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भिलाई भाजपा की नई टीम पर 'दाग' की कालिख: अपराधियों, सटोरियों और गुंडों को मिली कमान!

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भिलाई | भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) भिलाई जिले की नवनियुक्त कार्यकारिणी विवादों के घेरे में आ गई है। पार्टी की नई टीम में 'युवा जोश' की जगह 'आपराधिक इतिहास' को तरजीह दिए जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। जैसे ही कार्यकारिणी की सूची जारी हुई, पार्टी के भीतर और बाहर हड़कंप मच गया है।

प्रमुख बिंदु: जो पार्टी की साख पर सवाल उठा रहे हैं

दागी चेहरों का दबदबा: नई कार्यकारिणी में ऐसे युवाओं को पदाधिकारी बनाया गया है, जिन पर लूट, मारपीट, धोखाधड़ी और महिलाओं से बदसलूकी जैसे संगीन मामले दर्ज हैं।

महादेव सट्टा एप से कनेक्शन: चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ पदाधिकारी चर्चित 'महादेव सट्टा एप' मामले में भी आरोपी हैं और जेल की हवा खा चुके हैं।

गैंगस्टर लिंक: रिपोर्ट के अनुसार, सूची में शामिल कुछ नामों का संबंध कुख्यात गैंगस्टरों के साथ भी बताया जा रहा है।

भीतरघात और बगावत: घोषणा के महज 24 घंटे के भीतर 10 मंडल अध्यक्षों ने इस सूची को खारिज करते हुए अपनी समानांतर सूची जारी कर दी है, जिससे पार्टी में गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है।

पार्टी की फजीहत, नेतृत्व ने माँगा स्पष्टीकरण

मामले की गंभीरता और बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने भिलाई जिलाध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन और युवा मोर्चा अध्यक्ष सौरभ जायसवाल को तलब किया है।

जिलाध्यक्ष का बचाव: सौरभ जायसवाल ने सफाई देते हुए कहा है कि जिन लोगों पर आरोप हैं, उनसे "चरित्र प्रमाण पत्र" माँगे गए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अभी सिर्फ आरोप लगे हैं, अपराध सिद्ध नहीं हुआ है।

निष्कर्ष

शुचिता की राजनीति का दावा करने वाली पार्टी के लिए यह स्थिति बेहद शर्मनाक साबित हो रही है। एक तरफ जहां युवाओं को जोड़ने की बात हो रही है, वहीं 'लिस्टेड अपराधियों' को पद बांटने से निष्ठावान कार्यकर्ताओं में भारी रोष है। अब देखना यह है कि क्या प्रदेश नेतृत्व इन नियुक्तियों को रद्द कर 'छवि सुधार' की दिशा में कदम उठाता है या नहीं।

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शौर्यपथ

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