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समोदा अफीम कांड: कांग्रेस महामंत्री ने SP पर कार्रवाई की उठाई मांग, बयान ने खड़े किए राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल Featured

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दुर्ग। दुर्ग जिले के ग्राम समोदा में अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में लगातार बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी क्रम में दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी की नवनियुक्त महामंत्री निकिता मिलिंद ने जिला पुलिस अधीक्षक (SP) पर भी कार्रवाई की मांग उठाते हुए सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में इसे जल्दबाजी और राजनीतिक अपरिपक्वता से जोड़कर भी देखा जा रहा है। ⚖️

निकिता मिलिंद ने अपने बयान में कहा कि ग्राम समोदा में लगभग 8 से 10 एकड़ खेत में अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आना बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में जिस “सुशासन” की बात कही जा रही है, वह अब “सूखा नशा आसन” बनता दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार अफीम वही पौधा है जिससे आगे चलकर हेरोइन जैसे घातक नशीले पदार्थ तैयार होते हैं, इसलिए इतने बड़े स्तर पर इसकी खेती का सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

SP की जवाबदेही पर उठाया प्रश्न

कांग्रेस महामंत्री ने कहा कि जब किसी छोटे मामले में आरक्षक या थानेदार को तत्काल लाइन अटैच कर दिया जाता है, तो इतने बड़े स्तर पर चल रही अफीम की खेती आखिर पुलिस और प्रशासन की नजर से कैसे छिपी रही। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जिम्मेदारी तय होती है तो क्या वही मापदंड जिले के पुलिस अधीक्षक पर भी लागू किए जाएंगे, जो सामान्य पुलिसकर्मियों पर लागू होते हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और यह स्पष्ट करने की मांग की कि इस अवैध खेती के पीछे किन-किन लोगों की भूमिका है।

सरकार पहले ही दे चुकी है सख्त कार्रवाई का संदेश

गौरतलब है कि इस मामले में प्रदेश सरकार पहले ही कड़ा रुख अपना चुकी है। गृहमंत्री विजय शर्मा विधानसभा में स्पष्ट रूप से कह चुके हैं कि नशे के अवैध कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को संरक्षण नहीं दिया जाएगा और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच प्रशासनिक स्तर पर जारी है और संबंधित विभाग लगातार तथ्य जुटा रहे हैं।

राजनीतिक बयान या अपरिपक्वता?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब जांच प्रक्रिया अभी जारी है और सरकार स्वयं सख्त कार्रवाई का संकेत दे चुकी है, ऐसे समय में सीधे जिला पुलिस अधीक्षक पर कार्रवाई की मांग करना राजनीतिक रूप से जल्दबाजी भरा कदम माना जा सकता है। कुछ जानकार इसे नई जिम्मेदारी संभालने के बाद दिए गए अपरिपक्व राजनीतिक बयान के रूप में भी देख रहे हैं।

फिलहाल समोदा अफीम कांड में जांच आगे बढ़ रही है और प्रदेश की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासनिक जांच के बाद किन-किन स्तरों पर जिम्मेदारी तय होती है। 

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