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चीनी की कीमतों में उछाल से त्योहारी मिठास पर महंगाई की मार, रक्षाबंधन से दीपावली तक मिठाई के दाम बढ़ने के आसार

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  नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आगामी त्योहारी सीजन में आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ महीनों में चीनी के दामों में करीब 40 प्रतिशत तक का उछाल आने की खबरों के बीच अलग-अलग बाजारों में खुदरा कीमतें बढ़कर 58 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। वहीं, कुछ रिपोर्टों के अनुसार पिछले एक-दो महीनों में चीनी के दाम में औसतन 10 से 20 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई है।

रक्षाबंधन सहित आगामी त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग बढ़ने वाली है। ऐसे में चीनी की महंगाई का सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ने की संभावना है। चीनी महंगी होने के साथ-साथ मिठाई बनाने में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री और उत्पादन लागत बढ़ने पर त्योहारी सीजन में मिठाइयों के दाम करीब 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। यानी इस बार त्योहारों पर मिठाई खरीदना आम परिवारों की जेब पर पहले की तुलना में अधिक भारी पड़ सकता है।

कम होता स्टॉक बढ़ा रहा चिंता

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में उपलब्ध स्टॉक को माना जा रहा है। सितंबर के अंत तक देश में चीनी का घरेलू स्टॉक घटकर 30 से 35 लाख टन रहने की आशंका है। यदि स्टॉक इस स्तर तक पहुंचता है तो आगामी सीजन के शुरुआती महीनों में घरेलू मांग पूरी करने को लेकर दबाव बढ़ सकता है।

एथेनॉल उत्पादन की ओर गन्ने का डायवर्जन भी असरदार

चीनी की उपलब्धता पर एथेनॉल उत्पादन का भी असर पड़ा है। गन्ने के रस और सीरप का एक हिस्सा चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन की ओर डायवर्ट किए जाने से बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने पर कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।

त्योहारी मांग बढ़ने से और बढ़ सकती है कीमत

रक्षाबंधन से त्योहारी सीजन की शुरुआत होने के साथ मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना है। ऐसे में चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी का असर उपभोक्ताओं तक पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। विशेष रूप से मिठाई कारोबारियों की लागत बढ़ने पर इसका भार ग्राहकों पर पड़ सकता है।

सरकार ने आपूर्ति सुधारने के लिए उठाए कदम

बढ़ती कीमतों और घरेलू उपलब्धता को देखते हुए केंद्र सरकार ने बाजार में आपूर्ति सुधारने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा सरकार ने व्यापारियों और थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा को और सख्त किया है, ताकि बाजार में अनावश्यक जमाखोरी पर नियंत्रण रखा जा सके और उपलब्ध स्टॉक का संतुलित वितरण सुनिश्चित हो।

त्योहार की मिठास बचाने की जरूरत

त्योहार भारतीय समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और खुशियों का प्रतीक हैं। रक्षाबंधन पर भाई-बहन के रिश्ते की मिठास से लेकर दीपावली की मिठाइयों तक, चीनी की बढ़ती कीमतों का असर सीधे आम परिवारों की जेब पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार की ओर से आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण के प्रयासों के साथ-साथ व्यापारियों से भी उचित लाभ के साथ उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखने की अपेक्षा है।

आम उपभोक्ताओं के लिए भी यह समय अनावश्यक खरीदारी और बर्बादी से बचते हुए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विकल्पों और उचित कीमतों की तुलना कर खरीदारी करने का संदेश देता है। त्योहार की असली मिठास महंगे दामों में नहीं, बल्कि आपसी प्रेम और खुशियां बांटने में है। सरकार, कारोबारियों और उपभोक्ताओं के सामूहिक प्रयास से उम्मीद है कि महंगाई के बावजूद त्योहारों की मिठास फीकी नहीं पड़ेगी।

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