नई दिल्ली, ।
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने प्रमुख क्षेत्रों में चल रहे उपायों की व्यापक समीक्षा करते हुए राज्यों और संबंधित एजेंसियों को सख्त एवं समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग की सुरक्षा एवं प्रवर्तन उप-समिति की 25वीं बैठक में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब सरकारों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया गया।
बैठक में वाहन प्रदूषण नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1 अक्टूबर 2026 से बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों को ईंधन उपलब्ध नहीं कराने की व्यवस्था लागू करने हेतु पेट्रोल पंपों एवं सीएनजी स्टेशनों पर एएनपीआर कैमरे लगाने की समीक्षा की गई। साथ ही स्वच्छ परिवहन, बीएस-III और उससे पुराने वाहनों पर कार्रवाई तथा यातायात जाम वाले क्षेत्रों में प्रदूषण कम करने के उपायों पर भी चर्चा हुई।
सड़क धूल एवं निर्माण अपशिष्ट प्रबंधन के तहत दिल्ली में प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले 5,500–6,000 मीट्रिक टन सीएंडडी कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने और मैकेनिकल रोड स्वीपिंग को तेज करने पर जोर दिया गया।
पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लक्ष्य के साथ पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तैयारियों की समीक्षा की गई। आयोग ने ईंट भट्टों में पराली आधारित बायोमास पेलेट्स के उपयोग को चरणबद्ध रूप से बढ़ाकर 1 नवंबर 2026 तक न्यूनतम 30 प्रतिशत सुनिश्चित करने के निर्देशों के पालन पर विशेष जोर दिया।
नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, खुले में कचरा जलाने की रोकथाम, लैंडफिल स्थलों पर आग नियंत्रण और प्रदूषण निगरानी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में भी प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में उद्योगों के लिए नए उत्सर्जन मानकों के अनुपालन को लेकर स्पष्ट चेतावनी दी गई कि निर्धारित पीएम उत्सर्जन सीमा का पालन नहीं करने वाली औद्योगिक इकाइयों पर बंदी सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सभी एजेंसियां सख्त प्रवर्तन, नियमित समीक्षा और त्वरित सुधारात्मक कदमों के साथ निर्धारित समयसीमा में निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।