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बिहार चुनावः लाखों लोगों तक मनरेगा को पहुँचाने वाले एक मज़दूर भी हैं मैदान में

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बिहार / शौर्यपथ / मेड़ से थोड़ी ही चौड़ी सड़क है, सड़क के दोनों ओर धान की बालियां लहरा रही हैं. ये सीधी सड़क मुज़फ़्फ़रपुर के रतनौली गांव को जाती है. सड़क के किनारे छोटी सी किराना दुकान पर बैठे शख़्स से संजय सहनी के घर का पता पूछा तो जवाब मिला नरेगा वाले भईया के यहां जाएंगी ना... इसके बाद हमने कुछ क़दम नापे ही थे कि सामने एक तिरपाल में 40 से 50 लोग ज़मीन पर बैठे नज़र आए.
इनमें महिलाएं ज़्यादा और पुरुष कम हैं. लोगों से घिरे संजय सहनी लोगों को बता रहे हैं कि, "जो नेता कभी यहां आए ही नहीं दिल्ली में बैठे हैं उनके नाम पर हमेशा वोट माँग लिया जाता है. जिस नेता को सामने से देखे तक नहीं उनके लिए वोट करने को कहा जाता है."

नीली सफ़ेद धारियों वाली शर्ट, गहरे भूरे रंग की पतलून और काले रंग की स्लीपर पहने संजय सहनी असाधारण रूप से सफ़ेद कुर्ते और गेंदे के फूलों की माला से लदे नेताओं से बिलकुल अलग दिखते हैं. ना ही उनकी बातों में आम नेताओं सी लफ़्फ़ाज़ी है और ना ही नेताओं से तेवर.
उन्हें घेर कर बैठीं तमाम बूढ़ी-अधेड़ उम्र की महिलाओं के लिए वह किसी उम्मीदवार से ज़्यादा उनके संजय भईया हैं.संजय सहनी मुज़फ़्फ़रपुर के कुढ़नी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. संजय को अलमारी चुनाव चिन्ह मिला है.

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शौर्यपथ

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