16 जिलों के समाजजन पहुंचे दुर्ग, पटेल चौक पर चक्का जाम… देवालय खोलने और नए अध्यक्ष को भवन सौंपने की मांग
दुर्ग। केंद्रीय गोंडवाना धमधागढ़ देवालय एवं गोंडवाना भवन को लेकर आदिवासी समाज में लंबे समय से चल रहा विवाद सोमवार को खुलकर सड़क पर दिखाई दिया। समाज के आस्था केंद्र माने जाने वाले इस देवालय में तालाबंदी की कार्रवाई के विरोध में 16 जिलों से पहुंचे समाजजनों ने पहले जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और बाद में अचानक पटेल चौक पर चक्का जाम कर दिया।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय गोंडवाना धमधागढ़ देवालय गोंडवाना समाज का एक प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक केंद्र है, जहां वर्षों से समाज के धार्मिक, सांस्कृतिक और संगठनात्मक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं। पिछले लगभग 20 वर्षों तक संस्था के अध्यक्ष रहे एम.डी. ठाकुर हाल ही में हुए चुनाव में पराजित हो गए थे, जिसके बाद कमलेश ध्रुव नए अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
हालांकि चुनाव संपन्न होने के बाद भी भवन और देवालय के संचालन को लेकर विवाद समाप्त नहीं हो सका। समाज के लोगों का आरोप है कि कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक पेचीदगियों का हवाला देकर गोंडवाना भवन एवं देवालय में तालाबंदी कर दी गई, जिससे समाज की धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
इसी मुद्दे को लेकर बड़ी संख्या में समाजजन जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और देवालय को तत्काल खोलने तथा भवन का संचालन नव-निर्वाचित अध्यक्ष को सौंपने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।
स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब समस्या का तत्काल समाधान नहीं निकलता देख समाज के लोगों ने अचानक पटेल चौक पर चक्का जाम कर दिया। देखते ही देखते क्षेत्र में यातायात प्रभावित हो गया और पुलिस प्रशासन को मोर्चा संभालना पड़ा।
पुलिस एवं जिला प्रशासन के अधिकारी लगातार समाज के प्रमुख लोगों से चर्चा कर स्थिति को सामान्य बनाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से समाज के प्रतिनिधियों के एक समूह को चर्चा के लिए कलेक्टर कार्यालय बुलाया गया है।
समाचार लिखे जाने तक प्रशासन और समाज के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता जारी थी, जबकि पटेल चौक पर प्रदर्शन और चक्का जाम की स्थिति बनी हुई थी।
समाज के लोगों में पूर्व अध्यक्ष एम.डी. ठाकुर के प्रति नाराजगी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समाज की आस्था से जुड़े इस केंद्र को विवाद और तालेबंदी से मुक्त कर नए निर्वाचित नेतृत्व को सौंपा जाना चाहिए, ताकि समाज की गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो सकें।
फिलहाल पूरे मामले पर जिला प्रशासन की नजर बनी हुई है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वार्ता के बाद समाधान किस दिशा में आगे बढ़ता है।