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सनातन का चोला, आपराधिक चेहरा? — आशुतोष ब्रह्मचारी प्रकरण और धर्म की गरिमा पर उठते सवाल

  • rounak group

विशेष रिपोर्ट | उत्तर प्रदेश

सनातन धर्म, जो त्याग, तप, सत्य और चरित्र की शुचिता का प्रतीक माना जाता है, आज एक गंभीर विमर्श के केंद्र में है। कारण है—स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप लगाने वाले आशुतोष पांडे उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी, जिनका नाम दीक्षा, ब्रह्मचर्य और धार्मिक संगठनों से जुड़ने के साथ-साथ एक लंबे और विवादास्पद आपराधिक इतिहास से भी जुड़ा रहा है।

21 से 27 मुकदमों का साया

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आशुतोष पांडे पर 21 से 27 तक आपराधिक मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं। इन मामलों में गैंगरेप (धारा 376), धोखाधड़ी (420), जबरन वसूली, गैंगस्टर एक्ट, गोवध अधिनियम, आईटी एक्ट और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं।
शामली जिले के कांधला थाना क्षेत्र में वे एक घोषित हिस्ट्रीशीटर हैं, जिनकी हिस्ट्रीशीट संख्या 76A है। पुलिस रिकॉर्ड में उनके नाम आशु शर्मा और अश्वनी सिंह के रूप में भी दर्ज होने की बात सामने आई है।

जिलों में फैला आपराधिक नेटवर्क

आशुतोष पांडे के खिलाफ मुकदमे केवल एक जिले तक सीमित नहीं हैं।

  • शामली (कांधला): 2019 में उन पर ₹25,000 का इनाम घोषित किया गया था।

  • मथुरा: कृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामलों में पक्षकार होने के साथ धोखाधड़ी और धमकी के आरोप।

  • गोंडा, लखनऊ, मुजफ्फरनगर: यहां भी उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण लंबित बताए जाते हैं।

फर्जी दस्तावेज और गौ-तस्करी के आरोप

उन पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे चुनाव लड़ने, फर्जी पहचान पत्रों के इस्तेमाल और गौ-तस्करी में संलिप्तता के आरोप भी लगे हैं। कुछ मामलों में पुलिस को रिश्वत देने की कोशिश और जेल यात्रा की पुष्टि भी रिपोर्ट्स में की गई है।

हालिया पुलिस कार्रवाई

  • शामली: अक्टूबर 2025 में कांधला थाने में एक महिला की शिकायत पर घर में घुसकर मारपीट, चोट पहुंचाने और धमकी देने का मामला दर्ज हुआ।

  • मथुरा: मई 2024 में गोविंद नगर थाने में धोखाधड़ी और धमकी (धारा 406, 504, 506 IPC) का केस। इस एफआईआर को रद्द कराने की याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज कर दी, केवल प्रक्रियागत राहत दी गई।

दीक्षा और विवाद का संगम

वर्ष 2022 में जगद्गुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा लेने के बाद आशुतोष पांडे ने स्वयं को आशुतोष ब्रह्मचारी घोषित किया और सन्यासी जीवन अपनाने का दावा किया। इसके बाद वे मथुरा में बस गए और “श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट” के अध्यक्ष बने।
यहीं से एक बड़ा सवाल खड़ा होता है—क्या दीक्षा मात्र से अतीत के आपराधिक आरोप धुल जाते हैं, या फिर यह धार्मिक आवरण का दुरुपयोग है?

फरवरी 2026 का नया मोड़

फरवरी 2026 में एक पत्रकार द्वारा सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार करना कि उसे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को झूठे यौन शोषण के मामले में फंसाने के लिए उकसाया गया, इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना देता है। हालांकि आशुतोष की शिकायत पर प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट के आदेश से एफआईआर दर्ज हुई है, लेकिन अब पुलिस आरोपकर्ता के आपराधिक इतिहास और शिकायत की सत्यता की गहन जांच कर रही है।

सनातन धर्म की गरिमा पर प्रश्न

धर्माचार्य, संत और समाज के प्रबुद्ध वर्ग मानते हैं कि सनातन धर्म का वस्त्र केवल बाहरी आवरण नहीं, बल्कि आचरण और चरित्र की कसौटी है। यदि आपराधिक प्रवृत्ति के लोग धार्मिक पदों, ब्रह्मचारी या पीठाधीश्वर जैसे शब्दों का सहारा लेकर समाज को भ्रमित करते हैं, तो यह न केवल कानून बल्कि धर्म की आत्मा के साथ भी अन्याय है।

निष्कर्ष

आशुतोष पांडे उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी का मामला केवल एक व्यक्ति या एक आरोप तक सीमित नहीं है। यह उस बड़ी चुनौती की ओर संकेत करता है, जहां धर्म की आड़ में आपराधिक अतीत को छिपाने की कोशिश समाज को दिग्भ्रमित कर सकती है।
अब यह जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था, न्यायपालिका और धर्मगुरुओं—तीनों की है कि सनातन धर्म की गरिमा को बचाया जाए और यह स्पष्ट संदेश जाए कि धर्म का चोला अपराधों पर पर्दा नहीं बन सकता

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