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श्रीमद्भागवत कथा समाज को संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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    रायपुर, । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि श्रीमद्भागवत कथा समाज को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की आध्यात्मिक विरासत प्रदेश की सबसे बड़ी धरोहर है, जिसके संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री रविवार शाम राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। उन्होंने कथा व्यास श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया तथा श्रीमद्भागवत जी की विधिवत आरती एवं वंदन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका होने के साथ-साथ भगवान श्रीराम की वनगमन स्थली भी है, जिससे प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान और अधिक गौरवशाली बनती है। उन्होंने शिवरीनारायण, राजिम कुंभ तथा प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये स्थल छत्तीसगढ़ की समृद्ध धार्मिक परंपरा के प्रतीक हैं।

श्री साय ने बताया कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का प्रभावी संचालन कर रही है। उन्होंने कहा कि अब तक करीब 50 हजार श्रद्धालु रामलला दर्शन योजना का लाभ ले चुके हैं, जबकि बुजुर्गों को विभिन्न तीर्थस्थलों के दर्शन भी कराए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए राज्य सरकार धर्म स्वातंत्र्य कानून को प्रभावी ढंग से लागू कर रही है। साथ ही गौधाम योजना के माध्यम से गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजन समाज में सेवा, करुणा, सद्भाव, नैतिकता और लोककल्याण की भावना को मजबूत करते हैं। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीवलोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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