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दुर्ग निगम गुमठी घोटाला:गुमटी दलाली में निगम के संविदा कर्मचारियों को भी मिल गया आवंटन.... Featured

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दुर्ग। शौर्यपथ । नगर पालिका निगम दुर्ग में इन दोनों गुमठी घोटाला में रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं । हाल ही में एक नया मामला सामने आया है जिसमें नगर पालिका निगम के स्पैरो में काम कर रहे कर्मचारियों को भी गुमटी का आबंटन nulm विभाग के मुक्तेश द्वारा कर दिया गया । गुमटी का आबंटन स्ट्रीट वेंडर को किया जाना था परंतु nulm विभाग के मुक्तेश ठेकेदार विकास गर्ग सहित एक और दलाल जिसे गुमठी मिली है के द्वारा एक ऐसे व्यक्ति को घूमती देने का मामला सामने आया है जो नगर पालिक निगम के स्पैरो कंपनी में कार्यरत है स्पैरो कंपनी के कर्मचारियों को गुमटी का आवंटन कर दिया गया और बाकायदा गुमटी पर नाम एवं नंबर भी अंकित कर दिया गया मामले के खुलासे के बाद अब nulm विभाग द्वारा मामले में लीपा पोती की खबर भी सामने आ रही है जब गुमठी में अंकित स्पैरो कंपनी के कर्मचारियों से इस बारे में बातचीत की गई तो उसके द्वारा यह स्वीकार किया गया की गुमटी उसके नाम पर था और उसके द्वारा राशि भी दे दी गई थी परंतु फिर इस गुमटी का आवंटन उससे ले लिया गया कर्मचारी ने यह भी बताया कि दी गई राशि मुक्तेश द्वारा वापस सौंप दी गई जिससे यह तो स्पष्ट हो रहा है कि नगर निगम क्षेत्र में गुमटी बनाने और उसे बेचने का कार्य बिना लिखापढ़ी के ही हो गया गुमटी की कीमत तय करना और उसे मनचाहे व्यक्तियों को बेचने के कई मामले सामने आ चुके हैं इतने मामले सामने आने के बाद भी दुर्ग नगर पालिका निगम आयुक्त लोकेश चंद्राकर द्वारा ना ही उक्त ठेकेदार जिसे बिना किसी आदेश के गुमटी बनाकर नगर निगम क्षेत्र में रखकर भेज दिया वहीं पैसे के लेनदेन के मामले में गुमठी संचालकों द्वारा मुक्तेश को पैसे देने/ मुक्तेश के निर्देश पर ठेकेदार को पैसे देने के मामले का खुलासा होने के बाद भी कार्यवाही न करना शहर में चर्चा का विषय है वही यह भी चर्चा है कि लाखों के इस लेनदेन में ठेकेदार एवं निगम अधिकारी सहित निगम प्रशासन के बड़े अधिकारियों की भी मिली भगत तो शामिल नहीं वही यह भी चर्चा है कि इन सब मामलों में दलाली कर रहे समाजसेवी का ढोंग कर रहे कुछ फर्जी लोगों को भी गुमठी दूसरे नाम से दे दिया गया सालों से जिला अस्पताल परिसर के सामने व्यापार कर है कुछ व्यापारियों का कहना है कि 18 नंबर की दुकान जिस व्यक्ति के नाम से है उसने कभी भी यहां पर स्ट्रीट वेंडर का कार्य नहीं किया बता दें कि 18 नंबर की दुकान किसी चंद्रेश भारती के नाम से है जिसे आसपास के व्यापारी पहचानते भी नहीं वही जिला अस्पताल परिसर से थोड़ी दूर फल दुकान लगाने वाले व्यापारी को घूमती का आवंटन न होने से यह भी स्पष्ट है कि गुमटी बनाकर बेचने का कार्य करने के मामले में लाखों रुपए क्या भ्रष्टाचार होने के बाद भी निगम प्रशासन मौन है और घोटाले को दबाने के नए-नए रास्ते निकालने की कोशिश बद्दस्तूर जारी है ऐसे में देखना है कि इस घोटाले के मास्टरमाइंड और घोटालेबाजों पर निगम प्रशासन कार्रवाई करती है या फिर जिला प्रशासन ।

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