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पुलवामा: सात वर्ष बाद भी अमर है बलिदान की ज्योति Featured

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   नई दिल्ली / 14 फरवरी 2026—यह तारीख देश की स्मृति में केवल एक दिन नहीं, बल्कि राष्ट्र की चेतना में अंकित वह पीड़ा है, जिसने पूरे भारत को एक सूत्र में बाँध दिया। सात वर्ष पूर्व, 14 फरवरी 2019 को पुलवामा के लेथपोरा में हुए भीषण आतंकी हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 40 वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था।

आज उनकी सातवीं बरसी पर सम्पूर्ण राष्ट्र उन्हें नमन कर रहा है। यह दिन ‘ब्लैक डे’ के रूप में याद किया जाता है—दुख का प्रतीक, लेकिन साथ ही अदम्य साहस, एकता और राष्ट्रभक्ति का भी प्रतीक।


लेथपोरा मेमोरियल पर श्रद्धा-सुमन

हमले के स्थल के समीप बने लेथपोरा शहीद स्मारक पर आज विशेष श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। शहीदों के चित्रों और नामों के सामने पुष्पचक्र अर्पित किए गए, गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और वातावरण “वीर शहीद अमर रहें” तथा “जय हिंद” के नारों से गूंज उठा।

हर पुष्पचक्र मानो राष्ट्र की ओर से एक वचन था—कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।


प्रधानमंत्री का नमन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा। यह संदेश केवल शब्द नहीं, बल्कि उस संकल्प का प्रतीक है जो हर भारतीय के हृदय में बसता है।


देशभर में कार्यक्रमों की श्रृंखला

  • राजस्थान के नागौर में त्यागी सेवा समिति द्वारा विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

  • विभिन्न स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में प्रार्थना सभाएं, दो मिनट का मौन और देशभक्ति गीतों के माध्यम से शहीदों को नमन किया गया।

  • चंडीगढ़ सहित कई शहरों में युवाओं और एनसीसी कैडेट्स ने कैंडल लाइट मार्च निकालकर शहीदों के प्रति सम्मान प्रकट किया।

इन कार्यक्रमों में केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति समर्पण की सच्ची भावना दिखाई दी।


डिजिटल श्रद्धांजलि और ‘ब्लैक डे’ अभियान

सोशल मीडिया पर #PulwamaAttack, #BlackDay और #LestWeForget जैसे हैशटैग्स के साथ लाखों देशवासी शहीदों को याद कर रहे हैं। कई लोगों ने अपनी प्रोफाइल तस्वीर काली कर डिजिटल माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की।

यह डिजिटल युग की वह अभिव्यक्ति है, जहाँ हर नागरिक अपने स्तर पर राष्ट्र के शहीदों के प्रति सम्मान प्रकट कर रहा है।


बलिदान जो प्रेरणा बन गया

पुलवामा का वह काला दिन भारत को तोड़ नहीं सका—बल्कि और अधिक मजबूत बना गया। शहीदों का बलिदान हमें याद दिलाता है कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए हमारे वीर जवान हर क्षण अपने प्राणों की आहुति देने को तत्पर रहते हैं।

आज आवश्यकता है कि हम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित न रहें, बल्कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारें—कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन, साहस और राष्ट्रप्रेम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

जब-जब तिरंगा लहराएगा, जब-जब राष्ट्रगान गूंजेगा, तब-तब पुलवामा के वीर सपूतों की स्मृति हमारे हृदय में जीवित रहेगी।

वीर शहीद अमर रहें।
जय हिंद।
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