिकायत मिली की निरजचंद शर्मा द्वारा कच्ची नाली में भवन सामग्री डाल दिया गया है जिससे नाली जाम हो गई है और आस-पास जगहों में बारिश का पानी भर रहा है । जिला कलेक्टर एवं आयुक्त इंद्रजीत बर्मन द्वारा तितुरडीह क्षेत्र का भ्रमण कर पानी भराव की स्थिति का जायजा लिया गया। इस दौरान शिकायत के आधार पर स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा मौका मुआयना किया गया। कच्ची नाली में निरजचंद सूर्या द्वारा भवन सामग्री डाल दिया गया था। जिसके कारण आस-पास क्षेत्र में पानी का भराव हो गया। वार्ड निवासियों की सूचना शिकायत पर तत्काल कार्यवाही कर जुर्माना लगाया गया तथा निकासी से रेती, गिट्टी हटवाया गया।
    किन्तु वही वार्ड नम्बर 43 में बेगम बाई के काम्प्लेक्स के सामने मोड़ पर पेड़ पौधे लगे होने तथा पास ही 20 फीट के नाले को अतिक्रमण कर 3 फीट का नाला कर दिया गया जिसके कारण बरसात में लोगो के घरो में नाले का गन्दा पानी जाता है किन्तु शिकायत के बाद भी निगम प्रशासन मौन रहा वही शहर की बसाहट के बीच मुर्गी फ़ार्म की शिकायत पर निगम प्रशासन द्वारा सिर्फ नोटिस का खेल खेला जा रहा है किन्तु वार्ड पार्षद की शिकायत के बाद भी निगम प्रशासन मौन है वही शहर में ऐसी कई जगह है जहा अवैध अतिक्रमण किया जा रहा है किन्तु शिकायतों के बाद भी निगम प्रशासन मौन है क्या सिर्फ अपने मनपसंद जगह शिकायत पर कार्यवाही करती है निगम प्रशासन या फिर सिर्फ ऐसे नागरिको से जुर्माना वसूल किया जा रहा है जो नियमो और कानून का सम्मान करते है और अनजाने में हुए गलत कार्यो की सज़ा जुर्माने के रूप में चुकाते आ रहे है .
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    निगम प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी लग्न चाहिए बड़ा जुर्माना
    आज निगम प्रशासन ने नाली पर बिल्डिंग मटेरियल रखने वाले पर जुर्माना लगाया जो नियमानुसार ही होगा अगर यह नियमानुसार सही है तो वार्ड नम्बर 43 में 15-20 फीट के नाले की चौड़ाई 3-4 फीट होने पर और इसकी सुचना देने के बाद भी निगम प्रशासन द्वारा कार्यवाही नहीं की गयी जिसके कारण आज के बरसात में कई निवासियों के घरो में पानी घुस गया . सूचना के बाद 10 हजार का जुर्माना करने वाला निगम प्रशासन क्या अपने अधिकारियो की इस लापरवाही के लिए कोई जुर्माना लगाएगा या सिर्फ दिखावे की कार्यवाही की जाएगी और सीधी-साधी जनता से ही जुर्माना वसूल करती रहेगी .
    विधायक वोरा भी उठा चुके है कई बार आपत्ति

    वर्तमान में कोरोना आपदा के कारण आम जन की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गयी है किन्तु छोटी बड़ी गलती की सजा के तौर पर भारीभरकम जुर्माने की आम जानो से मिलने वाली शिकायत आम जन अपने जनप्रतिनिधि विधायक वोरा से कर चुके है जिस पर विधायक एवं महापौर ने निगम प्रशासन से कहा भी है की कोरोना आपदा में आम जानो से छोटी छोटी बात पर बड़ा जुर्माना ना ले किन्तु निगम प्रशासन अपनी चाल पर चल रहा है और नियमो का हवाला दे कर / व्यवस्था सुधरने की बात कह रहा है . अगर निगम प्रशासन सही है तो क्यों नहीं हर शिकायतों पर कार्यवाही हो रही है

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