कोंडागांव / शौर्यपथ /
जब रोजगार, घर या भोजन से महरूम मजदूरों के आर्थिक सामाजिक हालात से बेखबर सरकार स्वयं की पीठ थपथपाकर प्रदेश में बढ़ रही बेरोजगारी की दर को आंकड़ों के मकडज़ाल मे उलझा कर झूठा दंभ भर रही हो और ज़मीनी हकीकत कुछ और बयां करे तब अनायास ही प्रगति के समान अवसर के सब्जबाग दिखाने वालों की कलई खुलती नजर आती है । उस पर प्रशासनिक संवेदनहीनता का डबल डोज पलायन का दंश झेलते व्यक्ति को मिलने वाली न्याय की आस को अंदर तक तोड़ते हुए परिवारों और अंतत: समाज को पंगु बना देता है ।
भाजपा जिला मीडिया प्रभारी रौनक दीवान ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि ताजा वाक्या नगर के कोपाबेड़ा वार्ड निवासी तरसीम नेताम से जुड़ा है जिसे बहला फुसला कर अच्छी नौकरी और मुकम्मल जि़ंदगी का सपना दिखाते विजयवाड़ा ले जाया गया जहां से आगे बैंगलोर ले जाकर बंधुआ मजदूरी करवाने का मामला प्रकाश में आया है । मजदूर के पिता रामलाल ने दिनांक 10/03/2022 को पुलिस को लिखित शिकायत में बताया कि उनका पुत्र तरसीम नवंबर माह से विजयवाड़ा में कार्यरत था । मार्च माह में किसी तरह घर वापस आए उस युवक के दो अन्य दोस्तों के माध्यम से जानकारी मिली की वह बैंगलोर के किसी एम पी ए आर कंपनी में बंधुआ मजदूर के रूप में कार्य कर रहा है । जहां से वह अपने घर वापस आना चाहता है किंतु बंधक बनाए जाने से वापस घर आने में असमर्थ है । 12 दिनों के बाद दिनांक 22/03/2022 को पुलिस प्रशासन की आंख खुली जिस पर कार्यवाही के नाम पर श्रम विभाग कोंडागांव के नाम एक पत्र अग्रेषित किया गया जिसमे उक्त युवक को वापस लाने एक टीम गठित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया ।
संवेदन शून्यता का परिचय देते श्रम कार्यालय से आवेदक को मौखिक रूप से कहा गया की बंधुआ मजदूरों को घर लाने की एक प्रक्रिया होती है जिस पर शासन का बहुत सा रुपया खर्च होता है । नगर के जागरूक जनप्रतिनिधि और नगर पालिका उपाध्यक्ष जसकेतु उसेंडी को जब इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने फौरन कलेक्टर से मुलाकात कर आवेदन देकर प्रार्थी रामलाल को न्याय दिलाने व तरसीम की सकुशल घर वापसी की गुहार लगाई जिस पर जिला कलेक्टर ने श्रम विभाग से जानकारी लेने की बात कहते उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया है । इस पर क्या कार्यवाही होती है यह समय के गर्भ में है किंतु यह वाकया रोजगार देने का वादा करती प्रदेश सरकार के दंभ को चूर चूर कर प्रशासनिक उदासीनता इंगित करने को पर्याप्त है ।
नगर पालिका उपाध्यक्ष जसकेतु उसेंडी ने कहा कि भले ही भूपेश बघेल घूम घूम कर छत्तीसगढ़ मॉडल की बात कर रहे हो लेकिन छत्तीसगढ़ में यह मॉडल कितना प्रभावी है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रदेश से हर दिन रोजगार की तलाश में हजारों मजदूर पलायन कर रहे हैं । किसी भी समाज की खुशहाली के लिए जरूरी है कि विभिन्न कारणों से होने वाले पलायन को रोका जाए । सरकारी दावों के बावजूद पलायन न रुकना यह बताता है कि विकास के लिए जिस तरह के समेकित प्रयास होने चाहिए वह नहीं हो रहे है ।