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छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी को 50 लाख का ऐतिहासिक सम्मान: कबड्डी वर्ल्ड कप की MVP ने रचा गौरव का नया अध्याय Featured

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रायपुर ।
भारत को कबड्डी विश्वकप और एशियन चैंपियनशिप जिताने में निर्णायक भूमिका निभाने वाली छत्तीसगढ़ की होनहार खिलाड़ी संजू देवी को राज्य सरकार ने 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया है। यह प्रदेश के खेल इतिहास में पहली बार है जब किसी खिलाड़ी को इतनी बड़ी राशि प्रदान की गई है। उप मुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री श्री अरुण साव ने नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में आयोजित समारोह में संजू को चेक सौंपा। इस अवसर पर बिलासपुर के चिंगराजपारा कबड्डी क्लब को कबड्डी मैट भी प्रदान किया गया।

संजू देवी ने अपने दमदार प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया। नवंबर 2025 में बांग्लादेश में आयोजित कबड्डी वर्ल्ड कप में उन्हें “मोस्ट वैल्यूएबल प्लेयर (MVP)” चुना गया। फाइनल मुकाबले में भारत के कुल 35 अंकों में से 16 अंक अकेले संजू ने अर्जित किए, जो उनकी निर्णायक भूमिका को दर्शाता है। सेमीफाइनल सहित पूरे टूर्नामेंट में उनके खेल ने टीम इंडिया को चैंपियन बनाने में अहम योगदान दिया।

कोरबा जिले के छोटे से गांव केराकछार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाली 23 वर्षीय संजू श्रमिक परिवार से आती हैं। उन्होंने जुलाई 2023 से बिलासपुर की बहतराई आवासीय बालिका कबड्डी अकादमी में प्रशिक्षण लेकर अपने खेल को निखारा। वे छत्तीसगढ़ की पहली महिला कबड्डी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया और दो प्रमुख प्रतियोगिताओं—एशियन चैंपियनशिप (ईरान, मार्च 2025) और वर्ल्ड कप—में भारत को स्वर्ण दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने संजू की उपलब्धि को प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को हरसंभव मंच और संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि संजू जैसी बेटियां आज नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन रही हैं और आने वाले समय में प्रदेश का नाम और ऊंचा करेंगी।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि संजू देवी का प्रदर्शन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाने वाला है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार खेल और खिलाड़ियों के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है और विशेष रूप से महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया जा रहा है।

संघर्ष से शिखर तक का सफर
संजू देवी की कहानी संघर्ष, अनुशासन और अटूट जज्बे की मिसाल है। गरीबी और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून, मानसिक मजबूती और कड़ी मेहनत के बल पर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया। ईस्ट जोन और ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी प्रतियोगिताओं से लेकर इंडिया कैंप और फिर भारतीय टीम तक उनका चयन लगातार बेहतर प्रदर्शन का परिणाम रहा।

आज संजू देवी केवल एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं। उनकी उपलब्धि यह संदेश देती है कि प्रतिभा और परिश्रम के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

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