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अधेड़ उम्र के लोग जीवन को लेकर सबसे ज्यादा सकारात्मक,सर्वे में खुलासा

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लाइफस्टाइल /शौर्यपथ /ऐसा माना जाता है कि अधेड़ उम्र में लोगों का व्यवहार रूखा और चिड़चिड़ा हो जाता है। लेकिन, अधेड़ उम्र के लोग असल में अन्य उम्र के लोगों की तुलना में ज्यादा सकारात्मक होते हैं। एक हालिया शोध के अनुसार 40 से 60 साल की उम्र के लोग युवाओं और बुजुर्गों की तुलना में कहीं ज्यादा सकारात्मक होते हैं।

अमेरिका और नीदरलैंड में 30,000 लोगों पर किए गए शोधों की समीक्षा करने वाले शोधकर्ताओं ने पाया कि अधेड़ उम्र के लोग जीवन में अच्छी चीजें होने लेकर ज्यादा सकारात्मक होते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अधेड़ लोग जो अपने जीवन में मूल्यों और संतुष्टि को ज्यादा कीमती समझते हैं वे अच्छी बातों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं। हालांकि, शोध में यह पता चला कि जर्मनी के लोग अधेड़ उम्र में भी सकारात्मक नहीं होते। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विलियम चोपिक ने कहा, जैसे-जैसे लोग परिपक्व होते हैं वे अपने काम में अधिक सक्षम हो जाते हैं।

सफलता उनके लिए थोड़ी आसान हो जाती है क्योंकि वे अपने जीवन के विभिन्न कार्यों में महारत हासिल कर लेते हैं, इसलिए वे अधेड़ उम्र तक पहुंचते ही अधिक आशावादी बनने लगते हैं। अधेड़ उम्र के लोग जीवन में आगे बढ़ने पर कम ध्यान केंद्रित करते हैं और जो वर्तमान में मौजूद है उसे खुशी से जीने को कोशिश करते हैं।

अमेरिका और नीदरलैंड में यह सकारात्मक रवैया 60 साल की उम्र के बाद घटने लगता है। प्रोफेसर चोपिक ने जर्नल ऑफ रिसर्च इन पर्सनैलिटी ने बताया कि सकारात्मक रवैया स्वास्थ्य और लोगों के नजरिये से जुड़ा होता है इसलिए उम्र बढ़ने पर इसमें कमी आती है।

 

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शौर्यपथ