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शहर से लगे गांव में धड़ल्ले से पैर पसार रहे भू-माफि या जिम्मेदार अधिकारियों के चुप्पी से उठ रहे सवाल

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धमतरी /शौर्यपथ/

  राजधानी की तजऱ् पर धमतरी जिला में अवैध प्लाटिंग धड़ल्ले से लगातार जारी है। अवैध प्लाटिंग के चलते नए बेतरतीब बसाहट की समस्या नियंत्रण के बाहर होती जा रही है। इस पर ब्रेक लगाने के मामले में जिला प्रशासन , राजस्व विभाग और नगर निगम फेल्यूअर साबित हो रहा है।

ताजा मामला सोरम का..
जिला मुख्यालय और प्रशासनिक आवास के आसपास तो प्लाटिंग का खेला हो ही चुका है जिसमें अनेक पक्षों के मुंह में मीठे स्वाद वाले लड्डू का वितरण भी किया जा चुका है लेकिन अधिकारी बदहजमी के मद्देनजर नाम मात्र की कार्यवाही दिखावे के लिए की थी लेकिन अब भू माफिया शहर से लगे गांव मेंआपनी पैठ जमा कर सांठगांठ के चलते अवैध मंसूबों पर कामयाब होते दिखाई दे रहे हैं
ताजा मामला जिला मुख्यालय से लगे महज़ तीन किलोमीटर की दूरी पर ग्राम पंचायत सोरम के रोड से लगे कृषि भूमि में मुरुम बिछा कर प्लॉटिंग किया जा चुका है। वही भू माफिया भोले भाले किसानों के कृषि भूमि को अनाप शनाप रेट में खरीदारी कर छोटे छोटे टुकड़ों मे प्लॉटिंग कर बड़े रकम मे बेच रहे हैं जिस पर जिम्मेदार अधिकारी मौन है।

कलेक्टर एवं अधिकारी बंगला के पीछे ही हो रही है प्लॉटिंग...
आपको बता दें कि जिला मुख्यालय और कलेक्टर निवास से लगे आसपास के क्षेत्र में बेतहाशा प्लाटिंग चल रही है जिसमे बड़े व्यापारी, और रसूखदार व्यक्ति शामिल हैं,। वर्तमान समय में जमीन के रेट को देखते हुए बड़े व्यापारी अपने रुपयों को ब्याज दर में देने के बजाय ज़मीन में ज्यादा इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं । साथ ही बड़े सफेदपोश नेताओं एवं प्रशाशनिक अधिकारियों, पटवारी के मिलीभगत से अपने अवैध मंसूबों में कामयाब हो रहे हैं जिसकी भनक विभाग को नही लग रहा है या यूं कहें कि जानबूझकर अनभिज्ञ हो रहे हैं।वहीं अवैध प्लाट काट काट कर बेचने वाले पर्दे के पीछे हैं बिना ले आउट, डायवर्सन के प्लाट खरीदने वाले अनियमित विकास की परेशानी झेल रहे हैं। साफ है कि विभागीय अफसर बड़े व्यपारियो से मिलीभगत कर अवैध प्लाटिंग कर रहे हैं ऐसा मिलीभगत और रसूखदारों के दबाव के चलते हो रहा है ।

अवैध प्लाटिंग रोकने कलेक्टर पहल करें ...

खेत में मुरम की रोड बना कर सस्ते में प्लॉट बेचने का खेल जमाने से क्यों चल रहा है? प्लॉट बेचने वाले पर्दे के पीछे चले जाते हैं। दलाल को मोटी रकम मिल जाती है अनियमित विकास और अवैध कालोनाइजर की समस्या से आखिर में जनता ही पिसती है। अवैध प्लाटिंग पर कार्रवाई के मामले में यदि नगर निगम के अफसर खसरा नंबर पर अटक जाते हैं, तो राजस्व विभाग व पटवारी को उसे उपलब्ध कराने का निर्देश कौन देगा? खेतों के छोटे छोटे प्लॉट काट काट कर बेचने के लिए यदि दलाल, अवैध कालोनाइजर किसान से एग्रीमेंट कर कमाई कर रहे हैं, तो उनकी जमीन की रजिस्ट्री क्यों हो रही है? इन सब पर रोक लगाने के लिए रजिस्ट्री,नगर तथा ग्राम निवेश विभाग, नगर निगम और राजस्व विभाग के बीच जब तक समन्वय नहीं होगा, रसूखदार अवैध कालोनाइजर, अवैध प्लाट बेचने वालों पर कार्रवाई नहीं हो पाएगी। इनके बीच समन्वय स्थापित करने के लिए कलेक्टर एवं निगमायुक्त ही पहल कर सकते हैं। निगम से मकान नक्शा पास कराए बिना लोग मकान इसीलिए बना रहे हैं,क्योंकि आर्किटेक्ट, इंजीनियरों का पंजीयन करने वाले निगम के अधिकारियों का उन पर दबाव नहीं है। मकान नक्शे के विपरीत निर्माण पर कार्रवाई नहीं हो रही है, तो इसके लिए निगम के इंजीनियर, सेनेटरी इंस्पेक्टर सब पर कार्रवाई होनी चाहिए,मकान निर्माण के बाद उसका पूर्णता प्रमाण पत्र लेना जब तक अनिवार्य नहीं होगा ,कोई निगम से दखलकारी अनुज्ञा लेने नही आएगा...

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PANKAJ CHANDRAKAR

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