August 10, 2026
Hindi Hindi

Login to your account

Username *
Password *
Remember Me
    शौर्य की बाते ( सम्पादकीय )

    शौर्य की बाते ( सम्पादकीय ) (229)

    दुर्ग । शौर्यपथ । भारतीय जनता पार्टी आज दुर्ग शहर ही नहीं प्रदेश एवं देश में एक ब्रांड के नाम से जाना जाता है भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों की जीत उनकी निजी जीत न होकर मजबूत संगठन और उन सक्रिय कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है जिन्होंने सालों संगठन को मजबूत करने में अपना पूरा योगदान दिया ऐसे में निगम चुनाव हो या फिर विधानसभा या लोकसभा भारतीय जनता पार्टी का प्रत्याशी होना ही जीत की ओर एक कदम आगे बढ़ा देता है परंतु वर्तमान समय में दुर्ग नगर निगम में कुछ ऐसे पार्षद भी निर्वाचित हो गए हैं जो ना ही संगठन में अपनी कोई अहम भूमिका निभाई और ना ही भारतीय जनता पार्टी के पुराने कार्यकर्ता रहे परंतु मौका परस्ती और दल बदलू की राजनीति के कारण इनके भाग्य का सितारा भी बुलंदी की ओर पहुंच गया .ऐसे ही एक प्रत्याशी दुर्ग नगर निगम में निर्वाचित होकर आज वार्ड का जनप्रतिनिधित्व करेगा जो पूर्व में हुए निगम चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर आए और कांग्रेस सरकार में शामिल होकर कांग्रेसी पार्षद की भूमिका निभाते रहे .वही जब प्रदेश में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार हुई तो एक बार फिर अपनी दल बदलू नीति के तहत भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए और साल भर में ही उन सक्रीय कार्यकर्ताओं के सपने को रौंद कर फिर से भारतीय जनता पार्टी के बैनर तले निगम चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने लगे . परंतु कहा जाता है भारतीय जनता पार्टी में प्रत्याशी होना ही जीत की ओर तेजी से कदम बढ़ाने के बराबर होता है ऐसे में वार्ड नंबर 35 से कुलेश्वर साहू अपने दल बदलू नीति के बाद एक बार फिर नगर निगम में वार्ड नंबर 35 का जनप्रतिनिधित्व करेंगे .चुनावी सीजन में वार्ड की जनता से चर्चा के दौरान कुलेश्वर साहू के बारे में कुछ बातों का खुलासा किया जो आज के लोकतंत्र में आम जनता को सोचने पर मजबूर करता है चर्चा के दौरान वार्ड के कुछ युवाओं ने कहा कि कुलेश्वर साहू सिर्फ चखना सेंटर चलाने और इससे होने वाली कमाई के लिए ही चुनावी मैदान में उतरते हैं वार्ड में विकास कार्य के नाम पर शून्य की स्थिति है कांग्रेस सरकार में शामिल होकर साहू चखना सेंटर चलाते रहे और फिर सरकार बदलने के बाद एक बार फिर अपना रंग दिखाते हुए भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर अपने व्यापार की रक्षा के लिए प्रयत्नशील रहे . वार्ड की जनता के अनुसार नयापारा  शराब भट्टी के समीप आज भी पार्षद कुलेश्वर साहू का दुकान है जहां शराबियो की ज़रूरत के सामान मिल जाती है प्रशासन ऐसे कार्यों में कितना सख्त है यह तो साफ नजर आ रहा है परंतु निर्दलीय से कांग्रेसी और कांग्रेसी से भाजपाई 5 साल में लगातार पार्टी बदलने की प्रक्रिया कहीं ना कहीं लोकतंत्र पर विश्वास रखने वालों के लिए एक गहरा आघात है इस वार्ड के कई भाजपा कार्यकर्ता भी जो सालों से चुनावी जंग में उतरने का सपना देख रहे थे कहीं ना कहीं उनके साथ भी अन्याय हुआ परंतु मजबूत संगठन और उनके फैसले के आगे बेबस और एक बार फिर दल बदलू का तमगा लिए कुलेश्वर साहू वार्ड नंबर 35 से पार्षद बन जश्न मना रहे हैं और लोकतंत्र को खुलेआम आइना दिखा रहे हैं .
    लेख : वार्ड वासी से चर्चा के आधार पर

    शौर्यपथ / सनातन धर्म में इस तिथि में ऋषि पंचमी मनाया जाता है। इस दिन सप्त ऋषियों की पूजा की जाती है। ऋषि पंचमी का व्रत महिलाओं के लिए विशेष होता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 08 सितंबर को इन्द्र योग का निर्माण हो रहा है।
     8 सितंबर का दिन भारत के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में याद किया जाता है। इसी दिन 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में बम ब्लास्ट हुआ था। इस हमले में करीब 37 लोगों मारे गए थे। साथ ही 125 से अधिक लोग घायल हुए थे।
    8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाता है .
    8 सितंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ

        1271 - जाॅन XXI का पोप के रूप में चयन।
        1320 - गाजी मलिक दिल्ली का सुल्तान बना।
        1331 - स्टीफन उरोस चतुर्थ ने खुद को सर्बिया का राजा घोषित किया।
        1449 - टुमू किले का युद्ध- मंगोलिया ने चीन के सम्राट को बंधक बनाया।
        1553 - इंग्लैंड में लिचफिल्ड शहर का निर्माण।
        1563 - मैक्सीमिलियन को हंगरी का राजा चुना गया।
        1689 - चीन और रूस ने नेरट्सजिंस्क (निरचुल) की संधि पर हस्ताक्षर किया।
        1900 - टेक्सास के गैलवेस्टोन में चक्रवाती और ज्वारीय तूफान से 6000 लोगों की मौत
        1952 - जेनेवा में काॅपीराइट के लिये पहले विश्व सम्मेलन में भारत समेत 35 देशों ने किये हस्ताक्षर।
        1962 - चीन ने भारत की पूर्वी सीमा में घुसपैठ किया।
        1988 - जाने माने व्यवसायी विजयपत सिंघानिया अपने माइक्रो लाइट सिंगल इंजन एयरक्राफ्ट से लंदन से अहमदाबाद पहुँचे।
        1991 - मैसिडोनिया गणराज्य स्वतंत्र हुआ।
        1997 - अमेरिकी ओपन टेनिस चैम्पियनशिप में पैट्रिक राफ़्टर को प्रथम ग्रैंड स्लैम ख़िताब मिला।
        1998 - 2001 में निर्धारित 13वें गुट निरपेक्ष आंदोलन की मेजबानी बांग्लादेश को सौंपी गयी।
        2000 - भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र शांति शिखर सम्मेलन के दौरान हिन्दी में भाषण देते हुए पाकिस्तान को लताड़ा।
        2002 - नेपाल में माओवादियों ने 119 पुलिस कर्मियों को मार डाला।
        2003 - इस्रायल के प्रधानमंत्री एरियल शैरोन चार दिवसीय भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुँचे।
        2006 - महाराष्ट्र के नासिक ज़िले में मालेगाँव बम धमाके।
        2008 -
            सर्वोच्च न्यायालय ने कैनफिना म्यूचुअल फण्ड घोटाले मामले के मुख्य अभियुक्त और शेयर दलाल केतन पारिख व अन्य आरोपियों को ज़मानत दी।
            प्रसिद्ध अमेरिका पत्रिका फोर्ब्स ने भारतीय अरबपति लक्ष्मी मित्तल को लाइफ टाइम अचीवमेण्ट अवार्ड देने की घोषणा की।
        2009 - भारत ने विमानवाहक पोत एडमिरल गोर्शकोव को नए कलपुर्ज लगाकर तैयार करने के लिए रूस को 10 करोड़ 20 लाख डालर दिये।

    रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की संस्कृति अपनी अति विशिष्ट परंपराओं और पर्वों के लिए जानी जाती है और हर पर्व, प्रकृति के पीछे गहरे समर्पण की मिसाल देता है। हरियाली को लेकर ऐसा ही दुर्लभ पर्व हरेली है, जब पूरी धरती हरीतिमा की चादर ओढ़ लेती है। धान के खेतों में रोपा लग जाता है और खेतों में चारों ओर प्रकृति अपने सुंदर नजारे में अपने को व्यक्त करती है। धरती माता का पूरा स्नेह पृथ्वीवासी या हर जीव-जन्तु पर उमड़ता है और इस स्नेह के प्रतिदान के लिए हम हरेली में प्रकृति को पूजते हैं। इस बार हरेली पर्व पर एक और खुशी हमारे प्रदेशवासियों के साथ जुड़ रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने एक पेड़ माँ के नाम पर लगाने के अभियान का आगाज किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में यह अभियान पूरे उत्साह से चल रहा है। मुख्यमंत्री ने हरेली के अवसर पर लोगों से पेड़ लगाने की अपील की है। यह पेड़ वे अपनी माँ के नाम लगाएंगे साथ ही धरती माँ के नाम लगाएंगे, जो धरती हमें इतना कुछ देती है, उसके श्रृंगार के लिए पौधा लगाएंगे और सहेजेंगे। यह पौधा हमारी हरेली की स्मृतियों को सुरक्षित रखने के लिए भी यादगार होगा। साथ ही प्रदेश भर में जहां भी खुले मैदानों में पौधरोपण के आयोजन होंगे वहां लोग गेड़ी का आनंद भी लेंगे। अपनी प्रकृति और परिवेश से जुड़ने और इसे समृद्ध करने से बढ़कर सुख और क्या होगा।
    छत्तीसगढ़ का पहला लोक पर्व हरेली
      छत्तीसगढ़ का सबसे पहला लोक पर्व हरेली है, जो लोगों को छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आस्था से परिचय कराता है। हरेली का मतलब हरियाली होता है, जो हर वर्ष सावन महीने के अमावस्या में मनाया जाता है। हरेली मुख्यतः खेती-किसानी से जुड़ा पर्व है। इस त्यौहार के पहले तक किसान अपनी फसलों की बोआई या रोपाई कर लेते हैं और इस दिन कृषि संबंधी सभी यंत्रों नागर, गैंती, कुदाली, फावड़ा समेत कृषि के काम आने वाले सभी तरह के औजारों की साफ-सफाई कर उन्हें एक स्थान पर रखकर उसकी पूजा-अर्चना करते हैं। घर में महिलाएं तरह-तरह के छत्तीसगढ़ी व्यंजन खासकर गुड़ का चीला बनाती हैं। हरेली में जहाँ किसान कृषि उपकरणों की पूजा कर पकवानों का आनंद लेते हैं, आपस में नारियल फेंक प्रतियोगिता करते हैं, वहीं युवा और बच्चे गेड़ी चढ़ने का मजा लेते हैं।
      हरेली के दिन गांव में पशुपालन कार्य से जुड़े यादव समाज के लोग सुबह से ही सभी घरों में जाकर गाय, बैल और भैंसों को नमक और बगरंडा का पत्ता खिलाते हैं। हरेली के दिन गांव-गांव में लोहारों की पूछपरख बढ़ जाती है। इस दिन गांव के लोहार हर घर के मुख्य द्वार पर नीम की पत्ती लगाकर और चौखट में कील ठोंककर आशीष देते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से उस घर में रहने वालों की अनिष्ट से रक्षा होती है। इसके बदले में किसान उन्हे दान स्वरूप स्वेच्छा से दाल, चावल, सब्जी और नगद राशि देते हैं। ग्रामीणों द्वारा घर के बाहर गोबर से बने चित्र बनाते हैं, जिससे वह उनकी रक्षा करे।
    हरेली से तीजा तक गेड़ी दौड़ का आयोजन
       हरेली त्यौहार के दिन गांव के प्रत्येक घरों में गेड़ी का निर्माण किया जाता है, मुख्य रूप से यह पुरुषों का खेल है घर में जितने युवा एवं बच्चे होते हैं उतनी ही गेड़ी बनाई जाती है। गेड़ी दौड़ का प्रारंभ हरेली से होकर भादो में तीजा पोला के समय जिस दिन बासी खाने का कार्यक्रम होता है उस दिन तक होता है। बच्चे तालाब जाते हैं स्नान करते समय गेड़ी को तालाब में छोड़ आते हैं, फिर वर्षभर गेड़ी पर नहीं चढ़ते हरेली की प्रतीक्षा करते हैं। चूंकि वर्षा के कारण गांव के कई जगहों पर कीचड़ भर जाता है, इस समय गेड़ी पर बच्चे चढ़कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर आते जाते हैं उसमें कीचड़ लग जाने का भय नहीं होता। बच्चे गेड़ी के सहारे कहीं से भी आ जा सकते हैं। गेड़ी का संबंध कीचड़ से भी है। कीचड़ में चलने पर किशोरों और युवाओं को गेड़ी का विशेष आनंद आता है। रास्ते में जितना अधिक कीचड़ होगा गेड़ी का उतना ही अधिक आनंद आता है। वर्तमान में गांव में काफी सुधार हुआ है गली और रास्तों पर काम हुआ है। अब ना कीचड़ होती है ना गलियों में दलदल। फिर भी गेड़ी छत्तीसगढ़ में अपना महत्व आज भी रखती है। गेड़ी में बच्चे जब एक साथ चलते हैं तो उनमें एक दूसरे से आगे जाने की इच्छा जागृत होती है और यही स्पर्धा बन जाती है। बच्चों की ऊंचाई के अनुसार दो बांस में बराबर दूरी पर कील लगाते हैं और बांस के टुकड़े को बीच में फाड़कर दो भाग कर लेते हैं, फिर एक सिरे को रस्सी से बांधकर पुनः जोड़ देते हैं इसे पउवा कहा जाता है। पउवा के खुले हुए भाग को बांस में कील के ऊपर फंसाते हैं पउवा के ठीक नीचे बांस से सटाकर 4-5 इंच लंबी लकड़ी को रस्सी से इस प्रकार बांधते है, जिससे वह नीचे ना जा सके लकड़ी को घोड़ी के नाम से भी जाना जाता है। गेड़ी में चलते समय जोरदार ध्वनि निकालने के लिए पैर पर दबाव डालते हैं जिसे मच कर चलना कहा जाता है।
    नारियल फेंक प्रतियोगिता
      नारियल फेंक बड़ों का खेल है इसमें बच्चे भाग नहीं लेते। प्रतियोगिता संयोजक नारियल की व्यवस्था करते हैं, एक नारियल खराब हो जाता है तो तत्काल ही दूसरे नारियल को खेल में सम्मिलित किया जाता है। खेल प्रारंभ होने से पूर्व दूरी निश्चित की जाती है, फिर शर्त रखी जाती है कि नारियल को कितने बार फेंक कर उक्त दूरी को पार किया जाएगा। प्रतिभागी शर्त  स्वीकारते हैं, जितनी बार निश्चित किया गया है उतने बार में नारियल दूरी पार कर लेता है तो वह नारियल उसी का हो जाता है। यदि नारियल फेंकने में असफल हो जाता है तो उसे एक नारियल खरीद कर देना पड़ता है। नारियल फेंकना कठिन काम है इसके लिए अभ्यास जरूरी है। पर्व से संबंधित खेल होने के कारण बिना किसी तैयारी के लोग भाग लेते है।
    बस्तर क्षेत्र में हरियाली अमावस्या पर मनाया जाता है अमुस त्यौहार
      छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में ग्रामीणों द्वारा हरियाली अमावस्या पर अपने खेतों में औषधीय जड़ी-बूटियों के साथ तेंदू पेड़ की पतली छड़ी गाड़ कर अमुस त्यौहार मनाया जाता है। इस छड़ी के ऊपरी सिरे पर शतावर, रसना जड़ी, केऊ कंद को भेलवां के पत्तों में बांध दिया जाता है। खेतों में इस छड़ी को गाड़ने के पीछे ग्रामीणों की मान्यता यह है कि इससे कीट और अन्य व्याधियों के प्रकोप से फसल की रक्षा होती है। इस मौके पर मवेशियों को जड़ी बूटियां भी खिलाई जाती है। इसके लिए किसानों द्वारा एक दिन पहले से ही तैयारी कर ली जाती है। जंगल से खोदकर लाई गई जड़ी बूटियों में रसना, केऊ कंद, शतावर की पत्तियां और अन्य वनस्पतियां शामिल रहती है, पत्तों में लपेटकर मवेशियों को खिलाया जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि इससे कृषि कार्य के दौरान लगे चोट-मोच से निजात मिल जाती है। इसी दिन रोग बोहरानी की रस्म भी होती है, जिसमें ग्रामीण इस्तेमाल के बाद टूटे-फूटे बांस के सूप-टोकरी-झाड़ू व अन्य चीजों को ग्राम की सरहद के बाहर पेड़ पर लटका देते हैं। दक्षिण बस्तर में यह त्यौहार सभी गांवों में सिर्फ हरियाली अमावस्या को ही नहीं, बल्कि इसके बाद गांवों में अगले एक पखवाड़े के भीतर कोई दिन नियत कर मनाया जाता है।
    साभार : • डॉ. दानेश्वरी संभाकर,सहायक संचालक

      राजनीती / शौर्यपथ / प्रदेश में एक पद मंत्रालय का खाली है एवं दूसरा पद (मंत्री बृजमोहन अग्रवाल) सांसद चुनाव जितने के बाद खाली होने की राह देख रहा है जिस पर संशय के बादल नजर आ रहे है वैसे अभी 18 जून तक समय है किन्तु राजनीती में चंद मिनटों में ही फैसले का असर दशा और दिशा सब बदल जाती है .
      वर्तमान समय में माना जाए तो एक पद खाली है जिस पर सभी की नजर है ऐसे में दुर्ग शहर विधायक के जन्मदिन का कार्यक्रम पृथ्वी पैलेसपर होना शहर में चर्चा का विषय है . पृथ्वी पैलेस में जन्मदिन मनाने पर अलग अलग चर्चाओं का बाजार गर्म है . दुर्ग जिले में ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी विधायक के द्वारा जन्मदिन का उत्सव घर में ना मना कर होटल में वो भी शहर से दूर और महंगे होटल में शुमार पृथ्वी पैलेस जिसके एक दिन का किराया ही लाखो रूपये का है जहाँ हजार पांच सौ लोगो का खाना ही लाखो में पहुँच जाता है ऐसे में चर्चा के अनुसार चार से पांच हजार लोगो का न्योता और कई व्ही आई पी लोगो के आने की संभावना व्यक्त की जा रही है जिससे राजनितिक हलको में यह चर्चा है कि साय सरकार के मंत्री मंडल विस्तार में गजेन्द्र यादव का नाम लगभग तय माना जा रहा है और यह पार्टी उसी कड़ी का एक हिस्सा के रूप में देखा जा रहा है . वही दूसरी तरफ ऐसी भी चर्चा है कि सक्रियता के मामले में क्षेत्र की जनता विधायक यादव से नाखुश है चंद लोगो से घिरे होने और संगठन तथा निगम के जनप्रतिनिधियों से दुरी मंत्री पद की राह में एक बड़ा स्पीड ब्रेकर नजर आ रहा है संघ से पिता का गहरा सम्बन्ध कुछ सकारात्मक पहल के रूप में भी अब नजर नहीं आ रहा . पिछले कुछ समय से संघ और भाजपा संगठन में कोल्ड वार खुलकर सामने आ गए है . राष्ट्रिय अध्यक्ष जे पी नड्डा का ब्यान अब हमें संघ की जरुरत नहीं वही संघ प्रमुख का भाजपा संगठन के चुनाव लड़ने की प्रणाली पर दिया गया बयान से यह भी उम्मीद नहीं की जा सकती की संघ से मंत्री पद के लिए दबाव बनाया जाएगा . ऐसे में पहली बार विधायक निर्वाचित होने के बाद शहर विधायक का शहर से दूर जन्मदिन मनाये जाने पर सबकी नजर है . शहर भर में जिस तरह से पूर्व विधायक , सांसद एवं अन्य जनप्रतिनिधियों के पोस्टर जन्मदिन के अवसर पर लगे होते थे ऐसा वर्तमान में देखने को नहीं मिला , मीडिया से दुरी गिनती के अखबारों में जन्मदिन कि बधाई सन्देश जिसमे से प्रकाश सांखला और इन्द्रजीत सिंग (छोटू भैया ) हैवी ट्रांसपोर्ट के आलावा किसी स्थानीय या मझोले अखबार , इलेक्ट्रोनिक मिडिया जैसे प्लेट फ़ार्म में सालो बाद दुर्ग में एक नए चेहरे के जन्मदिन की कही झलक नजर नहीं आ रही फिर भी सभी की नजर शाम को होने वाले उत्सव और उसके बाद के नतीजो पर है .....


    शौर्यपथ समाचार परिवार की तरफ से दुर्ग शहर विधायक गजेन्द्र यादव को जन्मदिन कि हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाये

    बस्तर लोकसभा चुनाव विशेष 2014

     संजय पराते की कलम से ...

       शौर्यपथ विशेष / वे डरे हुए हैं, बदहवास है। बावजूद इसके कि आंकड़े उनके पक्ष में है, इस बार जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है। इस हकीकत को वे भी पहचान रहे हैं। इसलिए वे और भी डरे हुए हैं, बदहवास हैं। मोदी के जुमलों पर न्याय का हथौड़ा भारी पड़ रहा है।
      बस्तर लोकसभा में विधानसभा की 8 सीटें हैं। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में तीन सीटें -- बस्तर, बीजापुर और कोंटा -- कांग्रेस ने जीती हैं, तो चार सीटों -- कोंडागांव, नारायणपुर, जगदलपुर और चित्रकोट -- पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। इन 8 सीटों पर कांग्रेस को सम्मिलित रूप से 4,01,538 वोट तथा भाजपा को 4,81,151 वोट मिले थे। इस प्रकार भाजपा 79,613 वोट और 7.91% वोटों के अंतर से आगे थी।
      वर्ष 2019 के पिछले लोकसभा चुनाव के परिणाम से विधानसभा चुनाव के ये परिणाम भाजपा के लिए आश्वस्तिदायक हैं। तब भाजपा को लोकसभा चुनाव में 3,63,545 वोट ही मिले थे और कांग्रेस को 4,02,527 वोट। इस प्रकार कांग्रेस के दीपक बैज ने भाजपा के बैदूराम कश्यप को 38,982 वोट और 4.27% के अंतर से हराया था। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने पिछली बार जिन दो सीटों पर विजय पाई थी, उनमें से एक बस्तर थी।
       इस प्रकार बस्तर लोकसभा में पांच साल पहले कांग्रेस से 4.27% वोटों से पीछे रहने वाली भाजपा आज 7.91% वोट से आगे हैं। निश्चित ही ये आंकड़ें प्रभावशाली हैं और भाजपा के पक्ष में हैं। इसके बावजूद भाजपा के चेहरे पर चिंता की लकीरें हैं और वह पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। क्यों? इसका एक कारण तो मतदाताओं का वह असामान्य व्यवहार ही है, जिसने दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को भारी भरकम जीत दिलाने के चार माह बाद ही अप्रैल 2019 में हुए लोकसभा के चुनावों में उसे पटकनी देने में कोई संकोच नहीं किया था।  इस बार भी मतदाता कहीं ऐसा ही 'खेला' नहीं कर दें! दूसरा कारण, लगातार दस सालों से केंद्र में सत्ता में बने रहने  और 2013-18 के दौरान केंद्र और राज्य दोनों ही स्तर पर सत्ता में बने रहने से पैदा सत्ता-प्रतिकूलता का कारक है, जिसने पिछली बार राज्य की सत्ता से उसे 10% वोटों के अंतर से बाहर कर दिया था। तीसरा कारण, स्वयं भाजपा की वे नीतियां हैं, जिससे राज्य की जनता और खासकर बस्तर की आदिवासी और गरीब जनता भुगत रही है।
      इसी बदहवासी ने भाजपा को मोदी की कथित गारंटी के बावजूद अपना उम्मीदवार बदलने को मजबूर किया है। इस बार उसने एक भूतपूर्व सरपंच महेश कश्यप को टिकट दिया है, जिसकी राजनैतिक पृष्ठभूमि यही है कि वह संघ के आनुषंगिक संगठनों बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद से जुड़ा रहा है और धर्मांतरण विरोधी आंदोलनों की अगुआई करते हुए ईसाई आदिवासियों पर हमले करता रहा है। इस चेहरे को सामने रखकर संघ-भाजपा ने हिन्दुत्व का कार्ड खेलने की कोशिश की है। कांग्रेस ने भी अपना प्रत्याशी बदला है और उसने लगातार 6 बार विधायक निर्वाचित हुए और भूपेश मंत्रिमंडल के आबकारी मंत्री कवासी लखमा को मैदान में उतारा है। कांग्रेस प्रत्याशी का व्यक्तित्व निश्चित ही भाजपा पर भारी पड़ रहा है।
       बस्तर में मोदी की 8 अप्रैल को सभा हो चुकी है। राम मंदिर, धर्मांतरण और असफल हो चुकी केंद्रीय योजनाओं की जुगाली करने के सिवा उनके पास कोई मुद्दा नहीं था। मोदी गारंटी का जुमला भी था, लेकिन बेरोजगारों के लिए रोजगार, किसानों के लिए एमएसपी और कर्जमुक्ति, आदिवासियों के लिए राज्य प्रायोजित उत्पीड़न से मुक्ति और वनाधिकार, पेसा और मनरेगा कानूनों के क्रियान्वयन की गारंटी सिरे से गायब थी। पिछली कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार पर तो वे गरज-तरज रहे थे, लेकिन अपने किए दुनिया के सबसे बड़े चुनावी बांड घोटाले पर चुप थे। उनके भाषण इस बात के संकेत थे कि एक व्यक्ति और एक दल के शासन को लादने की पूरी गारंटी है। वहीं 13 अप्रैल को हुई अपनी सभा में राहुल गांधी का पूरा भाषण मुद्दों पर केंद्रित था। आदिवासियों, बेरोजगार नौजवानों, गरीबी की समस्या उनके भाषण के केंद्र में थी और भाजपा की सांप्रदायिक नीतियों पर उन्होंने अपना निशाना साधा।
      रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार सोनी कहते हैं कि बस्तर के आदिवासियों को धारा 370 के हटने या राम मंदिर के निर्माण से कोई मतलब नहीं है। इन मुद्दों को सामने रखकर भाजपा को अपनी जीत का सपना नहीं देखना चाहिए। लेकिन पत्रकार पूर्णचंद्र रथ का कहना है कि बस्तर लोकसभा क्षेत्र के शहरी हिस्से (जो अपेक्षाकृत बहुत छोटा है) में भाजपा का प्रभाव कांग्रेस से ज्यादा है।
      जगदलपुर के एक नौजवान कांग्रेसी कार्यकर्ता भुजित दोशी कहते है कि मोदी की सभा के मुकाबले राहुल की सभा का बड़ी होना बताता है कि बस्तर में हवा किस ओर बह रही है। महिलाओं के उत्थान के लिए हर वर्ष उन्हें 1 लाख रुपए देने के वादे के साथ ही आज राहुल गांधी ने किसानों की कर्जमुक्ति, उन्हें एमएसपी की कानूनी गारंटी देने और नौजवानों से खाली पदों को भरने का जो वादा किया है, वह मोदी की किसी भी गारंटी पर भारी पड़ेगी।
      दरभा के आदिवासी नौजवान संतोष यादव ने कहा कि राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद नक्सलियों के दमन के नाम पर आदिवासियों का उत्पीड़न बढ़ गया है और भाजपा सरकार फिर से नए रूप में सलवा जुडूम को लाना चाहती है। लोहंडीगुड़ा के आदिवासी टाटा के लिए बंदूक की नोंक पर उनकी जमीन छीनने की रमन सरकार की करगुजारी को अभी तक नहीं भूले हैं। नगरनार के स्टील प्लांट को मोदी सरकार आज भी निजीकरण की सूची में रखे हुए हैं। इसलिए बस्तर का नौजवान मोदी की किसी भी गारंटी पर विश्वास करने के लिए तैयार नहीं है। हंसते हुए वे कहते हैं -- "हाथी के दांत दिखाने के और होते हैं, खाने के और। मोदी गारंटी का यही हाल है।" उल्लेखनीय है कि रमन राज में संतोष नक्सलियों के साथ संबंध रखने के झूठे आरोप में कई माह जेल काट चुके हैं।
      लेकिन फिर वही सवाल : जीतेगा कौन? क्या कांग्रेस 80,000 वोटों की खाई को पाटने में सफल हो पाएगी?पत्रकार रितेश पांडे एक मशहूर मजाक की याद दिलाते हैं : जनता तो चाहती है कि कांग्रेस जीते, लेकिन यदि कांग्रेसी ही भाजपा को जीताना चाहे तो...? वे कहते हैं कि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार का यह एक बड़ा कारण था। लेकिन अब कांग्रेसी इस हार से सबक लेकर एकजुट होंगे और मोदी के जुमलों पर न्याय का हथौड़ा भारी पड़ेगा।

    साभार - संजय पराते मोबाइल न.  94242-31650

    शौर्यपथ राजनीति । लोकसभा चुनाव में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस ने राजेन्द्र साहू को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। देश में 7 चरणों में हो रहे चुनाव में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र में तीसरे चरण में मतदान होना है ऐसे में भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों के पास काफी समय है प्रचार के लिए । एक तरफ भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी विजय बघेल जिनकी चुनावी प्रचार की शैली निरंतर तेजी से बढ़ रही है और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन में दिख रही भीड़ भी यह बता रही है कि भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी विजय बघेल अपने पिछले सर्वाधिक मतों से जीत के रिकॉर्ड को तोड़ सकते हैं वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र साहू भी चुनावी प्रचार प्रसार में लग चुके हैं परंतु राजन साहू के साथ बड़ी परेशानी है कि पिछले 5 सालों में कांग्रेस सरकार के समय पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी रहने के बावजूद भी राजेंद्र साहू ने कोई ऐसी उपलब्धि हासिल नहीं की जिसे जनता के सामने बताया जा सके हालांकि राजेंद्र साहू किसी संवैधानिक पद में नहीं रहे कांग्रेस सरकार के आखिरी सालों में जरूर जिला सहकारी केंद्रीय ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष रहे परंतु साल भर के कार्यकाल में किसी बड़ी उपलब्धि की चर्चा नहीं हुई वहीं कुछ तथाकथित कांग्रेसी जो पत्रकारिता का चादर ओढ़े चाटुकारिता का प्रदर्शन करते हुऐ यह जरूर दिखाने की कोशिश किया जा रहा है कि 10 साल पहले राजेंद्र साहू ने बड़े जोश खरोश उसके साथ चुनाव लड़ा और जीत के करीब पहुंचे थे परंतु 10 साल पहले की स्थिति और आज की स्थिति में काफी अंतर है वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी की संगठात्मक क्षमता काफी मजबूत हुई है वहीं कांग्रेस पार्टी में अभी भी आपसी मतभेद अपनी चरम सीमा पर है हाल ही में भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ता सम्मेलन में जिस तरह से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का भाजपा में प्रवेश हुआ जिसमें युवा वर्गों का एक बड़ा जत्था कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुआ वहीं दूसरी ओर राजेंद्र साहू के पास युवक की वैसे टीम नहीं है जो पूरे तन मन से चुनावी प्रचार में राजेंद्र साहू के साथ रहे कांग्रेस कार्यकाल के समय जिस तरह से कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा चखना सेंटर का संचालन ,ठेकेदारी में संलिप्त मदन जैन भी ऋषभ जैन जैसे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का खुलेआम विषय विधानसभा में कांग्रेस के विरोध में कार्य करने का आप राजेंद्र साहू और वोरा गुट में पोस्टर वार को लेकर आपसी मतभेद और कांग्रेसी का कार्यालय में भ्रष्टाचार में लिप्त कार्यकर्ताओं का कांग्रेस के पक्ष में समर्थन मांगना यह सब राजेन्द्र साहू के लिए चुनावी परिणाम को विपरीत दिशा में ले जा रहा है । 

      दुर्ग विधानसभा क्षेत्र की ही बात करें तो दुर्ग विधानसभा क्षेत्र में नगर निगम के एम आई सी मेंबर अभी तक खुलकर चुनावी प्रचार में सामने नहीं आ पाए हैं वही दुर्ग कांग्रेस के बड़े नेता अरुण वोरा , आर एन वर्मा , शंकर ताम्रकार, धीरज बाकलीवाल जैसे भी उस तरह से चुनावी प्रचार में नहीं दिख रहे हैं जिसकी कांग्रेस को जरूरत है वहीं दूसरी ओर कांग्रेसी पार्षदों का एवं कांग्रेस के समर्थन में पिछले विधानसभा चुनाव में कार्य करने वाले जनप्रतिनिधियो का भाजपा में जाना भी यह इशारा कर रहा है कि वर्तमान में भी वही स्थिति की निर्मित हो रही है जिस तरह से विधानसभा चुनाव में निर्मित हुई थी आपसी गुटबाजी दुर्ग कांग्रेस की एक बड़ी कमजोरी रही है इससे 5 सालों में राजेंद्र साहू ने पाटन क्षेत्र में ही अपना ध्यान आकर्षित किया दुर्ग की राजनीति से वह दूर रहे संगठन में रहते हुए भी पिछले 5 सालों में राजेंद्र साहू द्वारा अपने जमीन के व्यापार को बढ़ाने और पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी रहने की चर्चा भी शहर में जोरों पर है । साथी है अभी चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी होने के बावजूद भी दुर्ग जिला मुख्यालय में ऐसा कोई बड़ा कार्य नहीं हुआ जिसे उपलब्धि के रूप में आम जनता याद कर सके कांग्रेस के युवाओं की टीम की स्थिति भी सभी को नजर आ रही है वर्तमान स्थिति में भी कांग्रेसी युवा टीम भारतीय जनता पार्टी युवा टीम क्या आगे काफी कमजोर प्रतीत हो रही है कांग्रेस प्रत्याशी राजेन्द्र साहू के पास अभी भी काफी समय है सिर्फ साहू समाज की बहुलता के और साहू समाज के प्रत्याशी होने के लाभ को अगर देखते हुए राजेंद्र साहू चुनावी मैदान में उतरते हैं तो कांग्रेस के प्रत्याशी के लिए दुर्ग लोकसभा का यह चुनाव भी एक ऋनात्मक परिणाम के रूप में सामने आएगा ।

    लेख का आधार, क्षेत्र में हो रही राजनैतिक चर्चा 

    शौर्यपथ । आज 8 मार्च को पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रुप में मनाया जाता है। भारत वर्ष में महिलाओ को आदिशक्ति के रुप में देखा गया है। महिला दिवस पर श्रुति पाठकों के लिए एक लेख समर्पित 

       अक्सर हम जाने अंजाने बहुत सारे बंधनों में बांधकर स्वयं को संचालित करते रहते हैं और इन बंधनों को सामाजिक बन्धन का नाम दे देते हैं। इन अवांछित को ढोते ढोते स्वयं को मानसिक शारीरिक थकाते रहते हैं , टूटते रहते हैं। वास्तव में हमें अपनी सीमाओं से स्वयं को संचालित तो करना होता है पर वह सीमा असीमित हैं ।हम एक संपूर्ण व्यक्तित्व तभी हो सकते हैं जब हम अपने आप को असीमित बना लें । एक स्त्री होना बहुत मुश्किल है और स्त्री का स्त्री बने रहना और भी मुश्किल। स्त्री में स्त्रीत्व का परिपालन करते-करते स्त्री स्त्री बनी रह भी जाती है पर सामाजिक, घरेलू परिप्रेक्ष में स्त्री का इंसान बने रहना ही मुश्किल हो जाता है । पुरुषों से अपेक्षाकृत अधिक जटिल और बल में अपेक्षा थोड़ा कम बनाया है । यूं तो स्त्री स्वयं प्रकृति है और असीमित शक्ति की मालकिन है पर उसे खुद को संरक्षण देना और खुद को स्थापित करना होता है। वह स्वयं तेज पुंज होकर निस्तेज रहते हुए सीमित मैं भी खुद को असीमित कर लेती है।

     

    **एक समंदर आंचल में छुपा रक्खा है।

    तूफ़ा खामोश हो गए। 

    लहरों को भी दवा रखा है। 

    पानी को भी जमीं चाहिए ठहरने के लिए ।

    मैंने हवाओं में आशियाना बना रखा है ।

    क्या बिगड़ेंगे आंधियां मेरा ।

    मैंने बवंडर को आंखों में उठा रखा है**

     

    यहां मैंने समुद्र की गहराई को स्त्री के मन और उसमें से निकलने वाले अमूल्य रत्नों को उसके गुण की और बवंडर की उपमा उसकी सहनशक्ति से की है।

    साभार : अनुराधा *अनु*  

    दुर्ग छत्तीसगढ़

    साभार : श्रीमती नूतन सिदार, सहायक संचालक

        रायपुर / शौर्यपथ  / महिला सशक्तिकरण की दिशा में आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने के लिए महतारी वंदन योजना एक कारगर कदम है। प्रदेश की महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा इस योजना की शुरूआत की गई है। गांव से लेकर शहर तक महिलाओ में जबरदस्त उत्साह देखा गया। महिलाओं को इस योजना से प्रतिमाह 1000 रूपए की राशि दी जाएगी। साल में कुल 12 हजार की राशि भी मिलेगी। महिलाएं घर चलाने के साथ-साथ ही घर की बजट बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्हें घर की जिम्मेदारियों का निर्वहन करना बखूबी आता है। महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक बल मिलेगा और उनके हाथों में एक राशि रहेगी। जिसका उपयोग वे कर सकेंगी।

      जगदलपुर शहर के लालबाग निवासी श्रीमती आसमती कश्यप ने स्थानीय हल्बी बोली में बताया कि हम सभी महिलाएं बहुत खुश है कि उनके खाते में प्रतिमाह 1000 रूपए की राशि आएगी। इसका उपयोग साग-सब्जी तथा अन्य जरूरत के लिए कर सकेंगी। बस्तर की महिलाओं ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बताया कि महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में छत्तीसगढ़ शासन की यह अनोखी पहल है।

      आड़ावाल निवासी स्वाति राव ने कहा कि राशि का उपयोग अपनी जरूरी घरेलू सामान की पूर्ति करने के लिए करेंगी। आड़ावाल की श्रीमती कृष्णादेवी ने खुशी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया।

      बलौदाबाजार नगर निवासी श्रीमती सुनीता यादव ने कहा सरकार ने प्रतिमाह 1 हजार रूपये देने का वादा किया था वह अब पूरा होने वाला है। आज मैंने महतारी वंदन योजना के लिए आवेदन कर दी हूं। अब जो पैसा मिलेगा उसका उपयोग बच्चों की पढ़ाई एवं अन्य खर्चों के लिए करूंगी। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं प्रदेश के मुखिया श्री विष्णुदेव साय को महतारी वंदन योजना प्रारंभ करने के लिए धन्यवाद देते हुए आभार जताया। इसी तरह कसडोल विकासखण्ड के ग्राम बल्दाकछार के विशेष पिछड़ी जनजाति निवासी श्रीमती तीजबाई कमार ने भी नजदीकी आंगनबाड़ी पहुंचकर महतारी वंदन योजना के लाभ लेने के लिए आवेदन किया है। उन्होंने कहा कि मैं दैनिक मजदूरी एवं किसानी कार्य कर पैसा कमाती हूं अब इसके साथ ही मुझे प्रतिमाह 1 हजार रूपये मिलेेगा। जो मेरे अतिरिक्त आय का साधन होगा। मै इस पैसे का उपयोग अन्य दैनिक खर्चों में करूंगी। श्रीमती तीजबाई कमार ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। इसी तरह बलौदाबाजार विकासखण्ड के ग्राम परसाभदेर निवासी श्रीमती स्नेहा पैकरा ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए प्रारंभ की गई योजना महतारी वंदन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी महिलाओं से आवेदन करने की अपील की है।

      गौरतलब है की प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना का लाभ प्रदेश के मूल निवासी विवाहित, विधवा, तलाकशुदा और परित्यकक्ता महिलाओं को मिलेगा। इस योजना में शामिल होने के लिए परिवार की आर्थिक आय ढाई लाख रुपए से कम वार्षिक रखी गई है। इस योजना का लाभ विवाहित 21 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की महिलाओं को मिलेगा। एक हजार रुपए सरकार की ओर से मिलना भी उनके आर्थिक विकास के लिए फायदेमंद साबित होगा। महिलाओं को मिलने वाली इस योजना का लाभ से उनके आर्थिक दशा में सुधार आएगी तथा यदि महिलाये कुछ पैसा बचा सके तो आगामी भविष्य के लिए उसका उपयोग कर सकती है।

    साभार :आनंद प्रकाश सोलंकी, सहायक संचालक( जनसंपर्क विभाग रायपुर )

         रायपुर / शौर्यपथ / छत्तीसगढ़ की नयी सरकार ने सुशासन का संकल्प लिया है। सुशासन यानि लोगों की बेहतरी के लिए प्रशासन में पारदर्शिता, कार्यों का समय सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा होना, अच्छा प्रबंधन, जनभागीदारी, जवाबदेही, कुशलता और कानून का पालन जैसी बातें शामिल हैं। यह किसी भी जनकल्याणकारी राज्य की प्रथम आवश्यकता होती है। नयी सरकार सुशासन की स्थापना के लिए आई.टी. को प्रमुख टूल के रूप में अपनाएगी। इसकी बानगी वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट में देखी जा सकती है।  
       मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा है कि छत्तीसगढ़ ई-गवर्नेंस की दृष्टि से माडल राज्य बने। उनकी मंशा के अनूरूप योजनाओं की ई-मानीटरिंग के साथ-साथ पारदर्शी प्रशासन और आईटी आधारित कर प्रणाली विकसित की जाएगी। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए छत्तीसगढ़ सेंटर फॉर स्मार्ट गवर्नेन्स की स्थापना का उल्लेख बजट में किया गया है। बजट में सभी विभागों में आई.टी. के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक उपकरण एवं आधुनिक सॉफ्टवेयर इत्यादि की व्यवस्था के लिए 266 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
       प्रदेश के 168 नगरीय निकायों में ई.गवर्नेन्स के तहत बजट एण्ड अकाउंटिंग मॉड्यूल स्थापित किया जायेगा। 47 नगरीय निकायों में प्रॉपर्टी सर्वे किये जाने हेतु GIS आधारित सॉफ्टवेयर निर्माण किया जायेगा। इससे प्रॉपर्टी टैक्स की प्राप्तियों में पारदर्शिता आयेगी। इन कार्यों के लिए 30 करोड़ का प्रावधान किया गया है। विभागवार महत्वपूर्ण अभिलेखों को डिजिटल रूप में तैयार करके छत्तीसगढ़ वेब अभिलेखागार में जन.सामान्य को सुविधा के लिए उपलब्ध कराया जायेगा, इसके लिए बजट में 03 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
       राज्य शासन द्वारा संचालित सभी प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं की एकजाई मॉनिटरिंग अटल डैशबोर्ड के माध्यम से की जायेगी। इसके लिए 05 करोड़ का प्रावधान किया गया है। शासकीय धन के आय.व्यय की दैनिक निगरानी के लिए एकीकृत वित्तीय प्रबंधन सूचना प्रणाली (IFMIS- 2.0) प्रारंभ की जायेगी। एकीकृत ई.प्रोक्योरमेंट परियोजना के नवीन संस्करण हेतु 15 करोड़ का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति.2020 को तत्परता से लागू किया जायेगा। डिजिटल एवं ए.आई. आधारित इको सिस्टम के माध्यम से शिक्षा की व्यवस्था की जायेगी।
    भारत नेट परियोजना के तहत राज्य की 9,804 ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाईबर केबल से जोड़ा जा चुका है। इसके रख.रखाव एवं संचालन के लिए 66 करोड़ की पूल निधि के गठन का प्रावधान किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में वाई.फाई के माध्यम से हॉट-स्पॉट स्थापित कर प्रदेश भर में इंटरनेट की पहुंच बढ़ायी जायेगी। इस हेतु प्रथम चरण में 1,000 ग्राम पंचायतों में वाई.फाई की सुविधा के लिए पी.एम.वाणी परियोजना अंतर्गत 37 करोड़ का प्रावधान किया गया है। शासन के विभिन्न विभागों द्वारा उपयोग किये जा रहे ई.परिसंपत्ति, मोबाईल एप, एवं वेबसाईट की सायबर सुरक्षा हेतु आवश्यक जांच एवं सर्टिफिकेशन की व्यवस्था की जायेगी।
      कर प्रशासन में मजबूती एवं पारदर्शिता लाने के लिए सभी विभागों में आई.टी. टूल्स की सहायता ली जायेगी। कर प्राप्तियों में सुधार हेतु निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया जायेगा। वस्तु एवं सेवाकर के संकलन में सुधार एवं पारदर्शिता के लिए राज्य मुख्यालय में बिजनेस इंटेलिजेंस यूनिट की स्थापना की जायेगी। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं मशीन लर्निंग का उपयोग करते हुए डाटा ड्रिवन फ्रॉड एनालिसिस सहित राजस्व संवर्धन के अन्य उपाय सुनिश्चित किये जायेंगे। इस हेतु 09 करोड़ 50 लाख का प्रावधान किया गया है। वस्तु एवं सेवा कर संबंधी अपीलीय मामलों के त्वरित निराकरण हेतु अधिकरण की स्थापना के लिए 05 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
       भूमि एवं भवनों का हस्तांतरण तथा अन्य विविध पंजीकृत संव्यवहार हेतु राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली (NGDRS) सॉफ्टवेयर का उपयोग सभी जिलों में लागू किया जायेगा, इससे धोखाधड़ी एवं बेनामी लेन.देन की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा। विचाराधीन संपत्तियों का ऑटोवेल्यूवेशन मॉड्यूल के तहत बाजार मूल्य की ऑनलाईन गणना का विकल्प होने से राजस्व प्राप्तियों में वृद्धि होगी, इसके लिए 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
      छत्तीसगढ़ सरकार के वर्ष 2024-25 के बजट में रायपुर-भिलाई सहित आसपास के क्षेत्रों को स्टेट कैपिटल रीजन के रूप में विकसित कर यहां विश्वस्तरीय आई.टी. सेक्टर विकसित किया जायेगा। नवा रायपुर, अटल नगर में “लाईवलीहुड सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस” एवं दुर्ग जिले में “सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप” स्थापित किया जायेगा। स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए इन्यूबेशन सेंटर की स्थापना तथा बी.पी.ओ. एवं के.पी.ओ. को आकर्षित करने के लिए आई.टी. पार्क की स्थापना की जायेगी। नवा रायपुर में आई.टी. आधारित रोजगार सृजन हेतु ‘प्लग एण्ड प्ले’ मॉडल का विकास किया जायेगा, इससे आर्थिक विकास एवं रोजगार सृजन के नये अवसर विकसित होंगे।
      जल संसाधन के बेहतर प्रबंधन हेतु डिजिटल सूचना प्रणाली विकसित की जायेगी। इसके लिए राज्य जल सूचना केन्द्र की स्थापना हेतु 01 करोड़ 56 लाख का प्रावधान किया गया है। जल जीवन मिशन की मॉनिटरिंग के लिए डैशबोर्ड एवं राज्य पोर्टल के साथ-साथ शिकायत निवारण एवं नये कनेक्शन हेतु ऑनलाईन आवेदन की व्यवस्था शुरू की जायेगी। जल की गुणवत्ता की ऑनलाईन मॉनिटरिंग की जायेगी।
      भू.नक्शों का जियो.रिफ्रेन्सिंग कराया जायेगा तथा प्रत्येक भू.खंड में यू.एल.पिन नंबर देते हुए भू.आधार कार्ड जारी किया जायेगा। नगरीय क्षेत्रों में 1: 500 के स्केल पर भूमि का नवीन सर्वेक्षण प्रारंभ किया जायेगा। इससे शहरी क्षेत्रों में छोटे भू.खण्डों को भू.नक्शे पर दर्ज किया जाना संभव हो सकेगा। भू.अभिलेखों को सिविल न्यायालयों से लिंक किया जायेगा। इससे सिविल न्यायालय द्वारा भूमि संबंधी प्रकरणों में पारित आदेशों के परिपालन में भू.अभिलेख का सुधार कार्य ऑनलाईन प्रक्रिया से संभव हो सकेगा। भूमि व्यपवर्तन की प्रक्रिया को ऑनलाईन एवं सरल किया जायेगा।
       सायबर क्राईम के प्रकरणों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए कबीरधाम़, कोरबा, राजनांदगांव एवं रायगढ़ जिले में 04 नवीन सायबर पुलिस थानों की स्थापना के लिए बजट में प्रावधान किया गया है। ई.कोर्ट मिशन प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन हेतु हार्डवेयर इंजीनियर एवं डाटा एण्ट्री ऑपरेटर के 596 पदों के सृजन का प्रावधान किया गया है।

      विशेष लेख / शौर्यपथ / 01 नवम्बर 2000 को भारतीय गणराज्य के 26वें राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य का उदय हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 13 दिसम्बर 2023 को प्रदेश की बागडोर संभाली। उनके बागडोर संभालते ही प्रदेश में सुशासन का सूर्याेदय होने लगा है। प्रदेश सरकार सबका साथ-सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास ध्येय वाक्य को लेकर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में 02 माह की अल्पावधि में कई जनहितकारी फैसलों से समाज के हर वर्ग की तरक्की और खुशहाली के लिए अनेक कदम उठाए गए। सरकार की लोकप्रियता का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण स्वच्छ प्रशासन और सरकारी काम-काज में पारदर्शिता लाना है। प्रदेश का हर नागरिक चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण प्रदेश सरकार की कल्याणकारी सोच से वाकिफ है। लोगों का सरकार के प्रति विश्वास बढ़ रहा है। अल्प अवधि में राज्य सरकार ने जनता से किए गए वादे पूर्ण करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं, जिसके कारण प्रदेश में न्याय, राहत और विकास का नया दौर शुरू हुआ है। सेवा, सुशासन, सुरक्षा एवं विकास के संकल्प को लेकर प्रदेश सरकार जनता की सेवा में दिन-रात लगी हुई है।  
    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सरकार ने शपथ ग्रहण करते ही पहली कैबिनेट में 18 लाख हितग्राहियों को प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत पक्के आवास बनाने का निर्णय लिया गया। प्रदेश में कृषक उन्नति योजना के तहत सरकार ने प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान खरीदी का वादा भी निभाएगा और धान खरीदी की पारदर्शी और सुगम व्यवस्था भी की गई। इस वर्ष छत्तीसगढ़ में अब तक का सर्वाधिक धान खरीदी का कीर्तिमान स्थापित हुआ है। प्रदेश सरकार द्वारा धान उपार्जन के समय-सीमा 31 जनवरी से बढ़ाकर 04 फरवरी तक करने का एक बड़ा निर्णय लिया। सरकार के इस फैसले से प्रदेश के लाखों किसानों को इसका फायदा मिला। समर्थन मूल्य पर 144.92 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी हुई है। राज्य सरकार ने युवाओं के हित में बड़ा फैसला लेते हुए पीएससी भर्ती परीक्षा वर्ष 2022 प्रकरण की सीबीआई जांच कराने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ के स्थानीय निवासियों को शासकीय सेवाओं में भर्ती हेतु अधिकतम आयु सीमा की छूट अवधि पांच वर्षों के लिए बढ़ा दी गई है। सरकार के इस फैसले से अनेक युवाओं को इसका लाभ मिलेगा और वे नए सिरे से हर क्षेत्र में प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होंगे।
    भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्म दिवस सुशासन दिवस 25 दिसम्बर को 12 लाख से अधिक किसानों के बैंक खाते में 2 साल के धान के बकाया बोनस 3 हजार 716 करोड़ रूपए की अंतर राशि अंतरित कर दी गई है।
    प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के द्वारा पीवीटीजी  अर्थात् विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति समूहों (बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर एवं अबुझमाड़िया) को मूलभूत सुविधाओं जैसे पक्के आवास गृह, संपर्क सड़के, छात्रावास का निर्माण, शुद्ध पेयजल, विद्युतीकरण, बहुद्देशीय केन्द्रों, आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा वनधन केन्द्रों का निर्माण, मोबाइल टॉवर की स्थापना, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल से परिपूर्ण करने की दिशा में प्रदेश सरकार कृत संकल्पित है। तेन्दूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक 5500 रूपए प्रति मानक बोरा  प्रदाय किए जाने राज्य सरकार ने निर्णय लिया है। तेन्दूपत्ता, महुआ, इमली सहित सभी लघुवनोपजों से आजीविका के साधनों को मजबूत बनाने के लिए प्रदेश सरकार सर्वाेच्च प्राथमिकता देगी। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए प्रदेश के 50 लाख ग्रामीण परिवारों को निःशुल्क शुद्ध पेयजल की व्यवस्था के लिए नल कनेक्शन हेतु 4,500 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूरों को 10 हजार रूपए वार्षिक सहायता राशि प्रदान करने का बजट में प्रावधान किया गया है।
    मातृ शक्ति का सम्मान करते हुए माताओं और बहनों के सम्मान, स्वाभिमान, स्वावलंबन और सुरक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। उनकी सेहत शिक्षा और पोषण के लिए राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महतारी वंदन योजना लागू की है। इसके अंतर्गत 12 हजार रूपए वार्षिक आर्थिक सहायता प्रदान करने का वादा निभाने की दिशा में पहल प्रारंभ कर दिया गया है। अयोध्या धाम में प्रभु राम की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के प्रति लोगों की जिज्ञासा और अगाध श्रद्धा भाव का सम्मान करते हुए प्रदेश सरकार ने रामलला दर्शन योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया है, इसके तहत प्रतिवर्ष हजारों लोगों को अयोध्या धाम तथा काशी विश्वनाथ धाम, प्रयाग राज की तीर्थयात्रा कराई जाएगी। सामान्य परिवारों के लिए प्रतिमाह 400 यूनिट तक आधे दाम पर बिजली प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।  
    प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्य योजना के अंतर्गत दिसम्बर 2028 तक निःशुल्क चावल प्रदाय करने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ में इस योजना से 67 लाख 94 हजार अंत्योदय, प्राथमिकता, एकल निराश्रित एवं निःशक्तजन राशन कार्डधारियों को मासिक पात्रता का चावल दिया जाएगा। महिलाओं का जीवन आसान बनाने में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की बड़ी भूमिका रही है। इसके अंतर्गत प्रदेश में अब तक 36 लाख से अधिक नवीन गैस कनेक्शन जारी किए गए हैं। छत्तीसगढ़ के प्रमुख 5 शक्तिपीठों कुदरगढ़, चन्द्रपुर, रतनपुर, दंतेवाड़ा तथा डोंगरगढ़ को चारधाम की तर्ज पर विकसित करने की कार्ययोजना बनाई जा रही है। तीन नदियों की संगम राजिम मेले की राष्ट्रीय स्तर पर पुनः पहचान दिलाने के लिए राजिम कुंभ (कल्प) का आयोजन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ के समन्वित विकास के लिए कटघोरा से डोगढ़गढ़ तक रेललाईन निर्माण के लिए 300 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है।
    छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2024-25 के लिए 01 लाख 47 हजार 446 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। यह बजट सभी वर्गों के समावेशी विकास को सुनिश्चित करने वाले और विकसित छत्तीसगढ़ के सपने को साकार करने वाला बजट है। अमृत काल का छत्तीसगढ़ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

    साभार : 

    • छगनलाल लोन्हारे, 

              उप संचालक ( जनसंपर्क - रायपुर )

    हमारा शौर्य

    हमारे बारे मे

    whatsapp-image-2020-06-03-at-11.08.16-pm.jpeg
     
    CHIEF EDITOR -  SHARAD PANSARI
    CONTECT NO.  -  8962936808
    EMAIL ID         -  shouryapath12@gmail.com
    Address           -  SHOURYA NIWAS, SARSWATI GYAN MANDIR SCHOOL, SUBHASH NAGAR, KASARIDIH - DURG ( CHHATTISGARH )
    LEGAL ADVISOR - DEEPAK KHOBRAGADE (ADVOCATE)
    © 2015 Shouryapath. All Rights Reserved. Designed By Global Vision