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May 02, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

दुर्ग। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को मजबूती देने की दिशा में दुर्ग में एक महत्वपूर्ण नियुक्ति सामने आई है। दुर्ग जिला कांग्रेस कमेटी की अनुशंसा पर अनुसूचित जाति विभाग के दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी में गुड्डा उरे को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय एवं प्रभावशाली बनाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल के नेतृत्व में संगठन लगातार विस्तार और सामाजिक समावेश की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

जारी नियुक्ति पत्र के अनुसार—

उपाध्यक्ष: 5 पद

महामंत्री: 5 पद

सचिव: 5 पद

इन पदों के बीच गुड्डा उरे की नियुक्ति को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे लंबे समय से सामाजिक सरोकारों और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

गुड्डा उरे के उपाध्यक्ष बनने की खबर सामने आते ही उनके समर्थकों, समाजजनों और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। इसे संगठन में नई ऊर्जा और अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्ति आगामी समय में संगठन की जमीनी पकड़ को और सुदृढ़ करेगी तथा सामाजिक संतुलन के साथ कांग्रेस को नई मजबूती प्रदान करेगी।

रायपुर: छत्तीसगढ़ में पारंपरिक भोजन 'बोरे बासी' पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए मजबूरी में खाया जाने वाला भोजन बताया है. उनके इस बयान के बाद, प्रदेश भर में उनकी कड़ी आलोचना हो रही है.

'बोरे बासी' रात के बचे चावल को पानी में भिगोकर बनाया जाने वाला एक पारंपरिक, पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन है, जो भीषण गर्मी में शरीर को ठंडक और पोषण प्रदान करता है. यह नेचुरल प्रोबायोटिक का एक बेहतरीन स्रोत है, जो लू से बचाने, पाचन सुधारने, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने और दिनभर ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है. इसमें विटामिन B12, कैल्शियम, पोटेशियम और आयरन की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को आवश्यक ऊर्जा और पोषण देते हैं. यह शरीर में पानी की कमी को भी दूर करता है. इसे सुबह-सुबह दही, अचार, चटनी, हरी मिर्च, प्याज या भाजी के साथ खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है.

पूर्वजों ने गर्मी में कई तरह की बीमारियों से बचने के लिए 'बोरे बासी' का सेवन किया जाता था. ऐसे में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव द्वारा इसे मजबूरी का भोजन कहना, छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पौष्टिक भोजन का अपमान माना जा रहा है. उनके इस बयान की सोशल मीडिया सहित समाज में कड़ी आलोचना हो रही है.

 मंत्री गजेंद्र यादव का इस तरह का बयान उनकी अपनी परंपरा और संस्कृति के प्रति उनकी समझ और सम्मान पर सवाल खड़े करता है. 'बोरे बासी' छत्तीसगढ़ की पहचान का एक हिस्सा है और इसे इस तरह से अपमानित करना प्रदेश के लोगों के लिए अस्वीकार्य है. मंत्री यादव को  छत्तीसगढ़ की परंपराओं और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए ना कि इसे मजबूरी का भोजन बताना चाहिए 

धमतरी/बोरई |  छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से खाकी को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। बोरई थाना प्रभारी (TI) पर केशकाल के एक व्यापारी के साथ साप्ताहिक बाजार में मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसके बाद पुलिस प्रशासन की कार्यशैली की चौतरफा आलोचना हो रही है।

विवाद की जड़: गाड़ी चेकिंग और तीखी बहस

जानकारी के अनुसार, यह घटना 1 मई 2026 की है। बोरई के साप्ताहिक बाजार में पुलिस की टीम वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान केशकाल से आए एक व्यापारी और थाना प्रभारी के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बात इतनी बढ़ गई कि तैश में आकर थाना प्रभारी ने सरेआम व्यापारी को थप्पड़ मार दिया।

व्यापारियों में भारी आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

बाजार के बीचों-बीच हुई इस बदसलूकी के बाद स्थानीय और बाहरी व्यापारियों में गहरा रोष है। व्यापारियों का कहना है कि पुलिस का काम सुरक्षा देना है, न कि आम नागरिकों पर हाथ उठाना।

प्रमुख मांग: व्यापारियों ने जिला पुलिस अधीक्षक (SP) से मांग की है कि संबंधित TI को तत्काल निलंबित किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच हो।

चेतावनी: यदि जल्द ही सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो व्यापारी संघ एकजुट होकर उग्र प्रदर्शन और बाजार बंद करने का निर्णय ले सकता है।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किलें

घटना का जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह बहस के दौरान वर्दीधारी अधिकारी अपना आपा खो रहे हैं। यह वीडियो अब वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुका है, जिससे विभाग बचाव की मुद्रा में नजर आ रहा है।

प्रशासनिक रुख

फिलहाल धमतरी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की जांच की बात कही है। हालांकि, अभी तक थाना प्रभारी के खिलाफ किसी औपचारिक कार्रवाई या निलंबन की पुष्टि नहीं हुई है।

एक नागरिक के तौर पर ध्यान देने वाली बात: गाड़ी चेकिंग के दौरान पुलिस को नियमों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन शारीरिक हिंसा या दुर्व्यवहार कानूनन गलत है। यदि किसी के साथ ऐसा होता है, तो पीड़ित व्यक्ति मानवाधिकार आयोग या वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज

करा सकता है।

नई दिल्ली |  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ी कानूनी राहत दी है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने असम में दर्ज एक आपराधिक मामले में खेड़ा की अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) मंजूर कर ली है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में फिलहाल हिरासत में पूछताछ की कोई ठोस आवश्यकता नहीं दिखती।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से संबंधित है। आरोप था कि पवन खेड़ा ने एक सार्वजनिक मंच से अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिससे उनकी छवि धूमिल हुई। इसी आधार पर असम पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की प्रकृति पर गौर करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। पीठ ने कहा:

"प्रथम दृष्टया यह मामला 'राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता' से प्रेरित प्रतीत होता है। कानून की प्रक्रियाओं का उपयोग राजनीतिक हिसाब चुकता करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।"

अदालत ने यह भी माना कि आरोपी के भागने या जांच से बचने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए जेल भेजना न्यायोचित नहीं होगा।

इन शर्तों पर मिली 'आजादी'

अदालत ने जमानत देते समय कुछ सख्त शर्तें भी लागू की हैं, जिनका उल्लंघन होने पर राहत रद्द की जा सकती है:

जांच में सहयोग: खेड़ा को असम पुलिस की जांच में पूरी तरह से शामिल होना होगा।

थाने में हाजिरी: पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर उन्हें अनिवार्य रूप से पेश होना होगा।

विदेश यात्रा पर रोक: बिना कोर्ट की पूर्व अनुमति के वे देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।

सबूतों की सुरक्षा: वे गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ का प्रयास नहीं करेंगे।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का कांग्रेस ने स्वागत किया है, जबकि असम सरकार और शिकायतकर्ता पक्ष ने इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। जानकारों का मानना है कि 2026 के राजनीतिक माहौल में यह फैसला विपक्षी नेताओं के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह दे

खा जा रहा है।

जबलपुर |  संस्कारधानी जबलपुर का प्रमुख पर्यटन स्थल बरगी बांध आज चीख-पुकार और मातम का केंद्र बन गया। गुरुवार शाम करीब 5:00 बजे आए एक भीषण चक्रवाती तूफान ने पर्यटकों से भरे क्रूज को जलसमाधि दे दी। तट से महज 300 मीटर की दूरी पर हुए इस हादसे में अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि प्रशासन की मुस्तैदी से 16 जिंदगियों को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया।

कुदरत का तांडव: 74 किमी/घंटा की रफ्तार और डूबता क्रूज

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम को अचानक आसमान में काले बादल छा गए और देखते ही देखते 74 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज आंधी चलने लगी। लहरें इतनी ऊंची उठीं कि क्रूज अनियंत्रित होकर एक तरफ झुक गया और पलट गया। क्रूज पर सवार पर्यटक संभल पाते, उससे पहले ही सब कुछ पानी में समा गया।

भावुक कर देने वाली दास्तां: आखिरी सांस तक बेटे को बचाती रही मां

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पत्थर दिल इंसान को भी रुला दिया। एक मां ने अपने 4 साल के मासूम बेटे को डूबने से बचाने के लिए आखिरी वक्त तक अपने हाथों में ऊपर उठाए रखा, लेकिन कुदरत के आगे ममता हार गई। दोनों के शव एक साथ बरामद हुए हैं। मृतकों में दिल्ली से घूमने आया एक परिवार भी शामिल है, जिनकी छुट्टियां मातम में बदल गईं।

लापरवाही की 'लहरें': उत्तरजीवियों के गंभीर आरोप

हादसे में सुरक्षित बचे पर्यटकों ने क्रूज प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक घायल पर्यटक ने बताया:

"जब मौसम खराब हो रहा था, हमने पायलट से वापस चलने को कहा, लेकिन उसने चेतावनी को नजरअंदाज किया। सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि हमारे पास लाइफ जैकेट तक नहीं थे। अगर जैकेट समय पर मिल जाते, तो शायद इतनी जानें नहीं जातीं।"

प्रशासनिक एक्शन और मुआवजे का एलान

हादसे की सूचना मिलते ही कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित SDRF और NDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं। मुख्यमंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए निम्नलिखित घोषणाएं की हैं:

उच्च स्तरीय जांच: घटना के कारणों और सुरक्षा खामियों की जांच के लिए कमेटी गठित।

आर्थिक सहायता: प्रत्येक मृतक के परिजन को 4-4 लाख रुपये की राहत राशि।

कठोर कार्रवाई: क्रूज के पायलट और जिम्मेदार कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है।

पर्यटन पर उठते सवाल

यह हादसा एमपी टूरिज्म और निजी ऑपरेटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। आखिर क्यों खराब मौसम के अलर्ट के बावजूद क्रूज को पानी में उतारा गया? क्या लाइफ जैकेट की उपलब्धता केवल कागजों तक सीमित है?

वर्तमान में बरगी बांध पर सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और व्यक्ति लापता न हो। पूरा जबलपुर आज उन परिवारों के लिए प्रार्थना कर रहा है जिन्होंने अपनों को खोया है।

  लोरमी । शौर्यपथ / अरुण साव ने शासकीय उचित मूल्य दुकान विक्रेताओं को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की “मजबूत कड़ी” बताते हुए कहा कि वे सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी, भरोसेमंद और प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वे आज लोरमी के मानस मंच में आयोजित प्रदेश स्तरीय शासकीय उचित मूल्य दुकान विक्रेता एवं संचालक संघ के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

उप मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली सीधे आम जनता के जीवन से जुड़ी है और राशन विक्रेता हजारों परिवारों तक समय पर खाद्यान्न पहुंचाकर न केवल जिम्मेदारी निभाते हैं, बल्कि समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण दायित्व भी पूरा करते हैं। उन्होंने संघ की छह प्रमुख मांगों—कमीशन वृद्धि और क्षतिपूर्ति सहित—पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया और बताया कि इन मांगों को वित्त विभाग को भेजकर विस्तृत चर्चा शुरू कर दी गई है।

सम्मेलन के दौरान अरुण साव ने संघ के लिए सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 15 लाख रुपये की घोषणा की, जिससे उपस्थित विक्रेताओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार गरीबों, किसानों और महिलाओं के हित में निर्णय ले रही है और विक्रेताओं की भूमिका इन योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर एक प्रेरणादायक पहल करते हुए उप मुख्यमंत्री ने लोरमी के मेधावी विद्यार्थियों—10वीं बोर्ड टॉपर अंशुल शर्मा और 12वीं मेरिट सूची में 8वां स्थान प्राप्त करने वाले चैतुराम साहू—के घर पहुंचकर उनका मुंह मीठा कराया और उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने दोनों छात्रों को प्रदेश में लोरमी का मान बढ़ाने के लिए बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विक्रेता, संचालक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जहां सरकार और विक्रेताओं के बीच संवाद, सहयोग और विश्वास का मजबूत संदेश सामने आया।

नई दिल्ली / 
राजधानी दिल्ली में 1 मई 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी नवीनतम दरों के अनुसार, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में ₹993 की सीधी बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद अब इसकी कीमत बढ़कर ₹3,071.50 प्रति सिलेंडर हो गई है।

यह वृद्धि खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा संचालकों और छोटे व्यवसायियों के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है, क्योंकि कमर्शियल गैस का सीधा असर खाद्य पदार्थों की लागत और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है।

? क्या है पूरा गणित?

  • पुरानी कीमत: ₹2,078.50 (अनुमानित)
  • नई कीमत: ₹3,071.50
  • एकमुश्त बढ़ोतरी: ₹993
  • साल 2026 में अब तक कुल बढ़ोतरी: ₹993

⚠️ आम आदमी पर असर

हालांकि घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर महंगा होने से बाजार में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह महंगाई की नई लहर को जन्म दे सकता है।

? क्यों बढ़ी कीमत?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और परिवहन लागत में वृद्धि को इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण माना जा रहा है।


? निष्कर्ष:
कमर्शियल LPG की इस बड़ी बढ़ोतरी ने व्यापारिक वर्ग की चिंता बढ़ा दी है। अगर यही रुझान जारी रहा, तो आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

  दुर्ग / शौर्यपथ / गजेन्द्र यादव ने आज लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सभाकक्ष में जिले में आगामी सुशासन तिहार की तैयारियों एवं विभागवार कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने बिजली, पानी, आवास, राशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को जनहित के कार्यों को तेजी से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए।
मंत्री ने 01 मई से शुरू होने वाले सुशासन तिहार को लेकर सभी तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि शिविरों में प्राप्त होने वाले आवेदनों का त्वरित और संवेदनशील निराकरण किया जाए, ताकि आम जनता को बिना किसी विलंब के लाभ मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को पूर्ण जवाबदेही के साथ कार्य करने की हिदायत दी और चेताया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि इस दौरान मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ अधिकारी शिविरों में शामिल होकर सीधे जनता से फीडबैक भी लेंगे।
राजस्व विभाग की समीक्षा करते हुए मंत्री ने लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर जोर दिया और विशेष रूप से समय सीमा से बाहर हो चुके मामलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और सभी कार्य पारदर्शिता से हों।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने एक स्कूल को “मॉडल स्कूल” के रूप में विकसित करने तथा आदर्श कन्या विद्यालय में विद्यार्थियों को जेईई और नेट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तैयारी कराने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीण प्रतिभाओं को बेहतर अवसर मिल सकें। वहीं जिले के 34 छात्रावासों की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने आदिवासी विकास विभाग को सभी छात्रावासों का निरीक्षण कर भोजन, स्वच्छता और सुरक्षा की व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए।
खाद्य विभाग को निर्देशित करते हुए मंत्री ने उचित मूल्य दुकानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और तीन महीने का राशन स्टॉक अनिवार्य रूप से बनाए रखने को कहा। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में उन्होंने प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा गांवों में बीपी और शुगर जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए।
मनरेगा के तहत व्यापक पौधारोपण अभियान चलाने, कृषि क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने, किसानों को कम पानी वाली फसलों के लिए प्रेरित करने और आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया। ऊर्जा विभाग को मुख्यमंत्री शहरी विद्युतीकरण योजना के तहत सर्वे कर आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने के निर्देश दिए गए, ताकि निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
मंत्री यादव ने दोहराया कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका असर जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखना चाहिए। बैठक में जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

  दुर्ग / शौर्यपथ / माननीय उच्चतम न्यायालय, भारत द्वारा न्याय को आमजन तक सरल, सुलभ और सहभागी स्वरूप में पहुंचाने के उद्देश्य से “समाधान समारोह-2026” का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान के समापन चरण में 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को विशेष लोक अदालत आयोजित होगी, जिसमें उच्चतम न्यायालय में लंबित मामलों का आपसी सहमति, संवाद और सौहार्दपूर्ण वातावरण में त्वरित निराकरण किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पक्षकारों को प्रभावी, मानवीय और सहज न्याय उपलब्ध कराना है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने आम नागरिकों, अधिवक्ताओं और पक्षकारों से अपील की है कि वे इस अभियान का अधिकतम लाभ उठाते हुए अपने लंबित प्रकरणों के समाधान के लिए सक्रिय भागीदारी करें। विशेष लोक अदालत में पक्षकार अपनी सुविधा अनुसार प्रत्यक्ष रूप से या वर्चुअल माध्यम से भी शामिल हो सकते हैं।

इच्छुक पक्षकार और अधिवक्ता निर्धारित गूगल फॉर्म के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं, जिसका लिंक उच्चतम न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 मई 2026 निर्धारित की गई है। अधिक जानकारी और सहायता के लिए वन स्टॉप सेंटर (वार रूम) से 011-23112428 और 011-23112528 नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाकर अपने मामलों का त्वरित, सुलभ और सौहार्दपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करें।

दुर्ग। नगर पालिक निगम दुर्ग इन दिनों भ्रष्टाचार के नए प्रतिमान गढ़ रहा है। निगम प्रशासन में 'शहरी सरकार' की मिलीभगत और ठेकेदारों की 'सेटिंग' का ऐसा खेल चल रहा है, जिसने ऑनलाइन और ऑफलाइन टेंडरिंग की पारदिर्शता को एक मजाक बना दिया है। ताज्जुब की बात यह है कि जहाँ ऑनलाइन प्रक्रिया से सरकार को लाखों का फायदा हो रहा है, वहीं ऑफलाइन के नाम पर निगम की तिजोरी को खुलेआम चूना लगाया जा रहा है।

ऑनलाइन में 20% 'Below', ऑफलाइन में 20% 'Above': कैसा है यह दोहरा मापदंड?

निगम के गलियारों में चर्चा है कि हाल ही में जारी करोड़ों रुपए के कार्यों की निविदाओं में भारी विसंगति है। तथ्य चौंकाने वाले हैं—वही ठेकेदार जो ऑनलाइन टेंडर में कार्य पाने के लिए 10 से 20 प्रतिशत 'बिलो' (Below) रेट पर आवेदन कर रहे हैं, वही ऑफलाइन निविदाओं में 10 से 20 प्रतिशत 'एबव' (Above) रेट हासिल करने के लिए कतार में सबसे आगे खड़े हैं।

यह सीधा और सत्यापित सत्य है कि जहाँ ऑनलाइन टेंडर से शासन के राजस्व की बचत हो रही है, वहीं ऑफलाइन टेंडर के जरिए 'टेबल के नीचे' के राजस्व को बढ़ाने की प्रबल संभावना बन गई है।

अरुण सिंह की कमी खल रही: विपक्ष की चुप्पी पर उठे सवाल

आज दुर्ग निगम की जनता को पूर्व वरिष्ठ पार्षद अरुण सिंह की कमी शिद्दत से महसूस हो रही है। भाजपा के इस युवा और प्रखर चेहरे ने धीरज बाकलीवाल की सरकार के समय इसी तरह की कमीशनखोरी और ऑफलाइन टेंडरों के खेल के खिलाफ सदन में आवाज बुलंद की थी।

विडंबना यह है कि वर्तमान में सत्ता पक्ष तो मौन है ही, विपक्ष के नेता भी मात्र 'रबर स्टैम्प' बनकर रह गए हैं। चर्चा है कि विपक्ष का आंदोलन केवल 'कमरा आवंटन' तक सीमित था और प्रोटोकॉल मिलते ही जनता के हितों की बलि चढ़ा दी गई।

'विकास की वीरांगना' को पोस्टर का रिटर्न गिफ्ट?

हाल ही में महापौर के जन्मदिन पर शहर भर में लगे "विकास की वीरांगना" वाले पोस्टरों की सच्चाई अब सामने आ रही है। निगम के इतिहास में पहली बार ठेकेदारों की पूरी फौज बधाई संदेशों में नजर आई। जानकारों का कहना है कि अब उन्हीं चेहरों को 'रिटर्न गिफ्ट' के तौर पर कार्यों की बड़ी सूची थमाई जा रही है। 70 में से चुनिंदा 50 ठेकेदारों के बीच काम का बंटवारा पहले ही तय होने की खबरें हैं।

आयुक्त सुमित अग्रवाल की पहल बनाम शहरी सरकार की जिद

निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए 20 लाख तक के कार्यों को भी ऑनलाइन प्रक्रिया में डालने का साहस दिखाया, जिससे निगम को लाखों के राजस्व का लाभ हुआ। सूत्रों के अनुसार, आयुक्त महोदय ऑफलाइन प्रक्रिया के पक्ष में नहीं थे, लेकिन शहरी सरकार की 'जिद' के आगे ऑफलाइन निविदाएं निकाली गईं। अब सवाल यह है कि महापौर अलका बाघमार इस राजस्व हानि पर मौन क्यों हैं? क्या "विकास की वीरांगना" जैसे शब्द केवल विज्ञापनों तक सीमित हैं?

जांच का विषय: 'वर्क ऑर्डर' के बदले 5% कैश!

नगर निगम परिसर में यह चर्चा आम है कि हर टेंडर के कार्यादेश (Work Order) की प्रति प्राप्त करने के लिए भी 2 से 5 प्रतिशत नकद राशि का भुगतान करना होगा। हालांकि यह जांच का विषय है, लेकिन जिस तरह से टेंडर से पहले ही 'किसको, कितना और कहाँ' हिस्सा देना है, यह तय हो चुका है, उससे भ्रष्टाचार की बू स्पष्ट आ रही है।

निष्कर्ष:

दुर्ग की जनता आज अपने फैसले पर पछता रही है। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और सत्ता-विपक्ष एक ही थाली के चट्टे-बट्टे नजर आएं, तो भ्रष्टाचार का फलना-फूलना लाजमी है। अब देखना यह होगा कि क्या शासन स्तर पर इस 'ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन' के खेल की जांच होगी या फिर भ्रष्टाचार की इस आग में निगम का राजस्व इसी तरह स्वाहा होता रहेगा?

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