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दुर्ग / शौर्यपथ / जिला दंडाधिकारी श्री अभिजीत सिंह ने पुलिस अधीक्षक दुर्ग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 की धारा 3 उपधारा (2) सह पठित उपधारा 3 के अंतर्गत दिनांक 6 अगस्त 2026 को आदेश पारित कर अनावेदक शुभम तागड़े उर्फ मराठा पिता दिनेश तागड़े को तीन माह की कालावधि के लिये केंद्रीय जेल दुर्ग में निरुद्ध करने के आदेश दिए है। जिला दंडाधिकारी के आदेश के अनुपालन में पुलिस अधीक्षक दुर्ग द्वारा शुभम तागड़े को 8 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर केंद्रीय जेल दुर्ग में निरुद्ध किया गया है।
ज्ञात हो कि पुलिस अधीक्षक जिला दुर्ग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन अनुसार अनावेदक शुभम तागड़े उर्फ मराठा पिता दिनेश तागड़े (उम्र-29 वर्ष), निवासी-मिलन चौक, कैम्प-02 भिलाई, थाना-छावनी, तहसील व जिला-दुर्ग (छ.ग.) थाना छावनी क्षेत्र का गुंडा-बदमाश है। वर्ष 2015 से लगातार आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण उसे निगरानी बदमाश की श्रेणी में लाया गया है। अनावेदक के विरुद्ध दुर्ग जिले के विभिन्न थानों में कुल 26 अपराध पंजीबद्ध हैं। इनमें मारपीट, गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी के 06 अपराध, साथियों के साथ मिलकर अवैध राशि की मांग व मारपीट का अपराध, आर्म्स एक्ट के 07 अपराध, चोरी व नकबजनी के 10 अपराध, आबकारी एक्ट का अपराध, नाबालिग बच्ची से छेड़छाड़ और लूट का प्रकरण दर्ज है। विभिन्न थानों के अंतर्गत उसके विरुद्ध थाना छावनी में 17 अपराध, थाना जामुल में 03 अपराध, थाना खुर्सीपार में 03 अपराध, थाना नंदिनी में 01 अपराध, थाना दुर्ग कोतवाली में 01 अपराध तथा थाना भिलाई भट्टी में 01 अपराध पंजीबद्ध किए गए हैं।
दुर्ग । शौर्यपथ / शहर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर नगर पालिक निगम दुर्ग की महापौर अलका बाघमार ने सख्त रुख अपनाया है। रायपुर नाका स्थित 42 एमएलडी फिल्टर प्लांट में लगातार हुई आगजनी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए महापौर ने जल विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर जलापूर्ति जल्द सामान्य करने और फिल्टर प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।
महापौर ने अपने शासकीय आवास एफ-4 में आयोजित बैठक में अधिकारियों से आगजनी की घटनाओं के कारणों की गंभीरता से जांच करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित ठेकेदार द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री की गुणवत्ता में कमी अथवा विभागीय स्तर पर किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बीआईटी दुर्ग और आईआईटी भिलाई में होगी जांच
दो दिन पूर्व आगजनी की घटना में जले ब्लीचिंग पावडर के नमूनों की गुणवत्ता जांच कराने के निर्देश महापौर ने दिए हैं। निष्पक्ष जांच के लिए ब्लीचिंग पावडर के सैंपल बीआईटी दुर्ग और आईआईटी भिलाई की लैब में भेजे जाएंगे।
महापौर ने बाजार मूल्य की तुलना में अत्यधिक कम दर पर उपलब्ध कराए गए ब्लीचिंग पावडर की गुणवत्ता की भी जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
ज्वलनशील सामग्री के लिए अलग सुरक्षित भंडारण
महापौर ने कहा कि ब्लीचिंग पावडर, एलम सहित अन्य ज्वलनशील अथवा संवेदनशील सामग्रियों को फिल्टर प्लांट परिसर में एक साथ रखने के बजाय प्लांट से कुछ दूरी पर अलग-अलग सुरक्षित भंडारण केंद्र विकसित किए जाएं। इससे भविष्य में आगजनी जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलेगी।
बाढ़ के बाद सफाई कार्य में तेजी के निर्देश
बारिश के कारण नदी में आई बाढ़ से इंटकवेल और फिल्टर प्लांट में जमा गाद एवं कचरे की सफाई को भी महापौर ने प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आवश्यक संसाधन लगाकर सफाई कार्य शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि शहर के सभी वार्डों में पेयजल आपूर्ति जल्द से जल्द सामान्य हो सके।
बैठक में जल कार्य प्रभारी लीना दिनेश देवांगन, लोक कर्म विभाग प्रभारी देवनारायण चंद्राकर, प्रभारी आयुक्त मानेंद्र साहू, जल विभाग के कार्यपालन अभियंता प्रकाश थवानी, सहायक कार्यपालन अभियंता राजेंद्र ढवाले, सब इंजीनियर विनोद मांझी, जल निरीक्षक नारायण ठाकुर सहित जल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
“विवाद बढ़ाएँ नहीं, संवाद से समाधान करें” के संदेश के साथ निकली जन-जागरूकता रैली
दुर्ग / शौर्यपथ / न्याय केवल अदालत की चौखट तक सीमित नहीं है, बल्कि संवाद, सहमति और आपसी विश्वास के माध्यम से गांव की चौपाल तक भी पहुंच सकता है। इसी सोच को साकार करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की टीम ने ग्राम कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता शिविर, विधिक जागरूकता कार्यक्रम एवं जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया। कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश रहा—“विवाद बढ़ाएँ नहीं, संवाद से समाधान करें।”
माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष श्रीमती सुषमा लकड़ा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री भूपेश कुमार बसंत एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री उमेश कुमार भागवतकर ने ग्रामीणों को सामुदायिक मध्यस्थता और विधिक अधिकारों की जानकारी दी।
अदालत पहुंचने से पहले संवाद से समाधान
कार्यक्रम में बताया गया कि छोटे-छोटे सामाजिक, पारिवारिक और स्थानीय विवादों को न्यायालय तक ले जाने से पहले आपसी बातचीत, विश्वास और सहमति के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। सामुदायिक मध्यस्थता न केवल विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने का प्रभावी माध्यम है, बल्कि इससे रिश्तों और सामाजिक सौहार्द को भी बनाए रखने में मदद मिलती है।
ग्रामीणों को मीडिएशन 3.0 के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि मध्यस्थता अब केवल वैकल्पिक विवाद समाधान की प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि यह तकनीक-सक्षम, समयबद्ध और नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। प्रशिक्षित सामुदायिक मध्यस्थ ग्राम स्तर पर विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कानूनी जागरूकता के साथ सामाजिक सरोकारों पर भी जोर
शिविर में केवल न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि ग्रामीण जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर भी जागरूक किया गया। अपराधमुक्त ग्राम, नशामुक्ति, टोनही प्रथा उन्मूलन, बाल संरक्षण, गुड टच-बैड टच, साइबर अपराध एवं डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों को सरल भाषा में समझाया गया।
बच्चों और युवाओं को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने, शिक्षा को प्राथमिकता देने, सकारात्मक जीवनशैली अपनाने और नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।
चौपाल से बाजार तक गूंजा न्याय और जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम के बाद ग्राम पंचायत से बाजार क्षेत्र तक जन-जागरूकता रैली निकाली गई। प्रचार वाहन के माध्यम से सामुदायिक मध्यस्थता, मीडिएशन 3.0, विधिक अधिकार, अपराध नियंत्रण और सामाजिक समरसता से जुड़े संदेश प्रसारित किए गए। ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक रैली में सहभागिता करते हुए एक स्वर में कहा—
“विवाद बढ़ाएँ नहीं, संवाद से समाधान करें।”
विशेष बात यह रही कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा, उद्देश्य और उपयोगिता को ग्रामीणों तक सहज तरीके से पहुंचाने के लिए विशेष रूप से तैयार छत्तीसगढ़ी गीत भी प्रचार वाहन के माध्यम से प्रसारित किया गया। स्थानीय भाषा में दिए गए इस संदेश ने ग्रामीणों को संवाद, सहमति और आपसी समझ के जरिए विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए प्रेरित किया।
न्याय को चौपाल तक पहुंचाने की सार्थक पहल
कुथरेल में आयोजित यह कार्यक्रम महज एक विधिक जागरूकता शिविर तक सीमित नहीं रहा। इसने न्याय को गांव की चौपाल तक पहुंचाने, समुदाय को न्याय प्रक्रिया का सहभागी बनाने और विवादों के स्थान पर संवाद की संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।
सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से गांवों में छोटे विवादों को समय रहते सुलझाने की पहल न केवल न्यायालयों पर अनावश्यक मुकदमों का बोझ कम कर सकती है, बल्कि सामाजिक रिश्तों और आपसी सौहार्द को भी मजबूत कर सकती है।
कुथरेल से उठी यह पहल एक ऐसे ग्रामीण भारत की तस्वीर प्रस्तुत करती है, जहां न्याय केवल फैसला नहीं, बल्कि संवाद, सहमति और सामाजिक समरसता का माध्यम बने—और यही विवाद-मुक्त, जागरूक एवं न्याय-सशक्त विकसित भारत की मजबूत नींव है।
शौर्यपथ लेख :(शरद पंसारी - संपादक शौर्यपथ दैनिक समाचार एवं shouryapathnews.in)
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य को देश का सबसे भरोसेमंद निवेश केंद्र (Investment Hub) बनाने के लिए ऐतिहासिक नीतियां लागू की हैं। राज्य ने सुरक्षा और सुशासन के दम पर पुरानी चुनौतियों को पीछे छोड़ दिया है और हाल ही में 8.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव (MoUs) हासिल कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।छत्तीसगढ़ की इस औद्योगिक क्रांति, नई निवेश नीति (2024-2030), और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के शानदार सफर पर एक विस्तृत एवं संपूर्ण लेख नीचे दिया गया है।
लाल आतंक से औद्योगिक वैश्विक पहचान तक: बदलते छत्तीसगढ़ की गौरव गाथा
1. नक्सलवाद से मुक्ति और शांति का नया सवेरा
एक समय था जब छत्तीसगढ़ का नाम सुनते ही देश-दुनिया के मानस पटल पर नक्सली हिंसा का अक्स उभरता था। लेकिन साय सरकार और केंद्र की डबल-इंजन सरकार की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है।
//नक्सल-मुक्त राज्य का संकल्प: बस्तर सहित सुदूर जनजातीय क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के कड़े अभियानों और समानांतर विकास कार्यों (जैसे सड़कें, स्कूल और अस्पताल) के चलते नक्सलवाद अंतिम सांसे ले रहा है।
//शांति और सुरक्षा का भरोसा: अब बस्तर और आस-पास के क्षेत्र 'रेड कॉरिडोर' से निकलकर कनेक्टिविटी, पर्यटन और उद्योगों के नए हब बन रहे हैं। निवेशकों के लिए सबसे पहली शर्त "सुरक्षित वातावरण" होती है, जिसे साय सरकार ने पूरी तरह सुनिश्चित किया है।
2. देश का पहला 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026'
छत्तीसगढ़ ने हाल ही में 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (छूट और सुगमता) अधिनियम, 2026' को विधानसभा से पारित कराकर देश में एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान बनाया है। छत्तीसगढ़ देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने उद्योगों के लिए 'जोखिम और विश्वास आधारित' (Risk & Trust-Based) अनुमति प्रणाली लागू की है।
3. औद्योगिक विकास नीति (2024-2030): समृद्धि का महामार्ग
1 नवंबर 2024 से लागू हुई राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 का मुख्य विजन छत्तीसगढ़ को 'अमृतकाल: छत्तीसगढ़ विजन @ 2047' के अनुरूप आर्थिक महाशक्ति बनाना है। इस नीति के प्रमुख आकर्षक वित्तीय और प्रशासनिक लाभ निम्नलिखित हैं:
// वन-क्लिक सिंगल विंडो पोर्टल: राज्य सरकार ने OneClick Single Window System की शुरुआत की है, जिससे जमीन आवंटन, बिजली-पानी कनेक्शन और पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) जैसी सभी औपचारिकताएं पूरी तरह डिजिटल और समयबद्ध हो गई हैं।
// भारी वित्तीय प्रोत्साहन (Subsidies): नए उद्योगों को फिक्स्ड कैपिटल इन्वेस्टमेंट (FCI) सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, और बिजली शुल्क (Electricity Duty) में शत-प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। इसके अलावा नेट SGST प्रतिपूर्ति (Reimbursement) की भी विशेष व्यवस्था है।
// भविष्य के सेक्टर्स (Thrust Sectors) पर फोकस: छत्तीसगढ़ पारंपरिक खनिज और इस्पात उद्योगों (जैसे देश का 20% लोहा और कोयला भंडार) से आगे बढ़कर अब हाई-टेक क्षेत्रों में कदम रख चुका है। नीति के तहत फार्मास्युटिकल्स, गारमेंट/टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
// समावेशी विकास: इस नीति में महिला उद्यमियों, आत्मसमर्पित माओवादियों, अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) के उद्यमियों, अग्निवीरों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष सब्सिडी पैकेज और औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
// स्थानीय रोजगार पर जोर: नीति के तहत उद्योगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए कौशल विकास (Skill Development) केंद्रों की स्थापना और रोजगार-लिंक्ड प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
4. नीति आयोग और रेटिंग्स में छत्तीसगढ़ का डंका
साय सरकार के इन प्रशासनिक और नीतिगत सुधारों का असर अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखने लगा है:
// नियामक सुगमता में नंबर 1: CRISIL और NITI Aayog Index की हालिया रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ को रेगुलेटरी ईज (नियामक सुगमता) और मजबूत संस्थागत माहौल में देश में प्रथम स्थान मिला है।
// पर्यावरणीय लचीलापन (Environmental Resilience): औद्योगिक विस्तार के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में छत्तीसगढ़ पूरे देश में दूसरे स्थान पर है।सशक्त कार्यबल: राज्य में महिला कार्यबल भागीदारी दर (Female Workforce Participation Rate) 58.1% है, जो देश के बड़े राज्यों के औसत से 41% अधिक है।
निष्कर्ष: एक नए 'इन्वेस्टमेंट हब' का उदयनक्सलवाद के अंधकार को चीरकर छत्तीसगढ़ आज सुशासन, सुरक्षा और पारदर्शी नीतियों के दम पर देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों की कतार में खड़ा हो चुका है। साय सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम न केवल राज्य की जीडीपी (GSDP) को तेजी से बढ़ा रहे हैं, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार सृजित कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की 2024-2030 की निवेश नीति निश्चित रूप से इसे एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है।
शौर्यपथ लेख
नई दिल्ली/रायपुर। भारत की सदियों पुरानी हथकरघा परंपरा आज भी देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पारंपरिक कौशल और रोजगार का महत्वपूर्ण आधार है, लेकिन भारत सरकार के उपलब्ध आधिकारिक आंकड़े इस क्षेत्र के सामने एक गंभीर चुनौती की ओर भी संकेत करते हैं। वर्ष 2009-10 की तीसरी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना में देश में 43.31 लाख हथकरघा बुनकर एवं संबद्ध श्रमिक दर्ज किए गए थे। इसके बाद उपलब्ध चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना 2019-20 में यह संख्या घटकर 35.22 लाख रह गई। यानी दोनों जनगणनाओं के बीच कुल कार्यबल में 8.09 लाख की कमी, लगभग 18.68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने 2009-10 की तीसरी हथकरघा जनगणना के आधार पर 43.31 लाख बुनकरों एवं संबद्ध श्रमिकों का आंकड़ा संसद और सरकारी दस्तावेजों में दर्ज किया था। वर्ष 2013-14 तथा 2014 के आसपास के मंत्रालय के दस्तावेजों में भी हथकरघा क्षेत्र में 43.31 लाख व्यक्तियों के रोजगार का उल्लेख मिलता है।
इसके विपरीत, चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना 2019-20 में देशभर में कुल 35.22 लाख हथकरघा कामगार दर्ज किए गए। इनमें 26,73,891 मुख्य बुनकर और 8,48,621 संबद्ध श्रमिक शामिल हैं। वस्त्र मंत्रालय के हालिया आधिकारिक उत्तरों में भी यही आंकड़ा देश के हथकरघा कार्यबल का Census-based आधार बताया गया है।
इस तुलना से स्पष्ट है कि 2014 के आसपास के 43.31 लाख के मुकाबले चौथी जनगणना के 35.22 लाख कामगारों तक संख्या पहुंचने पर करीब 18.7 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई। यह गिरावट केवल बुनकरों की संख्या में नहीं, बल्कि बुनाई से जुड़ी संबद्ध गतिविधियों में काम करने वाले लोगों को मिलाकर कुल हथकरघा कार्यबल में दिखाई देती है।
लेकिन कहानी केवल गिरावट की नहीं है
हथकरघा क्षेत्र की तस्वीर का दूसरा पहलू भी महत्वपूर्ण है। चौथी जनगणना में दर्ज 35.22 लाख कामगारों में 26.74 लाख मुख्य बुनकर और 8.49 लाख संबद्ध श्रमिक हैं। यानी हथकरघा आज भी करोड़ों परिवारों की पारंपरिक आजीविका और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 31.45 लाख हथकरघा परिवार इस क्षेत्र से पूर्ण या आंशिक रूप से आजीविका प्राप्त करते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि हथकरघा क्षेत्र मुख्यतः असंगठित क्षेत्र है और इसमें काम करने वाले लोग पारंपरिक कौशल के आधार पर स्वरोजगार से जुड़े हैं।
महिलाओं की बड़ी भूमिका
हथकरघा क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसकी महिला भागीदारी है। चौथी हथकरघा जनगणना के अनुसार कुल हथकरघा कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 72.3 प्रतिशत है। इससे स्पष्ट होता है कि हथकरघा केवल कपड़ा उत्पादन का माध्यम नहीं बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और पारंपरिक कौशल का भी महत्वपूर्ण आधार है।
2014 से 2026 तक का सवाल—क्या संख्या फिर बढ़ रही है?
यहीं आंकड़ों को लेकर सावधानी जरूरी है। 2026 में उपलब्ध 35.22 लाख को 2026 की वास्तविक कुल संख्या नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह संख्या 2019-20 की चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना से प्राप्त हुई है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने 28 जनवरी 2025 को e-Pehchan पोर्टल शुरू किया है। इसका उद्देश्य चौथी जनगणना में छूट गए लोगों तथा उसके बाद क्षेत्र में जुड़े नए बुनकरों और संबद्ध श्रमिकों का पंजीयन करना है। मंत्रालय के अनुसार इस प्रक्रिया में नए पंजीयन, मौजूदा विवरणों में संशोधन और e-Pehchan कार्ड डाउनलोड की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया के कारण जोड़ने, हटाने और विवरण अपडेट करने का काम लगातार चलता रहता है।
इसलिए नए e-Pehchan कार्ड जारी होना हथकरघा कार्यबल में नई भागीदारी का संकेत जरूर है, लेकिन इसे सीधे 2019-20 के 35.22 लाख में जोड़कर 2026 की कुल संख्या घोषित करना सांख्यिकीय रूप से सही नहीं होगा।
डिजिटल बाजार से नई संभावनाएं
हथकरघा क्षेत्र को पारंपरिक बाजारों से निकालकर डिजिटल बाजार से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारी Handloom पोर्टल पर e-Pehchan, India Handmade, GeM और India Handloom Brand जैसे डिजिटल एवं विपणन प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं।
इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि बुनकरों की आय और रोजगार की स्थिरता केवल करघे की संख्या पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उनके उत्पाद को उचित बाजार, बेहतर मूल्य, डिजाइन, ब्रांडिंग और सीधे ग्राहक तक पहुंच मिलने पर भी निर्भर करती है।
आंकड़ों का सबसे बड़ा संदेश
सरकारी आंकड़ों की तुलना एक स्पष्ट तस्वीर सामने रखती है—2009-10 में 43.31 लाख से चौथी जनगणना 2019-20 में 35.22 लाख तक हथकरघा बुनकर एवं संबद्ध श्रमिकों की संख्या में 8.09 लाख की कमी आई।
यह कमी लगभग 18.68 प्रतिशत है। इससे यह सवाल जरूर उठता है कि पारंपरिक हथकरघा व्यवसाय से लोगों के दूर होने के पीछे कम आय, बाजार में प्रतिस्पर्धा, पावरलूम और मशीन आधारित उत्पादन, कच्चे माल की लागत, विपणन की कठिनाइयां और नई पीढ़ी का दूसरे रोजगारों की ओर बढ़ना कितना जिम्मेदार है।
दिलचस्प बात यह है कि यह गिरावट नई नहीं है। सरकारी रिकॉर्ड में दूसरी हथकरघा जनगणना 1995-96 में 65.50 लाख बुनकर एवं संबद्ध श्रमिक थे, जो तीसरी जनगणना 2009-10 में घटकर 43.31 लाख रह गए थे। सरकार ने उस समय मशीन आधारित मिल और पावरलूम क्षेत्र से प्रतिस्पर्धा, सहकारी संस्थाओं की कमजोरी, ऋण की कठिन उपलब्धता और विपणन संबंधी समस्याओं को हथकरघा क्षेत्र की गिरावट के प्रमुख कारणों में गिना था।
इस लिहाज से 43.31 लाख से 35.22 लाख की गिरावट केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भारत की पारंपरिक हथकरघा अर्थव्यवस्था के सामने खड़ी दीर्घकालीन चुनौती का संकेत है।
अब सरकार के सामने चुनौती केवल नए बुनकरों का पंजीयन करने की नहीं, बल्कि मौजूदा बुनकरों को टिकाऊ रोजगार, बेहतर पारिश्रमिक, सस्ता कच्चा माल, आधुनिक डिजाइन, बाजार तक सीधी पहुंच और डिजिटल बिक्री के अवसर उपलब्ध कराने की है।
यही तय करेगा कि आने वाले वर्षों में भारत का हथकरघा केवल अपनी गौरवशाली परंपरा के रूप में याद किया जाएगा या फिर यह परंपरा नई पीढ़ी के लिए सम्मानजनक और टिकाऊ रोजगार का मजबूत माध्यम भी बन पाएगी
राशन की कतार से मिलेगी मुक्ति, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए 24×7 घंटे खाद्यान्न- मंत्री दयालदास बघेल
रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडएस) को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल ने आज प्रदेश के पहले तीन ‘अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम‘ का रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में ऑनलाइन शुभारंभ किया। इस नवाचार के साथ छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जहां ग्रेन एटीएम के माध्यम से हितग्राहियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है। यह पीडएस प्रणाली में पारदर्शिता के लिए राज्य सरकार बड़ी पहल है।
अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम के माध्यम से राशनकार्डधारी हितग्राही अब अपनी सुविधा के अनुसार 24×7 घंटे चावल प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए मशीन की स्क्रीन पर राशनकार्डधारी को अपना आधार नंबर अथवा राशनकार्ड नंबर दर्ज करना होगा और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न प्राप्त किया जा सकेगा। इस सुविधा से उचित मूल्य की दुकानों में राशन लेने के लिए लगने वाली कतार और समय की बाध्यता से हितग्राहियों को राहत मिलेगी।
वन नेशन.वन राशनकार्ड से दूसरे राज्यों के हितग्राहियों को भी सुविधा
अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम की खासियत यह है कि छत्तीसगढ़ के राशनकार्डधारियों के साथ.साथ अन्य राज्यों के राशनकार्डधारी भी ‘वन नेशन, वन राशनकार्ड‘ योजना के तहत बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से खाद्यान्न प्राप्त कर सकेंगे। इससे प्रवासी श्रमिकों और अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ आने वाले हितग्राहियों के लिए भी राशन प्राप्त करना आसान होगा।
छत्तीसगढ़ ग्रेन एटीएम संचालित करने वाला देश का पांचवां राज्य
अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम वर्तमान में उत्तराखंड, मेघालय, गुजरात और ओडिशा में संचालित हो रहे हैं। अब छत्तीसगढ़ भी ग्रेन एटीएम संचालित करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो गया है। प्रदेश में तीन ग्रेन एटीएम की शुरुआत पीडीएस व्यवस्था में तकनीक और नवाचार के प्रभावी उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
2500 किलोग्राम तक खाद्यान्न भण्डारण क्षमता
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के सहयोग से स्थापित अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम की भण्डारण क्षमता लगभग 2500 किलोग्राम है। मशीन में चावल की लोडिंग पूर्णतः स्वचालित प्रणाली से होगी। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद मशीन निर्धारित मात्रा में चावल उपलब्ध कराएगी। इससे खाद्यान्न वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी को और मजबूत किया जा सकेगा।
गरीब से लेकर हर हितग्राही के लिए समय की बचत
खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और राज्य सरकार के मार्गदर्शन में पीडीएस व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और जनसुविधा केंद्रित बनाने के लिए लगातार नवाचार किए जा रहे हैं। अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अब हितग्राही अपने अन्य कार्यों के बाद अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय राशन प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि ग्रेन एटीएम के उपयोग से समय की बचत होगी और उचित मूल्य दुकानों में भीड़ तथा कतार की समस्या कम होगी। अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम के शुरू होने से छत्तीसगढ़ में राशन वितरण व्यवस्था अधिक आधुनिक, सुरक्षित, विश्वसनीय और सुविधाजनक बनेगी। तकनीक आधारित यह पहल हितग्राहियों को समय की बचत के साथ सम्मानजनक तरीके से खाद्यान्न प्राप्त करने की सुविधा देगी और पीडीएस में पारदर्शिता को नई मजबूती प्रदान करेगी।
पारदर्शी पीडीएस की दिशा में प्रभावी कदम
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम की प्रतिनिधि सुश्री नजी़नो हॉसीमोनी ने छत्तीसगढ़ सरकार को इस नवाचार के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम की स्थापना राज्य सरकार, खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल तथा खाद्य विभाग की सचिव श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले के प्रयासों से संभव हुई है। उन्होंने इसे पारदर्शी एवं प्रभावी पीडीएस प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
शुभारंभ अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री प्रेमप्रकाश पांडे, विधायक श्री मोती लाल साहू, खाद्य विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम नागरिक आपूर्ति निगम की एमडी श्रीमती इफ्फत आरा, अपर संचालक श्री नीलिमा एल्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, हितग्राही उपस्थित थे।
महतारी वंदन की राशि से जगन्नाथ मंदिर निर्माण में सहयोग, महिलाओं ने पेश की सामाजिक सहभागिता की मिसाल
रायगढ़ / शौर्यपथ / वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत आमापाली में आयोजित जन चौपाल में ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं और आवश्यकताएं सुनीं तथा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय जरूरतों के संबंध में जानकारी ली।
जन चौपाल के दौरान आमापाली की माताओं-बहनों की एक प्रेरणादायी पहल भी सामने आई। महिलाओं ने महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्राप्त राशि में से स्वेच्छा से धनराशि एकत्रित कर भगवान जगन्नाथ मंदिर के प्रारंभिक निर्माण कार्य के लिए समर्पित की। महिलाओं के इस सामूहिक प्रयास की वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी ने सराहना की।
महिलाओं की सामाजिक सहभागिता बनी मिसाल
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि आमापाली की बहनों ने अपनी इच्छा और संकल्प से राशि एकत्रित कर मंदिर निर्माण में सहयोग दिया है। यह केवल आर्थिक योगदान नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता, सामूहिक जिम्मेदारी और महिला नेतृत्व का प्रेरक उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ समाज और सामुदायिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनका स्वैच्छिक योगदान आपसी सहयोग और सामाजिक एकजुटता की भावना को मजबूत करता है।
श्री चौधरी ने कहा कि आमापाली की महिलाओं की यह पहल निश्चित रूप से अन्य लोगों को भी सामुदायिक कार्यों में आगे बढ़कर योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी।
जन चौपाल में सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं
वित्त मंत्री ने इस सराहनीय पहल के लिए ग्राम पंचायत आमापाली की सभी माताओं-बहनों और सहभागी नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जन चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुनना और स्थानीय स्तर पर उनके समाधान की दिशा में पहल करना राज्य सरकार की जनकल्याण और सुशासन की प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नीधि वर्मा के घर का बिजली बिल हुआ शून्य, 1.08 लाख रुपये की डबल सब्सिडी से मिली बड़ी राहत
अंबिकापुर में लक्ष्य से दोगुने से अधिक आवेदन, 1,136 घरों में स्थापित हुए रूफटॉप सोलर संयंत्र
रायपुर / शौर्यपथ / प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना सरगुजा जिले में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ ही आम परिवारों को बिजली खर्च से राहत दिलाने और ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। योजना का लाभ लेकर अंबिकापुर के मायापुर निवासी श्रीमती नीधि वर्मा का परिवार अब बिजली खर्च के बोझ से मुक्त होकर सौर ऊर्जा के माध्यम से अपनी जरूरतें पूरी कर रहा है। सोलर संयंत्र स्थापित होने के बाद उनके घर का बिजली बिल शून्य हो गया है।
4 से 5 हजार रुपये के मासिक बिजली बिल से मिली राहत
श्रीमती नीधि वर्मा ने बताया कि सोलर संयंत्र स्थापित करने से पहले उनके घर में प्रतिमाह लगभग 4 से 5 हजार रुपये तक बिजली बिल आता था। बढ़े हुए बिजली खर्च से परिवार के बजट पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था। प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत घर की छत पर सोलर संयंत्र स्थापित कराने के बाद अब घरेलू बिजली की जरूरतें सौर ऊर्जा से पूरी हो रही हैं और बिजली बिल लगभग पूरी तरह समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा कि योजना ने परिवार को आर्थिक राहत देने के साथ बिजली की जरूरतों को पूरा करने का स्थायी और स्वच्छ विकल्प उपलब्ध कराया है।
1.08 लाख रुपये की डबल सब्सिडी से आसान हुआ सोलर संयंत्र लगाना
श्रीमती वर्मा ने बताया कि योजना के तहत उन्हें लगभग 1 लाख 8 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की सब्सिडी शामिल है। इस आर्थिक सहायता से सोलर संयंत्र स्थापित करने की लागत का बड़ा हिस्सा कम हुआ और उनके लिए सौर ऊर्जा अपनाना आसान हो गया।
बिजली उपभोक्ता से बनीं ऊर्जादाता
सौर ऊर्जा से मिलने वाले लाभ को साझा करते हुए श्रीमती नीधि वर्मा ने कहा कि पहले उनका परिवार केवल बिजली का उपभोक्ता था, लेकिन अब वे स्वयं बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। घरेलू आवश्यकता से अधिक उत्पादित बिजली विद्युत ग्रिड में वापस जाती है और नियमानुसार उसका लाभ भी प्राप्त होता है। उन्होंने कहा, “पहले हम बिजली उपभोक्ता थे, लेकिन अब ऊर्जा दाता बन गए हैं।” उनका मानना है कि सौर ऊर्जा अपनाने से परिवार को बिजली बिल में राहत मिलने के साथ देश की ऊर्जा व्यवस्था में आम नागरिक की भागीदारी भी बढ़ रही है।
अंबिकापुर में लक्ष्य से अधिक आवेदन, तेजी से बढ़ रहा रूफटॉप सोलर का दायरा
विद्युत विभाग के अनुसार सरगुजा जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना का लाभ तेजी से पहुंच रहा है। अंबिकापुर शहर में 1,000 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापना के लक्ष्य के विरुद्ध 2,021 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 1,985 हितग्राहियों के लिए वेंडर चयनित किए जा चुके हैं तथा 1,136 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित हो चुके हैं।
वहीं अंबिकापुर ग्रामीण क्षेत्र में भी 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 1,282 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें 1,200 हितग्राहियों के लिए वेंडर चयनित किए गए हैं तथा 305 घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।
स्वच्छ ऊर्जा के साथ आर्थिक सशक्तिकरण की ओर बढ़ते परिवार
प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से सरगुजा में परिवारों को बिजली खर्च में राहत मिलने के साथ स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है। रूफटॉप सोलर संयंत्रों की बढ़ती संख्या ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में जिले की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।
श्रीमती नीधि वर्मा ने अधिक से अधिक परिवारों से प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी का लाभ लेकर घरों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना परिवार और देश दोनों के हित में है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आम नागरिकों को आर्थिक रूप से राहत देने के साथ स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पीएम आवास के हितग्राहियों को सौंपी खुशियों की चाबी
आवास निर्माण,जल सुरक्षा एवं ग्रामीण अधोसंरचना गुणवत्ता पर विशेष जोर
रायपुर / शौर्यपथ / आयुक्त वीबी - जीरामजी एवं संचालक प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण तारण प्रकाश सिन्हा शुक्रवार को बलौदाबाजार पहुंचे। इस दौरान विभिन्न ग्राम पंचायतों में निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया।
आयुक्त ने जनपद पंचायत बलौदाबाजार अंतर्गत ग्राम पंचायत बेमेतरा तथा जनपद पंचायत पलारी अंतर्गत ग्राम पंचायत सितदेवरी में विभिन्न विकास कार्यों का स्थल निरीक्षण करते हुए हितग्राहियों एवं ग्रामीणों से सीधे संवाद किया। निरीक्षण के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण अंतर्गत निर्मित आवासों का अवलोकन किया तथा आवास पूर्ण कर चुके हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से खुशियों की चाबी प्रदान की। हितग्राहियों से आवास निर्माण, प्राप्त सहायता, निर्माण की गुणवत्ता एवं योजना से उनके जीवन में आए बदलाव के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पात्र परिवारों को योजना का लाभ समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित करें ।
आयुक्त ने वीबी- जीरामजी अंतर्गत जल सुरक्षा श्रेणी में निर्मित एवं प्रगतिरत कार्यों का भी विस्तृत निरीक्षण किया।इस दौरान नवीन तालाब, अमृत सरोवर, सैंड फिल्टर आधारित बोरवेल रिचार्ज संरचना तथा चेक डैम निर्माण कार्यों की स्थल पर तकनीकी एवं उपयोगिता संबंधी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संरक्षण एवं भू-जल पुनर्भरण से जुड़े कार्य केवल निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि उनका चयन स्थानीय आवश्यकता, कैचमेंट, जलधारण क्षमता एवं दीर्घकालिक उपयोगिता के आधार पर किया जाए।
उन्होंने कहा कि वीबी-जीरामजी का उद्देश्य रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ ग्राम पंचायतों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण, जल सुरक्षा को सुदृढ़ करना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाना है। अतः योजना अंतर्गत स्वीकृत प्रत्येक कार्य का प्रत्यक्ष लाभ ग्रामीण समुदाय को दिखाई देना चाहिए।स्थल निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर सहज एवं आत्मीय वातावरण में चर्चा की तथा योजनाओं के क्रियान्वयन, स्थानीय आवश्यकताओं, रोजगार, आवास एवं विकास कार्यों के संबंध में उनके अनुभव और सुझाव सुने। उन्होंने मैदानी अमले को निर्देशित किया कि ग्रामीणों की वास्तविक आवश्यकताओं को समझते हुए ग्राम सभा से अनुमोदित कार्ययोजना के अनुरूप प्राथमिकता आधारित कार्य संपादित किए जाएं।
इसके पश्चात जिला पंचायत सभाक़क्ष बलौदाबाजार में आयोजित विभागीय समीक्षा बैठक मे वीबी- जी रामजी एवं पीएम आवास योजना ग्रामीण सहित ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। आयुक्त ने योजना अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की गुणवत्ता, समयबद्ध पूर्णता, श्रमिक नियोजन, तकनीकी मापदंडों के पालन तथा पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि फील्ड निरीक्षण को नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया जाए तथा प्रत्येक निर्माण कार्य की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए। जल संरक्षण संरचनाओं के माध्यम से अधिकतम वर्षाजल संचयन, भू-जल स्तर में सुधार और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में परिणामोन्मुखी कार्य करने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण एवं समीक्षा के दौरान सीईओ जिला पंचायत सुश्री दिव्या अग्रवाल एवं संबंधित जनपद पंचायतों के अधिकारी-कर्मचारी, तकनीकी अमला, पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
महतारी वंदन से नीलम के जीवन में आया आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का उजाला
रायपुर / शौर्यपथ / विष्णु के सुशासन में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिल रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, जिन्हें प्रदेश की महिलाएं स्नेह से ‘विष्णु भैया’ कहती हैं, के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक संबल के साथ आत्मविश्वास और सम्मान का उजाला ला रही है। योजना के माध्यम से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता महिलाओं को परिवार की आवश्यकताओं में सहभागी बनने के साथ अपने निर्णय स्वयं लेने का भरोसा भी दे रही है।
ग्राम पंचायत लालपुर, विकासखंड गौरेला की श्रीमती नीलम राठौर के जीवन में भी महतारी वंदन योजना बदलाव की नई उम्मीद लेकर आई है। नीलम बताती हैं कि उन्हें योजना की 30वीं किस्त की राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हुई है। नियमित रूप से मिलने वाली इस आर्थिक सहायता से वे अपनी और परिवार की दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में योगदान दे पा रही हैं।
नीलम के लिए यह राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का आधार बन गई है। उनका कहना है कि पहले परिवार की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी कई बार इंतजार करना पड़ता था। अब महतारी वंदन योजना से नियमित सहायता मिलने के कारण वे अपनी आवश्यकताओं को प्राथमिकता के अनुसार पूरा कर पा रही हैं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में पहले से अधिक मजबूती के साथ भागीदारी निभा रही हैं।
आर्थिक सहयोग से बढ़ा आत्मविश्वास
नीलम बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि ने उनके भीतर आर्थिक निर्णय लेने का आत्मविश्वास बढ़ाया है। परिवार की छोटी-बड़ी जरूरतों में अपना योगदान देने से उन्हें यह महसूस होता है कि वे अपने परिवार की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उनका कहना है कि आर्थिक रूप से सक्षम होने से महिलाओं में अपने फैसले स्वयं लेने का भरोसा बढ़ता है। नियमित आर्थिक सहायता ने उन्हें भी अपने परिवार की जरूरतों को समझने, उन्हें प्राथमिकता देने और अपनी जिम्मेदारियों को अधिक आत्मविश्वास के साथ निभाने का अवसर दिया है।
विष्णु भैया की पहल से महिलाओं को मिल रहा आर्थिक संबल
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को विकास की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में आगे बढ़ा रही है। प्रदेश की महिलाओं के बीच लोकप्रिय ‘विष्णु भैया’ की सरकार की महतारी वंदन योजना महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनके आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता को भी मजबूत कर रही है।
विष्णु के सुशासन में महिलाओं को परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहभागी बनने और अपने जीवन से जुड़े निर्णयों में अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है। योजना से मिलने वाली सहायता महिलाओं के लिए आर्थिक सुरक्षा के साथ भविष्य के प्रति भरोसे का आधार भी बन रही है।
महिलाओं के सम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ उनके आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। नियमित रूप से मिलने वाली राशि से महिलाएं परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में अपना योगदान दे रही हैं और स्वयं को परिवार की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस कर रही हैं।
विष्णु के सुशासन में राज्य सरकार की महिला केंद्रित योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर उन्हें परिवार और समाज के विकास में सक्रिय भागीदार बनाना है। महतारी वंदन योजना इसी सोच को धरातल पर साकार कर रही है।
नीलम ने ‘विष्णु भैया’ के प्रति जताया आभार
श्रीमती नीलम राठौर ने महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, जिन्हें वे स्नेहपूर्वक ‘विष्णु भैया’ कहती हैं, के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि योजना से मिलने वाली राशि महिलाओं के लिए आर्थिक संबल के साथ आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दे रही है।
नीलम की कहानी यह दर्शाती है कि महिलाओं को समय पर मिलने वाला आर्थिक संबल उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत कर सकता है। परिवार की जरूरतों में योगदान देने का अवसर मिलने से उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और वे स्वयं को परिवार की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस कर रही हैं।
छोटी-सी आर्थिक मदद, बड़े बदलाव की शुरुआत
नीलम के जीवन का अनुभव इस बात का उदाहरण है कि महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव की शुरुआत कर सकती है। परिवार की जरूरतों में योगदान देने का अवसर मिलने से उनके आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और वे अधिक मजबूती के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
विष्णु के सुशासन में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को प्राथमिकता देते हुए संचालित महतारी वंदन योजना आज प्रदेश की अनेक महिलाओं के लिए आर्थिक संबल, आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का आधार बन रही है। ‘विष्णु भैया’ की सरकार की यह पहल महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा के साथ नई उम्मीद, नया आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का उजाला लेकर आ रही है।
Feb 09, 2021 Rate: 4.00
