August 13, 2026
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    धर्म संसार / शौर्यपथ / प्रभु यीशु के जन्म की ख़ुशी में मनाया जाने वाला क्रिसमस का त्योहार पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह त्योहार कई मायनों में बेहद खास है। क्रिसमस को बड़ा दिन, सेंट स्टीफेंस डे या फीस्ट ऑफ़ सेंट स्टीफेंस भी कहा जाता है। प्रभु यीशु ने दुनिया को प्यार और इंसानियत की शिक्षा दी। उन्होंने लोगों को प्रेम और भाईचारे के साथ रहने का संदेश दिया। प्रभु यीशु को ईश्वर का इकलौता प्यारा पुत्र माना जाता है। इस त्योहार से कई रोचक तथ्य जुड़े हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
    क्रिसमस ऐसा त्योहार है जिसे हर धर्म के लोग उत्साह से मनाते हैं। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जिस दिन लगभग पूरे विश्व में अवकाश रहता है। 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार आर्मीनियाई अपोस्टोलिक चर्च में 6 जनवरी को मनाया जाता है। कई देशों में क्रिसमस का अगला दिन 26 दिसंबर बॉक्सिंग डे के रूप मे मनाया जाता है। क्रिसमस पर सांता क्लॉज़ को लेकर मान्यता है कि चौथी शताब्दी में संत निकोलस जो तुर्की के मीरा नामक शहर के बिशप थे, वही सांता थे। वह गरीबों की हमेशा मदद करते थे उनको उपहार देते थे। क्रिसमस के तीन पारंपरिक रंग हैं हरा, लाल और सुनहरा। हरा रंग जीवन का प्रतीक है, जबकि लाल रंग ईसा मसीह के रक्त और सुनहरा रंग रोशनी का प्रतीक है। क्रिसमस की रात को जादुई रात कहा जाता है। माना जाता है कि इस रात सच्चे दिल वाले लोग जानवरों की बोली को समझ सकते हैं। क्रिसमस पर घर के आंगन में क्रिसमस ट्री लगाया जाता है। क्रिसमस ट्री को दक्षिण पूर्व दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। फेंगशुई के मुताबिक ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। पोलैंड में मकड़ी के जालों से क्रिसमस ट्री को सजाने की परंपरा है। मान्यता है कि मकड़ी ने सबसे पहले जीसस के लिए कंबल बुना था।

    *सारंगढ़ के शासकीय लोचन प्रसाद पांडेय महाविद्यालय का स्थापना दिवस समारोह*

    *उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने जनभागीदारी मद निर्मित कक्ष का किया लोकार्पण*

    रायपुर /शासकीय लोचन प्रसाद पांडेय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सारंगढ़ के स्थापना दिवस के अवसर पर राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद, पठन-पाठन, कला, गायन एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य के विचार ही उसके जीवन में वास्तविक बदलाव लाते हैं। श्रेष्ठ विचारों का निर्माण अच्छी संगति से ही संभव है। उन्होंने पौराणिक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि गुरु द्रोणाचार्य के सानिध्य के बावजूद गलत संगति के कारण दुर्योधन का पतन हुआ। 

         मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि राज्य में 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' को प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शिक्षा एवं जिला विकास के लिए पर्याप्त बजटीय प्रावधान किए गए हैं, जिसके अंतर्गत सारंगढ़ में ऑडिटोरियम निर्माण सहित अन्य विकास कार्य गति पकड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को साकार करने में युवा शक्ति की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

          मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि जब कुम्हार ने चिलम बनाने के स्थान पर शीतल जल प्रदान करने वाली सुराही बनाने का निर्णय लिया, तो मिट्टी का रूप और उद्देश्य दोनों बदल गए। यदि विचार सकारात्मक हों, तो वे स्वयं के जीवन को संवारने के साथ-साथ समाज को भी शीतलता और शांति प्रदान करते हैं। इस दौरान उन्होंने कॉलेज परिसर में पौधरोपण किया l जनभागीदारी मद से निर्मित नवीन अतिरिक्त कक्ष का लोकार्पण भी किया।

    *महाविद्यालय में सुविधाओं का विस्तार और स्थानीय मांगें*

             कार्यक्रम में सारंगढ़ विधायक उत्तरी जांगड़े ने नवीन कक्ष के निर्माण पर बधाई देते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने महाविद्यालय में सेमिनार हॉल निर्माण की मांग रखी। प्राचार्य ने संस्था का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए स्नातकोत्तर स्तर पर संस्कृत एवं गणित विषय प्रारंभ करने तथा सेमिनार हॉल की आवश्यकता से अवगत कराया। 

        इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष, पूर्व विधायक श्रीमती केराबाई मनहर,स्थानीय जनप्रतिनिधि, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, महाविद्यालय के प्राध्यापक, एनसीसी एवं एनएसएस के कैडेट्स तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

    विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने की किया शुभारंभ

    रायपुर / राजनांदगांव के दिग्विजय स्टेडियम में जिला बैडमिंटन एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित 25वीं छत्तीसगढ़ स्टेट जूनियर रैंकिंग बैडमिंटन टूर्नामेंट 2026-27 का भव्य शुभारंभ हुआ। प्रतियोगिता का उद्घाटन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने किया। 9 से 13 अगस्त 2026 तक चलने वाली इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रदेशभर से अंडर-19 बालक एवं बालिका वर्ग के खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।

    *राजनांदगांव खेल नगरी के रूप में हो रहा विकसित- डॉ. रमन सिंह*

              विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राजनांदगांव में प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन होना गर्व का विषय है। यहाँ हॉकी, फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, जूडो, कराटे और कुश्ती जैसे खेलों में अपार प्रतिभाएं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार राजनांदगांव को खेल नगरी के रूप में विकसित करने के लिए खेल अधोसंरचना, कोर्ट, प्रशिक्षण सुविधाओं और आधुनिक संसाधनों के विकास पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने खिलाड़ियों को अनुशासन और कड़ी मेहनत के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

    *खेलों को बढ़ावा देने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन को 100 करोड़- उपमुख्यमंत्री अरुण साव*

            उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने राजनांदगांव को संस्कारधानी के साथ-साथ खेलों की राजधानी बताया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय भारोत्तोलक ज्ञानेश्वरी यादव का उल्लेख करते हुए कहा कि जिले में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। राज्य सरकार खेलों के विकास के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस वर्ष 156 खिलाड़ियों को श्उत्कृष्ट खिलाड़ीश् घोषित किया गया है तथा श्मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशनश् के तहत 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। उन्होंने बैडमिंटन एसोसिएशन को अधोसंरचना के प्रस्ताव पर बजट उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।

    *सांसद संतोष पाण्डेय ने दिया खिलाड़ियों को मार्गदर्शन*

            सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए दिग्विजय स्टेडियम परिसर के संसाधनों का खिलाड़ियों के हित में बेहतर उपयोग करने और खेल अधोसंरचना को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन छत्तीसगढ़ बैडमिंटन संघ के अध्यक्ष श्री विक्रम सिंह सिसोदिया ने दिया। इस अवसर पर राजगामी संपदा न्यास की अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा साहू, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, कोच और बड़ी संख्या में खिलाड़ी उपस्थित थे।

    सब इंस्पेक्टर/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2024 में संशोधन, 25 अक्टूबर को शिक्षक भर्ती परीक्षा के चलते लिया गया फैसला

    रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने गृह पुलिस विभाग के अंतर्गत सूूबेदार/उप निरीक्षक संवर्ग/प्लाटून कमांडर परीक्षा-2024 की मुख्य परीक्षा की प्रस्तावित तिथियों में संशोधन किया है। आयोग द्वारा जारी संशोधन सूचना के अनुसार अब यह मुख्य परीक्षा 2, 3 एवं 4 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी।

    छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने इससे पहले 4 अगस्त 2026 को प्रारंभिक लिखित परीक्षा का परिणाम जारी करते हुए मुख्य परीक्षा के आयोजन की संभावित तिथि 24, 25 एवं 26 अक्टूबर 2026 निर्धारित की थी। लेकिन 25 अक्टूबर को शिक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित होने के कारण मुख्य परीक्षा की तिथियों में बदलाव किया गया है।

    अब 2, 3 और 4 नवंबर को होगी मुख्य परीक्षा

    आयोग की ओर से जारी सूचना में स्पष्ट किया गया है कि संशोधित कार्यक्रम के अनुसार सूबेदार/उप निरीक्षक संवर्ग/प्लाटून कमांडर परीक्षा-2024 की मुख्य परीक्षा अब 2, 3 एवं 4 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी।

    इस बदलाव से मुख्य परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी और अन्य परीक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को नए कार्यक्रम के अनुसार व्यवस्थित करना होगा।

    मुख्य परीक्षा के लिए फिर से करना होगा ऑनलाइन आवेदन

    आयोग ने मुख्य परीक्षा के लिए चिन्हांकित अभ्यर्थियों को महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा है कि उन्हें मुख्य परीक्षा के लिए आयोग की वेबसाइट के माध्यम से पृथक रूप से ऑनलाइन आवेदन प्रस्तुत करना होगा। इस संबंध में विस्तृत सूचना आयोग द्वारा अलग से जारी की जाएगी।

    आयोग ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे मुख्य परीक्षा से संबंधित नवीनतम जानकारी के लिए CGPSC की आधिकारिक वेबसाइट www.psc.cg.gov.in⁠� का नियमित रूप से अवलोकन करते रहें।

    अभ्यर्थियों के लिए जरूरी तारीखें

    प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम: 4 अगस्त 2026

    पूर्व निर्धारित मुख्य परीक्षा: 24, 25 एवं 26 अक्टूबर 2026

    संशोधित मुख्य परीक्षा: 2, 3 एवं 4 नवंबर 2026

    तिथि परिवर्तन का कारण: 25 अक्टूबर को शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन

    मुख्य परीक्षा आवेदन: अलग से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया होगी

    CGPSC की इस संशोधन सूचना से गृह पुलिस विभाग की भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को अब अपनी रणनीति नए परीक्षा कार्यक्रम के अनुरूप बनानी होगी।

    इंडिया हैबिटेट सेंटर में छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा का रंग, पांडवानी ने बांधा समां*

    रायपुर । शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की पंडवानी को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक मंच इंडिया हैबिटेट सेंटर में अपनी पूरी जीवंतता के साथ प्रस्तुत हुई। महान पांडवानी कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति को समर्पित विशेष प्रस्तुति के साथ आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन 2026 का शुभारंभ हुआ। पंडवानी की इस प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक बार फिर प्रमुखता से सामने रखा।

    *छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत पंडवानी*

            इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टाइन ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में पांडवानी कलाकार प्रभा यादव ने पारंपरिक संगीतकारों के साथ प्रस्तुति दी। महाभारत की कथाओं पर आधारित पंडवानी में कथा, गायन, संवाद, लय और अभिनय का ऐसा संयोजन देखने को मिला, जिसने छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट लोक शैली की ताकत और व्यापकता को सामने रखा।

           कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सरकार के प्रतिनिधियों के साथ प्रदेश की कला और संस्कृति से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व भी उपस्थित रहे। वरिष्ठ पत्रकार एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्ण दास, धरसींवा विधायक एवं प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार अनुज शर्मा, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव तथा सांस्कृतिक कार्यकर्ता ने कार्यक्रम में भाग लिया। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश और अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा भी इस अवसर पर मौजूद रहीं।

    *तीजन बाई के योगदान को याद किया*

             इस प्रस्तुति का केंद्र तीजन बाई की कला यात्रा और पांडवानी को मिली राष्ट्रीय पहचान रही। छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा से निकली पंडवानी को देश और दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचाने में तीजन बाई का योगदान असाधारण रहा। उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली से पंडवानी को नई पहचान दी और इसे भारतीय लोक प्रदर्शन कलाओं की प्रमुख विधाओं में स्थापित किया।

     *सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम पंडवानी*

           तीजन बाई को समर्पित प्रस्तुति के जरिए उनके कला जीवन और छत्तीसगढ़ की उस परंपरा को याद किया गया, जिसमें कथावाचन केवल मनोरंजन नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक स्मृतियों और जीवन मूल्यों को आगे बढ़ाने का माध्यम रहा है। इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.जी. सुरेश ने कहा कि भारत की लोक कलाएं देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनमें पीढ़ियों से चली आ रही कहानियां, परंपराएं और मूल्य सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि लोक कलाकारों और परंपराओं को राष्ट्रीय राजधानी में मंच देना इन विरासतों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

    *भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास पंडवानी*

            धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि पंडवानी छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण लोक कला है। तीजन बाई ने इसे गांवों से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में इस परंपरा का सम्मान होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। अन्वेषा कला केंद्र की सचिव अन्वेषा ब्रह्मा ने कहा कि भारत की लोक परंपराओं में सदियों का इतिहास, सामूहिक स्मृति और जीवन-दर्शन सुरक्षित है। ऐसे आयोजन इन परंपराओं को नए दर्शकों और नई पीढ़ी से जोड़ने का काम करते हैं।

    *देश की लोक परंपराओं का साझा मंच*

           आईएचसी लोक संगीत सम्मेलन भारत के अलग-अलग हिस्सों की लोक संगीत, कथावाचन और प्रदर्शन परंपराओं को एक मंच पर लाने वाला वार्षिक आयोजन है। इसका उद्देश्य देश की विविध लोक कलाओं को सामने लाना और पारंपरिक कलाकारों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का अवसर देना है।

          इस वर्ष सम्मेलन की शुरुआत ही छत्तीसगढ़ की पंडवानी और तीजन बाई की स्मृति को समर्पित प्रस्तुति से होना विशेष महत्व रखता है। राजधानी के प्रमुख सांस्कृतिक मंच पर हुई इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि भारत की लोक कलाएं केवल अतीत की धरोहर नहीं हैं, बल्कि आज भी देश की सांस्कृतिक पहचान और रचनात्मक ऊर्जा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अन्वेषा कला केंद्र पिछले 25 वर्षों से अधिक समय से भारत की शास्त्रीय और लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन, दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और शैक्षणिक गतिविधियों के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।

    NDMA की राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस में बनी आपदा प्रबंधन की रणनीति, शून्य देरी से राहत-बचाव के लिए परखी जाएंगी तैयारियां

    रायपुर । शौर्यपथ ।  छत्तीसगढ़ में संभावित बाढ़ और उससे जुड़ी आपदाओं से निपटने के लिए राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को बिना किसी देरी के संचालित करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा राज्य स्तरीय उच्चस्तरीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।

    कॉन्फ्रेंस में प्रदेश की आपदा प्रबंधन तैयारियों की समीक्षा के साथ यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि 18 अगस्त को राज्य स्तरीय टेबल-टॉप एक्सरसाइज तथा 20 अगस्त को व्यापक मॉक एक्सरसाइज (मॉक ड्रिल) आयोजित की जाएगी। इन अभ्यासों के माध्यम से बाढ़ जैसी वास्तविक आपदा के दौरान प्रशासन, राहत-बचाव दल और विभिन्न विभागों की कार्यक्षमता तथा आपसी समन्वय को परखा जाएगा।

    शून्य देरी से राहत-बचाव पर फोकस

    राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अधिकारियों को टेबल-टॉप एक्सरसाइज से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को गहराई से समझने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि किसी भी वास्तविक आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों में देरी जान-माल के नुकसान को बढ़ा सकती है। ऐसे में पूर्वाभ्यास के माध्यम से अधिकारियों और संबंधित विभागों को अपनी भूमिका, जिम्मेदारियों और आपसी समन्वय की स्पष्ट जानकारी होना जरूरी है। प्रस्तावित अभ्यास इसी तैयारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    स्वास्थ्य से लेकर जल संसाधन तक—हर विभाग की भूमिका तय

    कॉन्फ्रेंस में संभावित बाढ़ के दौरान विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों और त्वरित कार्रवाई की विस्तृत समीक्षा की गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) तथा पशुपालन विभाग द्वारा आपदा के दौरान किए जाने वाले राहत एवं बचाव कार्यों का खाका तैयार किया गया।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था, सड़क एवं संपर्क मार्गों को बहाल करने, जल संसाधनों से संबंधित स्थिति की निगरानी, पेयजल व्यवस्था तथा पशुधन की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विभागीय समन्वय को प्राथमिकता दी गई।

    पुलिस, फायर ब्रिगेड, रेलवे और एयरपोर्ट भी रहेंगे समन्वय में

    राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में आपदा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों और संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इनमें नगर सेना, अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा, पुलिस मुख्यालय, रायपुर रेल मंडल (DRM), स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट के निदेशक, दूरसंचार, विज्ञान केंद्र तथा औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के अधिकारी शामिल रहे।

    इसके अलावा पंचायत, ऊर्जा, परिवहन और खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया। प्रदेश के सभी जिलों के नोडल अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से कॉन्फ्रेंस से जुड़े रहे।

    18 अगस्त को तैयारी की ‘टेबल-टॉप’ परीक्षा, 20 को मैदान में उतरेगी पूरी व्यवस्था

    प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत 18 अगस्त की टेबल-टॉप एक्सरसाइज में बाढ़ जैसी आपदा की काल्पनिक परिस्थितियां बनाकर विभिन्न विभागों की निर्णय लेने की क्षमता, SOP के पालन और आपसी समन्वय की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद 20 अगस्त को मॉक एक्सरसाइज के जरिए वास्तविक परिस्थितियों के करीब जाकर राहत एवं बचाव व्यवस्था की तैयारियों को परखा जाएगा।

    इन दोनों अभ्यासों का उद्देश्य केवल तैयारियों की समीक्षा करना नहीं, बल्कि संभावित कमियों को समय रहते पहचानकर उन्हें दूर करना भी है, ताकि बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में प्रशासनिक मशीनरी तेजी से सक्रिय हो और प्रभावित लोगों तक राहत एवं बचाव सहायता समय पर पहुंचाई जा सके।

    शून्य देरी, बेहतर समन्वय और त्वरित राहत—इसी लक्ष्य के साथ छत्तीसगढ़ में संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारियों को अब जमीनी स्तर पर परखा जाएगा।

    एक माह से स्थायी आयुक्त का इंतजार, भुगतान प्रक्रिया पर विराम की चर्चा; वेतन और ठेकेदारों के भुगतान को लेकर बढ़ी चिंता, 'आयुक्त किसकी पसंद का?Ó बनी सियासी बहस

    शौर्यपथ विशेष
    दुर्ग नगर निगम में करीब एक माह से स्थायी आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। जुलाई के दूसरे सप्ताह में तत्कालीन आयुक्त सुमित अग्रवाल के स्थानांतरण के बाद उपायुक्त मोहेंद्र साहू कार्यवाहक आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अगस्त का दूसरा सप्ताह शुरू हो चुका है, लेकिन स्थायी आयुक्त की नियुक्ति अब तक नहीं हुई है।

    भुगतान और वेतन को लेकर चिंता

    निगम से जुड़े सूत्रों और कर्मचारियों के बीच विभिन्न भुगतान प्रक्रियाओं के प्रभावित होने की चर्चा है। हालांकि निगम प्रशासन ने इस संबंध में अभी आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इसी बीच अगस्त का वेतन समय पर मिलने को लेकर भी कर्मचारियों में चिंता की चर्चा है।

    सावन, तीज-त्योहार और रक्षाबंधन के बीच वेतन में देरी कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। ठेकेदारों की चिंता भी भुगतान प्रक्रिया को लेकर बढ़ी हुई है। विकास कार्यों में बिल परीक्षण और भुगतान की प्रक्रिया स्थायी आयुक्त की नियुक्ति के बाद गति पकडऩे की उम्मीद जताई जा रही है।

    'आयुक्त किसकी पसंद का?"

    स्थायी आयुक्त की नियुक्ति में देरी अब राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गई है। दुर्ग की राजनीति में महापौर अलका बाघमार और विधायक एवं स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से जुड़े खेमों के बीच मतभेदों की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि अगला आयुक्त किसकी पसंद का होगा?

    निगम और राजनीतिक गलियारों में अधिकारियों के नाम को लेकर सहमति-असहमति की चर्चाएं हैं। हालांकि इन चर्चाओं की वास्तविकता संबंधित राजनीतिक नेतृत्व ही स्पष्ट कर सकता है।

    एक ही दल की सरकार, फिर देरी क्यों?

    दुर्ग की स्थिति इसलिए भी सवाल खड़े करती है क्योंकि महापौर अलका बाघमार और विधायक गजेंद्र यादव भाजपा से हैं। वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा जिले के प्रभारी मंत्री और उपमुख्यमंत्री अरुण साव नगरीय प्रशासन विभाग के मंत्री हैं। भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे भी दुर्ग से जुड़ी प्रमुख राजनीतिक हस्ती हैं।

    ऐसे में सवाल उठ रहा है—

    "जब सरकार से लेकर नगर निगम तक सत्ता एक ही दल की है, तो स्थायी आयुक्त की नियुक्ति में इतनी देरी क्यों?"

    भूमिपूजन की रफ्तार, प्रशासनिक नियुक्ति में सुस्ती

    शहर में विकास कार्यों के भूमिपूजन और लोकार्पण जारी हैं, लेकिन निगम की प्रशासनिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण पद पर स्थायी अधिकारी नहीं है। विकास केवल भूमिपूजन से नहीं, बल्कि कार्यादेश, निर्माण, बिल परीक्षण और भुगतान की सुचारू व्यवस्था से पूरा होता है।

    फिलहाल निगम में चार सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में हैं—

    आयुक्त कब आएगा?
    भुगतान कब होगा?
    वेतन समय पर मिलेगा या नहीं?
    और अगला आयुक्त किसकी पसंद का होगा?

    अब निगाहें शासन और नगरीय प्रशासन विभाग पर हैं कि दुर्ग निगम को स्थायी आयुक्त कब मिलता है।

    क्योंकि सवाल सिर्फ आयुक्त की नियुक्ति का नहीं, बल्कि यह भी है कि 'ट्रिपल इंजनÓ सरकार में दुर्ग निगम की प्रशासनिक गाड़ी आखिर कब रफ्तार पकड़ेगी?

    घर पर ऑनलाइन पढ़ाई कर तीनों बहनों ने हासिल किया मेडिकल में प्रवेश का सपना, सीमित संसाधनों के बीच मेहनत और एक-दूसरे के सहयोग से मिली बड़ी कामयाबी

    रायपुर / शौर्यपथ / कबीरधाम जिले के छोटे से गांव नेउर में आज सफलता की ऐसी कहानी सामने आई, जिसने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया। एक ही परिवार की तीन बहनों—किरण, ज्योति और सुमन महोबिया ने एक साथ NEET परीक्षा उत्तीर्ण कर मेडिकल शिक्षा के लिए अपना रास्ता बनाया है। तीनों बहनों की इस असाधारण उपलब्धि ने न केवल उनके माता-पिता और परिवार का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों के लिए भी यह एक प्रेरणादायी मिसाल बन गई है।

    तीनों बेटियों की इस उपलब्धि से अभिभूत उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा रविवार को स्वयं नेउर गांव पहुंचे और उनके घर जाकर तीनों बहनों से मुलाकात की। उन्होंने किरण, ज्योति और सुमन को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। साथ ही माता श्रीमती भगवती महोबिया, पिता श्री राम महोबिया और परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात कर इस गौरवपूर्ण सफलता के लिए पूरे परिवार को बधाई दी।

    तीन बहनों की सफलता पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायी : विजय शर्मा

    उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि एक ही परिवार की तीन बहनों का एक साथ मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफल होना असाधारण उपलब्धि है। यह केवल परिवार की खुशी नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और जिले के लिए गर्व का विषय है।

    उन्होंने कहा कि एक ही घर में रहकर तीन बहनों ने एक-दूसरे का साथ देते हुए NEET जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी की और सफलता हासिल की। यह उपलब्धि बताती है कि नियमित मेहनत, सही दिशा, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर गांव में रहकर भी बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि किरण, ज्योति और सुमन की सफलता उन विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बीच अपने गांव और घर से ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

    घर बना तीनों बहनों की कोचिंग का केंद्र

    तीनों बहनों ने घर पर रहकर ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से NEET की तैयारी की। पढ़ाई के दौरान तीनों एक-दूसरे की मदद करती रहीं और लक्ष्य को लेकर लगातार मेहनत करती रहीं। बहनों के बीच प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग की भावना ने उनकी तैयारी को और मजबूत बनाया।

    ज्योति और सुमन ने अपने पहले ही प्रयास में NEET परीक्षा उत्तीर्ण की। दोनों ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, बोड़ला से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की है।

    वहीं बड़ी बहन किरण महोबिया ने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की। उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर, पांडातराई से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की है।

    तीनों बहनों की सफलता की खास बात यह है कि उन्होंने एक-दूसरे के साथ रहकर, एक-दूसरे को प्रेरित करते हुए अपने सपने को साकार किया।

    अब डॉक्टर बनकर सेवा का संकल्प

    मुलाकात के दौरान उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने तीनों छात्राओं से उनकी स्कूली पढ़ाई, NEET की तैयारी और आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने कहा कि अब मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के बाद भी इसी लगन और मेहनत को बनाए रखें और अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करें।

    उन्होंने छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डॉक्टर बनने के बाद अच्छे संस्थानों और अस्पतालों में कार्य कर अनुभव प्राप्त करें। साथ ही अपने गांव, क्षेत्र और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव हमेशा बनाए रखें। अपनी शिक्षा और अनुभव का उपयोग जरूरतमंद लोगों की सेवा के लिए करें, ताकि उनकी सफलता का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।

    तीन बेटियों की सफलता ने परिवार को बनाया गौरवान्वित

    किरण, ज्योति और सुमन की इस उपलब्धि से महोबिया परिवार में खुशी का माहौल है। एक ही घर से तीन बेटियों का एक साथ NEET में सफल होना यह संदेश भी देता है कि बेटियों को अवसर, प्रोत्साहन और परिवार का सहयोग मिले तो वे किसी भी ऊंचाई को हासिल कर सकती हैं।

    नेउर गांव की इन तीन बहनों की कहानी आज केवल एक परिवार की सफलता की कहानी नहीं रही, बल्कि “बेटियां पढ़ें, आगे बढ़ें और अपने सपनों को साकार करें” की प्रेरक मिसाल बन गई है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विदेशी राम धुर्वे सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

       दुर्ग / शौर्यपथ / जिला दंडाधिकारी श्री अभिजीत सिंह ने पुलिस अधीक्षक दुर्ग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 की धारा 3 उपधारा (2) सह पठित उपधारा 3 के अंतर्गत दिनांक 6 अगस्त 2026 को आदेश पारित कर अनावेदक शुभम तागड़े उर्फ मराठा पिता दिनेश तागड़े को तीन माह की कालावधि के लिये केंद्रीय जेल दुर्ग में निरुद्ध करने के आदेश दिए है। जिला दंडाधिकारी के आदेश के अनुपालन में पुलिस अधीक्षक दुर्ग द्वारा शुभम तागड़े को 8 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर केंद्रीय जेल दुर्ग में निरुद्ध किया गया है।
    ज्ञात हो कि पुलिस अधीक्षक जिला दुर्ग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन अनुसार अनावेदक शुभम तागड़े उर्फ मराठा पिता दिनेश तागड़े (उम्र-29 वर्ष), निवासी-मिलन चौक, कैम्प-02 भिलाई, थाना-छावनी, तहसील व जिला-दुर्ग (छ.ग.) थाना छावनी क्षेत्र का गुंडा-बदमाश है। वर्ष 2015 से लगातार आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण उसे निगरानी बदमाश की श्रेणी में लाया गया है। अनावेदक के विरुद्ध दुर्ग जिले के विभिन्न थानों में कुल 26 अपराध पंजीबद्ध हैं। इनमें मारपीट, गाली-गलौज व जान से मारने की धमकी के 06 अपराध, साथियों के साथ मिलकर अवैध राशि की मांग व मारपीट का अपराध, आर्म्स एक्ट के 07 अपराध, चोरी व नकबजनी के 10 अपराध, आबकारी एक्ट का अपराध, नाबालिग बच्ची से छेड़छाड़ और लूट का प्रकरण दर्ज है। विभिन्न थानों के अंतर्गत उसके विरुद्ध थाना छावनी में 17 अपराध, थाना जामुल में 03 अपराध, थाना खुर्सीपार में 03 अपराध, थाना नंदिनी में 01 अपराध, थाना दुर्ग कोतवाली में 01 अपराध तथा थाना भिलाई भट्टी में 01 अपराध पंजीबद्ध किए गए हैं।

       दुर्ग । शौर्यपथ / शहर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर नगर पालिक निगम दुर्ग की महापौर अलका बाघमार ने सख्त रुख अपनाया है। रायपुर नाका स्थित 42 एमएलडी फिल्टर प्लांट में लगातार हुई आगजनी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए महापौर ने जल विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर जलापूर्ति जल्द सामान्य करने और फिल्टर प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।

    महापौर ने अपने शासकीय आवास एफ-4 में आयोजित बैठक में अधिकारियों से आगजनी की घटनाओं के कारणों की गंभीरता से जांच करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित ठेकेदार द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री की गुणवत्ता में कमी अथवा विभागीय स्तर पर किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आने पर उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    बीआईटी दुर्ग और आईआईटी भिलाई में होगी जांच

    दो दिन पूर्व आगजनी की घटना में जले ब्लीचिंग पावडर के नमूनों की गुणवत्ता जांच कराने के निर्देश महापौर ने दिए हैं। निष्पक्ष जांच के लिए ब्लीचिंग पावडर के सैंपल बीआईटी दुर्ग और आईआईटी भिलाई की लैब में भेजे जाएंगे।

    महापौर ने बाजार मूल्य की तुलना में अत्यधिक कम दर पर उपलब्ध कराए गए ब्लीचिंग पावडर की गुणवत्ता की भी जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    ज्वलनशील सामग्री के लिए अलग सुरक्षित भंडारण

    महापौर ने कहा कि ब्लीचिंग पावडर, एलम सहित अन्य ज्वलनशील अथवा संवेदनशील सामग्रियों को फिल्टर प्लांट परिसर में एक साथ रखने के बजाय प्लांट से कुछ दूरी पर अलग-अलग सुरक्षित भंडारण केंद्र विकसित किए जाएं। इससे भविष्य में आगजनी जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में मदद मिलेगी।

    बाढ़ के बाद सफाई कार्य में तेजी के निर्देश

    बारिश के कारण नदी में आई बाढ़ से इंटकवेल और फिल्टर प्लांट में जमा गाद एवं कचरे की सफाई को भी महापौर ने प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि आवश्यक संसाधन लगाकर सफाई कार्य शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि शहर के सभी वार्डों में पेयजल आपूर्ति जल्द से जल्द सामान्य हो सके।

    बैठक में जल कार्य प्रभारी लीना दिनेश देवांगन, लोक कर्म विभाग प्रभारी देवनारायण चंद्राकर, प्रभारी आयुक्त मानेंद्र साहू, जल विभाग के कार्यपालन अभियंता प्रकाश थवानी, सहायक कार्यपालन अभियंता राजेंद्र ढवाले, सब इंजीनियर विनोद मांझी, जल निरीक्षक नारायण ठाकुर सहित जल विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

    “विवाद बढ़ाएँ नहीं, संवाद से समाधान करें” के संदेश के साथ निकली जन-जागरूकता रैली

    दुर्ग / शौर्यपथ / न्याय केवल अदालत की चौखट तक सीमित नहीं है, बल्कि संवाद, सहमति और आपसी विश्वास के माध्यम से गांव की चौपाल तक भी पहुंच सकता है। इसी सोच को साकार करने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की टीम ने ग्राम कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता शिविर, विधिक जागरूकता कार्यक्रम एवं जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया। कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश रहा—“विवाद बढ़ाएँ नहीं, संवाद से समाधान करें।”

    माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष श्रीमती सुषमा लकड़ा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री भूपेश कुमार बसंत एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री उमेश कुमार भागवतकर ने ग्रामीणों को सामुदायिक मध्यस्थता और विधिक अधिकारों की जानकारी दी।

    अदालत पहुंचने से पहले संवाद से समाधान

    कार्यक्रम में बताया गया कि छोटे-छोटे सामाजिक, पारिवारिक और स्थानीय विवादों को न्यायालय तक ले जाने से पहले आपसी बातचीत, विश्वास और सहमति के माध्यम से सुलझाया जा सकता है। सामुदायिक मध्यस्थता न केवल विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने का प्रभावी माध्यम है, बल्कि इससे रिश्तों और सामाजिक सौहार्द को भी बनाए रखने में मदद मिलती है।

    ग्रामीणों को मीडिएशन 3.0 के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि मध्यस्थता अब केवल वैकल्पिक विवाद समाधान की प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि यह तकनीक-सक्षम, समयबद्ध और नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। प्रशिक्षित सामुदायिक मध्यस्थ ग्राम स्तर पर विवादों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    कानूनी जागरूकता के साथ सामाजिक सरोकारों पर भी जोर

    शिविर में केवल न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि ग्रामीण जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर भी जागरूक किया गया। अपराधमुक्त ग्राम, नशामुक्ति, टोनही प्रथा उन्मूलन, बाल संरक्षण, गुड टच-बैड टच, साइबर अपराध एवं डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों को सरल भाषा में समझाया गया।

    बच्चों और युवाओं को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने, शिक्षा को प्राथमिकता देने, सकारात्मक जीवनशैली अपनाने और नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।

    चौपाल से बाजार तक गूंजा न्याय और जागरूकता का संदेश

    कार्यक्रम के बाद ग्राम पंचायत से बाजार क्षेत्र तक जन-जागरूकता रैली निकाली गई। प्रचार वाहन के माध्यम से सामुदायिक मध्यस्थता, मीडिएशन 3.0, विधिक अधिकार, अपराध नियंत्रण और सामाजिक समरसता से जुड़े संदेश प्रसारित किए गए। ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक रैली में सहभागिता करते हुए एक स्वर में कहा—

    “विवाद बढ़ाएँ नहीं, संवाद से समाधान करें।”

    विशेष बात यह रही कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा, उद्देश्य और उपयोगिता को ग्रामीणों तक सहज तरीके से पहुंचाने के लिए विशेष रूप से तैयार छत्तीसगढ़ी गीत भी प्रचार वाहन के माध्यम से प्रसारित किया गया। स्थानीय भाषा में दिए गए इस संदेश ने ग्रामीणों को संवाद, सहमति और आपसी समझ के जरिए विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए प्रेरित किया।

    न्याय को चौपाल तक पहुंचाने की सार्थक पहल

    कुथरेल में आयोजित यह कार्यक्रम महज एक विधिक जागरूकता शिविर तक सीमित नहीं रहा। इसने न्याय को गांव की चौपाल तक पहुंचाने, समुदाय को न्याय प्रक्रिया का सहभागी बनाने और विवादों के स्थान पर संवाद की संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।

    सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से गांवों में छोटे विवादों को समय रहते सुलझाने की पहल न केवल न्यायालयों पर अनावश्यक मुकदमों का बोझ कम कर सकती है, बल्कि सामाजिक रिश्तों और आपसी सौहार्द को भी मजबूत कर सकती है।

    कुथरेल से उठी यह पहल एक ऐसे ग्रामीण भारत की तस्वीर प्रस्तुत करती है, जहां न्याय केवल फैसला नहीं, बल्कि संवाद, सहमति और सामाजिक समरसता का माध्यम बने—और यही विवाद-मुक्त, जागरूक एवं न्याय-सशक्त विकसित भारत की मजबूत नींव है।

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