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May 04, 2026
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शौर्यपथ

शौर्यपथ

अवधेश टंडन की रिपोर्ट
जांजगीर चांपा / शौर्यपथ / कोरोना महामारी के बीच ग्रामीणों को हर तरह से सुविधा देने के लिए राज्य सरकार हर तरह से प्रयास कर रही है इसी बीच ग्रामीण इलाकों में रोजगार गारंटी योजना के तहत सभी ग्राम पंचायतों में काम चलाई जा रही है जिसमें रोजगार सहायकों के द्वारा लापरवाही बरती जा रही है पर मालखरौदा के कार्यक्रम अधिकारी इन दिनों रोजगार सहायकों पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है जो की लापरवाही कर रहे हैं उन पर भी कुछ एक्शन नहीं ले रहे हैं
ग्राम पंचायत के रोजगार सहायकों का हाल
मालखरौदा क्षेत्र के रोजगार सहायकों का इन दिनों हौसले बुलंद हैं ग्राम पंचायत कर्रापाली के रोजगार सहायक बिना माक्स सोशल डिस्टेंस के साथ काम करा रहे थे साथ ही सरकार के नियमों को दरकिनार कर रहे हैं और ग्राम पंचायत बड़े राबेली के रोजगार सहायक तो खुद को किसी अधिकारी से कम नहीं समझ रहे हैं पत्रकार को ही धमकी देने वाली बात बोल दी जाओ जो छापना है छाप लो हमारे अधिकारी जांच कर के चले गए हैं जरा इस रोजगार सहायक की भी कहानी सुन ले साहब ने काम चालू होने के बाद भी सूचना बोर्ड नहीं बनाया है यह मामला ग्राम पंचायत किरारी का जिसे काम चालू हो चुका था पर सूचना बोर्ड नहीं बनाया है इन सब के बीच एक ऐसा भी गांव है जिसमें दिखावे के लिए तो कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया था पर कोई कार्यवाही नहीं किया गया है हम बात कर रहे हैं ग्राम पंचायत चिखली का जहां रोजगार सहायक के द्वारा बिना सूचना बोर्ड बनाए काम चालू कर दिया गया था पर इस मामले में भी अभी तक उचित कार्रवाई नहीं किया गया है और थोड़ा नजर इस ग्राम पंचायत में भी डाल लें जहां सरपंच के पति ही रोजगार सहायक है जहां रोजगार गारंटी योजना के तहत तालाब गहरीकरण का काम चल रहा है जिसमें नियमों को ठेंगा दिखाते हुए नजर आ रहे हैं ऐसे ही और कई गांव के मामले है पर कार्यकर्म अधिकारी कुछ ज्यादा ही मेहरबान है रोजगार सहायकों के ऊपर इसीलिए तो अभी तक इन सभी मामलों में कार्यवाही नहीं किया गया है
मालखरौदा कार्यकर्म अधिकारी सतेंद्र पटेल
मालखरौदा में कई जगह से मीडिया के माध्यम से सूचना मिला था जिस पर जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी पर एक हफ्ते से ज्यादा हो गया है पर इन पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है ऐसे में सवाल उठना लाज़मी हो जाता है साहब जब आपको जानकारी है फिर भी रोजगार सहायकों पर कार्यवाही क्यों नहीं किया जा रहा है
*क्या ऐसे लापरवाह रोजगार सहायकों पर जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करेंगे या फिर इनको शाबाशी देंगे सरकार के नियमों का धज्जियां उड़ाने पर .

         खेल / शौर्यपथ / रोहित शर्मा के सीमित ओवरों में सलामी बल्लेबाज की भूमिका निभाने से पिछले सात वर्षों में भारत को दोनों छोटे प्रारूपों में ओपनिंग को लेकर ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी पड़ी, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उसकी एक अदद सलामी जोड़ी की तलाश अब भी जारी है। रोहित को पिछले साल अक्टूबर में टेस्ट मैचों में भी सलामी बल्लेबाज की भूमिका में उतारा गया था और वह इसमें सफल भी रहे, लेकिन उनकी असली परीक्षा विदेशी पिचों पर होनी थी और न्यूजीलैंड दौरे से पहले उनके चोटिल होने के कारण भारत को 2020 में खेले गये दो टेस्ट मैचों में नयी सलामी जोड़ी के साथ उतरना पड़ा था।

भारत अगर इस साल के आखिर में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाता है तो फिर पूरी संभावना है कि मयंक अग्रवाल के साथ रोहित ही पारी का आगाज करेंगे, लेकिन अन्य बल्लेबाजों विशेषकर युवा पृथ्वी शॉ की दावेदारी को भी कम करके नहीं आंका जा सकता है जबकि केएल राहुल वनडे फॉर्मैट में अच्छे प्रदर्शन के कारण लंबे प्रारूप में खेलने का दावा मजबूत करते जा रहे हैं। इनके अलावा मुरली विजय और शिखर धवन की दावेदारी को भी नहीं नकारा जा सकता है।

पिछले 5 सालों में इन खिलाड़ियों के आजमाया
पिछले पांच वर्षों में भारत ने शिखर धवन, केएल राहुल, मुरली विजय, मयंक अग्रवाल, रोहित शर्मा, पार्थिव पटेल, पृथ्वी शॉ, गौतम गंभीर, हनुमा विहारी, अभिनव मकुंद और यहां तक कि तीसरे नंबर पर खेलने वाले चेतेश्वर पुजारा को भी पारी का आगाज करने के लिए भेजा। इस बीच भारत ने इन खिलाड़ियों को मिलाकर 15 जोड़ियां आजमाई। राहुल ने सर्वाधिक 32 टेस्ट मैचों में ओपनिंग की जबकि विजय ने 29, धवन ने 21 और अग्रवाल ने 11 मैचों में यह जिम्मेदारी संभाली।

2018 में मयंक ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किया था डेब्यू
मयंक अग्रवाल ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2018 में मेलबर्न में 'बॉक्सिंग डे' टेस्ट मैच में पदार्पण किया और शीर्ष क्रम के पहले दो स्थानों में से एक स्थान को स्थायित्व प्रदान किया। उन्होंने अब तक 11 मैचों की 17 पारियों में 974 रन बनाए हैं लेकिन न्यूजीलैंड के खिलाफ चार पारियों में वह 102 रन ही बना पाए थे जबकि पृथ्वी ने 98 रन बनाए थे। लेकिन इस पूरी सीरीज में सभी भारतीय बल्लेबाज नाकाम रहे थे।

रोहित शर्मा पिछले साल बतौर टेस्ट ओपनर खेले
रोहित शर्मा टेस्ट मैचों में फिर से पारी का आगाज करने के लिए बेताब होंगे। उन्होंने पिछले साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ विशाखापट्टनम में पहली बार यह भूमिका निभाई और दोनों पारियों में शतक (174 और 127) ठोककर नया रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद उन्होंने रांची में 212 रन की लाजवाब पारी खेली लेकिन बांग्लादेश के खिलाफ दोनों टेस्ट मैचों में उनका बल्ला कुंद पड़ा रहा। शॉ ने अब तक जो चार टेस्ट मैच खेले हैं उनमें एक शतक की मदद से 335 रन बनाये हैं।

अगर पिछले पांच वर्षों में अन्य देशों की सलामी जोड़ियों की बात करें तो इंग्लैंड और श्रीलंका के बाद भारत ने सर्वाधिक बल्लेबाजों से पारी की शुरुआत करवाई। इंग्लैंड ने इस बीच 17, श्रीलंका ने 12, भारत ने 11, दक्षिण अफ्रीका ने 10, ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान ने नौ-नौ खिलाड़ियों को सलामी बल्लेबाज के रूप में आजमाया।

न्यूजीलैंड ने टॉम लाथम की वजह से इस बीच स्थायित्व दिखाया और पिछले पांच वर्षों में उसने केवल चार खिलाड़ियों को ओपनिंग का दायित्व सौंपा। लाथम ने पिछले पांच वर्षों में अपनी टीम की तरफ से सभी 42 मैचों में पारी का आगाज किया।

 

          सेहत / शौर्यपथ / बालों की खूबसूरती और मजबूती के लिए आप क्या कुछ नहीं करते। हेयर स्पा, तेल मालिश एवं अलग-अलग सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल भी। लेकिन कुछ आहार भी आपके बालों की खूबसूरती और मजबूती को लौटा सकते हैं बगैर किसी झंझट के। जानिए यह 5 आहार जिन्हें खाने से आपके बालों की सारी समस्याएं हल हो सकती हैं।
१. गाजर -लाल-मीठी गाजर स्वाद के साथ आपको सेहत और सौंदर्य भी देती है। यह विटामिन ए का एक अच्छा स्त्रोत है साथ ही इसमें मौजूद कैरोटीन आपके बालों और आंखों को सुरक्षित और खूबसूरत बनाए रखता है। यह आपके बालों को जड़ से मजबूती प्रदान करेगी।
2 .पालक - पालक का सेवन करना बहुत फायदेमंद है। सेहत के साथ ही यह आपके बालों को झड़ने से भी रोकेगी। आयरन से भरपूर होने के कारण इसक सेवन आपकी इस समस्या को बिल्कुल खत्म कर देगा।
3.शकरकंद - शकरकंद जिसे स्वीट पोटेटो भी कहते हैं, विटामिन ए से भरपूर होता है जो आपके बालों को मजबूती देकर झड़ने से रोकता है, साथ ही जड़ों में मौजूद तेल को भी सुरक्षित रखता है, जिससे आपके बालों को पोषण मिलता रहता है।
4.दही - दही खाने से भी बालों का झड़ना रुकता है और इससे बाल खूबसूरत व चमकदार बनते हैं। इसमें पाया जाने वाला विटामिन बी6 और विटामिन डी आपके बालों में जान लाकर उन्हें सजीव करता है।
५.किशमिश - बालों की लंबाई नहीं बढ़ने से परेशान न हों, क्योंकि किशमिश खाने से आपके बालों का विकास तेजी से होता है।इसमें आयरन के साथ-साथ मिनरल्स भी भरपूर मात्रा में होते हैं जो आपके बालों को पोषण देते हैं।

                 सेहत / शौर्यपथ / मैथीदाने का प्रयोग आप खाने के स्वाद को बढ़ाने में करते हैं, लेकिन इसके सेहत और सौंदर्य लाभ आपको हैरत में डाल देंगे। आइए जानते हैं इनके अनमोल गुण।

मैथीदाने का चूर्ण प्रतिदिन खाने से आपका वजन नियंत्रित रहता है और वसा की मात्रा धीरे-धीरे कम हो जाती है। इस तरह से आप अपना वजन भी कम कर सकते हैं।

मैथीदाने का नियमित सेवन दिल की बीमारियों को भी दूर रखने में भी मदद करता है। यह दिल का दौरा पड़ने की आशंका को बेहद कम कर देता है और आप अपने हृदय को रख सकते हैं बिलकुल स्वस्थ।

मधुमेह के मरीजों के लिए मैथीदाना बहुत फायदेमंद होता है। इसको रोज रात में भिगोकर रखने के बाद रोज सुबह चबाकर खाने से और इसके पानी के सेवन से लाभ मिलता है।
बालों की खूबसूरती के लिए भी मैथीदाना फायदेमंद है। इसका पेस्ट बनाकर बालों में लगाने से बालों से रूखापन गायब होता है, साथ ही बाल मजबूत बनते हैं।

चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने में भी यह मैथीदाना कुछ कम गुणवान नहीं है। इसे पीसकर चेहरे पर लगाने से त्वचा में चमक के साथ कसाव आता है। इसके अलावा रूखी त्वचा वालों के लिए यह बहुत लाभप्रद है, क्योंकि यह त्वचा को नमी प्रदान करता है।

           खाना खजाना / शौर्यपथ / रमजान/ईद-उल-फितर (ईदुल फित्र) का त्योहार नजदीक आते ही हर बाशिंदे के मन में सिवइयों के मीठे स्वाद का एक अलग ही अहसास भर जाता है। इसी के मद्देनजर रमजान माह के आखिरी अशरे के साथ ही ईदुल फितर की आहट से बाजार में सिवइयां व शीर-खुरमे से सजने लगे हैं।

यूं तो मीठी ईद और सिवइयां एक-दूसरे के पर्याय हैं, लेकिन इसके अलावा और भी कई व्यंजन इस त्योहार पर बनते हैं। ईद के बाजारों में सिवइयों के दिल लुभाते ढेरों के अलावा शीरमाल, बाकरखानी, अंगूरदाना वगैरह भी खूब बनते हैं। साथ ही घरों में मांसाहारी व्यंजन भी बनते हैं।

आइए जानते हैं मीठी ईद पर बनाए जाने वाले विशेष पकवान :-

* दूध फेनी :

ईद पर सिवइयां और फेनी अच्छे-अच्छों के मुंह में पानी ला देती है। सिवइयों और फेनी में बुनियादी फर्क यह है कि फेनी तार के गुच्छे की तरह होती है। इसे बनाने में ज्यादा मेहनत लगती है। इसे घी में तला
जाता है। यह रंगीन भी मिलती है।

कम तली हुई सफेद और ज्यादा तली हुई लाल या जाफरानी रंग की फेनी होती है। फेनी को दूध के साथ ही खाया जाता है। सिवइयां नमकीन भी मिलती हैं।

* शीरमाल :

यह मैदे, घी और शकर से बनी मीठी रोटी है। शीर का अर्थ है दूध। खास बात यह है कि यह बाजार में तैयार बना हुआ मिलता है। इसे गोश्त के साथ भी खाया जाता है।

स्वाद में यह कुछ-कुछ मीठे पाव-सा और लजीज लगता है। वैसे शीरमाल फारसी का शब्द है और इसका
अर्थ होता है दूध से गूंथे आटे की रोटी। शादियों में भी यह खूब चलता है।
* बाकरखानी :

ईदुल फितर पर बाकरखानी का अपना अलग मजा है। यह मैदे, सूखे मेवे और मावे की बनती है। इसे तंदूर या ओवन में सेंका जाता है। उस पर सूखे मेवे सजाए जाते हैं।

यह लखनऊ और हैदराबाद में भी काफी लोकप्रिय है। बाकरखानी खाने में ज्यादा मिठासभरी होती है। इसे

दूध के साथ भी खाया जाता है। यह पचने में भी हल्की होती है।

* अंगूरदाना :

रोजा-इफ्तारी में इसका खूब चलन है। अंगूरदाना दरअसल उड़द की दाल से बनने वाली मोटी बूंदी है। यह मीठी होती है। इसके अलावा इफ्तार में नुक्ती भी खूब खाई जाती है। यह बेसन से बनती है। इन दिनों
सेव की तरह के खारे भी काफी पसंद किए जाते हैं।

* मीठी सिवइयां : शीर-खुरमा

सिवइयां मशीन से भी बनती हैं और हाथ से भी। यह मैदे की होती हैं। जब इसे दूध और मेवे के साथ बनाया जाता है तो यह शीर-खुरमा कहलाता है।
शीर यानी दूध, खुरमा या कोरमा यानी कि सूखे मेवे का मिक्चर। इसमें खोपरा, किशमिश, छुहारा, काजू आदि शामिल रहते हैं। इसे मीठे दूध में भीगी सिवइयों पर सजाया जाता है।

          लाइफस्टाइल / शौर्यपथ /सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही नौतपा 25 मई से 2 जून तक तपेगा। इस वर्ष वक्री ग्रहों की स्थिति से बने संयोग रोहिणी में प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति बनाएंगे। इस बीच भीषण गर्मी के अलावा बारिश के भी संयोग बताए जा रहे हैं अर्थात रोहिणी गलेगी।

इसबार ग्रहों की विकट स्थिति के कारण प्राकृतिक आपदाओं का दौर बना हुआ है। जिससे महामारी भीषण गर्मी, आंधी, तूफान के साथ हवा, आगजनी, हवाई दुर्घटनाएं, राजनैतिक उथल-पुथल की स्थितियां बनी हैं।

नौतपा : वैज्ञानिक तथ्य

वैज्ञानिक मतानुसार नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर आती हैं, जिस कारण तापमान बढ़ता है। अधिक गर्मी के कारण मैदानी क्षेत्रों में निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है, जो समुद्र की लहरों को आकर्षित करता है। इस कारण ठंडी हवाएं मैदानों की ओर बढ़ती हैं। चूंकि समुद्र उच्च दबाव वाला क्षेत्र होता है, इसलिए हवाओं का यह रुख अच्छी बारिश का संकेत देता है।

नौतपा : ज्योतिष शास्त्र

ज्योतिष शास्त्र अनुसार रोहिणी नक्षत्र का अधिपति ग्रह चन्द्रमा और देवता ब्रह्मा है। सूर्य ताप तेज का प्रतीक है, जबकि चन्द्र शीतलता का। चन्द्र से धरती को शीतलता प्राप्त होती है। सूर्य जब चन्द्र के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करता है, तो इससे उस नक्षत्र को अपने पूर्ण प्रभाव से ले लेता है। जिस वजह से पृथ्वी को शीतलता प्राप्त नहीं होती। ताप अधिक बढ़ जाता है। वैसे तो सूर्य 15 दिनों तक रोहिणी नक्षत्र में भ्रमण करता है, लेकिन शास्त्रीय मान्यता अनुसार प्रारंभ के नौ दिन ही नौतपा के तहत स्वीकार किए जाते हैं।

साल में एक बार रोहिणी नक्षत्र की दृष्टि सूर्य पर पड़ती है। यह नक्षत्र 15 दिन रहता है लेकिन शुरू के पहले चन्द्रमा जिन 9 नक्षत्रों पर रहता है वह
दिन नौतपा कहलाते हैं। इसका कारण इन दिनों में गर्मी अधिक रहती है।

मई माह के अंतिम सप्ताह में सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी कम हो जाती है। इससे धूप और तीखी हो जाती है। नक्षत्रों के काल गणना को आधार मानने वाले प्राचीन ज्योतिष मत में परस्पर सांमजस्य बिठाने का प्रयास कर रहे हैं।

नवतपा के संबंध में कहा जाता है कि,

ज्येष्ठ मासे सीत पक्षे आर्द्रादि दशतारका।
सजला निर्जला ज्ञेया निर्जला सजलास्तथा।।

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में आद्रा नक्षत्र से लेकर दस नक्षत्रों तक यदि बारिश हो तो वर्षा ऋतु में इन दसों नक्षत्रों में वर्षा नहीं होती, यदि इन्हीं नक्षत्रों में तीव्र गर्मी पड़े तो वर्षा अच्छी होती है।

भारतीय ज्योतिष में नवतपा को परिभाषित कर लिया गया है, चंद्रमा जब ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में आर्द्रा से स्वाति नक्षत्र तक अपनी स्थितियों में हो एवं तीव्र गर्मी पड़े, तो वह नवतपा है।

भारत में ऐसे बहुत लोगों का मानना है कि सूर्य वृष राशि में ही पृथ्वी पर आग बरसाता है और खगोल शास्त्र के अनुसार वृषभ तारामण्डल में यह नक्षत्र हैं कृतिका, रोहिणी और मृगशिरा   कृतिका सूर्य, रोहिणी चंद्र, मृगशिरा मंगल अधिकार वाले नक्षत्र हैं इन तीनों नक्षत्रों में स्थित सूर्य गरमी ज्यादा देता है ।

अब प्रश्न यह कि इन तीनों नक्षत्रों में सर्वाधिक गरम नक्षत्र अवधि कौन होगा इसके पीछे खगोलीय आधार है इस अवधि में सौर क्रांतिवृत्त में शीत प्रकृति रोहिणी नक्षत्र सबसे नजदीक का नक्षत्र होता है।

जिसके कारण सूर्य गति पथ में इस नक्षत्र पर आने से सौर आंधियों में वृद्धि होना स्वाभाविक है इसी कारण परिस्थितिजन्य सिद्धांत कहता है कि जब सूर्य वृष राशि में रोहिणी नक्षत्र में आता है उसके बाद के नव चंद्र नक्षत्रों का दिन नवतपा है।

ज्योतिष के सिद्धांत के अनुसार नौतपा में अधिक गर्मी पड़ना अच्छी बारिश होने का संकेत माना जाता है। अगर नौतपा में गर्मी ठीक न पड़े, तो अच्छी बारिश के आसार कम हो जाते हैं।

इस बार वक्री ग्रह होने की वजह से कहीं-कहीं बादल फटने के समाचार भी मिलेंगे। कहीं वर्षा से जन-धन की हानि के योग भी बनते हैं।


सूर्य की गर्मी और रोहिणी के जल तत्व के कारण मानसून गर्भ में आ जाता है और नौतपा ही मानसून का गर्भकाल माना जाता है। जिस समय में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होता है उस समय चन्द्र नौ नक्षत्रों में भ्रमण करते हैं, यही कारण है कि इसे नौतपा कहा जाता है।

जब सूर्य वृषभ राशि में रोहिणी नक्षत्र में भ्रमण करते हैं, तब गर्मी तेज होती है चन्द्र की पत्नी माने जाने वाले रोहिणी नक्षत्र में गरम आंधियां ज्यादा प्रभाव दिखाती हैं।

इस वर्ष नौतपा या नवतपा अर्थात रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव 25 मई को शुरू हो जाएगा।

 

 

          धर्म संसार / शौर्यपथ / मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार कहा जाने वाला ईद-उल-फितर पर्व न सिर्फ हमारे समाज को जोड़ने का मजबूत सूत्र है, बल्कि यह इस्लाम के प्रेम और सौहार्दभरे संदेश को भी पुरअसर ढंग से फैलाता है। मीठी ईद भी कहा जाने वाला यह पर्व खासतौर पर भारतीय समाज के ताने-बाने और उसकी भाईचारे की सदियों पुरानी परंपरा का वाहक है। इस दिन विभिन्न धर्मों के लोग गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे से गले मिलते हैं और सेवइयां अमूमन उनकी तल्खी की कड़वाहट को मिठास में बदल देती है।

ईद-उल-फितर भूख-प्यास सहन करके एक महीने तक सिर्फ खुदा को याद करने वाले रोजेदारों को अल्लाह का इनाम है। सेवइयां में लिपटी मोहब्बत की मिठास इस त्योहार की खूबी है। ईद-उल-फितर एक रूहानी महीने में कड़ी आजमाइश के बाद रोजेदार को अल्लाह की तरफ से मिलने वाला रूहानी इनाम है। ईद समाजी तालमेल और मोहब्बत का मजबूत धागा है, यह त्योहार इस्लाम धर्म की परंपराओं का आईना है। एक रोजेदार के लिए इसकी अहमियत का अंदाजा अल्लाह के प्रति उसकी कृतज्ञता से लगाया जा सकता है।
दुनिया में चांद देखकर रोजा रहने और चांद देखकर ईद मनाने की पुरानी परंपरा है और आज के हाईटेक युग में तमाम बहस-मुबाहिसे के बावजूद यह रिवाज कायम है। व्यापक रूप से देखा जाए तो रमजान और उसके बाद ईद व्यक्ति को एक इंसान के रूप में सामाजिक जिम्मेदारियों को अनिवार्य रूप से निभाने का दायित्व भी सौंपती है।

रमजान में हर सक्षम मुसलमान को अपनी कुल संपत्ति के ढाई प्रतिशत हिस्से के बराबर की रकम निकालकर उसे गरीबों में बांटना होता है। इससे समाज के प्रति उसकी जिम्मेदारी का निर्वहन तो होता ही है, साथ ही गरीब रोजेदार भी अल्लाह के इनामरूपी त्योहार को मना पाते हैं। व्यापक रूप से देखें तो ईद की वजह से समाज के लगभग हर वर्ग को किसी न किसी तरह से फायदा होता है। चाहे वह वित्तीय लाभ हो या फिर सामाजिक फायदा हो।

भारत में ईद का त्योहार यहां की गंगा-जमुनी तहजीब के साथ मिलकर उसे और जवां और खुशनुमा बनाता है। हर धर्म और वर्ग के लोग इस दिन को तहेदिल से मनाते हैं। ईद के दिन सिवइयों या शीर-खुरमे से मुंह मीठा करने के बाद छोटे-बड़े, अपने-पराए, दोस्त-दुश्मन गले मिलते हैं तो चारों तरफ मोहब्बत ही मोहब्बत नजर आती है। एक पवित्र खुशी से दमकते सभी चेहरे इंसानियत का पैगाम माहौल में फैला देते हैं। अल्लाह से दुआएं मांगते व रमजान के रोजे और इबादत की हिम्मत के लिए खुदा का शुक्र अदा करते हाथ हर तरफ दिखाई पड़ते हैं और यह उत्साह बयान करता है कि लो ईद आ गई।
कुरआन के अनुसार पैगंबरे इस्लाम ने कहा है कि जब अहले ईमान रमजान के पवित्र महीने के एहतेरामों से फारिग हो जाते हैं और रोजों-नमाजों तथा उसके तमाम कामों को पूरा कर लेते हैं तो अल्लाह एक दिन अपने उक्त इबादत करने वाले बंदों को बख्शीश व इनाम से नवाजता है। इसलिए इस दिन को 'ईद' कहते हैं और इसी बख्शीश व इनाम के दिन को ईद-उल-फितर का नाम देते हैं।

रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है। इस पूरे माह में रोजे रखे जाते हैं। इस महीने के खत्म होते ही 10वां माह शव्वाल शुरू होता है। इस माह की पहली चांद रात ईद की चांद रात होती है। इस रात का इंतजार वर्षभर खास वजह से होता है, क्योंकि इस रात को दिखने वाले चांद से ही इस्लाम के बड़े त्योहार ईद-उल-फितर का ऐलान होता है। इस तरह से यह चांद ईद का पैगाम लेकर आता है। इस चांद रात को 'अल्फा' कहा जाता है।

जमाना चाहे जितना बदल जाए, लेकिन ईद जैसा त्योहार हम सभी को अपनी जड़ों की तरफ वापस खींच लाता है और यह अहसास कराता है कि पूरी मानव जाति एक है और इंसानियत ही उसका मजहब है।

धर्म संसार / शौर्यपथ /मंगलवार की प्रकृति उग्र है। मंगलवार का दिन हनुमानजी और मंगलदेव का है। लाल किताब के अनुसार मंगल नेक के देवता हनुमानजी और बद के देवता वेताल, भूत या जिन्न है। हर कार्य में मंगलकारी परिणाम प्राप्त करने के लिए मंगलवार का उपवास रखना चाहिए।

ये कार्य करें :
1. इस दिन लाल चंदन या चमेली के तेल में मिश्रित सिन्दूर लगाएं।
2. मंगलवार ब्रह्मचर्य का दिन है। यह दिन शक्ति एकत्रित करने का दिन है।
3. दक्षिण, पूर्व, आ‍ग्नेय दिशा में यात्रा कर सकते हैं।
4. शस्त्र अभ्यास, शौर्य के कार्य, विवाह कार्य या मुकदमे का आरंभ करने के लिए यह उचित दिन है।
5. बिजली, अग्नि या धातुओं से संबंधित वस्तुओं का क्रय-विक्रय कर सकते हैं।
6. मंगलवार को ऋण चुकता करने का अच्छा दिन माना गया है। इस दिन ऋण चुकता करने से फिर कभी ऋण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
लाल किताब के अनुसार निम्नलिखित उपाय पूछकर कर सकते हैं-

7. मंगल को नीम के पेड़ में शाम को जल चढ़ाएं और चमेली के तेल का दीपक जलाएं। ऐसा कम से कम 11 मंगलवार करें। हो सके तो इस दिन कहीं पर नीम का पेड़ लगाएं।
8. मंगलवार का व्रत रखकर हनुमानजी की उपासना करें। फिर किसी भी हनुमान मंदिर में मंगरवार को नारियल, सिंदूर, चमेली का तेल, केवड़े का इत्र, गुलाब की माला, पान का बीड़ा और गुड़ चना चढ़ाएं। गुड़ खाएं और खिलाएं।
9. मंगल खराब की स्थिति में सफेद रंग का सुरमा आंखों में डालना चाहिए। सफेद ना मिले तो काला सुरमा डालें।
10. बहते पानी में तिल और गुड़ से बनी रेवाड़ियां प्रवाहित करें या खांड, मसूर व सौंफ का दान करें।
11. मीठी तंदूरी रोटी कुत्ते को खिलाएं या लाल गाय को रोटी खिलाएं।
12. बुआ अथवा बहन को लाल कपड़ा दान में दें।
13. रोटी पकाने से पहले गर्म तवे पर पानी की छींटे दें।
14. मंगलवार के दिन लाल वस्त्र, लाल फल, लाल फूल, लाल चंदन और लाल रंग की मिठाई चढ़ाने से मनचाही कामना पूरी होती है।
15. मंगलवार के दिन मंदिर में ध्वजा चढ़ाकर आर्थिक समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए। पांच मंगलवार तक ऐसा करने से आर्थिक परेशानी हट जाती है।
16. मंगलवार को बढ़ के पत्ते पर आटे के पांच दीपक बनाकर रखें और उन्हें हनुमानजी के मंदिर में प्रज्वलित करके रख आएं।
ये कार्य न करें :
1. मंगलवार सेक्स के लिए खराब है। इस दिन सेक्स करने से बचना चाहिए।
2. मंगलवार को नमक और घी नहीं खाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और हर कार्य में बाधा आती है।
3. पश्‍चिम, वायव्य और उत्तर दिशा में इस दिन यात्रा वर्जित।
4. मंगलवार को मांस खाना सबसे खराब होता है, इससे अच्छे-भले जीवन में तूफान आ सकता है।
6. मंगलवार को किसी को ऋण नहीं देना चाहिए वर्ना दिया गया ऋण आसानी से मिलने वाला नहीं है।
7. इस दिन भाइयों से झगड़ा नहीं करना चाहिए। हालांकि किसी भी दिन नहीं करना चाहिए।

 

        शौर्यपथ /मेरी कहानी /पढ़ाई उस लड़के के लिए एक ऐसा मुश्किल पहाड़ थी, जिस पर चढ़ना नामुमकिन था। पढ़ाई में आलम ऐसा था कि हर राह-मंजिल पर डांट-फटकार बरसती रहती थी। गणित देखकर दिमाग पैदल हो जाता, विज्ञान सिर के ऊपर से निकल जाता, भाषा ऐसे लंगड़ाती कि पूरे ‘रिजल्ट’ को बिठा देती। कई बार ऐसी पिटाई की नौबत आन पड़ती कि अपना भूगोल ही खतरे में पड़ जाता। हाथ भले पढ़ाई में तंग था, लेकिन दिमाग में बदमाशियां इफरात थीं। हरकतें ऐसी थीं कि एक दिन प्रिंसिपल साहब ने यहां तक कह दिया, ‘यह लड़का या तो जेल पहुंचकर मानेगा या फिर करोड़पति बन जाएगा।’ शिक्षकों ने बहुत पढ़ाया-समझाया, प्रिंसिपल ने भी लाख कोशिशें कीं, लेकिन पढ़ाई उस लड़के के पल्ले नहीं पड़ी, और अंतत: वह दिन आ गया, जब वह लड़का स्कूल से बाहर कर दिया गया। उम्र महज 15 साल थी, मैट्रिक का मुकाम भी दूर रह गया। पढ़ाई छूट गई, अब क्या होगा? मां बैले डांसर थीं और कभी एयर होस्टेस रही थीं। पिता काम लायक भी कामयाब नहीं थे। ऐसे में घर का बड़ा लड़का ही पटरी से उतर गया। जो लोग पढ़ाई के लिए कहते थे, वही पूछने लगे कि अब यह लड़का क्या करेगा?

एक दिन वह लड़का उसी छूटे स्कूल के बाहर बैठकर सोच रहा था। बाकी लड़के स्कूल जा रहे थे। उनमें से कुछ शायद मुस्करा भी रहे थे। दुनिया में ऐसे लोग बहुत हैं, जो सिर्फ किसी की नाकामी का इंतजार करते हैं, घात लगाए बैठे रहते हैं कि कब किसी को नाकामी का घाव लगे और उस पर नमक छिड़का जाए। ऐसी निर्मम दुनिया में स्कूल ने उसे ऐसे ठुकरा दिया था कि किसी दूसरे स्कूल में दाखिले की सोचना भी फिजूल था। उसके साथ ऐसा क्यों हुआ? वह क्यों न पढ़ सका? कहां कमी रह गई? क्या जिंदगी में आज तक हर काम बुरा ही किया है? वहां बैठे-बैठे पहले तो वह लड़का अपनी तमाम बुरी यादों से गुजरा। बीते लम्हों के हादसों के तमाम मंजर जब खर्च हो गए, तब सोच की सही लय लौटी। दिलो-दिमाग में सवाल पैदा हुआ, क्या आज तक की जिंदगी में कभी उसे तारीफ मिली है? वह कौन-सा काम था, जिसके लिए उसे तारीफ मिली थी? आखिर ऐसा कोई तो काम होगा? फिर उसे याद आया कि उसने एक बार स्कूल की पत्रिका के प्रकाशन में शानदार योगदान दिया था, जिसके लिए उसे सबसे तारीफ हासिल हुई थी। जिसके हाथ में भी वह पत्रिका गई थी, लगभग सभी ने उसेबधाई दी थी।

पत्रिका का प्रकाशन अकेला ऐसा काम था, जिससे उस लड़के को कुछ समय के लिए ही सही, स्कूल में शोहरत नसीब हुई थी। लड़के ने अपना हुनर खोज लिया था, उसे अपनी काबिलियत दिख गई थी। उसे लग गया था कि यही वह काम है, जो वह सबसे बेहतर कर सकता है। वह उठा, पूरे जोश के साथ स्कूल के अंदर गया और अभिवादन के बाद प्रिंसिपल से बोला, ‘सर, आप कहते हैं, मैं कुछ नहीं कर सकता, लेकिन एक काम है, जो मैं बेहतर कर सकता हूं, जिसके लिए मुझे आपसे तारीफ भी मिल चुकी है। मैं छात्रों के लिए एक अच्छी पत्रिका निकालूंगा। आपसे मदद की उम्मीद रहेगी।’ प्रिंसिपल भी उसका जोश देख खुश हो गए। उन्होंने लड़के को मदद के आश्वासन और शुभकामनाओं के साथ विदा किया। फिर क्या था, वह लड़का दिन-रात पत्रिका की तैयारी में जुट गया। पैसा, संसाधन, सामग्री, सहयोग इत्यादि वह जुटाता गया। छात्रों को ही नहीं, उनके अभिभावकों को भी अपने शीशे में उतारने में वह लड़का इतना माहिर था कि सभी ने मिलकर उसकी मदद की और सवा साल की बेजोड़ मेहनत के बाद उसकी पत्रिका स्टूडेंट का पहला अंक 1 जनवरी, 1968 को बाजार में आ गया। वह पत्रिका छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच हाथों-हाथ ऐसी बिकी कि सबने उस 17 साल के लड़के रिचर्ड ब्रेंसन को सिर-आंखों पर बिठा लिया।

ब्रेंसन बहुत कम उम्र में दूसरों के लिए नजीर बन गए। वह समझ गए थे, जिंदगी में वही काम करना चाहिए, जो हम सबसे बेहतर कर सकते हैं या जिसमें हम सबसे ज्यादा हुनरमंद हैं या जिसके लिए लोग हमारी तारीफों के पुल बांधते हों। ब्रेंसन के एक हुनर ने उनके लिए आगे बढ़ने की ऐसी राह बना दी कि उन्होंने कभी पलटकर नहीं देखा। आज वह वर्जिन ग्रुप की 400 से ज्यादा सफल कंपनियों के मालिक हैं और दुनिया के मशहूर अमीरों में उनकी गिनती होती है। नाकामियों से निकलने के लिए अपने गिरेबां में कैसे झांकना पड़ता है, रिचर्ड ब्रेंसन इसकी बेहतरीन मिसाल हैं। गौर कीजिएगा, जिस लड़के को कभी स्कूल से निकाल दिया गया था, उस लड़के की कामयाबी आज दुनिया के तमाम सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन संस्थानों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है। प्रस्तुति : ज्ञानेश उपाध्याय रिचर्ड ब्रेंसन (मशहूर उद्यमी),नई दिल्ली।

 

         जीना इसी का नाम है / शौर्यपथ / बेनाला (विक्टोरिया) की एंजला बार्कर के हिस्से में खुशियां बेशुमार थीं। वह अच्छी एथलीट थीं। ऊंची कूद में उनका नाम था। नेटबॉल में वह सेंटर पोजीशन पर खेला करती थीं। स्क्वायड बास्केटबॉल में माहिर थीं। दोस्तों के साथ गाना उनका शगल था। साइकोलॉजी में करियर बनाने की मंशा थी। हर फैसले में साथ देने वाला परिवार था। और एक सजीला ब्वॉयफ्रेंड हाथ थामने को तैयार था। मानो ईश्वर ने उनके लिए बाहों भर कायनात तय कर रखा था। मगर जो तय नहीं था, वह थी उनकी नियति।
यह घटना 2002 की है। तब एंजला सोलह साल की थीं। ब्वॉयफ्रेंड डेल कैरी लेपोइडविन के आक्रामक व्यवहार को वह समझने लगी थीं। उसका वक्त-बेवक्त हाथ उठाना उन्हें अखरने लगा था। लिहाजा इस रिश्ते को सींचना उनके लिए मुश्किल हो गया। उन्होंने लेपोइडविन को छोड़ने का मन बना लिया। 7 मार्च वह दिन था, जब देर शाम एक सुपरमार्केट की कार-पार्किंग में उन्होंने लेपोइडविन को मना किया। नाराज लेपोइडविन हैवानों की तरह उन पर टूट पड़ा। उसने लात-घूंसों की बौछार कर दी। एंजला का पूरा शरीर ऐंठ गया। उनके कान और मुंह से खून निकलने लगा। वह उन्हें तब तक पीटता रहा, जब तक कि वह बेहोश न हो गईं।
डॉक्टरों के लिए एंजला ‘वेजेटेटिव-स्टेट’ में पहुंच चुकी थीं, यानी करीब-करीब कोमा की स्थिति। दिमाग के अंदरुनी हिस्सों में गंभीर चोट थी। चेहरा पूरा सूज गया था। मां हेलेन बार्कर बताती हैं, ‘एंजला एक निर्जीव देह की तरह हमारे सामने पड़ी थी। हम यह मान चुके थे कि अब वह ज्यादा दिनों तक हमारे बीच नहीं रहेगी। मगर कहीं न कहीं यह आस भी थी कि ईश्वर इतना बेरहम नहीं हो सकता।’ और, जब तीन हफ्तों के बाद एंजला की आंखें खुलीं, तो वह अपनी आवाज खो चुकी थीं और चलना भी उनके लिए सपना हो चला था।
वह करीब आठ हफ्तों तक अस्पताल में रहीं। फिर उन्हें बेनाला के ओल्ड एज नर्सिंग होम में भेज दिया गया। सभी यही कह रहे थे कि उनका बाकी जीवन अब बिस्तर पर ही बीतने वाला है। लेकिन मजबूत इरादों वाली एंजला को यह मंजूर नहीं था। सभी को गलत साबित करने में उन्हें तकरीबन तीन साल लगे। वह बताती हैं, ‘मुझे पता था कि हर चीज मेरे खिलाफ है। मगर मुझे बिस्तर से उतरना था। अपने पांवों पर खड़ा होना था। बोलना था। अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करनी थी। पुराने दिनों को फिर से जीना था।’
इन तीन वर्षों का सफर काफी कष्टदायक रहा। इस दौरान उन्होंने न जाने किस हद तक दर्द झेले। यह उनकी जिद ही थी कि बिस्तर का साथ जल्द छूट गया। अब व्हील चेयर उनका साथी है। पिता इयान बार्कर बताते हैं, ‘जब वह घर लौटी, तो उसकी आंखें भींगी हुई जरूर थीं, पर उनमें उसका आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। हां, अपनी आवाज को फिर से पाने में उसे पांच साल लग गए।’
एंजला आज भी टूटे-फूटे शब्दों में ही बोल पाती हैं, लेकिन हिंसा के खिलाफ उनके ये शब्द काफी धारदार होते हैं। साल 2004 में ऑस्ट्रेलिया की संघीय सरकार ने उनके जज्बे को आदर्श बताकर लव्स मी, लव्स मी नॉट नाम से एक डीवीडी जारी की, जो घरेलू हिंसा के खिलाफ सरकारी अभियान का हिस्सा है। आज भी एंजला तमाम दर्द के बावजूद हिंसा के खिलाफ लोगों को जागरूक करने में पीछे नहीं रहतीं। अब तक हजारों छात्रों, पुरुषों, महिलाओं, स्वास्थकर्मियों, पुलिसकर्मियों, राजनेताओं, कैदियों से वह संवाद कर चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र तक में अपनी बात रख चुकी हैं। वह कहती हैं, ‘हिंसा खत्म करने में शिक्षा की भूमिका काफी अहम है। बच्चों को जन्म से ही एक-दूसरे का सम्मान करना और एक-दूसरे को समान समझना सिखाया जाना चाहिए। नौजवान भी रिश्तों में दुव्र्यवहार के बीज पहचानना सीखें, क्योंकि प्यार की पहली अवस्था में उन्हें भी मेरी तरह सब कुछ खुशनुमा लग सकता है। शारीरिक और भावनात्मक दुव्र्यवहार करने वाला कभी भी प्रेमी नहीं हो सकता।’
एंजला को हादसे से पहले के 12 महीने याद नहीं हैं। मगर यह पता है कि उनका ब्वॉयफ्रेंड अब दूसरे के साथ ऐसा नहीं कर सकता। वह साढ़े दस साल के लिए हवालात के अंदर है। हालांकि मां हेलन इस सजा को नाकाफी मानती हैं। वह आज भी कहती हैं कि उनकी बेटी को ताउम्र दर्द देने वाला इंसान जिंदगी भर जेल में बंद रहना चाहिए। उसने एंजला का सब कुछ छीन लिया। मगर एंजला के मन में ऐसा कोई मलाल नहीं है। वह अपनी खुशमिजाजी छोड़ना नहीं चाहतीं।
साल 2010 में एंजला बेनाला छोड़कर मेलबर्न आ गईं। जल्द ही उन्हें नेशनल ऑस्ट्रेलिया बैंक में पार्ट-टाइम नौकरी भी मिल गई। उन्हें 2011 में विक्टोरियन यंग ऑस्ट्रेलियन ऑफ द ईयर अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। मेलबर्न की 100 प्रभावशाली शख्सियतों में भी वह शुमार हैं। आज भी जब उनकी यादों को कुरेदा जाता है, तो वह कहना नहीं भूलतीं- खुद पर विश्वास रखो, कुछ भी पाना असंभव नहीं।
प्रस्तुति : हेमेन्द्र मिश्र
एंजला बार्कर ऑस्ट्रेलियाई सामाजिक कार्यकर्ता

 

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