नई दिल्ली ।
भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के स्वर्णिम युग की प्रतिष्ठित हस्ती और दूरदर्शन की जानी-मानी वरिष्ठ न्यूज़ एंकर सरला माहेश्वरी का गुरुवार को दिल्ली में निधन हो गया। वे 71 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वे पार्किंसन (Parkinson’s) जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझ रही थीं। उनका अंतिम संस्कार 12 फरवरी को शाम 4 बजे दिल्ली के निगम बोध घाट पर संपन्न हुआ।
उनके निधन पर प्रसार भारती और दूरदर्शन नेशनल ने गहरा शोक व्यक्त किया। उनके समकालीन और प्रसिद्ध न्यूज़ एंकर शम्मी नारंग सहित कई पूर्व सहयोगियों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय प्रसारण जगत की एक बड़ी क्षति बताया।
?️ दूरदर्शन का वह दौर, जब समाचार एक कला था
सरला माहेश्वरी 1980 और 90 के दशक में दूरदर्शन का एक प्रतिष्ठित चेहरा थीं। उन्होंने वर्ष 1976 में दूरदर्शन ज्वाइन किया और लगभग तीन दशकों तक (1976–2005) समाचार वाचन से जुड़ी रहीं। वे उन अग्रणी एंकर्स में शामिल थीं जिन्होंने देश में लाइव न्यूज़ बुलेटिन पढ़ने की परंपरा को मजबूत किया।
उनकी पहचान केवल एक समाचार वाचक के रूप में नहीं, बल्कि भाषा की शुद्धता, सटीक उच्चारण, संतुलित प्रस्तुति और शालीन व्यक्तित्व के कारण भी थी।
? प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
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जन्म: 21 जुलाई 1954 (दिल्ली में जन्म; मूल रूप से राजस्थान के बीकानेर से संबंध)
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विवाह से पूर्व उनका नाम सरला जरीवाला/भदानी रहा।
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वे दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी और गुजराती साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन में पीएचडी थीं।
पत्रकारिता के साथ-साथ वे दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में हिंदी की लेक्चरर भी रहीं। उल्लेखनीय है कि उसी दौरान अभिनेता शाहरुख खान वहां छात्र थे।
? अंतरराष्ट्रीय अनुभव
1984 में वे इंग्लैंड गईं, जहां उन्होंने BBC (ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन) में समाचार वाचक के रूप में कार्य किया। 1988 में भारत लौटकर वे पुनः दूरदर्शन से जुड़ गईं और अपने संयमित वाचन से दर्शकों का विश्वास अर्जित किया।
? ऐतिहासिक क्षणों की साक्षी
सरला माहेश्वरी ने कई ऐतिहासिक और भावनात्मक घटनाओं की खबरें देश तक पहुंचाईं—
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1982 के एशियाई खेलों के रंगीन प्रसारण का दौर
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इंदिरा गांधी की गिरफ्तारी से जुड़ी खबरें
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1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की दुखद सूचना
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1997 में मदर टेरेसा के अंतिम संस्कार का प्रसारण
इन क्षणों में उनकी आवाज़ देश के करोड़ों घरों तक पहुंची और वे विश्वसनीयता का प्रतीक बन गईं।
? सादगी, शैली और प्रभाव
वे अपने सीधे पल्ले की साड़ी और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व के लिए जानी जाती थीं। गुजराती शैली में पहनी गई उनकी साड़ियां उस दौर में महिलाओं के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय थीं। दर्शक उनके समाचारों के साथ-साथ उनके सौम्य व्यक्तित्व और मर्यादित प्रस्तुति से भी जुड़ाव महसूस करते थे।
???? व्यक्तिगत जीवन
उनके पति डॉ. पवन माहेश्वरी, एक प्रख्यात गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट हैं। उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं।
? उनके समकालीन एंकर्स
उस दौर में समाचार वाचन गरिमा, तटस्थता और भाषा की शुद्धता का प्रतीक था। उनके प्रमुख समकालीनों में शामिल रहे—
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शम्मी नारंग – अपनी गहरी और प्रभावशाली आवाज़ के लिए प्रसिद्ध
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सलमा सुल्तान – बालों में गुलाब लगाने की सिग्नेचर शैली
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गीतांजलि अय्यर – लोकप्रिय अंग्रेज़ी समाचार वाचिका
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रीनी साइमन खन्ना
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नीति रवींद्रन
? स्वर्ण युग की विरासत
1980 और 90 का दशक भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता का स्वर्ण काल माना जाता है। उस समय ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ की होड़ नहीं, बल्कि संतुलित, संयमित और तथ्यपरक प्रस्तुति पर जोर था। सरला माहेश्वरी उसी परंपरा की सशक्त प्रतिनिधि थीं।
उनका निधन केवल एक व्यक्तित्व का अवसान नहीं, बल्कि उस दौर की गरिमा, भाषा-संस्कृति और प्रसारण परंपरा की स्मृतियों को भी भावुक कर गया है।
भारतीय पत्रकारिता जगत उन्हें सदैव एक विश्वसनीय, शालीन और प्रेरणादायी आवाज़ के रूप में याद करेगा।
श्रद्धांजलि।