Print this page

मछली पालन से बढ़ी आमदनी, सपने हो रहे पूरे

  • doing of business

राज्य में मत्स्य पालन को दिया गया है कृषि का दर्जा
रायपुर /शौर्यपथ/

मछली पालन से बढ़ी आमदनी, सपने हो रहे पूरे

छत्तीसगढ़ में नई सरकार के गठन के बाद जनकल्याणकारी नीतियों ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी आदमनी बढ़ाने नए द्वार खोल दिए हैं। इसकी बानगी गरियाबंद के फिंगेश्वर विकासखंड के किसान परिवार में देखने को मिली, जहां किसान बालचंद साहू ने परम्परागत खेती के इतर मछली पालन में संभावनाएं तलाशीं और उम्मीद के मुताबिक सफलता भी पायी। मछली पालन से आर्थिक समृद्धि की ओर कदम बढ़ाकर यह किसान परिवार अपनी दैनिक जरूरतों के अलावा दूसरी भौतिक सुविधाओं के सपने को भी पूरा कर रहा है।

गौरतलब है कि राज्य में नई सरकार ने मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा दिया है। इसके बाद प्रदेश के कई हिस्सों में छोटे और मझोले किसान धान और गेंहू जैसी परम्परागत खेती के अलावा मछली पालन जैसे उपाय अपना रहे हैं। राज्य के साथ बाहरी राज्यों में अच्छा बाजार मिलने के कारण इन किसानों को बेहतर आमदनी भी हो रही है। इन्हीं में से एक गरियाबंद के ग्रामीण अंचल के किसान  बालचंद बताते हैं कि उनकी 18 एकड़ की पुस्तैनी जमीन है। लम्बे समय तक वे अपनी जमीन में धान की फसल लेते रहे, लेकिन उन्हें लागत की अपेक्षा लाभ कम ही हो पा रहा था। ऐसे में राज्य सरकार की योजना और प्रोत्साहन से उन्होंने मत्स्य पालन का सोचा। किसान बालचंद ने पहले अपनी एक हेक्टेयर जमीन में तालाब का निर्माण कराया और मत्स्य विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में मछली पालन करना शुरू किया। मत्स्य पालन विभाग द्वारा उन्हें वर्ष 2019-20 में राष्ट्रीय कृषक विकास योजना अंतर्गत 40 प्रतिशत की दर से अनुदान राशि 2.80 लाख रूपये स्वीकृत किया गया। उक्त राशि से उन्होंने स्वयं के तालाब में मत्स्य पालन का विस्तार किया गया। अक्टूबर 2020 में उन्होंने 50 टन मत्स्य उत्पादन कर बाजारों में बिक्री कर अच्छी आमदनी अर्जित की। आमदनी के अच्छी जरिया मिलने से बालचंद ने अपने कृषि भूमि में एक हेक्टेयर का एक और तालाब बनवाया।

दूसरों को भी मिला रोजगार -

बालचंद ने बताया कि मछली पालन कार्य करने से मेरे साथ-साथ इस कार्य में जुड़े अन्य लोगों की भी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन कार्य में 5 मजदूर नियमित कार्यरत है। साथ ही पास-पड़ोस के 50 व्यक्ति रोज उनके फार्म से 25 से 50 किलोग्राम मछली खरीदकर गांवों में विक्रय कर आमदनी अर्जित कर रहे है।  बालचंद मत्स्य पालन व्यवसाय से उत्साहित होकर अब हेचरी निर्माण की ओर अग्रसर है।

उद्यानिकी में भी किया नवाचार -

किसान बालचंद साहू ने अपनी आमदनी का स्त्रोत बढ़ाने के लिए उद्यानिकी में भी नवाचार किया। इसके लिए उन्होंने तालाब में मछली पालन के अलावा तालाब के मेढ़ पर उद्यानिकी एवं दलहनी फसलों के साथ कटहल, पपीता, नींबू के पौधे रोपित किए और अपनी आमदनी का जरिया बढ़ाया।

 

Rate this item
(0 votes)
PANKAJ CHANDRAKAR

Latest from PANKAJ CHANDRAKAR