सारंगढ़ /शौर्यपथ/
कोरोनाकाल में जिस तरह देश और प्रदेश विषम परिस्थितियों से गुजरा उस वक्त भारी दुखद स्थिति से स्वास्थ्य कर्मी सुरक्षा कर्मी के साथ अनेक विभाग के कर्मचारियों ने अहम भूमिका निभाया यह सराहनीय योगदान रहा जिसे भुलाया नहीं जा सकता इसमें पंचायत की भी बढ़ी भूमिका नजर आया जहा पंचायत के प्रमुख सरपंचों ने भी दिन रात अपने गांव के लोगो के लिए कार्य करते रहे एक तरह से देखा जाए तो सरपंचों ने ही पूरा व्यवस्था को लेकर जिम्मेदारी उठाया था .
वहीं पंचायत प्रतिनिधियों अपने गांव को छोड़कर जितने भी बाहर रोजी मजदूरी करने गए थे उनकी वापसी को लेकर डाटा एकत्रित कर आलाधिकारियों को देना साथ ही उन सभी प्रवासी मजदूरो के लिए रहना और उनका पूरा भोजन व्यवस्था करना उस समय सरपंचों ने वित्त के पैसों के साथ अपने खुद के निजी पैसे को खर्च करना पड़ा था,प्रशासनिक स्तर पर आश्वाशन दिया गया था। कि आप जितने कि राशि खर्च कर रहे है वो सब आपको शासन से मिल जाएगा किन्तु अभी तक राशि आधा अधूरा ही मिल पाया है जिससे पंचायतों में रोष व्यप्त हो रहा है,
कोरोनाकाल में खर्च हुए राशि अब तक पंचायतों को नहीं मिला
विगत दिनों सरपंचों ने प्रवासी मजदूरों के आने जाने का गाड़ी बुकिंग कर उनके रहने खाने के साथ अन्य जरूरी सामग्रियों के लिए लाखो रुपए खर्च किए थे कई दुकानों में उधारी कर खाद्य सामग्री उपलब्ध कराया गया था ,यहाँ तक कि पंचायतों ने कर्ज लेकर सारा खर्च का प्रबन्ध किया था सभी पंचायतों में लाखो रुपए खर्च किए थे लेकिन अभी तक उन्हे शासन से पूरा पैसा नहीं मिला, कहा गया था कि आपको हर खर्च की राशि मिलेगा लेकिन अब तक नहीं मिला हालाकि शासन ने कुछ राशि पंचायतों को प्रदान किया था लेकिन अब भी हजारों लाखो का भुगतान करना बाकी है राशि ना मिलना पंचायतों के लिए बन रहा है सिर दर्द सिर्फ महामारी मे खर्च हुए एक राशि नहीं है इसी तरह और भी कई विकास कार्य की भी राशि पंचायतों में आना बाकी है अगर सरकार समय अनुरूप राशि दे देती है तो पंचायतों को काम करने और आर्थिक तंगी से जूझना नहीं पड़ेगा .