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नई दिशा:समय का प्रबंधक है टाइम बॉक्सिंग, जानिए ये कैसे काम करता है

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अन्य खबर /शौर्यपथ/

टाइम बॉक्सिंग एक सरल और लोकप्रिय समय प्रबंधन तकनीक है जो आपको अपने शेड्यूल पर बेहतर नियंत्रण रखने में मदद करती है। यह आत्म-अनुशासन का अभ्यास करने और अपने कार्यों को व्यवस्थित करने के लिए भी उपयोगी है। इसमें समय के मुताबिक़ कार्यों को किया जाता है, ताकि वक़्त का सही उपयोग हो सके। टाइम बॉक्सिंग के साथ, आप इस बात पर भी अधिक ध्यान दे सकते हैं कि आपने किसी निश्चित कार्य पर कितना समय बिताया और वह कार्य कितने बेहतर तरीक़े से हो पाया।


टाइम बॉक्सिंग के ज़रिए आप अपनी उत्पादकता को भी बढ़ा सकते हैं और ध्यान को एक ही कार्य पर केंद्रित कर सकते हैं। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

 टाइम बॉक्सिंग के फ़ायदे

टाइम बॉक्सिंग के माध्यम से किसी भी कार्य पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जिससे उस कार्य को अच्छे तरीक़े से किया जा सके।

इस तकनीक के ज़रिए उन कार्यों को चिह्नित कर सकते हैं, जो अधिक ज़रूरी हैं और फिर उनकी प्राथमिकता को निर्धारित करके उनको क्रमानुसार पूरा किया जा सकता है।

टाइम बॉक्सिंग को लागू किया जाए तो इससे किसी भी कार्य में हो रही व्यर्थ की देरी से बचा जा सकता है। किसी भी काम में ज़रूरत से ज़्यादा माथापच्ची से बचने में भी मदद मिल सकती है।

इस प्रबंधन मंत्र का एक और पहलू यह भी है कि इसके माध्यम से किए जाने वाले कार्यों का बेहतर तरीक़े से आकलन कर सकते हैं। इससे यह पता लगाना आसान होता है कि तय समय में कितना काम किया जा सकता है। भविष्य के कार्यों का एक लेखा-जोखा तैयार कर सकते हैं कि एक टाइम-लिमिट के भीतर कितना कार्य किया जा सकता है।
टाइम बॉक्सिंग तकनीक को अपनाने से कार्य हल्के-फुल्के तरीक़े से किया जा सकता है व बोझिल महसूस नहीं होता। निश्चित रूप से इससे उत्पादकता या प्रोडक्टिविटी में बढ़ोतरी होती है।
इस तरह से न केवल कार्य का निर्धारण कर सकते हैं बल्कि कार्य के बीच में एक निश्चित अंतराल भी लागू कर सकते हैं। मिसाल के तौर पर अगर किसी कार्य को एक तय समय पर पूरा करते हैं और उसके बाद अगले कार्य के लिए कुछ मिनट या घंटे का अंतराल रखते हैं, तो इसका फ़ायदा यह होगा कि हमें थकान का एहसास नहीं होगा और हमारी दिनचर्या में जो अगले काम होंगे उनको भी बेहतर उत्पादकता के साथ पूरा कर सकेंगे।
टाइम बॉक्सिंग के ज़रिए आप किसी विशिष्ट कार्य पर कितना समय व्यतीत करेंगे इसे लेकर सीमाएं निर्धारित कर सकते हैं। ख़ासतौर पर सुबह के कार्यों के लिए इस तकनीक का प्रयोग करना बेहतर रहता है। महिलाओं के लिए ये अधिक लाभकारी है, क्योंकि सुबह का वक़्त उनके लिए काफ़ी व्यस्ततापूर्ण होता है।
इसे अपनाने से कार्य निर्धारित किए जाने से यह फ़ायदा भी होगा कि टालमटोल की प्रवृत्ति से छुटकारा मिलेगा। साथ ही कार्य की जवाबदेही भी तय होगी जिससे काम तेज़ी से होगा और जिसको जो कार्य निर्धारित किया जाएगा, वह उसको पूरी ज़िम्मेदारी से निभाएगा।
टाइम बॉक्सिंग को कैसे लागू करें?

यह तकनीक काम से ज़्यादा उसमें लगने वाले ‘समय’ पर फोकस करती है और इसे अपनाते समय इसी बात पर ध्यान देना होगा?

काम चाहे घर का हो या ऑफिस का, अगर लम्बा है, तो उसे कुछ भागों में विभाजित कर लें या किसी और को सौंप कर कुछ हिस्सा करवा सकते हों, तो वैसा करें।
हर हिस्से को पूरे करने में कितना समय लगना है, यह तय करें और उतनी ही समय- सीमा बांध लें।
अगर आपने किसी काम के लिए 25 मिनट का समय तय किया था और वो उतने समय में ना हो पाया हो, तो ज़ाहिर है कि आपकी इच्छा होगी कि समय को बढ़ा लिया जाए, लेकिन यह टाइम बॉक्सिंग का नियम है और फायदा भी कि आप समय नहीं बढ़ा सकते।
अब फायदे को समझते हैं। अगर आपने तयशुदा सीमा में काम पूरा नहीं किया, तो विश्लेषण कीजिए कि ऐसा क्यों नहीं हुआ। ऐसा न कर पाने के कारण काम को कितने मिनट और आगे बढ़ाना होगा। अपने काम के तरीकों और गति पर भी नज़र डालने का मौका आपके पास होगा।
टाइम बॉक्सिंग को अगर पूरी योजना के साथ, हर काम में लागू किया जाए, तो कुछ ही दिनों में न सिर्फ आपकी, बल्कि आपके साथ काम करने वालों की कार्यक्षमता में बढ़ोतरी होगी, बल्कि काम समय पर भी पूरा होने लगेगा। शायद आपको नए विचारों के लिए अधिक समय मिल सके।

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PANKAJ CHANDRAKAR