दुर्ग / शौर्यपथ / भूपेश सरकार के चौथे बजट की घोषणा करते ही भूपेश सरकार और कांग्रेस ने अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव में अपनी जीत पक्की कर ली . जिस तरह से जनहित के फैसले लेने में भूपेश सरकार ने अपना पक्ष रखा है उससे कर्मचारी वर्ग , शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग , किसान वर्ग , व्यापारी वर्ग , आदिवासी वर्ग सहित किसी भी प्रकार का नया टेक्स ना लगा कर माध्यम वर्ग को अपने बजट से खुश किया है उससे यह तो निश्चित है कि भूपेश सरकार को इसका फायदा आने वाले विधान सभा चुनाव में जरुर मिलेगी . वर्तमान राजनितिक स्थिति की बात करे तो छत्तीसगढ़ में अब भाजपा के पास कोई चुनावी मुड़े नहीं बचे है . कुछ मुद्दों पर भाजपा ज़रूर कांग्रेस को घेरने की कोशिश करेगी किन्तु ये मुद्दे आम जनता के दिलो पर घर नहीं कर पायेंगे . जिस तरह की स्थिति वर्तमान में प्रदेश में है उससे अब भाजपा को भी २०२३ के विधान सभा चुनाव के बदले २०२८ के विधान सभा चुनाव की तैयारियों की सोंच्नी चाहिए .
ऐसा नहीं है कि भाजपा के समर्थको की प्रदेश में कोई कमी है और विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के पास संगठन की क्षमता नहीं है किन्तु संगठन में जिस तरह की गुट बाजी हावी है वही प्रदेश में कोई बड़ा छत्तीसगढ़ी चेहरा का ना होना प्रदेश में भाजपा को कमजोर कर रहा है . प्रदेश में भाजपा को अब कोई मजबूत चेहरा चाहिए विपक्ष की मजबूत भागीदारी चाहिए , भाजपा के संगठन में एकाधिकार जमाये नेताओ में एका की ज़रूरत अब भाजपा के जमीनी स्तर के कार्यकर्ता भी महसूस कर रहे है . मुकाबले के लिए तो जमीनी कार्यकर्ता तैयार है किन्तु आपसी गुटबाजी के चलते प्रदेश में भाजपा कमजोर नजर आ रही है .